June 17, 2019
Politics

चुनावी टूरिज्म में प्रियंका गांधी

हजार ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर मुंह से उफ्फ.... निकलें। जी हां आजकल चुनावों के दंगल में ऐसा ही एहसास हो रहा है कि जो भी ख्वाहिश होगी, जिसकी भी इच्छा होगी... वो मुंह मांगी पूरी हो जाएंगी। इन दिनों तो आम जनता से लेकर मंत्रियों, संतरियों सभी की ख्वाहिशों पर मुहर लग रही है, गुंजाइश होगी तो पूरी हो जाएंगी वरना, प्लीज आप वोट दीजिए और भविष्य में आने वाले दिनों की गिनती कीजिए। पर प्लीज वोट हमें ही दीजिए। ऐसी ही इच्छापूर्ति का पिटारा लेकर घूम रही हैं प्रियंका गांधी। जी हां पूरा नाम नहीं लिख रही हूं क्योंकि गांधी में है दम। चुनावों से कुछ महीने पहले पार्टी की उच्चस्तरीय पद की कमाने संभालकर सामने आई पिं्रयका को देखने में ऐसा लग रहा है कि पिछले पांच वर्ष से वो इन्हीं दिनों को इंतजार कर रही थी। क्यों....? यह सोचने की बात है। खैर वो इसीलिए कि कब उनको उच्चतम पद मिले और वो चुनाव टूरिज्म पर निकले।  जिस तरह से खबरों के बाजार में एक जाने-माने न्यूज चैनल ने इन चुनावों को पर्व का नाम दिया। सुनते ही लगा, क्या....। पर्व। क्या वाकई यह चुनाव पर्व है। क्योंकि आजकल पर्व से पहले तो सुप्रीम कोर्ट का बिगुल बज उठता है। वैसे जनता सब जानती है इसीलिए सुप्रीम कोर्ट की कुछ बातों को वो नहीं मानती है।  इसीलिए तो इस चुनावी पर्व में अखबार क्या, चैनल क्या सभी मनाने पर लगे हैं। आप वोट किसी को भी दीजिए लेकिन चैनल सिर्फ हमारा ही देखिए। आखिर टीआरपी का मामला है ना भाई....। आप तो समझ ही सकते हैं।  अरे भई उनका क्या जो बिचारे पहली बार इस पर्व का हिस्सा बनेंगे। यानि कि पहली बार वोट देंगे। उनके लिए तो बहुत ही कन्फ्यूजन वाली सिचुऐशन है। यार... पहली बार है, किसको दूं और किसको नहीं।  खैर हम बात कर रहे थे प्रियंका गांधी के चुनावी टूरिज्म की। सोचने वाली बात तो यह है कि वो उन्हीं जगहों पर जाकर वापिस से खुदाई करना क्यों चाह रही है जहां से नरेंद्र मोदी पहले से ही पानी निकलवा चुके है। यानि कि गंगा। जी हां भारतीय लोगों के दिलों में गंगा शब्द बेहद लोकप्रिय और पवित्र है। गंगा की बढ़ोत्तरी मोदी नहीं करते तो आज प्रियंका को सवारी करने का मौका कैसे मिलता। सोचने की बात तो यह है कि किस उम्मीद पर प्रियंका यह सब कर रही है कि वो यह बात समझती नहीं कि अचानक से पार्टी की सीनियर बनकर सामने आ जाने से चुटकी बजाकर वो अपने खेमे के लोगों की परेशानियों को कैसे खत्म कर सकती हैं। रात भर नेताओं की मैराथन करने के बाद उनको क्या मिलेगा। मैडम पब्लिक सब जानती भी है और समझती भी है। हां स्टाइल बांटने के लिए यदि आप पब्लिक में जाना चाहती हैं और टूरिज्म का मजा लेना चाहती है तो मोस्ट वेलकम, आखिर ख्वाहिश का मामला है भई। और वाड्रा के पास बोहत पैसा है।  तो इस चुनावी पर्व की पल-पल की जानकारी रखें कि आखिर किस खूंट पर प्रियंका ने खूंटा लगाया, कौन जाने आने वाले समय में टूरिज्म स्थान की उपलब्धि मिल जाएं, क्योंकि यह उम्मीद-ए-चुनाव हैं। 
अनिका

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