June 17, 2019
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नई दिल्ली :भारत में बिजनेस एजुकेशन बदलाव की दिशा में तेजी से आगे बढ रहा हैइस बात को मान्यता देते हुए देश के उप राष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने आज नई दिल्ली के द क्लैरिजेज में आयोजित ईपीएसआई के बी-स्कूल लीडरशिप कॉन्क्लेव के उद्घाटन में अपने विचार रखे। उन्होने आविष्कारोँ के जरिए शिक्षा की गुणवत्ता में बढोत्तरी के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के माननीय उप राष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने उद्घाटन अभिभाषण के दौरान कहा कि, “हम परम्परागत शिक्षा पद्धति पर निर्भर नहीं रह सकते हैं, हमे शिक्षण के तरीकोँ में बदलाव लाना होगा, और इसमे नई चीजोँ को शामिल किया जाना चाहिए जैसे कि केस स्टडी, अनुरूपता, ऑनलाइन पाठ्यक्रमोँ की शुरुआत जैस कि एमओओसी, तकनीकी उपकरणोँ जैसे कि लैपटॉप और मोबाइल का इस्तेमाल, और डिसरप्टिव तकनीकोँ जैसे कि कक्षाओँ में एआई के इस्तेमाल पर जोर देना चाहिए। हालांकि, स्थिति यह है कि तमाम आविष्कारी समाधानोँ के बावजूद आज भी देश की करीब 20% आबादी अशिक्षित है। ऐसे में अशिक्षा को मिटाने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, खासकर ग्रामीण भारत में, ताकि उच्च शिक्षा की नींव को और मजबूत बनाया जा सके।

भारतीयोँ को व्यवसाय के मामले में अपनी सोच बदलने की जरूरत पर जोर देते हुए श्री नायडू ने कुछ अग्रणी बिजनेस स्कूलोँ जैसे कि बिमटेक,एक्सएलआरआई, आईएसबी, नर्सी मोंजी आदि की बदलाव लाने में भूमिका की सराहना करते हुए श्री नायडू ने पारिवारिक व्यापार को समझने में इनके महत्व की बात की। उन्होने कहा, “बिजनेस स्कूलोँ को अपने पाठ्यक्रम में सफल पारिवारिक व्यवसायोँ को केस स्टडी के तौर पर शामिल करना चाहिए। हमे पहले से मौजूद बिजनेस मॉडल के इस्तेमाल के साथ-साथ अपने खुद के ऐसे मॉडल भी विकसित करने चाहिए जो भारतीय जरूरतोँ के अनुकूल होँ। इसके साथ ही, बिजनेस स्कूलोँ को अपने छात्रोँ के नैतिक व्यवसाय की नीतियोँ और आचार को भी बेहद मजबूती से स्थापित करना चाहिए।“

उन्होने प्रधानमंत्री के उस वक्तव्य का भी जिक्र किया जिसमेँ वह उच्च शिक्षा में “सुधार, क्रियान्वयन और परिवर्तन” की जरूरत पर बल देते हैं। श्री नायडू ने कहा कि, “पिछले कुछ वर्षोँ के दौरान, भारत ने देश में व्यवसाय करने के नियमोँ को काफी सहज बनाया है। परिणामस्वरूप, भारत दुनिया की तीसरी सबसे बडी अर्थव्यवस्था बनने को तैयार है। यह बात पूर्व-स्थापित है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि और सम्पदा उत्पादन में प्रशिक्षित मानवीय पूंजी की भूमिका सबसे अहम होती है। भारत की अर्थव्यवस्था में प्रगति ने नए रोजगार निर्माण के क्षमता में बढोत्तरी की है और व्यवसाय हेतु सम्भावनाएँ भी काफी बढ गई हैं।

प्रो. एरिक कॉर्नुअल, डायरेक्टर जनरल व सीईओ, युरोपियन फाउंडेशन फॉर मैनेजमेंट डिवेलपमेंट (ईएफएमडी) उद्घाटक समारोह में सम्मानित अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे और अन्य गणमान्य अतिथियोँ में डॉ. जी विश्वनाथन, फाउंडर व चांसलर, वेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (वीआईटी), डॉ. एच. चतुर्वेदी, अल्टर्नेट प्रेसिडेंट, एजुकेशन प्रमोशन सोसायटी ऑफ इंडिया एवम डायरेक्टर, बिमटेक (बीआईएमटेक) और डॉ. एम आर जयराम, चेयरमैन, गोकुला एजुकेशन फाउंडेशन ने भी कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में हिस्सा लिया। यह कॉन्क्लेव 28 फरवरी 2019 तक चलेगा और इसका विषयक फोकस है ‘बिजनेस एजुकेशन 4.0:फ्युचराइजिंग इंडियन बिजनेस स्कूल्स’।

प्रो. एरिक कॉर्नुअलडायरेक्टर जनरल व सीईओयुरोपियन फाउंडेशन फॉर मैनेजमेंट डिवेलपमेंट (ईएफएमडी) ने कहा कि, “आज की व्यावसायिक शिक्षा को दुनिया की सामाजिक-आर्थिक स्थितियोँ के अनुकूल बनाने की जरूरत है-दुनिया भर में, आर्थिक असमानता तेजी से बढ रही है मध्य-वर्ग का दायरा तेजी से संकुचित हो रहा है; ऐसे में हमे स्वयम से यह सवाल करना चाहिए कि क्या हमारी परम्परागत शिक्षा युवाओँ को रोजगार मुहैया कराने के लिए उपयुक्त है।“

डॉ. जी विश्वनाथनफाउंडर एवम चांसलरवेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (वीआईटी) ने कहा कि, “किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए शिक्षा एक अहम विषय है लेकिन दुर्भाग्यवश हमारे मामले में ऐसा नहीँ नजर आ रहा है। अब वह समय आ गया है जब हमेँ हर किसी के लिए निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए; इसकी शुरुआत हम लडकियोँ के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करके कर सकते हैं।“

 डॉ. एच. चतुर्वेदीअल्टर्नेट प्रेसिडेंटएजुकेशन प्रमोशन सोसायटी ऑफ इंडिया एवम डायरेक्टरबिमटेक (बीआईएमटेक) ने कहा कि“आज देश के उप राष्ट्रपति जी हमारे बीच हैं, इस बात को लेकर हमे बेहद गर्व है। यह कॉनक्लेव शिक्षा प्रदाताओँ और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियोँ के लिए बेहतरीन अवसर है, जहाँ वे एक साथ आकर बी-स्कूलोँ के लिए एक चार्टर प्लान तैयार कर सकते हैं।“ 

कॉन्क्लेव के पहले सत्र में नए रोजगार, नए कौशल और नए पाठ्यक्रमोँ के बारे में चर्चा की गई जिन्हे आज के छात्रोँ और कल के भविष्य हेतु तैयार किया जा रहा है। अन्य सत्र में शिक्षा के अनुभवोँ पर पुनर्विचार और बिजनेस शिक्षा को तकनीकी से युक्त बनाने के विषय में चर्चा की गई।28 फरवरी को होने वाले सत्र में भारत में भविष्य के अनुकूल बी-स्कूल विकसित करने के लिए रेगुलेटरी पॉलिसी पर चर्चा की जाएगी।

एशिया के विकास में भारत अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि वर्ष 2030 तक यह दुनिया की तीसरी सबसे बडी अर्थ्यव्यवस्था बन सकती है। भारतीय बिजनेस स्कूल भी इस यात्रा में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं और दुनिया के लिए अधिक उपयोगी बन रहे हैं। यह कॉन्क्लेव बिजनेस स्कूल के अगुवाओँ के लिए एक ऐसा अवसर है जिसके जरिए वे अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए खोज, मूल्यांकन और एक ठोस कदम उठाने के लिए तैयार हो सकते हैं।

AK Mishra, Founder and CEO, Chanakya IAS Academy, enlightens aspirants upon the 10 common mistakes  they do and the ways to rectify it.

1. NOT following the curriculum – one of the biggest mistakes the aspirants commit is not to follow the syllabus given by the UPSC. Many of them start their preparation without referring to the syllabus and within no time find themselves in ‘no progress zone’.Though the topics may be vast, but not completely unlimited. CSE aspirants need to break this myth as this may prove fatal in the long run costing you with time, money, energy and resource. In their course of preparation, consider the UPSC syllabus as your roadmap to start with and continue referring it at all points of preparation.

2. Missing to go through previous years – Aspirants donot realize that the previous year papers can help them prepare in accordance with the latest trend followed by the UPSC. While preparing, refer to previous years after each step in order to co-relate witht hetopics finished, as this is a good indicator of whether you are moving in the right direction or not.

3. Piling up irrelevant books – Flooding the room completely wth UPSC preparation books does not always land you in success. For effective preparation, choose handpicked books that are genuinely relevant. Though there are several market place in the city that is the hub for such preparation books with various authors and publications available, scrutinize for the relevant book to idealize your preparation. It is preferable for the aspirants to seek advise from their seniors, experienced mentors or reliable sources before going for a book purchase.

4. Not getting basic reference – Most of the aspirants do this by going for heavy weight books instead of getting the basics clear. The NCERT books upto 12 standard are a good source of knowledge to initiate steadily. This is the most atomic sized mistake that can compel your preparations to fall.

5.  Writing skills deficiency – the mains exams is the criteria for the selection process that includes writing essays. One lacking writing skills may not be well efficient in clearing theselection process. The aspirants should be well equipped with facts and wisdom, fluent flow of knowledge in a very precise and skillful manner. Being one of the toughest task, if not rectified on time, failure is guaranteed. Aspirants should be focusing on exam pattern oriented writing rigorously rather than blogging to improve writing and typing skills. 

6. Way of Choosing optional paper – Aspirants opt for the optional paper based on the subject scores and marking trends, length and extent of the curriculum and subject that covers almost the GS paper. These insights and estimations can prove fatal during results. Optional paper should be chosen in such a way that it should also suit the aspirants interest and inclination towards it.

7. NOT perceiving the bottomline of the newspapers – if the newspapers and the magazines are not understood about ‘what and how to read’, the results will yield low in the long run. A newspaper has three segments from an exam point of view – events (that gives facts and figures), Issues (provides views and reviews that helps in developing an individuals understanding and opinion on contemporary subjects.) and gossips. In addition articles on various other segments also helps aspirants to frame and write well structured essays. Hence utilize the newspapers with persistent efforts.

8. Improper analysis of your strengths – SWOT analysis is  undertaken to identify the internal strengths and weaknesses, as well as external opportunities and threats. As the nature of the UPSC exam demands high dynamism and adaptability, candidates miss to analyse their inbuilt strengths nad weakness along with the posing opportunity nad threats. This takes them in a wrong direction during preparation leading to loss of tempo and zeal. Aspirants should therefore keep a consistent grip overtheir strong areas and atleast a loose fist over weaker section.

9. Not prioritizing the task – improper management of time can lead to undesirableoutcomes. As aspirants put years together for UPSC preparation, managing time and prioritizing their work is must. Any ambition without a time frame is nothing more than a fantasy. Understand the difference between urgent and important to achieve fruitful benefits.

10. Circumventing regular reviewing – To retain the information stored during the preparation it is necessary to revise consistently. There has to be a very well maintained cohesion between what you read and ‘revise’ what have you read till date. Video Lectures, Subject Audios and Group Discussions (Group Study) can prove to be a boon for an aspirant of UPSC CSE. 

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने सिंगरौली के एसपी कार्यालय का घेराव करके चित्रकूट में हुए हादसे के जो कि श्रेयांश रावत और प्रियांशु रावत की निर्मम हत्या को लेकर के प्रदर्शन किया और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया। इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नंद केश सिंह, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महासचिव कुंवर कुश कुमार सिंह गहरवार और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र बहादुर सिंह जिला अध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह जिला महामंत्री एवं जिला मंत्री साउथ में और भी क्षत्रियगण मौजूद रह,े अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा राजेंद्र सिंह ने निर्मम हत्या की निंदा की है। प्रदेश भर के सभी क्षत्रिय बंधु मध्य प्रदेश की सरकार को अवगत कराना चाहती है कि यदि इस प्रकरण के ऊपर जल्द से जल्द उचित कार्रवाई ना हुई तो हम अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के सभी पदाधिकारी जिले में अनशन करेंगे और दोनों बच्चों के लिए हम तब तक लड़ेंगें जब तक की कातिल को पकड़ा नहीं जाता। राष्ट्रीय मंत्री/ राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्तिसिंह चंदेल का कहना है सरकार को ऐसी घटनाएं पर अंकुश लगाया जाना चाहिए और उनके तह तक जाना चाहिए कि आखिर ऐसी घटनाएं होती ही क्यों है।महिला अध्यक्ष आरती सिंह चौहन का कहना है कि मध्य प्रदेश की ऐसी घटना है जोकि सभी समाज के लिए शर्मसार करती है सरकार जल्द से जल्द कार्यवाही करे। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के सभी क्षत्रिय बंधुवर आखरी दम तक लड़ाई लड़ते रहेंगे और न्याय होने तक इस लड़ाई को जारी रखेंगे।भारतीय जेट ने पाकिस्तान के भीतर जैसे कार्रवाई की. अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की ओर से भारतीय वायुसेना के जांबाजों को शुभकामनाएं व बधाई!

सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में सम्भवत: ऐसा पहली बार हुआ है कि एक प्रशासनिक अधिकारी ने न्यायालय के आदेश में परिवर्तन करने का दुस्साहस किया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने इस मामले में छानबीन करवाई और एक ही दिन में ऐसे दुस्साहस की निन्दा करते हुए दोषी अधिकारी को नौकरी से हटा भी दिया गया। यह एक घटना सारे देश के प्रशासनिक भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए पर्याप्त प्रेरणा और मार्ग उपलब्ध कराती है। जिस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय ने एक भ्रष्ट अधिकारी के विरुद्ध निर्णय लेने में एक क्षण भी व्यर्थ नहीं किया और छानबीन सहित नौकरी से हटाने की सज़ा का निर्णय एक ही दिन में लागू कर दिखाया, क्या इसी प्रकार देश के सभी सरकारी कार्यालयों तथा अन्य संस्थानों में इसी गति से कार्यवाही सम्पन्न नहीं की जा सकती? सर्वोच्च न्यायालय के सर्वोच्च अधिकारी के रूप में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के द्वारा निर्णय लेने का यह तौर-तरीका केवल एक ही केन्द्रीय लक्षण को सिद्ध करता है कि मुख्य न्यायाधीश भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को एक क्षण के लिए भी बर्दाश्त नहीं करना चाहते। उनका यह लक्षण यह भी सिद्ध करता है कि वे स्वयं भी एक ईमानदार और अनुशासित जीवन में विश्वास रखने वाले व्यक्तित्व से परिपूर्ण हैं। इसके विपरीत सामान्यत: हम किसी भी कार्यालय, मंत्रालय या अन्य संस्थान में यह देखते हैं कि भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के एक-दो मामलों की तो कोई परवाह ही नहीं करता, बल्कि जब भी कोई सरकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार में लिप्त होता है तो वह उस भ्रष्टाचार की राशि का बंटवारा अपने उच्चाधिकारियों के साथ भी करता ही है। इसीलिए कोई उच्चाधिकारी भ्रष्टाचार के मामलों में किसी कार्यवाही के लिए तैयार नहीं होते। जब भ्रष्टाचार सिर से ऊपर बहने लगता है तो भ्रष्ट कर्मचारी को निलम्बित करके छानबीन कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाती है। निलम्बन की अवधि में भ्रष्ट कर्मचारी बिना काम किये अपने वेतन का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त करता रहता है और बाहर कोई भी अतिरिक्त कार्य करके अपनी आय बढ़ाने में सफल हो जाता है। दूसरी तरफ कई वर्ष चलने वाली छानबीन की कार्यवाही में क्या होगा या क्या नहीं होगा, इस बात से बेपरवाह उस अधिकारी को कभी भी अपने किये का पछतावा नहीं होता। कई बार तो छानबीन प्रक्रिया में भी भ्रष्टाचार का चढ़ावा देकर वह पुन: नौकरी पर बहाल हो जाता है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की तरह यदि सरकारी विभागों में भी उच्चाधिकारी ईमानदार हों तो उनके लिए यह उदाहरण एक बहुत बड़ा हथियार बन सकता है जिसके माध्यम से वे तत्काल भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्यवाही करके अपने-अपने कार्यालय में ईमानदारी और अनुशासन की स्थापना कर सकते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय में ही दूसरी बड़ी घटना तो इससे भी अधिक चौंकाने वाली थी। किसी व्यक्ति ने स्वयं को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का निजी सचिव एच.के. जुनेजा बताते हुए तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राधाकृष्णन तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नारायण स्वामी को टेलीफोन के माध्यम से कुछ विशेष व्यक्तियों का नाम उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सिफारिश करके भेजने के लिए कहा। इतना ही नहीं उस बहुरुपिये व्यक्ति ने इन दोनों उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को यह भी कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई भी उनसे बात करना चाहते हैं। इसके बाद उसी व्यक्ति ने रंजन गोगोई की आवाज़ में वही निर्देश इन दोनों उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को दिये। इस घटना का पता चलते ही मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई ने प्राथमिक छानबीन करवाई तो पता लगा कि किसी व्यक्ति ने अपने मोबाईल से एक विशेष प्रकार के सॉफ्टवेयर का प्रयोग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के लैण्डलाईन बोर्ड के माध्यम से अपनी कॉल उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को मिलाई। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के पास फोन कॉल सर्वोच्च न्यायालय के टेलीफोन बोर्ड से पहुँची थी। मुख्य न्यायाधीश ने इस घटना को लेकर भी तुरन्त एक उच्च स्तरीय बैठक करके विस्तृत छानबीन के आदेश दिये हैं। इतना ही नहीं उन्होंने सभी उच्च न्यायालयों के समस्त न्यायाधीशों को यह निर्देश जारी कर दिया है कि उनके नाम पर आने वाली किसी भी टेलीफोन कॉल को वे महत्त्व न दें। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने एक प्रकार से इस निर्देश के माध्यम से अपने ऊपर स्वयं ही एक अंकुश लगा दिया है कि वे कभी किसी उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को टेलीफोन के माध्यम से किसी प्रकार का कोई निर्देश नहीं देंगे।
लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इससे पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को टेलीफोन के माध्यम से यथा सम्भव निर्देश जारी करते रहे हैं। सभी उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा ही की जाती है, परन्तु इससे पूर्व सम्बन्धित उच्च न्यायालय न्यायाधीश बनने के योग्य व्यक्तियों की सिफारिश सर्वोच्च न्यायालय को भेजता है। सर्वोच्च न्यायालय की दूसरी सिफारिश के बाद केन्द्र सरकार अर्थात् राष्ट्रपति के द्वारा सम्बन्धित व्यक्ति की नियुक्ति का आदेश जारी किया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने तो सभी उच्च न्यायालयों को यह निर्देश जारी कर दिया है कि उनके नाम से किसी टेलीफोन निर्देश को महत्त्व न दिया जाये। परन्तु क्या यह व्यवस्था भविष्य में आने वाले सभी मुख्य न्यायाधीश जारी कर पायेंगे? वैसे उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश नियुक्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से नियमबद्ध और पारदर्शी बनाने की माँग लम्बे समय से चलती आ रही है, परन्तु न तो सर्वोच्च न्यायालय ने कभी इस माँग को स्वीकार किया है और न ही केन्द्र सरकार ने इस प्रक्रिया को लागू करने में कोई रुचि दिखाई। इसी का परिणाम है कि सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों या केन्द्र सरकार के गुप्त टेलीफोन निर्देशों के आधार पर ही उच्च न्यायालयों के द्वारा न्यायाधीश नियुक्त होने की सिफारिशों की प्रक्रिया सम्पन्न हो जाती है। ऐसी प्रक्रिया के माध्यम से केवल चहेते व्यक्तियों को ही उच्च न्यायालयों का न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश पद पर नियुक्ति के लिए ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है कि जिसमें विधिवत रिक्त स्थानों की सार्वजनिक घोषणा की जाये, लिखित और मौखिक परीक्षा पारदर्शी तरीके से सम्पन्न की जाये और ईमानदार तथा योग्य लोगों को उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश के रूप में पदासीन होने के अवसर प्राप्त हों।

vimal vadhawan
Advocate in supreme court
vimalwadhawan@yahoo.co.in