December 10, 2019
Art-n-Culture

बता के रहूंगा, जी….

बता के रहूंगा, जी… प्रभु और देवी.देवताओं का फर्क. समाज में इस फर्क को जाने बिना विसंगतियां पैदा न करें।
प्रभु यानी परमपिता परमात्मा अर्थात स्वयं भगवान इस विश्व रंगमंच का क्रिएटर, डायरेक्टर और मुख्य एक्टर है। चाहें उसे अल्लाह कहो, जीसस कहो, वाहेगुरु कहो या परवरदिगार। उसे प्यार से किसी भी नाम से पुकारो सबका मालिक एक है। उसे किसी ने गॉड.ऑफ़.लाइट, नूर.ए.इलाही, एक ओंकार, सतनाम, निराकार आदि नामों से भी पुकारा।
प्रभु यानी सर्वशक्तिमान परमपिता परमात्मा, ज्ञान, प्रेम, पवित्रता, सुख, शांति, आनंद और शक्ति का सागर है। वह संपूर्ण विश्व की आत्माओं का बाप है। जो जन्म.मरण के चक्कर से परे है। वह सृष्टि चक्र ;सतयुग, त्रेता, द्धापर, कलियुग में अपने समय पर केवल कलियुग के अंत में सृष्टि को पतित से पावन बनाने के लिए आते हैं। कलियुग की जो आत्माएं समझ लेती हैं और अपने विकारों ;काम, क्रोध, लोभ, मोह, और अहंकार का नाश करती हैं केवल वही आत्माएं सतयुग में स्वर्ग स्थापित कर देवी.देवता बनती हैं। उनके द्धापर युग में मंदिर बनते हैं।
इस धरा पर प्रभु भी अपना पार्ट अपनी मनमर्जी से निभाने हेतु स्वतंत्र नहीं हैं, वह भी समय के साथ बंधे हुए हैं। जी, यह जानना बहुत आवश्यक है कि इस धरा पर प्रभु का पार्ट अलग है और देवी.देवताओं का एकदम अलग। प्रभु अपना अधिकार किसी को नहीं दे सकते इसलिए किसी भी देवी.देवता का प्रभु के सामान अधिकार हो ही नहीं सकता। प्रभु कभी मंदिरों में नहीं रहते। वहां तो सिर्फ देवी.देवता रहते हैं। इस धरा पर लोग देवी.देवताओं को ही प्रभु समझ बैठते हैं। उन्हें भगवान ;सबका मालिक एक और देवी.देवताओं में फर्क का पता ही नहीं होता।
जीए प्रभु और देवी.देवताओं के फर्क को जाने बिना ही समाज में विसंगतियां मिटाने वाले ही विसंगतियां पैदा कर रहे हैं। बहुत बुरा लगता है। ;यह सूचना केवल जनहित में जारी की गई। बुरा मानने वाले, नकारात्मक लोग तथा औरों को अपने से श्रेष्ठ न समझने वाले अन्यथा न लें, धन्यवाद।
डॉ. आलोक सक्सेना
नई दिल्ली

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