March 21, 2019
Health

Edusports द्वारा किए गए 9वें वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार दिल्ली में 61प्रतिशत बच्चों का बीएमआई स्वस्थ है।

स्कूलों में बच्चों के समग्र स्वास्थ्य और सेहत के स्तर का आँकलन करने के उद्देश्य से एडुस्पोर्ट्स के द्वारा 9 साल पहले जो वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण शुरू किया गया था उसके नवीनतम संस्करण से यह पता चला है कि पूरे भारत में बच्चों के स्वास्थ्य का स्तर बेहद चिंताजनक है। देशभर में किए गए इस सर्वेक्षण में 21 राज्यों के 113 शहरों और कस्बों के 279 स्कूलों के 7 साल से 17 साल की उम्र के 1.53.441 बच्चों को शामिल किया गया है।
इस सर्वेक्षण ने विभिन्न मापदंडों पर बच्चों के स्वास्थ्य के स्तर का आँकलन किया और इससे कुछ रोचक निष्कर्ष निकलकर सामने आये हैं:
Body Mass Index (BMI): किसी व्यक्ति के वजन और लंबाई से प्राप्त किया जाने वाला एक आँकड़ा होता है और इसका उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि उस व्यक्ति का वज़न स्वस्थ वजन की सीमा के भीतर है या नहीं।
Aerobic capacity: माँसपेशियों को ऑक्सीजन पहुँचाने की लिए हृदय और फेफड़ों की क्षमता।
Anaerobic capacity: अवायवीय ;ऑक्सीजन के बिना ऊर्जा प्रणालियों से ऊर्जा की कुल मात्रा। यह उच्च तीव्रता वाले छोटी अवधि के व्यायामों या कार्यों जैसे कि तेज दौड़ने के दौरान उपयोगी होती है।
Abdominal or Core strength: धड़ की माँसपेशियों की ताकत जो किसी व्यक्ति की मुद्रा को निर्धारित करने में मदद करती है।
Flexibility: किसी व्यक्ति के जोड़ों को स्वतंत्र रूप से हिलाने की क्षमता।
Upper body strength ;छाती, रॉम्बॉइड्स ;ऊपरी पीठ, डेल्टोइड्स ;बाहरी कंधे, ट्राइसेप्स ;ऊपरी बाँह का पिछला हिस्सा, और बाइसेप्स ;ऊपरी बाँह का सामने का हिस्सा जैसी मांसपेशियों की ताकत।
Lower body strength: टाँगों की माँसपेशियों जैसे कि क्वाड्रिसेप्स ;ऊपरी टाँगों की सामने की माँसपेशियाँ, हैमस्ट्रिंग ;ऊपरी टाँग की पीछे की माँसपेशियाँ, ग्लूटिअल्स, हिप फ्लेक्सर्स और पिंडली की माँसपेशियाँ।

महत्वपूर्ण तथ्य
5 में से 2 बच्चों का बीएमआई अच्छा नहीं है।
2 में से 1 बच्चे के शरीर के ऊपरी भाग में पर्याप्त शक्ति नहीं है।
3 से 2 बच्चों में शरीर के निचले हिस्से में पर्याप्त शक्ति नहीं है।
5 बच्चों में से 1 में पेट की वांछित मजबूती नहीं है।
3 में से 1 बच्चे में वांछित लचीलापन नहीं है।
3 बच्चों में से 2 में वांछित वायुजीवी क्षमता नहीं है।
3 बच्चों में से 1 में वांछित अवायवीय क्षमता नहीं है।
इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि स्वस्थ बीएमआई वाले 59प्रतिशत लड़कों की तुलना में 63प्रतिशत लड़कियों की स्थिति थोड़ी बेहतर है। स्वास्थ्य के अनेकों मापदंडों जैसे कि ऊपरी शरीर की ताकत, पेट की ताकत और लचीलेपन में लड़कों की तुलना में लड़कियों को ज़्यादा तंदुरुस्त पाया गया। हालाँकि, निचले शरीर की ताकत और वायुजीवी क्षमता के सेहतमंदी के फिटनेस मापदंडों में लड़कों ने लड़कियों को पीछे छोड़ दिया।
फिटनेस लेवल तुलनात्मक विश्लेषणरू लड़कियाँ बनाम लड़के
इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि स्वस्थ बीएमआई वाले 59प्रतिशत लड़कों की तुलना में 63प्रतिशत लड़कियों की स्थिति थोड़ी बेहतर है। स्वास्थ्य के अनेकों मापदंडों जैसे कि ऊपरी शरीर की ताकतए पेट की ताकत और लचीलेपन में लड़कों की तुलना में लड़कियों को ज़्यादा तंदुरुस्त पाया गया। हालाँकि, निचले शरीर की ताकत और वायुजीवी क्षमता के सेहतमंदी के फिटनेस मापदंडों में लड़कों ने लड़कियों को पीछे छोड़ दिया।
सेहत सही बनाए रखने में स्कूलों का महत्व
हालाँकि इस सर्वेक्षण से चिंता का एक कारण सामने आया है, फिर भी यह सर्वेक्षण उन तरीकों को भी उजागर करता है जिनके साथ हम इस स्थिति को सुधार सकते हैं। सभी बच्चों के लिए गर्मी की वार्षिक छुट्टियों से पहले और बाद में एक तुलनात्मक स्वास्थ्य मूल्यांकन किया गया था। इसमें यह पाया गया है कि छुट्टियों के दौरान, सभी मापदंडों में बच्चों के स्वास्थ्य के स्तर में बहुत भारी कमी आयी थी। इससे पता चलता है कि स्कूल बच्चों को स्वस्थ बने रहने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब बच्चे स्कूल द्वारा प्रदान की जाने खेल.कूद की बुनियादी सुविधाओं और नियमित खेल कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाते हैंए तो उनकी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
एड्स्पोर्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं सह.संस्थापक, सौमिल मजमुदार कहते है, हालाँकि अस्वस्थ बच्चों की अधिक संख्या चिंताजनक है, फिर भी हमारे पास वो तरीक़े भी हैं जिनसे हम इस स्थिति को सुधार सकते हैं। यह सर्वेक्षण इस बात को फिर से दोहराता है कि खेलने का उचित समय प्रदान करके स्कूल बच्चों की सेहत को सही बनाए रखने के लिए एक उत्प्रेरक के तौर पर काम करते हैं। आजकल के परिवेश संदर्भ में, जब कई शहरों में खेलने की सुरक्षित जगह की कमी होती है, तो स्कूल ही एकमात्र ऐसा स्थान होता हैं जहाँ बच्चों को खेलने का मौका मिलता है। इससे स्कूलों में मिलने वाले खेल.कूद के किसी भी उपलब्ध समय को प्रभावी ढंग से उपयोग करने और संरचित करने की आवश्यकता और महत्व को बल भी मिलता है ताकि सभी बच्चों को भी और न केवल स्कूल की टीमों को उस कार्यक्रम से लाभ हो।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *