March 21, 2019
Home Archive by category Art-n-Culture

Art-n-Culture

 प्रतिभाओं की माताओं का हुआ सम्मान, शारीरिक सौष्ठव स्पर्धा में युवाओं ने दिखाई प्रतिभासोनीपत। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जैन ने कहा कि आज नारी शक्ति सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक क्षेत्र में बेहतर प्रतिनिधित्व प्रदान कर रही है। इस समय मे उनपर खुद को वीर माता जीजाबाई के समान अपने नौनिहालों को राष्ट्र भाव से परिपूर्ण बनाने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। शनिवार दोपहर क्रीड़ा भारती व हिन्द हित सेना द्वारा वीर माता जीजाबाई सम्मान समारोह की अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री बीके मीडिया सलाहकार राजीव जैन ने कहा कि आज वातावरण में बदलाव की बयार है। महिलाएं हर क्षेत्र में खुद को साबित कर रही हैं और पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चल रही हैं। उनके अंदर के आत्मस्वाभिमान में सशक्तता लाने के लिए जहां सामाजिक स्तर पर, वहीं राजनीतिक स्तर पर बीते 5 साल में महत्वपूर्ण प्रयास हुए हैं। हम बचपन से वीर माता जीजाबाई की शौर्य गाथा और मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी की परवरिश एवं उनमें राष्ट्र भावना कूट-कूट कर भरने के लिए कहानी सुनकर बड़े हुए हैं। ऐसा ही प्रयास लाखों माताएं करती हैं, जिसे हमें सम्मान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज जिस मंच पर हम 22 अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय खिलाड़ियों की माताओं को सम्मान दे रहे हैं, उन्होंने लगातार खिलाड़ियों की क्षमता में निखार लाने और कड़ी मेहनत के लिए प्रेरणा देने का काम किया है। ऐसी भावना आज प्रत्येक माता के अंदर होनी चाहिए, तभी हम अपने बच्चों को राष्ट्र को गौरान्वित करने वाले कार्य करने के लिए प्रेरित कर सकेंगें।क्रीड़ा भारती द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य वक्ता के तौर पर ओलम्पिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने भी माताओं की मेहनत को सम्मान किया। उन्होंने कहा कि माता घरेलू कार्यो में रत रहें अथवा कामकाजी रहें, अपने बच्चे की क्षमता को परखने में सबसे आगे होती हैं। उनकी भूमिका एक नवजात, एक शिशु, एक बालक, एक युवा को कुम्हार की मिट्टी की भांति सही दिशा में ले जाने में महत्वपूर्ण होती है। इस अवसर पर क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय सहमंत्री रामानन्द, उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री दलपत सिंह, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश प्रभारी उमेश कुमार, हिन्द हित सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रान्त उपाध्यक्ष वाभा श्रवण दुबे, वाभा प्रान्त अध्यक्ष विजय कुमार, सोनीपत क्रीड़ा भारती इकाई उपाध्यक्ष अरुण दहिया, भूपेंद्र धवन, मुकेश कुमार समेत बड़ी संख्या में विशिष्ठ जन मौजूद रहे।

सोनीपत। शहरी स्थानीय निकाय, महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन ने कहा है कि मनुष्य के जीवन पर उसके धर्म के संस्कार प्रभाव छोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य अपने आस-पास के वातावरण से जो संस्कार ग्रहण करता है, उसका असर उसके धार्मिक, सामाजिक आचरण पर प्रभाव डालता है। उन्होंने आह्वान किया कि युवा वर्ग को अपने संस्कार ज्ञान को बढाने के लिए बुजुर्गों के पास समय बिताना चाहिए, तभी धर्म को मजबूती मिलेगी।ओल्ड डीसी रोड स्तिथ वृंदावन गार्डन परिसर में विश्व आनन्द, सेवा चैरिटेबल द्वारा आयोजित श्री भागवत गीता ज्ञान यज्ञ में शिरकत करते हुए मंत्री कविता जैन ने कहा कि हमारे ऋषि मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिए संस्कारों का आविष्कार किया था। धार्मिक ही नहीं अपितु वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में महत्व है। भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस्कारों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्य संस्कार के अनुसार ही क्रियान्वित होते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म को बचाने के लिए पहले संस्कारों को आधार बनाना पडेगा और संस्कार मजबूत करने के लिए हमें अपने युवाओं को बुजुर्गों के पास समय बिताने के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने आयोजन में पहुंचे श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वह अपने बच्चों को बेहतर संस्कार दें, ताकि वह समाज व देश के विकास में अपना योगदान दे सकें। इस मौके पर आयोजकों ने उनका पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया।

New Delhi, 12th March 2019: Namaste Thailand Festival, organized by the Royal Thai Embassy, New Delhi, is coming back with a load of fun-filled activities and workshops from March 15th, 2019, between 3 P.M to 11 P.M at Select City Walk, New Delhi. The cultural fiesta is a one-stop occasion which commemorates the 72 years of Indo-Thai Diplomatic Relations.

The formation of bilateral relations between Thailand and India has witnessed immense growth since 1947. The religious, cultural, mythological and commercial exchanges between the two countries have existed since centuries. To celebrate the diplomatic relations and strengthen the cultural bond, the festival of Thai food, products, music, performances and culture is all set to lay out its cultural mat in the heart of Delhi, India.

The three-day event offers a range of wonderful activities and workshops where one can begin with Mulberry paper mini umbrella, body painting, button badge activities, posing with Thai costumes and a lot more. The festival brings a diverse range of fun-filled stalls which include women’s fashion, paper flowers, accessories, jewelry to home decorations, relaxation aromas and souvenirs to add extra-Thai cultural flavor to the festival.

Visitors can also experience the exquisite Thai cuisines from the renowned NuengRoi by Radisson Blu. Also, there will be three quiz competitions for half an hour about Thailand at 5:30 pm, 7 pm, and 8 pm respectively. Renowned Thai artists like Asia-7 and a Thai Jazz-fusion band will culminate the festival on musical note.

The Thai festival culminates on 17th March, 2019. The entry to the festival is free.

On the occasion of International Mother Language Day, Sahitya Akademi organized a Multilingual Poets’ Meet at Sahitya Akademi, New Delhi. Dr. K. Sreenivasarao, Secretary, Sahitya Akademi welcomed the participants. He said that all languages have their own cultural identities.  He mentioned the Akademi’s efforts in protecting various languages and dialects.

The Inaugural Address was delivered by eminent Hindi poet, Sri Leeladhar Jagoori.  He discussed in detail the role of one’s mother language in one’s life and the dangers and challenges before the languages.  He said that we can’t imagine a language without a script, in the absence of which several languages are in the process of extinction and expressed his concern over the same.  Sri Rahul Dev, eminent journalist, who was the Guest of honour, expressed his concern over extinction of the languages and said that it was high time we identified the nature of this danger; else it would be difficult to get rid of it. It is the challenge before the writers to recognize this danger and address the problem before it is too late. Sri Madhav Kaushik, Vice-President, Sahitya Akademi said that original talent comes out in one’s own language.  We realized the importance of our languages after the globalization of the world.  He concluded saying that the challenge is not only from the English language, but also from those who immensely contribute in its dominance.  In the four sessions chaired by Sri Sheen Kaaf Nizam, Dr. Vanita, Dr. Aziz Hajini and Sri Darshan Darshi respectively, eminent poets like Rajeev Barua (Assamese), Adnan Kafeel Darwesh (Hindi), Lalitha Siddabasavaiah (Kannada), Narendra Debbarma (Kokborok),
Nadim Shoqia (Kashmiri), Mahendra Kadam (Marathi), Jagdeep Sidhu (Punjabi), Devakanta Ramchiary (Bodo), Bibhas Roy Chowdhury (Bengali), Roshal Bral (Dogri), Mohan Himthani (Sindhi), Mamidi Harikrishna (Telugu) Salim Saleem (Urdu), Amit Shankar Saha (English), Joysing Tokbi (Karbi), Nutan Sakhardende (Konkani), K.V. Ramakrishnan (Malayalam), I. Deven Singh (Manipuri), Surya Mishra (Odia) Arvind Tiwari (Sanskrit), Esha Dadawala (Gujarati), Neelmadhav Choudhary (Maithili), Dipok Doley (Mising), Uttam Kumar Chhetri (Nepali), Roshan Bafna (Rajasthani), Damayanti Beshra (Santali) and Ambaadhavan (Tamil) presented their creative works. The programme was well-attended by the literary lovers of Delhi Sri Anupam Tiwari, Editor, Sahitya Akademi proposed a vote of thanks.

जानते हैं न भैया! मन कितना चंचल है। जितना शांत करने की कोशिश करो उतना ही उपद्रव करता है ।किसी को देखकर हम कहते हैं यह अंतर्मुखी है किसी से बात ही नहीं करता तो जो ज़्यादा बोलता है, कचर.पचर करने की कोशिश करता ही रहता है, उसके बारे में हम सोचते हैं यह बाहर्मुखी है क्योंकि वह किसी से भी बतियाता रहता है ।पर मन का मूल स्वभाव तो यह है न भैया ए वह कभी शांत रहता ही नहीं भैया, उसका संवाद ज़ारी रहता है। कभी खुद से, कभी दूसरे से ।
विचारों से भरपूर मन कभी चुप नहीं बैठता अब वो बाहर किसी से बतियाता रहे या ख़ुद से एवो बात अलग है । यही मज़ेदार बात है हमारी, संवाद हमारे मनों में चलता ही रहता है पर कितना सही व गलत हमें कुछ पता ही नहीं होता। जीवन की यही त्रासदी है, हम जो कुछ और जहाँ सोचना होता है , वह नहीं सोच पाते और मन है कि भीतर उत्पात मचाता रहता है ।
क्या यह बेहतर नहीं है कि हम स्वयं से ऐसे संवाद करें जो हमारे व दूसरों के लिए बेहतर जीवन बना सकें
कभी कभी न हम सबको एक दूसरे के विचारों से प्रभावित होकर अपने बारे में सोचने.समझने के लिए विवश हो जाते हैं और कभी.कभी ग़लत निर्णय भी ले बैठते हैं। सो भैया ! बेहतर यही है कि हम खुद से संवाद करें, सोचें, थोड़ा सा दिमाग़ को सही दिशा में ले जाकर गंभीरतापूर्वक अपने भीतर उतरें और अपने निर्णय लें। स्वयं से गंभीर संवाद अपने खुद के लिए ज़रूरी हैं वर्ना मन तो कभी शांत रहता ही नहीं बेशक हम उसे अंतर्मुखी मानें या बाहर्मुखी!
पर्दे में छिपकर रहने पर
क्या कर लेंगे जीवन में
जाएंगे जब जीवन से क्या
तब मुख देखें दर्पण में…
संवादों का राग है जीवन
उत्सव का आभास है जीवन !
तो भैया ! खुश रहें, मन में झाँकें, उससे संवाद करके अपने निर्णय लें और आनंदमय जीवन जीएं।

सस्नेह
डॉ. प्रणव भारती

The Delhi Literature Festival , the seventh edition of three days Festival at the Dilli Haat, INA. The Delhi Literature Festival 2019 was inaugurated by Rashmi Singh IAS, Secretary, NDMC in the presence of Sangeeta Bahadur, Author Kaal Trilogy and Indian Ambassador to Belarus, Dilip Pandey, Author & Member, Sahitya Kala Parishad, Bharati Bhargava, Founder Director of Delhi Literature Festival along with Rama Pandey known TV & Theatre personality.

The Festival started in the afternoon by a live performance of Charag-e-Harf by the Writer’s hub from Lucknow, followed by the session on Your Prime Minister is Dead (Vitasta Publishing) by author Anuj Dhar followed by the next session onPadmavat- An Epic Love Story (Rupa Publications) by Purushottam Agarwal in conversation with Dr.Babli Moitra Saraf.

The evening session was on the popular book Bihar Diaries(Penguin Random House) by Amit Lodha IPS in conversation with Parull Mahaajan Advisor Delhi Literature Festival, followed by A Tribute to late Amrita Pritam- with panel discussion with Lavleen Thadani renowned Film & Theatre Personality, Laxmi Shankar Bajpai, Eminent Poet along with Sumit Mishra, Eminent Poet. The Session was presented by Palka Grover, Advisor Delhi Literature Festival.

The Second day of the Festival started with the Art of Story Telling with Victor Ghose, Indian writer in the historical fiction genre as well as in the paranormal short story genre, most notably the Eric Roy stories: The Job Charnock Riddle in 2016 and the Tomb of God (to be published in 2019) along with live performance on guitar followed by a Session on Hindi literature with acclaimed Hindi writers & poets including Maitreyi Pushpa, Anamika, Alpana Mishra in conversation with Prem Bhardwaj, Editor, Paaki Magazine at Delhi Literature Festival was quite interesting. As they all were discussing the importance of Hindi Literature

The evening session was full of Masala with Jonathan Gil Harris- Author of Masala Shakespeare (Rupa Publications) with Dr. Amna Mirza. Followed by a session on When History Meets Mystery- writing the Indian Historical Crime Fiction; Kaalkoot- The Lost Himalayan Secret (Treesahde Books) by S Venkatesh in conversation with Lipika Bhushan. The next session was on Infinite Variety, A History of Desire in India(Speaking Tree) by Madhavi Menon in conversation with Pallavi Rebbapragada, Author at First Post.

The last session on Day two was “Kama- The Riddle of Desire” (Penguin Randomhouse) by Gurcharan Das in conversation with Rachna Sharma.

The third and concluding day of the Festival started with Sufiana Mushaira curated by Mridula Tandon, Sakshi NGO along with Shayar Azhar Iqbal, Taruna Mishra, TarkashPradip, Irfan Khan Sikandar, Meenakshi, Jijivisha and ZeeshanNiazi. Followed by the next session on Early Indians: The Story of Our Ancestors and Where We Came From (Juggernaut) by Tony Joseph in conversation with Dr.AmnaMirza. The next session was on Lanterns and Fireflies by young first time Author Ritika followed by another session on A book of poems written in Hindi “Mann Tumahre Pass Hai” by Nitin Pramod in conversation with Parull Mahaajan Advisor Delhi Literature Festival. Each poem of this book is different in nature. Nature is an integral part of his poems.

With the General Elections round the corner, in the evening the Festival, witnessed interactive session on topical subjects including the book “The Contenders- Who will lead India Tomorrow”(Simon and Schuster) by Priya Sahgal.

The next Session on Mehr (Rupa Publications) by Sidhharth Gigoo in conversation with Samriddhi Goyal was quite engrossing and intense.

And the Concluding Session of this year’s Festival on Ayodhya: City of Faith, City of Discord (Aleph Book Company) by Valay Singh in conversation with Anup Sharma, Columnist &Storyteller.

The Delhi Literature Festival organisers acknowledged the support of the Delhi Government, Department of Art, Culture & Languages, NDSWA, URJA and the Delhi Book Lovers amongst others.

विश्वप्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय की अंग्रेजी में बहुचर्चित उपन्यास द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस का हिंदी अनुवाद अपार खुशी का घराना एवं उर्दू अनुवाद बेपनाह शादमानी की ममलिकत का लोकार्पण इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुआ। इस उपन्यास का हिंदी में अनुवाद वरिष्ठ कवि और आलोचक मंगलेश डबराल और उर्दू अनुवाद अर्जुमंद आरा द्वारा किया गया, उपन्यास को दोनों भाषाअंो में राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है।
लोकार्पण के बाद लेखिका अरुंधति रॉय एहिंदी अनुवादक मंगलेश डबराल और उर्दू अनुवादक अर्जुमंद आरा से वरिष्ठ लेखक संजीव कुमार एवं आशुतोष कुमार ने बातचीत की।
कार्यक्रम की शुरूआत दास्तानगो दारेन शाहिदी द्वारा पुस्तक से मधुर अंशपाठ कर किया गया।
इस मौके पर लेखिका अरुंधति रॉय ने कहा मेरी यह पुस्तक अब तक देश-विदेश के 49 भाषाओँ में अनुवाद हो चुकी है और अब हिंदी और उर्दू में आते ही मेरे लिए पूरी हो गयी है। आगे उन्होंने कहा द गॉड ऑफ स्माल थिंग्स उपन्यास की सफलता और बुकर पुरस्कार मिलने के बादए मैं चाहती तो द गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स, भाग .2- 3 भी लिख सकती थी, लेकिन मेरे लिए उपन्यास एक पूजा और मेरी दुनिया है, उपन्यास ऐसी विधा है जिसमें आप एक बह्मांड रच सकते हैं, जिसके जरिये आप पाठक को अपने साथ.साथ चलने के लिये आमंत्रित करते हैं। यह कहीं अधिक जटिल प्रक्रिया है। लेकिन मेरे लिये यह संतुष्टि देने वाली है। मैं उपन्यास लिखती हूँ तो मुझे लगता है कि मैं अपने कौशल का इस्तेमाल कर रही हूँ। इसमें मुझे अधिक संतोष और सुख मिलता है।
अरुंधति ने कहा, द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस उपन्यास को लिखने में बहुत समय लगाए इसे लिखना मेरे लिए एक पहेली को सुलझाने जैसे था।
बातचीत के दौरान सवालों का जवाब देते हुए लेखिका ने कहा यह एक धोखेबाज नोवल है, इसके धोखे को समझने के लिए आपको इसे कई बार पढ़ना पड़ सकता है।
कवि और आलोचक मंगलेश डबराल ने अनुवाद के समय के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस उपन्यास के शीर्षक के लिए काफी कश्मकश थी। मिनिस्ट्री शब्द के अनुवाद के लिये महकमाए मंत्रालय, सलतनत आदि शब्दों के बाद घराना अरुंधति को पसंद आया। अनुवाद के दौरान आई कठिनाईयों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा अंग्रेजी उपन्यास में अरुंधति ने कई नए शब्दों का उपयोग किया है जिनका हिंदी शब्द मिलना बहुत मुश्किल था।
उर्दू अनुवादक, अर्जुमंद आरा ने अनुवाद के समय के अपने अनुभवों के बारे में बताते हुए कहा इस उपन्यास को अरुंधति द्वारा जिस तरह लिखा गया है और जिस तरह के शब्दों का चुनाव उपन्यास में किये गए थे उनको ज्यों का त्यों, खासकर उर्दू में अनुवाद करना काफी कठिन था। मैंने, उर्दू में लिखते वक्त अपनी तरफ से पूरी वफादारी दिखाई है ताकि उपन्यास के किरदारों के भाव वेसे ही आयें जैसे मूल भाषा में हैं। आगे उन्होंने कहा पुरानी दिल्ली और कश्मीर वाले हिस्से को अनुवाद करने में ज्यादा मुश्किल नही आयी।
राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने कहा यह अपार हर्ष का मौका है कि इस महत्वपूर्ण पुस्तक का देश की दो प्रमुख भाषाओं. हिंदी और उर्दू में एक साथ प्रकाशन हुआ है। यह राजकमल प्रकाशन के लिए भी एक एतिहासिक क्षण है कि बेपनाह शादमानी की ममलिकत राजकमल की उर्दू की पहली प्रकाशित पुस्तक है।


किताब के बारे में
अपार ख़ुशी का घराना
अपार ख़ुशी का घराना हमें कई वर्षों की यात्रा पर ले जाता है। यह एक ऐसी कहानी है जो वर्षों पुरानी दिल्ली की तंग बस्तियों से खुलती हुई फलते.फूलते नए महानगर और उससे दूर कश्मीर की वादियों और मध्य भारत के जंगलों तक जा पहुँचती है, जहां युद्ध ही शान्ति है और शान्ति ही युद्ध है। और जहां बीच.बीच में हालात सामान्य होने का एलान होता रहता है। अंजुम, जो पहले आफ़ताब थी, शहर के एक क़ब्रिस्तान में अपना तार.तार कालीन बिछाती है और उसे अपना घर कहती है। एक आधी रात को फुटपाथ पर कूड़े के हिंडोले में अचानक एक बच्ची प्रकट होती है। रहस्मय एसण्तिलोत्तमा उससे प्रेम करनेवाले तीन पुरुषों के जीवन में जितनी उपस्थित है उतनी ही अनुपस्थित रहती है। अपार ख़ुशी का घराना एक साथ दुखती हुई प्रेम.कथा और असंदिग्ध प्रतिरोध की अभिव्यक्ति है। उसे फुसफुसाहटों मेंए चीखों में, आँसुओं के जरिये और कभी.कभी हँसी.मजाक के साथ कहा गया है। उसके नायक वे लोग हैं जिन्हें उस दुनिया ने तोड़ डाला है जिसमें वे रहते हैं और फिर प्रेम और उम्मीद के बल पर बचे हुए रहते हैं। इसी वजह से वे जितने इस्पाती हैं उतने ही भंगुर भी, और वे कभी आत्म.समर्पण नहीं करते। यह सम्मोहक, शानदार किताब नए अंदाज में फिर से बताती है कि एक उपन्यास क्या कर सकता है और क्या हो सकता है। अरुंधति रॉय की कहानी.कला का करिश्मा इसके हर पन्ने पर दर्ज है।
लेखिका अरुंधति रॉय के बारे में
अरुंधति रॉय ष्मामूली चीजों का देवता की लेखक हैं जिसे 1997 में मैन बुकर पुरस्कार प्राप्त हुआ और उसका अनुवाद बयालीस से ज़्यादा भाषाओं में हो चुका है। उसके अलावा रॉय की अनेक कथेतर पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, जिनमें प्रमुख हैं ,न्याय का गणित, आहत देश, भूमकाल: कॉमरेडों के साथ, कठघरे में लोकतंत्र। आप दिल्ली में रहती हैं।

20वें भारत रंग महोत्सव में युवा फोरम ने आज निम्नलिखित दो नाटक (प्‍ले) प्रस्तुत किए:

रुकावट के लिए खेद है: दी थिएटर सोसायटी, दौलत राम कॉलेज द्वारा प्रस्‍तुत यह नाटक, सड़कों की बिगड़ती स्थिति, नियमों के अप्रभावी प्रवर्तन और हर दिन इसे देखने के बाद इसे नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाता है। नाटक सड़कों पर और उसके प्रति लोगों के दृष्टिकोण के बारे में बात करता है और जब एक कदम आगे बढ़ता है तो धैर्य कैसे जवाब देता है।

अल्लाह-हू-अकबर: ट्रायाम्बकम का एक नाटक, दी थिएटर सोसायटी, राजधानी कॉलेज, समकालीन समय में हमारे देश द्वारा सामना किए गए आतंकवाद के मुद्दे को दिखाता है। यह नाटक लोगों को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न दकियानूसी बातों पर सवाल खड़ा करता है, खासकर युवाओं को, जो कि गलत कामों में लिप्‍त है। यह एक मजबूत कहानी के साथ एक मधुर कहानी भी है जो समाज को उस असुरक्षा के बारे में जागरूक करने के लिए है जिसमें वे रह रहे हैं और कैसे देशवासी शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम उठा सकते हैं, उसे भी दिखाया गया है।

बीमर ज़िन्दगी: जज़्बा थिएटर ग्रुप, रामानुजन कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्‍तुत एक नाटक, यह नाटक दिखाता है कि कैसे वर्तमान में लोग जल्‍दबाजी में खुशी का पीछा करते हैं और बहुत तेजी से हो रहे बदलावों को लेकर किस तरह से आसानी से समझौता कर लेते हैं। हमें महसूस नहीं होता है कि हमारे अधिकांश विकल्प जिसमें तुरंत घटित होने वाली घटनायें हैं, हमारे जीवन में हम किस तरह से बिना प्रतिरोध किये आसानी से बुरी आदतों को अपना लेते हैं और उनका ही अनुसरण करते हैं, जबकि इससे हमारा शरीर निरंतर कमजोर और बीमार होता चला जाता है, इसके परिणामस्‍वरूप हमारे जीवन का अंत यानी मृत्‍यु हो जाती है।

माहौल या परिवेश के अनुकूल हो रहा अभिनय भारत रंग महोत्सव की एक विशेषता है और यह थिएटर के महोत्‍सव में विभिन्‍न रंगों को जोड़ता है। इन प्रदर्शनों में विभिन्‍न राज्यों के कम-ज्ञात (जो लोकप्रिय नहीं है) स्थानीय, पारंपरिक और लोक कलाओं का वर्णन होता है जो इसे राष्‍ट्रीय राजधानी से जोड़ता है। नाटक के शुरू होने से पहले इन नाटकों का प्रदर्शन एनएसडी परिसर के ऑडिटोरियम में होता है। आज के सशक्त प्रदर्शनों में कालबेलिया बिल्‍लू भट्ट, भवाई पुष्‍पांजलि, कलबेलिया, चूलिया नृत्‍य भोवन और पार्टी और भवाई का प्रदर्शन हुआ।

कबेलिया राजस्थान का एक नृत्य रूप है, जो इसी नाम की जनजाति द्वारा पेश किया जाता है। यह नृत्य उनकी संस्कृति का एक अनिवार्य हिस्सा है और पुरुषों और महिलाओं द्वारा इसे पेश किया जाता है।

चूलिया उत्तराखंड का पारंपरिक लोक नृत्य है। यह नृत्य बहादुरी और उत्साह का प्रतीक है। यह मुख्य रूप से कुमाऊं क्षेत्र में मनाया जाता है।

डायरेक्‍टर्स मीट

निर्देशक श्री आशीष चट्टोपाध्याय (बोल), श्री अरविंद सिंह (कथा एक कंस की), श्री उर्मिल कुमार थपलियाल (हरिशचन्‍नर की लड़ाई) और श्री गौरी रामनारायण (मैथमैजिशियन) ने आज इस सत्र में भाग लिया। प्रख्यात थिएटर क्रिटिक्स श्री शिवकेश मिश्रा और डॉ. असगर वजाहत, महासचिव, फ़ॉर क्रिएटिविटी एंड कम्युनिकेशन, ने भी सत्र में भाग लिया।

अपने नाटक ‘बोल’ के बारे में बात करते हुए, निर्देशक श्री आशीष चट्टोपाध्याय कहते हैं, ”मेरी टीम मूल रूप से कोलकाता से है। पिछले 38 वर्षों से, मैं थिएटर से जुड़ा व्यक्ति रहा हूं और यह टीम मेरे परिवार को भी पसंद करती है। हमने विभिन्न स्थानों पर थिएटर नाटकों का प्रदर्शन शुरू किया है। चूंकि मैं साहित्य के प्रति झुकाव रखता हूं, मैं हमेशा अनसुनी कहानियों के चयन की कोशिश करता हूं जो शायद ही आम आदमी तक पहुंचती है।”

रंगमंच के बारे में बात करते हुए, श्री उर्मिल कुमार थपलियाल कहते हैं, ”थिएटर की समकालीन प्रासंगिकता तब है जब इसे स्थानीय स्तर पर प्रदर्शित और समझा जाता है। व्‍यावसायीकरण के कारण ‘नौटंकी’ धीरे-धीरे अपनी पकड़ खोती जा रही है। आधुनिक रंगमंच के साथ, मुझे उम्मीद है कि आज की पीढ़ी अपने प्रमुख और मूल मूल्यों को बरकरार रखते हुए, मुख्य रूप से थिएटर का नेतृत्व करेगी।”

अपने नाटक मैथमैजिशियन के बारे में बात करते हुए, श्री गौरी रामनारायण कहते हैं, ”इस नाटक पर काम करना कहानी और प्रसंग के भीतर हमेशा एक त्‍याग जैसी यात्रा रही है। इस नाटक को पूरा करने में हमें 5 से 6 महीने लगे। नाटक में हिंसा, पूंजीवादी और फासीवाद से संबंधित संभावनाओं को दिखाता है जिसे मैं अपने आसपास महसूस करता हूं।”

”कथा एक कंस की” कहानी ‘कंस’ के बारे में बताती है कि कैसे वह सत्ता में रहने से वह अधिक भयभीत हो जाता है। ‘कंस’ एक दयालु राजा था, जो भयभीत और असुरक्षित महसूस कर रहा था।” श्री अरविंद सिंह, निदेशक ने ये कहा।

नाटक

सुंदर मज घर (झड़ी पट्टी): अनिरुद्ध बंकर द्वारा निर्देशित, ‘सुंदर मजार घर’ में कन्या भ्रूण हत्या और एक समाज के खिलाफ संघर्ष को दर्शाया गया है, जहां अब भी एक महिला को एक बोझ माना जाता है। (ओपेन लॉन, 6:00 बजे शाम)

एक धोतरची गोश्त: मिलिंद इनामदार का मराठी नाटक, यह तमाशा की शैली में है, जो महाराष्ट्र का एक लोक रूप है। तमाशा खिलाड़ियों का एक छोटा समूह दोहरे अर्थ वाले संवादों के साथ ‘गावलान’ को प्रस्तुत कर रहा है। अभिमानी संघटन ने कृष्ण को हरी धोती पहनने पर आपत्ति जताई और अभिनेताओं के साथ अशिष्ट व्यवहार किया और उनसे कहा कि वे उनकी अनुमति के बिना इस तमाशा को न करें। (श्री राम सेंटर, 4:00 बजे शाम)

वी टीच लाइफ… सर! प्रशांत उदयवर का यह कन्‍नड़ नाटक बिना युद्ध के प्रयोग के पेश किया जाने वाला नाटक है। “फिलिस्तीन”, “ईरान-इराक”, “भारत-पाकिस्तान” की युद्ध की कथाओं का वर्णन यहां किया गया है। नाटकीय रूप से तैयार की गई कहानियां और कविताएं उनके प्रदर्शन का आधार हैं। यह केवल एक मौखिक नाटक नहीं है, बल्कि दृश्यों और शारीरिक गतिविधियों द्वारा संरचित है। (एलटीजी, 5:30 बजे शाम)

जेम्स्टा (रीवेंज या बदला) हेनरीक तलार द्वारा प्रस्‍तुत पोलिश नाटक एक चरित्र जेनिक रैप्‍सीविज पर आधारित है, जो रेबेका मिल्‍जेक  के साथ एक ही महल में रहता है, जिससे वह नफरत करता है और पैसे के लिए विधवा पॉडस्टोलिना से शादी करना चाहता है। हालांकि, पॉडस्टोलिना एक अमीर पति की तलाश में है। रेजेंट मिल्‍जेक अपने बेटे वाक्‍लाव को चाहते हैं और पॉडस्टोलिना को बाहर करना चाहते हैं। लेकिन वाक्लाव क्‍लारा के प्यार में है, जो एक स्नातक और जेल्निक की भतीजी है, जिसने अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद उसकी देखभाल की। यहां भावनात्‍मक स्थिति अधिक से अधिक जटिल हो रही है, क्योंकि एक ही समय में क्‍लारा के प्‍यार को पापकिन कबूल करता है। (कमानी, 7:00 बजे शाम)

अंधा युग: जॉय मैसनम द्वारा निर्देशित, हिंदी नाटक धर्मवीर भारती द्वारा लिखित एक कविता-नाटक है। यह महाभारत युद्ध के अंतिम दिन की पृष्ठभूमि को दर्शाता है। बदला लेने के एक अंतिम कार्य के लिए तरसते हुए अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र छोड़ता है, जो दुनिया को नष्ट करने की कोशिश के लिए है। नाटक के केंद्र में भगवान कृष्ण हैं। यह सुनिश्चित करने में उनकी विफलता के बावजूद, पूरे नाटक में उनकी उपस्थिति है, जो हमें बताती है कि हर परिस्थिति में नैतिक और न्यायसंगत समय इंसानों के लिए हमेशा उपलब्ध है। (अभिमान, 8:30 बजे रात)

कल होने वाले नाटक:

•     बयान (लेखिका: महाश्वेता देवी; निर्देशक: उषा गांगुली; समूह: एनएसडी रिपोर्टरी कंपनी, दिल्ली; भाषा: हिंदी; अवधि: 1 घंटा 35 मिनट)

•     औरत! औरल! औरल! (लेखक: इस्मत चुगताई, निर्देशक: नसीरुद्दीन शाह; समूह: मोटले, मुंबई; भाषा; हिंदुस्तानी; अवधि: 2 घंटे)

•     आहल अमादी एपक (लेखक: अर्नेस्‍ट हेमिंग्वे; निर्देशक: ओएसिस सौगजम; समूह: दी अम्‍बीलिक थिएटर, इम्फाल; भाषा: मणिपुरी; अवधि: 1 घंटा 10 मिनट)

•     पांचाली लास्या रंगा (लेखक: एच एस वेंकटेश मूर्ति; निर्देशक: बी जयश्री: सम्‍सक्रुती, बैंगलोर; भाषा: कन्नड़; अवधि: 1 घंटा 30

डायरेक्‍टर्स मीट

(स्‍थान: योगा हॉल; समय: 11 बजे से दोपहर 1 बजे)

इस सत्र में भाग लेने वाले निर्देशकों के नाम

  1. सुंदर मज घर (झंडी पट्टी)– निर्देशक: अनिरुद्ध बांकर एक धोतार्ची गोश्‍त: निर्देशक: मिलिंद इनामदार
  2. वी टीच लाइफ….सर: निर्देशक: प्रशांत उदयवर
  3. जेम्‍स्‍टा (बदला): निदेशक: हेनरिक टेलर
  4. अंधा युग: निर्देशक: जॉय मैसनम

कितनी संज्ञाएं जीवन भर हमने ओढ़ी और बिछाईं

रिश्तों के पर नोंचे खोंचे और बहुत की हाथापाई

पलकों पर बैठे सौदागर से सपने यूं सेज सजाकर

और भरम तोड़ा सबने ही आपाधापी से भरमाकर

मन के बैल तोड़ ज़ंजीरें भागे पर न मिली रिहाई

कितनी संज्ञाएं…….

रिश्तों के ……….

आंगन में मनवा के बैठे रिश्ते शतरंजी चालों से

शोर मचाया है जीवन भर बेढंगे बेसुध ख्यालों से

इस मनवा से उस मनवा तक ईर्ष्या के फैलाए जाले

सतरंगी सपनों को तोड़ा एस्नेहएप्रेम को कौन संभाले

फिर भी द्वेष टूट न पाया ओढ़े रहता नरम रजाई

कितनी संज्ञाएं……

रिश्तों के ……….

सत्य न जाने कहाँ खो गया घ् मनवा क्यों बीमार हो गया

तंद्रा टूटी बेचैनी की जीवन भी दुश्वार हो गया

बिछी हुई क्यों मन.आँगन में दुर्गंधों की मैली चादर

चटक गए संबंधों की दीवारें गिरती रहतीं भरभर

सन्नाटों से झोली भर ली, रिश्तों की खो गई कमाई

कितनी संज्ञाएं…..

रिश्तों के …….।।

डॉ प्रणव भारती

20th Bharat Rang Mahotsav (BRM), the largest theatre
festival in Asia, organized by the National School of Drama (NSD), is all set to bring its
bouquet of plays, interactive sessions, and other cultural events to cheer up the
winter afternoons of theatre enthusiasts in the city.
The international theatre festival will commence in New Delhi on 1st February, 2019
and culminate on 21st February, 2019 bringing a diverse range of productions
comprising 111 shows and allied events such as ‘Director’s Meet’, ‘Living Legend’, and
‘Master Class’.
Page 1 of 4
The inaugural ceremony will be held at Kamani auditorium on 1st February, 2019 at
6:00 PM followed by the performance of ‘Karanth ke Rang’, directed by Amod Bhatt.
The 50-minute long performance is a medley of songs composed by late Shri B V
Karanth, a stalwart of Kannada and Hindi theatres. Shri Karanth was a prolific
composer of songs and scripts for theatre and directed and acted in many
productions.
The festival, which enters its 20th edition this year, is celebrating the 150th birth
anniversary of Mahatma Gandhi – 4 of the plays to be staged on the life, philosophy,
and principles of the ‘Father of the Nation’. The festival will host 69 Indian and 15
foreign plays across India, selected after screening. Additionally, 9 folk productions, 5
plays by NSD diploma students, 1 production from the Sikkim center of NSD, 3 plays by
the NSD Repertory as well as 5 invitee plays by eminent theatre practitioners will
captivate the theatregoers across India.
The national capital will host 89 plays: 25 plays in Hindi, 16 in Bengali, 5 in Kannada,
2 in Marathi, 2 in Odia, 2 in Gujarati, 2 in Manipuri, 3 in English, 2 in Assamese, 2 in
Malayalam and 1 each in Maithili, Telugu, Nepali, and Sanskrit, in addition to 15
foreign plays, the festival also brings 8 folk performances to theatre aficionados in
the city.
The 21-day long festival this year will include plays in Hindi, English, and other
regional languages. International productions from countries such as Bangladesh,
Poland, Russia, Sri Lanka, the Czech Republic, Italy, Nepal, Romania, and Singapore as
well as non-verbal, folk, and multi-lingual performances will enthrall the audience
during the theatrical spectacle.
The performances in New Delhi will be held at Bahumukh and Chahumukh (7:30 PM),
Open Lawn (6:00 PM), and Abhimanch (8:30 PM) at the NSD’s Bahawalpur House
campus as well as nearby Sri Ram Centre (4:00 PM), LTG (5:30 PM), and Kamani (7:00
PM) auditoriums.
Apart from the spellbinding performances and interaction with thespians and eminent
personalities from the world of theatre, the festival in Delhi will also have 2
international and 2 national seminars on theatre. The national seminars to be held in
New Delhi will attend to the topic ‘Is Modern Theatre Inclusive?’ and will hold sessions
dedicated to ‘Notion of State and Representation’, ‘Unrepresented Form’, and ‘NonGovernmental Curating and Funding Policy’.
Besides, the NSD campus will be abuzz with street plays, ambience shows, and
‘Theatre Bazar’, a motley of stalls offering a range of products and culinary delights.
The youth forum shows will comprise performances by dramatic societies of nearly 50
colleges in Delhi while ambience performances will bring folk dance and other
traditional performing art forms.
Page 2 of 4
In keeping with its concerted efforts to promote theatre among people and take
select performances to other parts of the country, the NSD arranges parallel festivals
in Dibrugarh (4th to 10th February, 2019), Varanasi (7th to 13th February, 2019), Ranchi
(9th to 15th February, 2019), Mysore (11th to 17th February, 2019), and Rajkot (13th to
19th February, 2019).
“The art of theatre is the oldest and the strongest medium that conveys human
emotions in a manner that defies temporal boundaries. We are delighted to usher in
the Bharat Rang Mahotsav to its 20th year and have made all efforts to bring a
selection of quality plays, choosing the best out of 960 submissions. There are 9 folk
performances being presented in Delhi as well as invitee plays and productions in
regional languages. We have tried to accommodate as many young theatre enthusiasts
as we can, since the institution aim to foster the growth of young talents through the
platform of BRM,” says Shri Suresh Sharma, Director In-charge, National School of
Drama (NSD).
“Theatre is a celebrated art form across the world and I am happy that this festival
gives us a chance to witness many of the plays which have received critical acclaim
globally. BRM aims at bringing together people and hence, we have spread the festival
across the country so that theatre reaches more and more people. BRM has been a
very successful festival attracting a lot of audience, including first-timers and we
hope a similar run this year too,” says Dr. Arjun Deo Charan, Acting Chairman, NSD
Society.