August 21, 2019
Health

गर्मियों में भी रखे अस्थमा से सावधानी

गर्मियों में अस्थमा के मामलों में थोड़ी कमी आ जाती है, इसलिये कईं लोग थोड़े से आसवाधान हो जाते हैं, अपनी दवाईयां समय पर नहीं लेते और जरूरी सावधानी नहीं रखते। लेकिन ऐसा नहीं है कि गर्मियों में अस्थमा के ट्रिगर वातावरण में उपस्थित नहीं रहते बल्कि कुछ ट्रिगरों जैसे वायु प्रदूषण, पराग कण, धूल आदि की उपस्थति अन्य मौसमों की तुलना में बढ़ जाती है। गर्मी और उमस भी अस्थमा के ट्रिगर का कार्य करती है, इसलिये जरूरी है कि इस मौसम में भी पूरी सावधानी रखी जाये ताकि अस्थमा अटैक का खतरा नहीं रहे।
नई दिल्ली स्थित सरोज सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रेस्परेटेरी मेडिसीन के डॉ. अनंत गुप्ता का कहना है कि अस्थमा श्वसन मार्ग से संबंधित एक रोग है। इससे पीडि़त व्याक्ति के लिये सांस लेना कठिन हो जाता है क्योंकि जो नलिकाएं फेफडों तक ऑक्सीजन ले जाती है वह फूल जाती हैं। सांस की नलियां वायु में अस्थमा के ट्रिगर के संपर्क में आने के कारण फूल जाती हैं। अस्थमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है, जिससे इसे जड़ से समाप्त किया जा सके। डॉक्टर की सलाह से नियमित दवाओं का सेवन और इसके ट्रिगर से बचने के लिए जरूरी उपाय अपनाकर इसे नियंत्रित रखा जा सकता है। अस्थमा तब तक ही नियंत्रण में रहता हैए जब तक रोगी आवश्यक सावधानियां बरत रहा है।
डॉ. अनंत गुप्ता का कहना है कि अस्थमा के कई कारक है जैसे कि पर्यावरण प्रदूषण, अनुवांशिक कारण, एलर्जीए ठंडी हवाएं, मानसिक तनाव आदि। कईं अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि गर्म और उमस भरी हवा में सांस लेने के चार मिनट में ही अस्थमा के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अस्थमा के लक्षण व्यक्ति विशेष के अनुसार बदल सकते हैं। वैसे सामान्य रूप से अस्थमा के निम्न लक्षण दिखाई देते है छाती में ्रजकडऩ, रात में और सुबह कफ की शिकायत होना, श्वास नली में हवा का प्रवाह निर्बाध रूप से न होना, सांस लेने में कठिनाई या सांस उखडऩा, सांस लेते हुए घरघर की आवाज करना, खांसी आदि।
गर्मियों में मिलने वाले कुछ निश्चित फल और सब्जियां भी अस्थमा अटैक कर सकती हैं जैसे नाशपति, तरबूज, खरबूज, सेब या दूसरे ताजे फल और सब्जियों से ये समस्याएं हो सकती हैं। एक सामान्य, समाधान यह है कि हमें ऐसे भोजन से बचना चाहिए और अगर सांस लेने में समस्या हो तो, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा इन बातों का भी ध्यान रखें। अगर गर्मियों में किन्हीं चीजों से एलर्जी बढ़ जाती है तो उसके लिये डॉक्टर से दवाई लें। ऐसे स्थानों पर जाने से बचें जहां वायु प्रदूषण हो। अगर कोई लक्षण दिखाई न दें तब भी डॉक्टर द्वारा सुझाई दवाईयां समय पर लें। डॉक्टर से परामर्श लिये बिना उपचार में बदलाव न करें। धूप में बाहर निकलने से पहले अपनी दवाई और इनहेलर साथ लेकर जाएं। क्लोरीन की गंध से एलर्जी है तो स्विलमिंग पूल न जाएं। रात में खिड़कियां खोलकर ना सोएं एलर्जी और अस्थमा के लक्षणों से बचने के लिये एअर कंडीशन का प्रयोग करें। अस्थमा मैनेजमेंट के लिये, रोगियों को संभावित अस्थमा ट्रिगर्स से बचना चाहिए और सुझाए गये उपचार को जारी रखना चाहिए।

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