April 22, 2019
Health

स्वाइन फ्लू से रहे सचेत प्रतिदिन 100 से ज्यादा मामले दर्ज

स्वाइन फ्लू एक अत्यधिक तेज़ी से फैलने वाली संक्रामक श्वसन रोग है, जो इन्फ़्लूएंजा ए नाम के वायरस  के कारण होता है। 2 सप्ताह में भारत में 1694 मामले देखे गए है जिनमे तक़रीबन 49 लोग मृत्यु की चपेट में आ गए। केवल दिल्ली की बात करे 13 जनवरी तक 170 मामले दर्ज किए गए है। इन्फ़्लूएंजा ए सूक्ष्म जीव की विशेष प्रकार की प्रजातियों में से किसी एक प्रकार के धारक से होती है। इसे एच1एन1 नाम से भी जाना जाता है। यह रोग सुअरों के श्वसन तंत्र से निकले वायरस के कारण होता हैए जिसकी चपेट में आने से कोई भी इन्फ्लूएंजा यानि स्वाइन फ्लू का शिकार हो सकता है।

सूअर इन्फ्लुएंजा आम तौर पर सुअरों से मनुष्यों में नहीं फैलता है। ‘मानव इन्फ्लुएंजा का कारण मनुष्य के खून में केवल एंटीबॉडी का पैदा होना होता हैं। मांसाहारी भोजन करने वाले मनुष्य यदि मांस को अच्छी तरह पका कर खाते है, तो उससे संक्रमण का कोई ख़तरा नहीं होता है। यदि संक्रमण के कारण मानव इन्फ्लुएंजा होता है तो उसे ‘जूनोटिकश् सुअर फ्लू कहते हैं। सूअर पालने वाले और उनके साथ काम करने वाले लोगों में स्वाइन फ्लू होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

स्वाइन फ्लू सबसे पहले मैक्सिकों में देखा गया, जिसने धीरे.धीरे पूरी दुनिया को अपनी ज़द में ले लिया। संक्रमित बीमारी होने की वजह से यह बहुत जल्दी एक.दूसरे में फैलती है। इसमें एंटीबॉयटिक दवाओं के सेवन से उपचार नही होता है बल्कि स्थिति बदतर हो जाती है। इससे संक्रमित लोगों के संर्पक में आने से बचना चाहिए।

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के रेस्पिरेटरी मेडिसिन में सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर  ज्ञानदीप मंगल के अनुसार हमें इस घातक बीमारी को नियंत्रित करने की आवश्यकता है अन्यथा यह एक राष्ट्रीय बोझ बन जाएगा। हम एच1एन1 वायरस से सुरक्षित रहने के लिए कुछ निवारण के उपाय कर सकते हैं जो इस घातक वायरस के होने की संभावना को कम करने में मदद कर सकते हैं। यह संक्रामक है इसलिए एच1एन1 वायरस से संक्रमित लोगों से दूरी बनाए रखना उचित है। संक्रमित व्यक्ति से छींक, खांसी, नाक या मौखिक तरल पदार्थ एक स्वस्थ व्यक्ति को रोगाणु पहुंचा सकते हैं। अपने हाथों को बार.बार धोएं और अपना हाथ साफ किए बिना अपने चेहरे या आंखों को न छुएं।

स्वाइन फ्लू के शिकार आम लोगों की तुलना में छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, डाइबिटीज के मरीज़ और हार्ट के मरीज़ों में जायादा होता है, क्योंकि इनकी प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य लोगों की तुलना में काफ़ी कमज़ोर होती है। स्वाइन फ्लू एक घातक बीमारी हैए इस बीमारी से बचने के लिए समय पर इसकी पहचान कर तुरन्त इलाज शुरु कर देना चाहिए। यदि शीघ्र इसका इलाज शुरु नही किया गया तो मरीज़ की मृत्यु भी हो सकती है।

नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल गुरुग्राम के सीनियर आहार विशेषज्ञ  परमीत कौर के अनुसार, स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए हाथ धोनाए पर्याप्त नींद लेना जरुरी है। हालांकि, पोषण आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • नियमित रुप से संतुलित भोजन करना अधिक मात्रा में फल और सब्जियां, साबूत अनाज और कम.से.कम तेल का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • जंक फूड और चीनी से दूर रहना चाहिए, यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमज़ोर करता है।
  • प्रोटीनयुक्त भोजन जैसे अण्डा, पनीर, चिकन, बीन्स और बादाम का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • विटामिन ए और विटामिन सी से भरपूर सब्जियों औऱ फल का सेवन करना चाहिए।

स्वाइन फ्लू के लक्षण 

मनुष्य में सूअर फ्लू के लक्षण मूलतः इन्फ्लूएंजा के लक्षण होते हैं या इन्फ्लूएंजा जैसे होते हैं। स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के खिंचाव के कारण होता है। यह बीमारी लार और बलगम कणों के माध्यम से फैलती है। इसके लक्षण निम्न है

  • बुखार
  • तेज ठंड लगना
  • गला खराब होना
  • तेज़ सिर दर्द होना
  • खांसी आना
  • कमज़ोरी महसूस होना
  • नाक बहना
  • उल्टी, दस्त आना
  • पेट दर्द होना         

स्वाइन फ्लू के बचाव

  • खांसी या छींक आने पर अपने चेहरे को टिश्यू पेपर से ढ़क ले।
  • टिश्यू को सही तरीके से फेंके अथवा नष्ट कर दें।
  • अपने आसपास सफाई रखें।
  • अपने हाथों को किसी हैंड सैनीटाइज़र द्वारा नियमित साफ करें।
  • मरीज़ के पास जाने से पहले मास्क लगाना चाहिए
  • यदि हो सके तो भीड़.भाड़ वाली ज़गह से दूर रहना चाहिए।
  • किसी भी संक्रमित वस्तु को ना छुए तथा संक्रमित लोगों से दूरी बनाए।
  • स्वाइन फ्लू के मरीज़ को अच्छा खाना चाहिए।
  • ढ़ंग से सोना चाहिए तथा तनाव से दूर रहना चाहिए।

स्वाइन फ्लू के लक्षण महसूस होने पर सबसे पहले डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इसके बाद तुरन्त स्वाइन फ्लू का टेस्ट कराना चाहिए। यदि टेस्ट रिर्पोट पॉजीटिव आती है तो घबराने की जरुरत नही है क्योंकि फ्लू को एंटीवायरल ड्रग टैमीफ्लू के ज़रिए इलाज किया जाता है। संक्रमण के लक्षण महसूस होने पर एंटीवायरल ड्रग देना जरुरी होता है। एंटीवायरल ड्रग देने से मरीज़ को तत्काल राहत मिलती है तथा कुछ समय के लिए बीमारी की तीव्रता कम हो जाती है। संक्रमण का पता चलने पर तुरन्त अस्पताल में भर्ती कराने और एंटीवायरल ड्रग देने पर सफलतापूर्वक इलाज़ संभव है। 

डॉक्टर गौरव जैनए जेनेरल फिज़िशियन, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल बताते है स्वाइन फ्लू के लक्षण महसूस होने पर सबसे पहले डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इसके बाद तुरन्त स्वाइन फ्लू का टेस्ट कराना चाहिए। यदि टेस्ट रिर्पोट पॉजीटिव आती है तो घबराने की जरुरत नही है क्योंकि फ्लू का एंटीवायरल ड्रग टैमीफ्लू के ज़रिए इलाज किया जाता है। संक्रमण के लक्षण महसूस होने पर एंटीवायरल ड्रग देना जरुरी होता है। एंटीवायरल ड्रग देने से मरीज़ को तत्काल राहत मिलती है तथा कुछ समय के लिए बीमारी की तीव्रता कम हो जाती है। संक्रमण का पता चलने पर तुरन्त अस्पताल में भर्ती कराने और एंटीवायरल ड्रग देने पर सफलतापूर्वक इलाज़ संभव है। लेकिन स्वाइन फ्लू के सभी मामलों में टैमीफ्लू के ज़रिए इलाज संभव नही है। इसके अलावा स्वाइन फ्लू पीसीआर के लिए 40 प्रतिशत मामलों में टैमीफ्लू की जरुरत नहीं होती।

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