कवि समाज को नई दिशा देता है – स्वानंद किरकिरे

आजादी के आंदोलन में कवियों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है- हरलीन कौर
‘एक नया युग शुरू हुआ है प्रगति का उत्थान का’-कर्नल वी.पी.सिंह

स्वतन्त्रता दिवस के महोत्सव के उपलक्ष्य में हिंदी अकादमी कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, दिल्ली द्वारा स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर पर ऐतिहासिक राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन वर्चुअल/ऑनलाइन किया गया। कवि-सम्मेलन उपाध्यक्ष, हिंदी अकादमी श्री स्वानंद किरकिरे प्रसिद्ध गीतकार एवं अभिनेता के सान्निध्य व श्री दिनेश रघुवंशी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। श्री प्रवीण शुक्ल के सफल संचालन में भारत के विभिन्न स्थानों से कवि/कवयित्रियों द्वारा कवि-सम्मेलन में अपनी-अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी गई। जिनमें श्री अर्जुन सिसोदिया, श्री गजेन्द्र प्रियांशु, सुश्री महक भारती, श्री विनय शुक्ल, कर्नल वी.पी. सिंह, डॉ. संगीता अधिकारी, सुश्री सविता असीम व श्री शहनाज हिन्दुस्तानी द्वारा काव्य-पाठ किया गया।
कवि-सम्मेलन की प्रस्तावना में अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने कहा कि ‘‘कवि हमेशा सकारात्मकता का प्रसार करते हैं। स्वतन्त्रता के लिए कवियों ने ही आजादी के विचार का प्रसार किया। हिंदी अकादमी की गतिशीलता के लिए हिंदी अकादमी को उपाध्यक्ष श्री स्वानंद किरकिरे जी का का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। कोविड काल में भी हिंदी अकादमी उनके मार्गदर्शन में नई-नई योजनाओं पर कार्य कर रही है। सुश्री हरलीन कौर, सचिव, साहित्य कला परिषद, विशेष सचिव, लो.नि.वि./सेवा विभाग जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस कवि-सम्मेलन का आयोजन ऑनलाइन किया जा रहा है और भविष्य में यह बृहद रूप में किया जाएगा इसकी आशा है और कहा कि आजादी के आंदोलन में कवियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अकादमी के उपाध्यक्ष श्री स्वानंद किरकिरे ने कहा कि कवि समाज को नई दिशा देता है।
कवियों में श्री अर्जुन सिसोदिया ने-‘‘अम्मा तेरे लाडले ने प्राण छो़ड़ने से पहले/शत्रुओं का आखिरी टैंक भी तोड़ दिया है। श्री वी.पी. सिंह ने-‘‘लेकर अंगडाई जाग उठा है सूरज स्वाभिमान का/एक नया युग शुरू हुआ है प्रगति का उत्थान का/शीश उठाए सीना ताने दुनिया को यह कहना है/किसी दान पर टिका नहीं है झंडा हिंदुस्तान का। श्री प्रवीण शुक्ल ने-‘‘लालकिले के मस्तक पर फर फर फहरे मस्त तिरंगा/मानव मन में निर्मल निर्झर बहे प्यार की गंगा। श्री गजेन्द्र प्रियांशु ने-‘‘देखा भी तो क्या देखा गर देखा हिन्दुस्तान नहीं/प्यार यहां पिस्तौल नहीं रेशम का धागा है। संगीता अधिकारी ने-‘‘भारत मेरी जान है इस पर दिल कुर्बान है/मैं इसका पहरेदार। श्री शहनाज हिंदुस्तानी ने- कांटों का पथिक तिरंगा बोल रहा हूं/फिर भी देश भक्तों को टटोल रहा हूं। अन्य कवियों ने भी अपनी-अपनी कविताओं से सुधी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देने वाली देशभक्ति की कविताएं सुनाई। और अंत में स्वतंत्रता दिवस के कवि-सम्मेलन के लिए सुप्रसिद्ध कवि श्री दिनेश रघुवंशी जी ने ‘‘वतन महबूब है अपना वतन के गीत गाते हैं/तिरंगा ओढ़ कर सौभाग्य पर हम मुस्कुराते हैं/शहादत को हमारी तुम कभी भूल मत जाना/तुम्हारी कल की खातिर हम गवां कर आज जाते हैं इन पंक्तियों के साथ अध्यक्षीय भाषण दिया। अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने अंत में कहा कि अकादमी हिन्दी के प्रसार के लिए इस प्रकार के प्रयास जारी रखेगी।’’ कवि-सम्मेलन के समापन पर हिंदी अकादमी के उप-सचिव श्री ऋषि कुमार शर्मा ने सभी अतिथियों व कवियों इस कोरोना काल में भी वे इस कवि-सम्मेलन में उपस्थित होने की सहमति प्रदान करने के लिए धन्यवाद किया।

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