March 3, 2021
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Art Magnum and Art Podium are presenting “Timeless Treasures” an impressive online art exhibition in Singapore Art Week starting from (22nd January-30th January 2021) the artworks will showcase by prominent pioneers of modern art movements in India. The exhibition will display the vibrant aesthetics and artistic capabilities that emerged in the country as it transitioned from British colonial rule to becoming an independent modern nation. As India grappled with its new status of an sovereign nation, these artist started a movement to develop their own language – a powerful combination of the indigenous history and the rich cultural heritage of India. As the name suggests the artwork on display are truly timeless and appeal to all sections of the art fraternity.

The works on display is an eclectic mix of different artistic mediums expressions. The show has brought together over 40 artworks sourced from its own collection, from private collectors across the world and from the artists. They include paintings, drawings, etchings and sculptures by modern masters such as Jamini Roy, M F Husain, J Swaminathan, F N Souza, Akbar Padamsee, Jogen Chowdhury, Sakti Burman, B Prabha and many others. The works have either been published or have been authenticated by experts and are of known provenance.

Timeless Treasures is supported by the Indian High Commission in Singapore. We are honoured and grateful to have His Excellency Mr Kumaran Periasamy as our special guest who will make the opening address.   

A one day preview will be held on Thursday, January 21st, where all artworks will be available at an exceptional value. Those interested can register to receive the event link here

Part of Singapore Art Week (SAW) 2021, Timeless Treasures will be hosted on that will run from Jan 22-30, 2021. Join in as ‘Art Takes Over’ the streets and the digital realm during the 9th edition of SAW 2021 – the Singapore’s visual arts calendar’s pinnacle event. 

On the occasion, Saurabh Singhvi Director Art Magnum said Art Magnum is collaborating with Art Podium to present a unique exhibition during the Singapore Art Week (SAW) called “Timeless Treasures”. The exhibition showcases works of Modern and contemporary Indian Masters and presents a great opportunity to collectors and art enthusiasm all over the world to own one of the masterpieces. It truly represents the vibrant art scene in India and is an ode to some of the great artist we have had over the years

 About the Gallery – Art Magnum

Art Magnum’s current director, Saurabh Singhvi, is taking his legacy forward and has been working for the welfare and promotion of Indian art all over the world. It has worked tirelessly to further the cause of Indian artists striving for excellence. Art Magnum was established to pay homage to established artist as they have worked meticulously to put Indian art on the global scene and at the same time promote young and upcoming talented artist to nurture the future of Indian art. Art Magnum has prided itself to present different medium of artistic expression ranging from the traditional to the modern to the contemporary to the experimental.

Art Magnum was founded with a vision to provide Indian art a platform to showcase its true ability and to support upcoming artist and craftsmen.. Since its inception in 1986, SSPPL has been working in the field of art and crafts. It’s founder Late Shri Prakash Chand Singhvi was a visionary figure who always wanted to further the cause of Indian arts and crafts.

For more information on the show and to avail yourself with attractive early-bird discounts, please write to  

Art-n-Culture Recipies

Kumaoni Dubke is one of the authentic dishes of Kumaon, Uttarakhand. Made with locally grown Organic Lentils like gram, green gram, gahat and Bhatt, this is an extremely flavour full and nourishing dish. This one’s a true labour of love. Slow cooked lentils in earthen pots, imparts a distinct smoky flavours and keeps the nutrition locked in.


  • Whole Moong Dal 1 Cup
  • Chana Dal 1/2 cup 
  • 4 tbsp ghee.
  • 2tbsp crushed garlic. 
  • 2tsp cumin seeds (zeera)
  • Whole red dry chillies. 2-3.
  •  1tsp turmeric powder 
  • 2 tsp Coriander powder 
  • 1tsp garam masala powder
  • Heeng – a pinch 
  • 4-5 cups water

Soak the dals overnight. 

In the morning wash well removing the green peels that separate from the dal.

Grind the soaked washed Dal’s to a fine paste adding enough water.  Set aside.

 In a Lange heavy bottom pot (earthenware) heat ghee.  Put in cumin seeds, garlic, whole red chillies, heeng and fry well.  Put in the dal paste, 4-5 cups of water, salt, turmeric, coriander powder and garam masala. Keep stirring till one boil comes. lower the flame and let it simmer for further 40-45 mins.

Once done temper with ghee and red chilli powder (optional) 

Serve with rice topped with a dollop of ghee.


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Insta – @the_food.lab


#अभय हो। अपने #अस्तित्व के कारक तत्व को समझो, उस पर विश्वास करो।#भारत की चेतना उसकी #संस्कृति है।अभय होकर इस संस्कृति का प्रचार करो।#संविधान_दिवस#constitutionday


राजभाषा निदेशक आर. रमेश आर्य एवं प्रख्यात साहित्यकार सुरेश ऋतुपर्ण थे सम्मानित अतिथि
भाषा अस्मिता की संवाहक होती है – सुरेश ऋतुपर्ण भारतीय संस्कृति का समन्वय-सूत्र है हिंदी – आर. रमेश आर्य

नई दिल्ली। 18 सितंबर 2020; राजभाषा हिंदी सप्ताह के समापन के अवसर पर आज साहित्य अकादेमी मंे समापन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें प्रख्यात साहित्यकार सुरेश ऋतुपर्ण मुख्य अतिथि के रूप में तथा आर. रमेश आर्य, राजभाषा निदेशक, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थिति थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में साहित्य अकादेमी के सचिव एवं अध्यक्ष राजभाषा कार्यान्वयन समिति के. श्रीनिवासराव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि साहित्य अकादेमी राजभाषा विभाग द्वारा निर्देशित सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सदैव तत्पर रहती है। उन्होंने अकादेमी के उपस्थित कर्मचारियों से अनुरोध किया कि वे भी राजभाषा विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को पाने के लिए सहयोग करें। 

समापन समारोह में अकादेमी की राजभाषा पत्रिका आलोक के नए अंक का लोकार्पण किया गया। राजभाषा हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित अनुवाद प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, यूनिकोड टंकण प्रतियोगिता एवं श्रुत लेखन प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के अंत में अपना वक्तव्य देते हुए आर. रमेश आर्य ने कहा कि हिंदी सामाजिक संस्कृति को विकसित करने वाली भाषा है और हमें अपनी मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा के साथ ही राष्ट्रभाषा हिंदी को भी भारतीय संस्कृति के समन्वय सूत्र के रूप में सम्मान देना चाहिए और उसका अपने दैनिक कार्यों में अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। सुरेश ऋतुपर्ण ने भाषा को अस्मिता से जोड़ते हुए कहा कि भाषा हमारे राष्ट्र का गौरव ही नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर की भी संवाहक होती है। उन्होंने माॅरीशस, फीजी, जापान, ट्रिनिनाड एवं टुबेको के अपने प्रवास की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि भाषा अपने साथ संस्कृति भी ले जाती है और वहाँ के परिवेश में हमारी जडं़े जमाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने रोजमर्रा के जीवन में मातृभाषाओं के कम होते प्रयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह हम अपनी भाषा ही नहीं बल्कि विराट संस्कृति की भी उपेक्षा कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।राजभाषा सप्ताह के दौरान पिछले 17 सितंबर 2020 को गीतकार एवं ग़ज़लकार हरेराम समीप, विज्ञान व्रत, कमलेश भट्ट कमल एवं बी.एल. गौड़ ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की थीं। राजभाषा सप्ताह का शुभारंभ प्रख्यात लेखिका मृदुला गर्ग ने 14 सितंबर 2020 को विधिवत् उद्घाटन करके किया था।


जीवन को संगीत और संगीत को जीवन मानने वाले पंडित जसराज एक कार्यक्रम के सिलसिले में इंदौर आए हैं। उन्होंने अपने बारे में खुलकर बात की।उन्होंने बताया कि “कृष्णजी को गाता हूं मैं। उनकी भक्ति ही सारा संगीत है मेरा। बिरले ही सही लेकिन जब गाता हूं तो कभी वह क्षण भी आता है जब कृष्ण दर्शन देते हैं। मुझे उनका अलौकिक रूप नज़र आता है।

यह सिर्फ तब होता है जब एक सुर सधा हुआ लग जाए, अच्छा लग जाए… ऐसा हो तो ही मिलती है वह छवि। प्रभु दिखें ऐसे सुर कब लगते हैं जानते हो! जब मैं और आनंद एक हो जाते हैं। जब किसी भी दायरे से परे हो जाता है गाना। वही तो आनंद है और जब तब आनंद तब तक राग, नहीं तो बैराग। लोग कहते हैं संगीत जीवन देता है, मेरा कहना है कि संगीत तो खुद ही जीवित शय है… और जो जीवित है वह बदलता रहेगा…उसमें छिपे भाव बदलते रहेंगे।

जो बदल न सके वो तो मृत है। आज भी जब गाने बैठता हूं तो मन में उठने वाले भाव नए होते हैं…ताज़ा होते हैं।

शुरुआती दौर में मैं 20 घंटे रियाज़

अक्सर यह बात सामने आती है कि संगीत बदल रहा है। असल में लोग शास्त्रीय संगीत समझते नहीं हैं। जो शास्त्रीय संगीत सीखते हैं वे ही उसे बेहतर समझ पाते हैं। संगीत के सच्चे साधक को रियाज़ के अलावा कुछ और नहीं सोचना चाहिए। मेरा रियाज़ तो चाहकर भी नहीं छूट सकता। शुरुआती दौर में मैं 20 घंटे रियाज़ किया करता था। आज दो-ढाई घंटे ही गाता हूं। इतनी ही देर सिखाता भी हूं…अंतर भी तो आ गया है समय में…पहले लोग 20-20 किलोमीटर दौड़ लिया करते थे। अब दो किमी भी दौड़ नहीं सकते।

क्रिकेट में मेरी रुचि है

संगीत से इतर मैं कुछ सोच नहीं सकता लेकिन क्रिकेट में मेरी रुचि है। 1986 से ही क्रिकेट का शौक है। उस समय रेडियो पर अक्सर लंदन से क्रिकेट कॉमेंट्री आती थी। सिग्नल साफ हो ना हो…आवाज़ आ रही हो या नहीं, लेकिन पूरे समय रेडियाे कान से लगाकर कॉमेंट्री सुनता था। भारत की टीम में सचिन और कुंबले यदि होते तो किसी में दम नहीं था कि 10-15 सालों तक हमें कोई हरा सकता था। क्रिकेट का ये शौक आज भी बरकरार है मेरा।

अपमान ने मोड़ा गाने की ओर

पंडित जसराज ने कहा कि संगीत की राह पर मेरी शुरुआत तबले से हुई थी। 14 बरस की उम्र में अपमानित करने वाली एक घटना ने मुझे गायकी की ओर मोड़ दिया। इंदौर का होलकर घराना काफी प्रसिद्ध रहा है। उस्ताद अमीर खां, पंडित कुमार गंधर्व, लता मंगेशकर, किशोर कुमार सहित इतनी हस्तियां यहां से हैं। कई बार लगता है कि कहां मैं हरियाणा में पैदा हो गया। ईश्वर इंदौर में ही जन्म दे देता तो इन सभी की सोहबत मिलती।


मशहूर शास्‍त्रीय गायक पंडित जसराज का 90 साल की उम्र में अमेरिका के न्यू जर्सी में निधन हो गया है. पंडितजी शास्‍त्रीय संगीत के मेवाती घराने से ताल्‍लुक रखते थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पंडित जसराज के निधन पर शोक जताया है. जनवरी में अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले पंडित जसराज ने आखिरी प्रस्तुति नौ अप्रैल 2020 को हनुमान जयंती पर फेसबुक लाइव के जरिये वाराणसी के संकटमोचन हनुमान मंदिर के ल‍िए दी थी. 

पंडित जसराज के निधन की खबर देते हुए उनकी बेटी दुर्गा जसराज ने बताया कि बड़े दुख के साथ हमें यह सूचित करना पड़ रहा है कि संगीत मार्तंड पंडित जसराज ने अमेरिका के न्यू जर्सी में सुबह 5:15 बजे कार्डिएक अरेस्ट होने के चलते अंतिम सांस लीं. पंडित जसराज के निधन से संगीत जगत को बहुत बड़ी क्षति पहुंची है.

पीएम मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया साईट ट्विटर पर इस बारे में एक ट्वीट भी किया है. उन्होंने लिखा, “पंडित जसराज का निधन भारत के शास्त्रीय संगीत जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है. उन्होंने देश-दुनिया में बहुत से संगीतकारों को बढ़ावा दिया है, उनके परिवार के लिए मेरी संवेदनाएं.”उनके परिवार में उनकी पत्‍नी मधु जसराज, पुत्र सारंग देव और पुत्री दुर्गा जसराज हैं. खयाल गायकी और ठुमरी में पंडित जसराज को महारत हासिल थी.

पद्मभूषण सहित संगीत के क्षेत्र के कई सम्‍मान से उन्‍हें नवाजा गया था. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पंडित जसराज के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मशहूर संगीतज्ञ पंडित जसराज के निधन से मैं दुखी हूं.” पंडित जसराज के निधन पर लोक संगीत गायिका मालिनी अवस्थी ने दुख प्रकट करते हुए ट्विटर पर लिखा कि मूर्धन्य गायक, मेवाती घराने के गौरव पद्मविभूषण पंडित जसराज जी नही रहे. यह संगीत जगत की अपूरणीय क्षति है.

पंडित जसराज अपने जीवन काल में पद्म विभूषण, पद्म श्री संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, मारवाड़ संगीत रत्न पुरस्कार आदि कई सम्मान से नवाजे गए. पंडित जसराज का जन्म 28 जनवरी 1930 को एक शास्त्रीय संगीत परिवार में हुआ. उनके परिवार की 4 पीढ़ियों ने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत को एक से बढ़कर एक शिल्पी दिया है. उनके पिताजी पंडित मोतीराम जी स्वयं मेवाती घराने के एक विशिष्ट संगीतज्ञ थे. 


मैं मर जाऊँ तो मेरी इक अलग पहचान लिख देना,
लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना..!

“‘सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिटटी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’ यह बेमिसाल शेर कहने वाले उर्दू के सुप्रसिद्ध शायर राहत इंदौरी का मंगलवार शाम 5:00 बजे निधन हो गया। राहत इंदौरी ने बीत दिन ही अपने कोरोना पॉजिटिव होने की खबर सोशल मीडिया के माध्यम से दी थी और लोगों से उनके अच्छे स्वास्थ्य की दुआ करने के लिए कहा था। लेकिन वह अपने सारे चाहने वालों का दिल तोड़ कर दुनिया को अलविदा कह गए। इंदौरी साहब रात साढ़े नौ बजे छोटी खजरानी (इंदौर) कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिए गए । कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उनको दफनाया गया।राहत इंदौरी ने मंगलवार सुबह ही ट्विटर पर अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी दी थी. मंगलवार को इसी एकाउंट से उनकी मृत्यु की सूचना दी गई.
राहत इंदौरी के मरणोपरांत उनके ट्विटर अकाउंट से ये ट्वीट किया गया.

इस ट्वीट में लिखा है – “राहत साहब का Cardiac Arrest की वजह से आज शाम 05:00 बजे इंतेक़ाल हो गया है….. उनकी मग़फ़िरत के लिए दुआ कीजिये।
उनके निधन पर राजनीति, फिल्म, साहित्य जगत की हस्तियों गहरा दुख प्रकट किया है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीटर पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “अपनी शायरी से लाखों-करोड़ों दिलों पर राज करने वाले मशहूर शायर, हरदिल अज़ीज़ श्री राहत इंदौरी का निधन मध्यप्रदेश और देश के लिए अपूरणीय क्षति है. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति दें और उनके परिजनों और चाहने वालों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दें.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहत इंदौरी के निधन पर ट्वीट करके लिखा, दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके चाहने वालों के साथ हैं.

इसी साल उनके द्वारा एक मुशायरे में पढ़ी गयी अपनी नज़्म ‘बुलाती है मगर जाने का नहीं’ भी टिक टोक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर खासी वायरल हुई थी. आइए एक नजर डालते हैं राहत इंदौरी के उन फेमस शेर पर जिन्हें लोगों ने कई बार दोहराया।

-दो गज सही ये मेरी मिलकियत तो है
ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।

इबादतों की हिफाजत भी उनके जिम्मे हैं,
जो मस्जिदों में सफारी पहन के आते हैं।

-अफवाह थी की मेरी तबियत खराब है
लोगों ने पूछ-पूछ के बीमार कर दिया।

-अब कहां ढूढने जाओगे हमारे कातिल
आप तो तत्ल का इल्जाम हमीं पर रख दो।

Mahipal Singh chauhan