February 27, 2020
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नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन लीची (एनआरसीएल) और केडिया फ्रेश ने ‘‘उन्नति लीची’’ को लॉन्च करने के लिये भागीदारी की

कोका-कोला इंडिया, देहात, नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन लीची (एनआरसीएल) और केडिया फ्रेश ने ‘‘उन्नति लीची’’ को लॉन्च करने के लिये भागीदारी की

बिहार में ‘‘फ्रूट सर्कुलर इकोनॉमी’’ की मजबूत शुरूआत के लिये एक पहल

उन्नति लीची का लक्ष्य है अगले 3 वर्षों में लीची के उत्पादन को 200 प्रतिशत तक बढ़ाना और 80,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षित कर लाभ पहुँचाना

नई दिल्ली, 13 फरवरी, 2020: तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कनार्टक, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में उन्नति मध्यस्थताओं की सफलता के बाद कोका-कोला इंडिया ने आज देहातनेशनल रिसर्च सेंटर ऑन लीची (एनआरसीएल) और केडिया फ्रेश के साथ मिलकर बिहार में उन्नति लीची को लॉन्च किया है। यह पहल उच्च घनत्व वाले पौधारोपण, कृषि की अच्छी पद्धतियों (जीएपी) के लिये किसानों के प्रशिक्षण और उपयुक्त प्रौद्योगिकी मध्यस्थताओं के माध्यम से नमूने के बागों के निर्माण के आधार पर कृषि महत्व श्रृंखला की क्षमता बढ़ाने और किसानों की क्षमता निर्माण पर लक्षित है।

इस पहल का शुरूआती चरण बिहार के मुजफ्फरपुरसमस्तीपुर और वैशाली जिलों में लॉन्च किया गया, जो राज्‍य में लीची की खेती के बड़े केन्द्र हैं। उगाने से लेकर पैकेजिंग तक संपूर्ण महत्व श्रृंखला को संजोने वाले उन्नति लीची का लक्ष्य 80,000 से अधिक किसानों को मौजूदा बागों के पुनर्जीवन, लगभग 3000 एकड़ के पुराने और जीर्ण खेतों को तरोताजा करने और लीची का उत्पादन दोगुना करने के लिये उच्च घनत्व वाले पौधारोपण जैसी आधुनिक तकनीकों की पेशकश पर शिक्षित और प्रशिक्षित करना है।

इस परियोजना की घोषणा प्रबुद्ध व्यक्तित्वों की उपस्थिति में हुई, जैसे बिहार के कृषि मंत्री श्री प्रेम कुमारदेहात के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशांक कुमारएनआरसीएल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस. डी. पांडेकेडिया फ्रेश के चेयरमैन आर. के. केडियाकोका-कोला इंडिया में फ्रूट सर्कुलर इकोनॉमी के वाइस प्रेसिडेन्ट असीम पारेख और इश्तियाक अमजद- वाइस प्रेसिडेन्टपब्लिक अफेयर्सकम्युनिकेशंस एंड सस्टैनेबिलिटीकोका-कोला इंडिया एंड साउथ वेस्ट एशिया

देहात के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशांक कुमार ने कहा, ‘‘लीची बिहार की एक हेरिटेज फसल है और हमारे किसान साल दर साल इस फसल के उत्‍पादन में गिरावट का अनुभव कर रहे हैं। किसानों के लिए उच्‍च मूल्‍य वाली फसल होने के कारण लीची उनकी आजीविका में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। हमारा लक्ष्‍य किसानों को पारंपरिक विधियों से हटकर आधुनिक कृषि पद्धतियों पर प्रशिक्षित करना है, जिसके लिये उन्हें संपूर्ण सहयोग, प्रशिक्षण और संबद्ध कृषि तकनीकों से अवगत कराया जाएगा। हमें विश्वास है कि इस परियोजना से कोका-कोला के जुड़ने से आवश्यक पैमाना और उत्कृष्ट प्रबंधन मिलेगा।’’

कोका-कोला इंडिया अपने अनूठे गुणों के लिये प्रसिद्ध लीची की किस्मों – शाही और चीना का उत्पादन बढ़ाने के लिये परियोजना क्रियान्वयन भागीदार देहात (ग्रीन एग्रीवोल्यूशन प्रा. लि.) के साथ निकटता से काम करेगा। केडिया फ्रेश मुजफ्फरपुर में नमूने का अत्याधुनिक बाग बनाने में अपनी विशेषज्ञता का प्रयोग करेगा और प्रमुख प्रौद्योगिकी भागीदार नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर लीचीमुजफ्फरपुर (एनआरसीएल) लीची की खेती के लिये संपूर्ण मानक परिचालन विधियों (एसओपी) को विकसित करेगा और परियोजना की समय अवधि के दौरान उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगा।

इश्तियाक अमजद – वाइस प्रेसिडेन्टपब्लिक अफेयर्सकम्युनिकेशंस एंड सस्टैनेबिलिटीकोका-कोला इंडिया एंड साउथ वेस्ट एशिया ने कहा, ‘‘हम देश के विभिन्न फलों के लिये अच्छी कृषि पद्धतियों (जीएपी) को बढ़ावा देने के लिये प्रतिबद्ध हैं। लीची की खेती बिहार में सबसे अधिक होती है और इस कारण इस राज्य की बड़ी आबादी को रोजगार मिलता है। हम अपने फल-आधारित पेयों के माध्यम से स्थानीय आधार पर उगने वाले फलों की मांग निर्मित करना, देश की कृषि-पारिस्थितिकी में निवेश करना और उन्नति परियोजनाओं के माध्यम से सीधे किसानों के साथ काम करना जारी रखेंगे, हम किसानों की आय बढ़ाने और उनके रहन-सहन का स्तर ऊँचा उठाने के लिये उनकी मदद करते रहेंगे।’’

कोका-कोला इंडिया में फ्रूट सर्कुलर इकोनॉमी के वाइस प्रेसिडेन्ट असीम पारेख ने कहा, ‘‘भारत दुनिया में लीची का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत में लीची की खेती में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बिहार और पश्चिम बंगाल की है। बिहार लीची का सबसे बड़ा उत्पादक है। लीची की खेती की पारंपरिक पद्धति के अलावा आधुनिक प्रौद्योगिकी और जीएपी को अपनाने से बिहार में लीची का उत्पादन दोगुना हो सकता है। बिहार में उन्नति लीची उस दिशा में एक विनम्रलेकिन महत्वपूर्ण प्रयास है।’’

उन्नति लीची के माध्यम से उत्पादनशीलता की बढ़त इस फल की स्थानीय मुख्तारी को गति दे सकती है, जिससे इस राज्य में हॉर्टिकल्चर की पारिस्थितिकी को बल मिलेगा। यह परियोजना किसानों को जरूरी अवसंरचना तक पहुँच भी देगी, जैसे उच्च उपज वाला प्लांटिंग मटेरियल और आधुनिक पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेस (पीओपी), जिससे लीची की खेती आकर्षक हो जाएगी।

कोका-कोला इंडिया और उसके भागीदार भारत की फ्रूट सर्कुलर इकोनॉमी के विकास के लिये 1.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश कर मजबूत महत्व श्रृंखलाओं के निर्माण के मार्ग पर बढ़ रहे हैं। बिहार में प्रोजेक्ट उन्नति लीची की शुरूआत के बाद यह पहल पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में भी होगी।

कोका-कोला कंपनी के विषय में

कोका-कोला कंपनी (NYSE: KO) दुनिया की सबसे बड़ी पेय कंपनी है, जोकि 500 से अधिक स्‍पार्कलिंग एवं स्टिल ब्रांडों और लगभग 3,900 पेयविकल्‍पों के साथ ग्राहकों को तरोताजा करती है। दुनिया की सबसे मूल्‍यवान और सम्‍मानित ब्रांडों में से एक, कोका-कोला द्वारा प्रवर्तित, हमारी कंपनी के पोर्टफोलियो में 21 बिलियन डॉलर के ब्रांड्स शामिल हैं जिनमें से 19 रिड्यूस्‍ड, लो या नो कैलोरी प्रोडक्‍ट्स में उपलब्‍ध हैं।

ये ब्रांड्स हैं डाइट कोक, कोका-कोला जीरो, फैंटा, स्‍प्राइट, दसानी, विटामिनवाटर, पावरेड, मिनट मेड, सिम्‍प्‍ली, डेल वैल्‍ले, जियॉर्जिया एवं गोल्‍ड पीक। दुनिया के सबसे बड़े पेय वितरण तंत्र के माध्‍यम से, हम स्‍पार्कलिंग और स्टिल बेवरेजेज दोनों में नंबर 1 प्रदाता हैं।

हर दिन 200 से अधिक देशों के उपभोक्ता हमारे पेयों की 1.9 बिलियन से अधिक सर्विंग्स का आनंद लेते हैं। स्थायी समुदायों के निर्माण की सशक्त प्रतिबद्धता के साथ हमारी कंपनी ऐसी पहलों पर केन्द्रित हैजो पर्यावरण पर हमारे प्रभाव को कम करती हैंहमारे असोसिएट्स के लिये काम का एक सुरक्षित और समावेशी माहौल बनाती हैं और हमारे परिचालन वाले समुदायों के आर्थिक विकास को बल देती हैं। अपने बॉटलिंग पार्टनर्स के साथ मिलकर हम 700,000 से अधिक सिस्टम असोसिएट्स के साथ विश्व के शीर्ष 10 निजी नियोक्ताओं में शुमार होते हैं।

अधिक जानकारी के लिये www.coca-colacompany.com पर कोका-कोला जर्नी देखेंहमें ट्विटर पर फॉलो करने के लिये twitter.com/CocaColaCo पर जाएंहमारा ब्लॉग कोका-कोला अनबॉटल्ड www.coca-colablog.com पर देखें या लिंक्डइन पर www.linkedin.com/company/the-coca-cola-company को क्लिक करें।


देहात के विषय में

देहात™  एग्री टेक सेक्टर में सबसे तेजी से बढ़ रहे स्टार्ट-अप्स में से एक और भारत में कृषक समुदाय को संपूर्ण समाधान एवं सेवाएं प्रदान करने वाली कुछ कंपनियों में से एक हैं हम कृषि क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन क्षमता की क्रांति लाने के लिये एआई-इनेबल्ड टेक्नोलॉजीज बना रहे हैं। वर्तमान में हम पूर्वी भारत- बिहार, यूपी और ओडिशा में परिचालन कर रहे हैं- हमारे सर्विस नेटवर्क में 165,000 किसान हैं और हम वर्ष 2024 तक 5 मिलियन किसानों तक अपनी सेवाएं पहुँचाना चाहते हैं।

आईआईटी दिल्ली, आईआईटी खड़गपुर, आईआईएम अहमदाबाद और अन्य शीर्ष संस्थानों के भूतपूर्व विद्यार्थियों द्वारा संस्थापित देहात अब 3 से 4 गुना वार्षिक वृद्धि दर के साथ एक पूरी तरह फंडेड स्टार्ट-अप है। हमने पिछले 8 वर्षों में अपने परिचालन से जमीनी स्तर पर जो प्रभाव निर्मित किया है, वह अनोखा है, हमें नैस्कॉम, फोर्ब्स, ईटी, नीति आयोग और बिल गेट्स फाउंडेशन ने सम्मानित और पुरस्कृत किया है।

नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर लीची (एनआरसीएल) के विषय में

एनआरसीएल लीची पर शोध एवं विकास के लिये अग्रणी राष्ट्रीय संस्थान है और राष्ट्रीय स्तर पर अगुवाई करता है। यह लीची के उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्द्धन पर सूचना के राष्ट्रीय संग्राहक का काम भी करता है और अंतिम यूजर्स को परामर्श सेवाएं प्रदान करता है। आईसीएआर-नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन लीची की संस्थापना 6 जून, 2001 को भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के तत्वाधान में की थी, ताकि यह भारत में मिशन वाले दृष्टिकोण के आधार पर लीची के शोध एवं विकास के शीर्ष संस्थान के तौर पर काम करे। इस सेंटर ने वर्ष 2002 से बजट आवंटन के साथ काम शुरू किया और मार्च, 2002 में दो वैज्ञानिकों का पहला बैच इस सेंटर से जुड़ा। 25 जून, 2002 को आईसीएआर और बिहार सरकार के बीच लीज का अनुबंध हस्ताक्षरित हुआ, ताकि मुशाहरी में इस सेंटर को 100 एकड़ भूमि मिले। वर्ष 2005 के दौरान और उसके बाद वैज्ञानिक, तकनीकी और सहयोगी कर्मचारियों तथा अवसंरचनात्मक सुविधाओं के विकास हेतु प्रशासनिक सहयोग और शोध कार्यों के लिये वित्तीय सहायता के साथ यह सेंटर मजबूत होता गया।

वर्तमान में इस सेंटर के पास 14 वैज्ञानिक, 3 तकनीकी, 8 प्रशासनिक और 3 सहयोगी कर्मचारी हैं, जबकि अनुमोदित वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक और सहयोगी कर्मचारियों की संख्या क्रमशः 15, 14, 12 और 10 है। अनुमोदित वैज्ञानिक पद हॉर्टिकल्चर, पौध प्रजनन, अनुवांशिकी, मृदा विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी, शरीर विज्ञान, पैथोलॉजी, कीट विज्ञान, अर्थशास्त्र, एक्सटेंशन एवं कंप्यूटर अनुप्रयोगों जैसे विभिन्न विषयों का प्रतिनिधित्व करता है।

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