November 17, 2019
Health

पास ऑन प्लास्टिक: मोबियस फाउंडेशन की एक खास पहल

नई दिल्ली: प्लास्टिक अपशिष्ट और संबन्धित प्रदूषण वैश्विक चिंता का कारण बन गया है क्योंकि यह सभी जीवित प्राणियों को प्रभावित करने के साथ ही हमारे ग्रह को भी हानि पहुँचा रहा है। सिंगल यूज़ प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों से पर्यावरण को बचाने के लिए मोबियस फाउंडेशन दिल्ली में 20 अक्टूबर से 3 नवंबर 2019 तक प्तपासऑनप्लास्टिक अभियान चला रहा है7

20 दिनों के इस अभियान के दौरान मयूर विहार फेज-१ और इंद्रप्रस्थ एक्सटेंशन दिल्ली के तीन आवासीय सोसाइटी (लगभग 2500 परिवार) मोबियस फाउंडेशन द्वारा रखे गए डिब्बे में अपने प्लास्टिक कचरे को डालेंगे। प्लास्टिक कचरे के संग्रह के लिए प्रत्येक सोसाइटी (२५० परिवार) में दो डब्बों की व्यवस्था की गई है। कचरे को संग्रहित करने के लिए ये डिब्बे 20 अक्टूबर से 1नवंबर तक यानि 14 दिनों के लिए सोसायटियों में उपलब्ध रहेंगे।

च्च्आर्थिक रूप से व्यवहार्य और बेहतर रीसाइक्लिंग के लिए कचरों को अलग करना आवश्यक है। हम पूर्वी दिल्ली आवासीय सोसाइटियों में एक पायलट प्रोजेक्ट चला रहे हैं। इसमें हम उस प्लास्टिक कचरे को अलग कर रहे हैं जिन्हें जलाने पर या लैंडफिल के माध्यम से नष्ट करने पर पर्यावरण को अधिक नुकसान होता है। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए मयूर विहार फेज-१ के पूर्वी दिल्ली आवासीय सोसायटी और इंद्रप्रस्थ एक्सटेंशन को चुना गया है। हम २५०० परिवारों के साथ काम कर रहे हैं। इसके लिए हमने संबन्धित आरडब्ल्यूए के साथ सहयोग किया है और प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रहण में उनका पूरा सहयोग मिल रहा है। इस पहल के माध्यम से मोबियस फ़ाउंडेशन प्लास्टिक कचरे को अलग करने के महत्व को लेकर जन-सामान्य में एक जागरूकता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही इस बात को लेकर भी जागरूकता फैलाया जा रहा है कि कैसे कोई व्यक्तिगत या सामाजिक रूप से इसमें भाग ले और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के प्रति सचेत रहे, ज्ज्श्री प्रदीप बर्मन, अध्यक्ष, मोबियस फाउंडेशन ने कहा।

प्लास्टिक प्रदूषण पर्यावरण में अपशिष्ट प्लास्टिक सामग्री के संचय के कारण होता है। यह एक गैर-बायोडिग्रेडेबल पदार्थ है जिसका मिट्टी या पानी में क्षय नहीं होता। इसे सुरक्षित और पारिस्थितिक रूप से निपटना एक चुनौती है। इसीलिए, प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रहण के बाद मोबियस फाउंडेशन उन्हें एक रीसाइक्लिंग कंपनी च्ग्रीन ओ टेक ज्को सौंप देगा। यह कंपनी इन प्लास्टिक से छरों, पॉलिएस्टर यार्न, खिलौने आदि का निर्माण करेगी और इस तरह प्लास्टिक का पुनः उपयोग हो पाएगा। इसके अलावा, प्रत्येक 100 ग्राम प्लास्टिक के बदले वे एक पेड़ भी लगाएंगे।

अधिक से अधिक लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए वे उन घरों को प्रोत्साहन दे रहे हैं जो अपने प्लास्टिक कचरे को डिब्बों में डाल रहे हैं। यह प्रलोभन पुनर्निर्मित या अपशिष्ट उत्पादों से बने पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों के रूप में है। प्रत्येक सोसाइटी के आरडब्ल्यूए को प्रशंसा प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।

इस पायलट प्रोजेक्ट का अगला चरण गुरुग्राम की सोसाइटी में स्थानीय गैर-सरकारी संगठन उदय केयर ट्रस्ट के सहयोग से इस मॉडल को लागू करना होगा। इसके डेटा को एकत्रित, संकलित और विश्लेषित कर नगर निगम को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। इसके माध्यम से वह इस व्यवस्था को या किसी अन्य तरीके के द्वारा प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए एक स्थायी बुनियादी ढांचा के निर्माण का निर्णय ले पाने में सक्षम हो पाएगा।

इस पहल को आगे बढ़ाते हुए इसमें घरेलू स्तर से निस्तारण प्रक्रिया तक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को शामिल किया जा सकता है जिससे कि कचरे का समुचित निपटारा हो सके।

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