November 13, 2019
Social Heros

रूकना तेरा काम नहीं, थकना तेरी शान नहीं

समर्पण और साहस की मिसाल सुश्री सुमन डूंगा

सुश्री सुमन डूंगा की पहचान पिछले दो दशकों में एक ऐसी संस्कृतिकर्मी और सामाजिक सरोकारों में सदैव सक्रिय रहने वाली मिलनसार और सकारात्मक महिला की है जिन्होंने अपनी सक्रियता और ऊर्जा से देश की राजधानी में रचनात्मक वातावरण बनाने में विनम्र भूमिका निभायी है। शुरू से ही एक सांस्कृतिक दृष्टिकोण रखने और ऐसी गतिविधियों में रुचि रखने के कारण जब वे आगे चलकर स्पिक मैके जैसे सांस्कृतिक अनुष्ठानिक उपक्रम से जुड़ीं तो उन्होंने सामाजिक कार्यों, शिक्षा, मीडिया एवं समन्वय तथा प्रचार-प्रसार के अनुभवों का इस कार्य में आत्मविश्वासपूर्ण प्रयोग किए और सफलता प्राप्त की।

सुश्री सुमन डूंगा वर्तमान में स्पिक मैके में मीडिया और संचार-समन्वय की प्रमुख के रूप में कार्यरत रहते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं संस्कृति के अनेक अनुषंगों के विस्तार और विशेष रूप से शिक्षा के केन्द्रों और संस्थानों से जोड़कर कार्य करने में विशेषज्ञता हासिल की है जिसका प्रमाण 7000 से अधिक गतिविधियाँ हैं जो देश-विदेश में आयोजित हुई हैं। सुश्री सुमन डूंगा को स्पिक मैके के इण्टरनेशनल कन्वेन्शन को 2015 में आईआईटी मुम्बई में संयोजित करने और उसकी चर्चा व्यापक स्तर तक पहुँचाने का सफल श्रेय है।

समाचार पत्रों की शीर्ष संस्था टाइम्स ऑफ इण्डिया के साथ मिलकर उन्होंने इस बडे़ सांस्कृतिक महोत्सव को एक अलग ही अन्दाज में प्रस्तुत किया। यह एक ऐसा आयोजन था जिसमें 2000 प्रतिनिधियों और प्रति सप्ताह 300 कलाकारों का सांस्कृतिक सामंजस्य लोगों के लिए अविस्मरणीय रहा है।उत्तरभारत विशेषकर हरियाणा, पंजाब, चण्डीगढ़, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सुश्री सुमन डूंगा ने स्पिक मैके और स्वप्रेरित-स्वस्फूर्त उपक्रमों के माध्यम से संस्कृति को कला रसिकों, कला के जिज्ञासुओं और प्रेमियों के साथ-साथ नयी पीढ़ी के स्वभाव में भी शामिल करने का जतन किया है जो उनके लिए एक बड़े आत्मसुख का हिस्सा है।

हाल ही में एक बड़ा सांस्कृतिक जलसा दिल्ली में चर्चा का केन्द्र बना जब आईडीसी जर्मनी और यूथ डेलिफिक गेम्स ऑर्गेनाइजिंग कमेटी ने अत्यन्त व्यापक स्तर पर कला और संस्कृति का बड़ा महोत्सव आयोजित किया। इसमें 100 देशों का प्रतिनिधित्व था। सुश्री सुमन इस पहल के बीच अपनी विनम्रता और अथक सक्रियता के साथ दृश्य में दिखायीं दीं। 

सुश्री सुमन ने समय-समय पर अनेक अवसरों में चाहे वो आयोजनों का मंच हो या दूरदर्शन का वैचारिक प्लेटफॉर्म या फिर औपचारिक-अनौपचारिक संवादों की स्थितियाँ, अपनी जिम्मेदारी, दृष्टि, सोच, संवेदना और लक्ष्य का आश्वस्त परिचय दिया है। वे बच्चों से लेकर बड़ों और बुजर्गों, सामान्य जनजीवन से लेकर दिव्यांगों के बीच भी सुरुचि और उत्साह के साथ अपनी नैतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करती हैं।

सुश्री सुमन अपने शब्दों में इस पूरे परिदृश्य में, स्वयं के होने को ईश्वर का वरदान और अपने लिए सौभाग्य मानती हैं। वे कहती हैं कि कला और संस्कृति का विश्व और व्यापक सामाजिक फलक उनके लिए देशकाल और परिस्थितियों, हर हाल में जीने का जरिया हैं, अपने आपको साबित करने का जरिया हैं, मनुष्य बने रहने का जरिया हैं, संवेदनाओं को बनाये रखने का जरिया हैं……………

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