April 22, 2019
Health

बीसीपीबीएफ – द कैंसर फाउंडेशन द्वारा ‘सेवन सिस्टरर्स कैंसर अपडेट 2019’ का आयोजन

उत्तर पूर्वी भारत अपने लोगों के लिए अत्याधुनिक कैंसर उपचार के हकदार 
शिलांग: त्रिपुरा कैसल ने आज दिल्ली, मुंबई और सात उत्तर पूर्वी राज्यों (असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड) से आए प्रमुख कैंसर विशेषज्ञों, रणनीतिकारों, प्रशासकों, उद्योग नेताओं के बीच आधुनिक तकनीकों के बारे में बातचीत की। इस कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ.रवि मेहरोत्रा, डॉ.अमल कटकी, डॉक्टर डी.वी. थप्पा, अशोक बाजपेयी जैसे प्रख्यात नेताओं ने किया।आयोजन के अध्यक्ष डॉक्टर फिरोज पाशा के अनुसार इस कार्यक्रम का लक्ष्य फेफड़ों, स्तन यकृत, पेरिटोनियम, मस्तिष्क और बचपन के कैंसर के निदान और उपचार के क्षेत्र में विकास फैलाना है, ताकि यहां के असहाय मरीजों को वो जीवनदान मिल सके, जो देश के बाकी क्षेत्रों के मरीजों को मिल रहा है। शिलांग के प्रमुख चिकित्सा पेशेवरों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और आम जनता को इन बीमारियों के बारे में जागरुक करने की कोशिश की।न्यूरो-ऑन्कोलॉजी के विकास, बाल चिकित्सा कैंसर में परिणामों की बेहतर, ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के उपचार और प्रेशराइज्ड इंट्रा पेरिटोनियल एरोसोल थेरेपी के उपयोग जैसे कई विषयों पर दिए गए लेक्चर इस इवेंट के मुख्य आकर्षण का कारण थे। बीसीपीबीएफ-द कैंसर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉक्टर समीर कौल का कहना है कि, “ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं की मृत्यु और अन्य बढ़ते हुए रोगों का प्रमुख कारण है। जेनेटिकल कैंसर के मामलों में कैंसर जीन के फैलने के चांसेस लगभग 10 प्रतिशत ज्यादा होते है, जबकि अभी भी 90 प्रतिशत मामले छोटे-मोटे होते हैं। यदि एक महिला को 40 वर्ष की आयु के भीतर स्तन कैंसर का पता चलता है, तो उनमें ओवेरियन और ब्रेस्ट कैंसर दोनों के लिए जोखिम का खतरा दोगुना हो जाता है। कैंसर के विकास का खतरा तब भी बढ़ जाता है, जब 60 साल से कम उम्र की महिलाओं में ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर होता है। इस कैंसर में एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स, प्रोजेस्टेरोन रिसेप्टर्स और मानव एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर की कमी होती है।” ग्लोबोकैन 2018 भारत द्वारा प्रदान किए गए, हाल के आंकड़ों के अनुसार, 2018 में कैंसर के नए रोगियों की संख्या में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी और मृत्यु दर 30 प्रतिशत दर्ज की गई थी। पिछले 5 सालों में कुल प्रचलित मामलों में लगभग 80 हजार रोगियों के मामलों में मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत तक रही है।बीसीपीबीएफ – द कैंसर फाउंडेशन की महासचिव मृदुल अरोड़ा का कहना है कि “हमारा प्रयास है कि हम भारत में अपने डॉक्टरों और रोगियों के लिए सर्वश्रेष्ठ वैश्विक कैंसर अनुसंधान के लाभ लेकर आएं और साथ ही दिल्ली में राष्ट्रीय कैंसर नीति निर्माताओं की जरूरतों और आकांक्षाओं को जमीनी स्तर पर पूरा कर सकें।” लीडिंग फाउंडेशन, थिंक टैंक एंड पेसेंट एडवोकेट 2004 से भारत में आर्थिक रूप से असहाय कैंसर रोगियों को मदद प्रदान करती आ रही है।

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