February 20, 2019
70-mm

इस बारे में ज़रा सोचिएए समझिए और फिर निर्णय लीजिए ।

रात का एक बजा हो और आपका मोबाइल अचानक बोलने लगे, आप क्या सोचेंगे. परेशान नहीं होंगे. न जाने कितने.कितने और क्या.क्या ख़्यालात आपको परेशान नहीं कर देंगे. आप चौंककर बैठ जाएंगे, सीधी सी बात है ..आपके पसीने नहीं छूट जाएंगे.

मोबाइल उठाने पर पता चले कि आपका एफ ण्बी मित्र आपको रिंग दे रहा है, आपका क्या मूड होगा. मन नहीं होगा कि सामने वाला सामने हो तो दो करारे से उसको लगा दिए जाएं.

भैया ! ऐसी क्या आफ़त आ गई और आफ़त आ भी गई तो क्या किसी की जान जा रही है. और जान जा भी रही हो तो किसी ऐसे को फ़ोन करो न जिसका सीधा संबंध हो तुमसे. और केवल टाईम पास करने के लिए फ़ोन कर रहे हो तो टाईम तो देखा होता पहले।

चटनी बना देने का मन होता है ऐसे आदमी का !

भैया! आज आधुनिक सुविधाएं बहुत बढ़ गईं हैं, हमें उनके साथ चलना भी चाहिए परंतु ये क्या कि तमाशा बना दिया जाए. जहाँ तक ये सब माध्यम एक .दूसरे से स्वस्थ्य संबंध रखने के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं, ठीक है किंतु जब इनके माध्यम से आप फूहड़ हरकतें करने लगते हैं तब स्वाभाविक रूप से

आजकल के सोशल मीडिया से मन उठ जाता है ।

सच तो यह है कि आज हम जो जीवन जी रहे हैं वह कितना बनावटी हो गया है. हम समझते हैं कि यदि हम वाॅटसैप ए एफण्बी पर नहीं हैं, हम ट्वीट नहीं करते हैं तो हम पिछड़े हुए हैं, आधुनिक नहीं हैं। हमने चिट्ठी.पत्री छोड़ दी है, मिलने.जुलने जाने पर हम टीवी के सामने बैठ जाते हैं और सीरियल देखने में खो जाते हैं।समाज के प्रति हमें कोई ज़िम्मेदारी समझ नहीं आती और हमें समय के प्रति भी न तो कोई चेतना है, न ही उसकी कीमत समझ पाते हैं। ठीक है भैया, न समझो पर दूसरे का तो ख़्याल करो । ये क्या कि एफण्बी मित्र बनते ही आपको कुछ भी करने के अधिकार मिल गए!

सो भैया! सोचो और दिमाग़ से काम लो। बहुत चांसेज़ हैं कि बिना स्तेमाल किए दिमाग़ में जंग न लग जाए।

सुनो रे भैया ! सच्ची बात

तुमसे कहती मन की बात

सावधान रहना सीखो तुम

चाहे दिन हो या हो रात

इस बारे में ज़रा सोचिएए समझिए और फिर निर्णय लीजिए ।

डॉ प्रणव भारती

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