April 3, 2020
Health

फिट इंडिया आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए गुड़गांव में मुफ्त फिजियोथेरेपी शिविर आयोजित

गुड़गांव, 8 सितंबर, 2019: ‘फिट इंडिया आंदोलन’ में योगदान के लिए के आर वी फाउंडेशन  ने फिजियोथेरेपी के महत्व के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए गुड़गांव में आज मुफ्त फिजिकल थेरेपी शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में लगभग 500 स्थानीय निवासियों  ने भाग लिया।

यह शिविर आईजीएल (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) के सहयोग से आयोजित किया गया था, जो प्रदूषण मुक्त, स्वस्थ और ग्रीन इंडिया के उद्देश्य के साथ बड़े पैमाने पर समाज की सेवा करता रहा है।

व्यक्तिगत भलाई और राष्ट्र निर्माण में फिजियोथेरेपी की भूमिका के बारे में जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया था, जिससे लोगों को स्वास्थ्य और स्वस्थ रुटीन को लेकर प्रोत्साहित किया.

केआरवी हेल्थकेयर और फिजियोथेरेपी प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक और फिजियोथेरेपिस्ट, डॉक्टर रिदवाना सनम ने बताया कि, “फिजिकल थेरेपी एक परंपरागत इलाज है जो मेडिकल साइंस का एक अहम हिस्सा है। ग्रेड 1, 2 और 3 में बिना किसी साइड इफेक्ट के फिजिकल थेरेपी, सर्जरी की जरूरत को खत्म कर देती है। लेकिन जागरुकता में कमी के कारण आम जनता के बीच इसे सिर्फ एक व्यायाम के रूप में जाना जाता है। उम्र चाहे जो हो, शारीरिक समस्या के आधार पर फिजियोथेरेपी सभी के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि यह तो सभी को मालूम है कि सर्जरी के बाद और स्ट्रोक के इलाज के बाद रिकवरी के दौरान फिजियोथेरेपी एक अहम भूमिका निभाती है, लेकिन इसके अन्य लाभों से लोग अभी भी अनजान हैं।”

भारत में बहुत ही कम लोग फिजियोथेरेपी और इसके फायदों के बारे में जानते हैं। इसको लेकर यही धारणा बनी हुई है कि यह सिर्फ क्रोनिक दर्द और सजर्री वाले मरीजों के लिए अनिवार्य है लेकिन लोगों को यह जानने की आवश्यकता है कि यह निवारक और रिहैब ट्रीटमेंट में भी अहम भूमिका निभाती है।

डॉक्टर रिदवाना सनम ने आगे बताया कि, पेशेवरों की बात की जाए तो कर्मचारियों में दर्द या समस्या के प्रकार को पहचानने में एर्गोनॉमिक्स (काम के वातावरण में कर्मचारियों की सहजता को समझना) एक अहम भूमिका निभाती है। गुड़गांव और हरियाणा के कई क्षेत्रों में बहुत अधिक औद्योगिकीकरण के साथ आईटी, बैंकिंग और टेलीमार्केटिंग आदि में लंबे और अनियमित काम के घंटों के कारण लोगों की जीवनशैली खराब और गतिहीन हो गई है। इस प्रकार की आबादी में पीठ दर्द, माइग्रेन, कमजोर मांसपेशियों और जोड़ों की समस्या निरंतर बढ़ रही है।

पोस्चर से संबंधित दर्द और समस्याओं को कम करने की जरूरत और सही पोस्चर एवं कार्यस्थल एर्गोनॉमिक्स के बारे में लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से डॉक्टर रिदवाना ने विभिन्न कंपनियों में फिजियोथेरेपी के सेशन संचालित किए है और उन्हें सर्टिफिकेट भी दिए हैं।

उम्र सहित कई अन्य कारणों से होने वाली गठिया की समस्या जैसे ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटाइड आर्थराइटिस, यूनीकम्पार्टमेंटल आर्थराइटिस ने भारत के हजारों लोगों का जीवन खराब कर दिया है। जॉइंट रजिस्ट्री (आईएसएचकेएस) के हालिया आकड़ों के अनुसार, भारत में 15 करोड़ से भी ज्यादा लोग जोड़ों की किसी न किसी समस्या से पीड़ित हैं और पिछले साल लगभग 35 हजार लोगों ने जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी करवाई। इसमें 95% मामले ऑस्टियोआर्थराइटिस (40-70 वर्ष की आयु वर्ग में) के थे। केआरवी हेल्थकेयर और फिजियोथेरेपी सालों से ऐसे लोगों की मदद कर रहा है और फिजियोथेरेपी की मदद से लगभग 55 हजार मामलों में सर्जरी की जरूरत को खत्म किया.

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