September 21, 2020
Lifestyle

Ageism at work….काम की जगहों पे उम्र के अनुसार भेदभाव

एक ऐसे युग में जहाँ हमारे कॉरपोरेट वर्कफोर्स में अधिकतर युवा मिलेनियल्स हैं वहाँ जनरेशन एक्स अथवा बेबी की उम्र वाले लोग भी शायद खुद के लिए समान वैल्यू और रेस्पेक्ट महसूस नहीं करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि एजिंग की समस्या सिर्फ रिक्रूटमेंट के समय देखने को नही मिलती है बल्कि नियोक्ताओँ द्वारा अक्सर अधिक उम्र वाके कर्मचारियोँ के प्रति नकारात्मक एटिट्यूड भी दर्शाया जाता हैए वह भी तब जब युवा सहकर्मियोँ के मुकाबले उनकी सेहत और उत्पादकता में कोई कमी नहीं होती है।

जब नए अवसर आते हैंए कुछ नया सीखने अथवा विकास सम्बंधी प्रोग्राम की बात आती है तो अक्सर अधिक उम्र वाले कर्मचारियोँ को नजरअंदाज किया जाता है। जबकि उनके लम्बे अनुभव का संस्थान को लाभ हो सकता हैए मगर देखा जाता है कि 50 साल से अधिक उम्र वाले लोगोँ को प्रमोशन नहीं दिया जाता हैए उन्हेँ ऐसे कार्योँ में लगा दिया जाता है जो कम महत्वपूर्ण होती हैंए जहाँ वे अपने रिटायरमेंट तक का ष्टाइम पासष् कर सकेँ।

एक ऐसे दौर में जब युवा कर्मचारियोँ को अधिक महत्व दिया जाता हैए तब यह देखना बेहद सामान्य बात है कि अधिक उम्र वाले कर्मचारियोँ के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है या उन्हे उनकी पोजिशन की तुलना कम महत्वपूर्ण काम दिया जाता है ताकि वे अपने आप ही संस्थान को छोडकर चले जाएँ।

श्एक ऐसा वर्कप्लेस तैयार हो जो सबके लिए समान और ओपेन हो किसी भी समस्या को दूर करने का पहला चरण है यह मानना कि समस्या मौजूद है। एजिज्म एक वास्तविक समस्या हैए यह स्वीकार करने के लिए हमेँ इसके बारे में भी उसी प्रकार से चर्चा करनी होगी जैसा कि हम सेक्सिज्म अथवा किसी अन्य भेदभाव के सम्बंध में।

अगर संस्थान अपनी पूरी क्षमताओँ के शिखर तक पहुंचना चाहते हैं और अपने यहाँ प्रतिभाओँ को रोककर रखना चाहते हैं और उत्पादकता बढाना चाहते हैं तो उन्हेँ एक ऐसा वर्कप्लेस तैयार करना हो जहाँ हर किसी को समान नजर से देखा जाएए उनकी उम्रए जेंडर अथवा अन्य विभेदोँ के आधार पर भेदभाव न किया जाएए हर किसी को मान.सम्मान दिया जाए।श् केवल कपूरए डायरेक्टर एंड क्रिएटिव स्ट्रेटजिस्टए चाय क्रिएटिव एंड रिटर्न ऑफ़ मिलियन स्माइल्स


इस दबे हुए मगर सशक्त भेदभाव के पीछे उम्र को लेकर कई तरह की भ्रांतियाँ जिम्मेदार हैं। अक्सर यह माना जाता है कि अधिक उम्र वाले कर्मचारी तकनीकी रूप से सक्षम नहीं होते हैंए बदलाव को आसानी से स्वीकार नहीं करतेए कम आविष्कारी और एडॉप्टेबल होते हैं।

जबकि इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया जाता है कि अधिक उम्र वाले कर्मचारियोँ को अनुभव अधिक होता हैए न सिर्फ किसी एक खास क्षेत्र में बल्कि सामान्य जीवन में भी। जो उन्हे ऐसे संस्थान के लिए एक आवश्यक पिलर ऑफ सपोर्ट बनाता है जो अपने भविष्य को अधिक सशक्त और संवहनीय बनाना चाहते हैं। बुजुर्ग कर्मचारी भी नए जॉब करना उतना ही पसंद करते हैं।

एजिज्म की समस्या से निबटने के लिए कई तरह के उपाय अपनाने की जरूरत है। इसके लिए सबसे पहले दिमाग से उन सारी भ्रांतियोँ को निकालना होगा जो एक खास आयुवर्ग वाले लोगोँ के विषय में व्याप्त हैं और सभी आयु वर्ग वाले लोगोँ को साथ मिलकर समान रूप से कार्य करने के लिए प्रेरित करना होगा।

श्मल्टी जनरेशनल टीम इस तरह के अवसर तैयार करना जिसमेँ सभी जनरेशन के लोगोँ को साह मिलकर काम करने का अवसर मिले। इससे न सिर्फ उम्र को लेकर व्याप्त भ्रांतियोँ को दूर करना आसान होगा बल्कि हर ग्रुप वाले लोगोँ के मन में एक दूसरे के प्रति सम्मान का भाव भी विकसित होगा।

जब युवा कर्मचारियोँ को पुराने लोगोँ के साथ काम करने का अवसर मिलेगा तो वे यह उन ट्रिक्स और स्किल्स को आसानी से सीख पाएंगे जो सिर्फ अनुभव ही सिखा सकता है। पुराने कर्मचारियोँ को उनके युवा सहकर्मियोँ के लिए दिशानिर्देशक की भूमिका भी दी जा सकती है। इस तरह के कदम युवा कर्मचारियोँ को बुजुर्ग कर्मचारियोँ के प्रति संवेदनशील बनाएंगे और एजिज्म के प्रति उनकी सोच में बदलाव आएगा। श्केवल कपूरए डायरेक्टर एंड क्रिएटिव स्ट्रेटजिस्टए चाय क्रिएटिव एंड रिटर्न ऑफ़ मिलियन स्माइल्स

प्रशिक्षण और विकास सभी संस्थानोँ को अपने कर्मचारियोँ को नए कौशलए नई तकनीक सिखाने और सही ऐटिट्यूड अपनाने की जरूरतए टीम एप्रोच और इंक्लूसिविटी से अवगत कराने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी कराने चाहिए।

अगर आपको ऐसा लगता है कि अधिक उम्र के लोग नई तकनीकोँ को आसानी से नहीं अपना सकते हैंए तो इस समस्या से निबटने का आसान तरीका है नियमित रूप से लर्निंग एंड डेवेलपमेंट कार्यक्रम का संचालन करनाए जिसमेँ सभी कर्मचारियोँ को नए कौशल और तकनीक सीखने का अवसर मिलता रहे।

यह न सिर्फ पुराने कर्मचारियोँ के लिए बल्कि उन सभी कर्मचारियोँ के लिए होना चाहिए जो नई तकनीक के बारे में सीखने के इच्छुक होँ। वास्तविकता यह है कि सिर्फ अधिक उम्र वाले लोग ही टेक्नो फोबिक नहीं होते हैंए बल्कि किसी भी उम्र के लोगोँ को यह समस्या हो सकती है और वे नई तकनीकोँ को अपनाने में डरते होंगे।
Kewal Kapoor,
Director & Creative Strategist,
CHAI Kreative and Return of Million Smiles

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