April 21, 2019
Art-n-Culture

परिवेशात्‍मक अभिनय और नुक्‍कड़ नाटक का मंचन

20वें भारत रंग महोत्सव में युवा फोरम ने आज निम्नलिखित दो नाटक (प्‍ले) प्रस्तुत किए:

रुकावट के लिए खेद है: दी थिएटर सोसायटी, दौलत राम कॉलेज द्वारा प्रस्‍तुत यह नाटक, सड़कों की बिगड़ती स्थिति, नियमों के अप्रभावी प्रवर्तन और हर दिन इसे देखने के बाद इसे नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाता है। नाटक सड़कों पर और उसके प्रति लोगों के दृष्टिकोण के बारे में बात करता है और जब एक कदम आगे बढ़ता है तो धैर्य कैसे जवाब देता है।

अल्लाह-हू-अकबर: ट्रायाम्बकम का एक नाटक, दी थिएटर सोसायटी, राजधानी कॉलेज, समकालीन समय में हमारे देश द्वारा सामना किए गए आतंकवाद के मुद्दे को दिखाता है। यह नाटक लोगों को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न दकियानूसी बातों पर सवाल खड़ा करता है, खासकर युवाओं को, जो कि गलत कामों में लिप्‍त है। यह एक मजबूत कहानी के साथ एक मधुर कहानी भी है जो समाज को उस असुरक्षा के बारे में जागरूक करने के लिए है जिसमें वे रह रहे हैं और कैसे देशवासी शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम उठा सकते हैं, उसे भी दिखाया गया है।

बीमर ज़िन्दगी: जज़्बा थिएटर ग्रुप, रामानुजन कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्‍तुत एक नाटक, यह नाटक दिखाता है कि कैसे वर्तमान में लोग जल्‍दबाजी में खुशी का पीछा करते हैं और बहुत तेजी से हो रहे बदलावों को लेकर किस तरह से आसानी से समझौता कर लेते हैं। हमें महसूस नहीं होता है कि हमारे अधिकांश विकल्प जिसमें तुरंत घटित होने वाली घटनायें हैं, हमारे जीवन में हम किस तरह से बिना प्रतिरोध किये आसानी से बुरी आदतों को अपना लेते हैं और उनका ही अनुसरण करते हैं, जबकि इससे हमारा शरीर निरंतर कमजोर और बीमार होता चला जाता है, इसके परिणामस्‍वरूप हमारे जीवन का अंत यानी मृत्‍यु हो जाती है।

माहौल या परिवेश के अनुकूल हो रहा अभिनय भारत रंग महोत्सव की एक विशेषता है और यह थिएटर के महोत्‍सव में विभिन्‍न रंगों को जोड़ता है। इन प्रदर्शनों में विभिन्‍न राज्यों के कम-ज्ञात (जो लोकप्रिय नहीं है) स्थानीय, पारंपरिक और लोक कलाओं का वर्णन होता है जो इसे राष्‍ट्रीय राजधानी से जोड़ता है। नाटक के शुरू होने से पहले इन नाटकों का प्रदर्शन एनएसडी परिसर के ऑडिटोरियम में होता है। आज के सशक्त प्रदर्शनों में कालबेलिया बिल्‍लू भट्ट, भवाई पुष्‍पांजलि, कलबेलिया, चूलिया नृत्‍य भोवन और पार्टी और भवाई का प्रदर्शन हुआ।

कबेलिया राजस्थान का एक नृत्य रूप है, जो इसी नाम की जनजाति द्वारा पेश किया जाता है। यह नृत्य उनकी संस्कृति का एक अनिवार्य हिस्सा है और पुरुषों और महिलाओं द्वारा इसे पेश किया जाता है।

चूलिया उत्तराखंड का पारंपरिक लोक नृत्य है। यह नृत्य बहादुरी और उत्साह का प्रतीक है। यह मुख्य रूप से कुमाऊं क्षेत्र में मनाया जाता है।

डायरेक्‍टर्स मीट

निर्देशक श्री आशीष चट्टोपाध्याय (बोल), श्री अरविंद सिंह (कथा एक कंस की), श्री उर्मिल कुमार थपलियाल (हरिशचन्‍नर की लड़ाई) और श्री गौरी रामनारायण (मैथमैजिशियन) ने आज इस सत्र में भाग लिया। प्रख्यात थिएटर क्रिटिक्स श्री शिवकेश मिश्रा और डॉ. असगर वजाहत, महासचिव, फ़ॉर क्रिएटिविटी एंड कम्युनिकेशन, ने भी सत्र में भाग लिया।

अपने नाटक ‘बोल’ के बारे में बात करते हुए, निर्देशक श्री आशीष चट्टोपाध्याय कहते हैं, ”मेरी टीम मूल रूप से कोलकाता से है। पिछले 38 वर्षों से, मैं थिएटर से जुड़ा व्यक्ति रहा हूं और यह टीम मेरे परिवार को भी पसंद करती है। हमने विभिन्न स्थानों पर थिएटर नाटकों का प्रदर्शन शुरू किया है। चूंकि मैं साहित्य के प्रति झुकाव रखता हूं, मैं हमेशा अनसुनी कहानियों के चयन की कोशिश करता हूं जो शायद ही आम आदमी तक पहुंचती है।”

रंगमंच के बारे में बात करते हुए, श्री उर्मिल कुमार थपलियाल कहते हैं, ”थिएटर की समकालीन प्रासंगिकता तब है जब इसे स्थानीय स्तर पर प्रदर्शित और समझा जाता है। व्‍यावसायीकरण के कारण ‘नौटंकी’ धीरे-धीरे अपनी पकड़ खोती जा रही है। आधुनिक रंगमंच के साथ, मुझे उम्मीद है कि आज की पीढ़ी अपने प्रमुख और मूल मूल्यों को बरकरार रखते हुए, मुख्य रूप से थिएटर का नेतृत्व करेगी।”

अपने नाटक मैथमैजिशियन के बारे में बात करते हुए, श्री गौरी रामनारायण कहते हैं, ”इस नाटक पर काम करना कहानी और प्रसंग के भीतर हमेशा एक त्‍याग जैसी यात्रा रही है। इस नाटक को पूरा करने में हमें 5 से 6 महीने लगे। नाटक में हिंसा, पूंजीवादी और फासीवाद से संबंधित संभावनाओं को दिखाता है जिसे मैं अपने आसपास महसूस करता हूं।”

”कथा एक कंस की” कहानी ‘कंस’ के बारे में बताती है कि कैसे वह सत्ता में रहने से वह अधिक भयभीत हो जाता है। ‘कंस’ एक दयालु राजा था, जो भयभीत और असुरक्षित महसूस कर रहा था।” श्री अरविंद सिंह, निदेशक ने ये कहा।

नाटक

सुंदर मज घर (झड़ी पट्टी): अनिरुद्ध बंकर द्वारा निर्देशित, ‘सुंदर मजार घर’ में कन्या भ्रूण हत्या और एक समाज के खिलाफ संघर्ष को दर्शाया गया है, जहां अब भी एक महिला को एक बोझ माना जाता है। (ओपेन लॉन, 6:00 बजे शाम)

एक धोतरची गोश्त: मिलिंद इनामदार का मराठी नाटक, यह तमाशा की शैली में है, जो महाराष्ट्र का एक लोक रूप है। तमाशा खिलाड़ियों का एक छोटा समूह दोहरे अर्थ वाले संवादों के साथ ‘गावलान’ को प्रस्तुत कर रहा है। अभिमानी संघटन ने कृष्ण को हरी धोती पहनने पर आपत्ति जताई और अभिनेताओं के साथ अशिष्ट व्यवहार किया और उनसे कहा कि वे उनकी अनुमति के बिना इस तमाशा को न करें। (श्री राम सेंटर, 4:00 बजे शाम)

वी टीच लाइफ… सर! प्रशांत उदयवर का यह कन्‍नड़ नाटक बिना युद्ध के प्रयोग के पेश किया जाने वाला नाटक है। “फिलिस्तीन”, “ईरान-इराक”, “भारत-पाकिस्तान” की युद्ध की कथाओं का वर्णन यहां किया गया है। नाटकीय रूप से तैयार की गई कहानियां और कविताएं उनके प्रदर्शन का आधार हैं। यह केवल एक मौखिक नाटक नहीं है, बल्कि दृश्यों और शारीरिक गतिविधियों द्वारा संरचित है। (एलटीजी, 5:30 बजे शाम)

जेम्स्टा (रीवेंज या बदला) हेनरीक तलार द्वारा प्रस्‍तुत पोलिश नाटक एक चरित्र जेनिक रैप्‍सीविज पर आधारित है, जो रेबेका मिल्‍जेक  के साथ एक ही महल में रहता है, जिससे वह नफरत करता है और पैसे के लिए विधवा पॉडस्टोलिना से शादी करना चाहता है। हालांकि, पॉडस्टोलिना एक अमीर पति की तलाश में है। रेजेंट मिल्‍जेक अपने बेटे वाक्‍लाव को चाहते हैं और पॉडस्टोलिना को बाहर करना चाहते हैं। लेकिन वाक्लाव क्‍लारा के प्यार में है, जो एक स्नातक और जेल्निक की भतीजी है, जिसने अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद उसकी देखभाल की। यहां भावनात्‍मक स्थिति अधिक से अधिक जटिल हो रही है, क्योंकि एक ही समय में क्‍लारा के प्‍यार को पापकिन कबूल करता है। (कमानी, 7:00 बजे शाम)

अंधा युग: जॉय मैसनम द्वारा निर्देशित, हिंदी नाटक धर्मवीर भारती द्वारा लिखित एक कविता-नाटक है। यह महाभारत युद्ध के अंतिम दिन की पृष्ठभूमि को दर्शाता है। बदला लेने के एक अंतिम कार्य के लिए तरसते हुए अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र छोड़ता है, जो दुनिया को नष्ट करने की कोशिश के लिए है। नाटक के केंद्र में भगवान कृष्ण हैं। यह सुनिश्चित करने में उनकी विफलता के बावजूद, पूरे नाटक में उनकी उपस्थिति है, जो हमें बताती है कि हर परिस्थिति में नैतिक और न्यायसंगत समय इंसानों के लिए हमेशा उपलब्ध है। (अभिमान, 8:30 बजे रात)

कल होने वाले नाटक:

•     बयान (लेखिका: महाश्वेता देवी; निर्देशक: उषा गांगुली; समूह: एनएसडी रिपोर्टरी कंपनी, दिल्ली; भाषा: हिंदी; अवधि: 1 घंटा 35 मिनट)

•     औरत! औरल! औरल! (लेखक: इस्मत चुगताई, निर्देशक: नसीरुद्दीन शाह; समूह: मोटले, मुंबई; भाषा; हिंदुस्तानी; अवधि: 2 घंटे)

•     आहल अमादी एपक (लेखक: अर्नेस्‍ट हेमिंग्वे; निर्देशक: ओएसिस सौगजम; समूह: दी अम्‍बीलिक थिएटर, इम्फाल; भाषा: मणिपुरी; अवधि: 1 घंटा 10 मिनट)

•     पांचाली लास्या रंगा (लेखक: एच एस वेंकटेश मूर्ति; निर्देशक: बी जयश्री: सम्‍सक्रुती, बैंगलोर; भाषा: कन्नड़; अवधि: 1 घंटा 30

डायरेक्‍टर्स मीट

(स्‍थान: योगा हॉल; समय: 11 बजे से दोपहर 1 बजे)

इस सत्र में भाग लेने वाले निर्देशकों के नाम

  1. सुंदर मज घर (झंडी पट्टी)– निर्देशक: अनिरुद्ध बांकर एक धोतार्ची गोश्‍त: निर्देशक: मिलिंद इनामदार
  2. वी टीच लाइफ….सर: निर्देशक: प्रशांत उदयवर
  3. जेम्‍स्‍टा (बदला): निदेशक: हेनरिक टेलर
  4. अंधा युग: निर्देशक: जॉय मैसनम

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