May 27, 2019
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Art-n-Culture

Based on Sandeep Unnithan provoking study of events, Contiloe Pictures plans to develop the book into a premium digital series

Everyone around the world remembers the 26/11 Mumbai attacks vividly. The three days of turmoil remain etched forever in Mumbai’s history. Announcing the acquisition of “Black Tornado: The Three Sieges of Mumbai 26/11”, a bestselling book by Sandeep Unnithan, detailing this multi-pronged terrorist attack, that plunged the city in chaos. Contiloe Pictures, a leading content powerhouse, furthermore revealed its plans to adapt the book into a premium digital series.

The show will be a multi episode digital drama series that will explore the various facets of the attacks which spread terror across India’s financial capital, and how Indians – from ordinary civilians to highly-trained commandos – responded.

“Black Tornado encapsulates key details of the three nights and the operation around the multiple sieges. While our nation saw the graphic imagery of terror on TV, they know little about the counter-insurgency by our commandos and the human interest stories behind these images. We are looking forward to working with Sandeep, the author of the book, closely to bring authenticity to the audience”, said Abhimanyu Singh, Founder and CEO, Contiloe Pictures.

“Excited that Contiloe Pictures is adapting ‘Black Tornado’ for its premium digital series. The Mumbai 26/11 attacks and the lessons from them must never be forgotten.” added Sandeep Unnithan

Inspired by the code name given by the National Security Guard to the operation, Black Tornado: The Three Sieges of Mumbai 26/11, recounts this shocking event through the craftfully penned book. Unprecedented in scale, 26/11 brought all three wings of the Indian Armed Forces together to fight the city-wide siege by 10 terrorists, who sailed into Mumbai armed with grenades, guns and bombs. Sandeep Unnithan gives us a ringside view of the attacks as well as the measures taken to contain them.

Now all set to be adapted into a gripping thriller, the series is being produced by Contiloe Pictures. The casting of the show is currently underway and is expected to be launched later this year.

Mumbai : Bollyood Actress Raveena Tandon release the Author Swati Lodha’s book “Who is Revathi Roy?” in Mumbai on Friday evening. Photo Girish Srivastav/11.05.2019

प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय की नई किताब एक था डॉक्टर एक था संत का लोकार्पण कॉन्स्टिट्यूशन क्लबए रफ़ी मार्ग एनई दिल्ली में हुआ। इस मौके पर वक्ताओं में पत्रकार उर्मिलेश उर्मिल, दिलीप मंडल, दिल्ली सरकार में मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम, दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर अनीता भारती, राजनेता मनीषा बांगर, सुनील सरदार, अनिल यादव जयहिंद मौजूद थे और कार्यक्रम का संचालन रतन लाल ने किया। एक था डॉक्टर एक था संत उपन्यास अंग्रेजी एवं हिंदी दोनों भाषाओँ में प्रकाशित किया गया है राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद अनिल यादव जयहिंद और दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल ने किया है।
इस पुस्तक में भारत में जातिगत पक्षपात, पूंजीवाद, पक्षपात के प्रति आंख मूंद लेने की आदत, आम्बेडकर की बात को गांधीवादी बुद्धिजीवियों द्वारा खंडन और संघ परिवार का हिंदू राष्ट्र तक लिखा है। भारत में असमानता को समझने और उससे निपटने के लिएए अरुंधति रॉय ज़ोर दे कर कहती हैं कि हमें राजनीतिक विकास और गांधी का प्रभाव, दोनों का ही परीक्षण करना होगा। सोचना होगा कि क्यों डॉ भीम राव आम्बेडकर द्वारा गांधी की लगभग दैवीय छवि को दी गई प्रबुद्ध चुनौती को भारत के कुलीन वर्ग द्वारा दबा दिया गया।
अरुंधति रॉय के विश्लेषण में, हम देखते हैं कि न्याय के लिए आंबेडकर की लड़ाई, जाति को सुदृढ़ करनेवाली नीतियों के पक्ष में, व्यवस्थित रूप से दरकिनार कर दी गई, जिसका परिणाम है वर्तमान भारतीय राष्ट्र जो आज ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र है, विश्वस्तर पर शक्तिशाली है, लेकिन आज भी जो जाति व्यवस्था में आकंठ डूबा है।
लोकार्पण मौके पर उपस्थित लेखिका अरुंधति रॉय ने कहा इस पुस्तक का विषय काफी सवेंदनशील है यह आम्बेडकर पर एक विस्तार विश्लेषण हैं, इस पुस्तक में आंबेडकर और गाँधी की तुलना नही की गयी है यह एक कहानी है कि कैसे एक वर्ग के व्यक्ति को समाजिक और राजनातिक तौर पर नजरअंदाज किया गया।
अरुंधति ने कहा इस पुस्तक में गाँधी और आम्बेडकर के संवादों को ज्यों का त्यों रखा गया है
पुस्तक के सह. अनुवादक रतन लाल इतिहास ने आम्बेडकर के साथ बर्बरता पूर्ण व्यवहार किया गया, इतिहास ने आम्बेडकर के लेखों को दुनिया के नजऱों से छिपा दिया मगर फिर भी आम्बेडकर के मानने वालों ने उन्हें अपने दिलों में जिन्दा रखा।

अनुवादक अनिल यादव जयहिंद ने अपने इस पुस्तक पर अनुभव साझा करते हुए कहा हमारे देश को एक सामाजिक क्रांति की जरूरत है और ह क्रांति पढऩे से आती है, अरुंधती की यह पुस्तक इस देश में क्रांति ला सकती है, जब अंग्रेजी में इस पुस्तक को पढ़ा तो झकझोर दिया था अनुवाद करते वक्त को प्रयास रहा कि सरल शब्दों का प्रयोग किया जाय अरुंधति के पुस्तकों का अनुवाद करना कठिन है क्योकि इनके एक शब्द के कई अर्थ होते हैं हमने पूरी कोशिश की है कि लेखनी में हमारी अपनी भावनाएं ना झलके।


समाजिक कार्यकर्ता एवं राजनीति में सक्रिय मनीषा बांगर ने अपने वक्ततव्य में कहा इस उपन्यास का हिंदी संस्करण उत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर भारत में आम्बेडकर को बहुत ही कम पढ़ा जाता है, क्योंकि यहां गांधीवादीओं का बोलबाला है यह इस देश का दुर्भाग्य है कि जो व्यक्ति उत्पादनों के राष्ट्रीयकरण की बात करता था उसकों को महत्ता नही देता और जो लोग ब्राह्मणवाद और जातिवाद को तरजीय देने वाले थे वो आज देश के लिए सर्वोच्च हैं आम्बेडकर को समझना है तो गांधी और गांधीवाद को ख़त्म करना होगा गाँधी द्वारा ही जातिवाद और ब्रामणवाद विदेशों में फैलाया गया था।
वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश उर्मिल ने पुस्तक पर बोलते हुए कहा लेखिका किस तरह के सामाजिक विषयों और प्रथाओं पर लिखती है वह अनुकरणीय है, इस पुस्तक से हिंदी पाठक प्रेरित होंगे आंबेडकर को हिंदी क्षेत्र में स्थापित करने का अगर श्रेय किसी को जाता है वह कांशीराम को जाता है, कांशीराम ने उन्हें उत्तर भारत में स्थापित किया था।
दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर अनीता भारती ने किताब के सम्बन्ध में अपने विचार मुखर स्वर में व्यक्त किये उन्होंने कहा गाँधी जी के अफ्रीका मूवमेंट को इस पुस्तक में बखूबी दर्शाया गया है गांधी जी के अफ्रीका के अश्वेतों के प्रति घृणा और अफ्रीका के लोगों के साथ मिलकर अश्वेतों के प्रति कैसे साजिश रची थी यह इस पुस्तक में है भारत में सवर्णों की दलितों के प्रति घृणा के पोषक गाँधी ही थे आम्बेडकर महिलाओं के हिमायती थे वहीं गाँधी महिलाओं को एक वस्तु के रूप में देखते थे।
दिल्ली सरकार में सामाजिक न्याय विभाग के राजेन्द्र पाल गौतम इस पुस्तक के माध्यम से लेखिका ने आम्बेडकर ज्ञान का समावेश कर दिया है।

Wake Up, Life is Calling

What if your mind is your greatest enemy? What if you were living your worst nightmare? How would you cope?

Ankita has fought a mental disorder, been through hell, and survived two suicide attempts. Now in Bombay, surrounded by her loving and supportive parents, everything seems idyllic. She is not on medication.

She is in a college she loves, studying her dream subject: Creative Writing. She has made friends with the bubbly Parul and the glamourous Janki.

At last leading a ‘normal life’, she immerses herself in every bit of it—the classes, her friends, her course and all the carefree fun of college.

Underneath the surface, however, there is trouble brewing. A book she discovers in her college library draws her in, consumes her and sends her into a terrifying darkness that twists and tears her apart. To make matters worse, a past boyfriend resurfaces, throwing her into further turmoil.

Armed with only a pen and a journal, she desperately fights with every ounce of strength she has. But can she escape her thoughts? Will Ankita survive the ordeal a second time around? What does life have in store for her?

Preeti Shenoy‘s compelling sequel to the iconic bestseller ‘Life is What You Make it’ chronicles the resilience of the human mind and the immense power of positive thinking. The gripping narrative demonstrates with gentle wisdom how by changing our thoughts we can change our life itself.

Link to the book: http://tinyurl.com/PreetiShenoy

author
Preeti Shenoy, among the top five highest
selling authors in India, is also on the Forbes longlist of the most
influential celebrities in India.

She has been awarded the ‘Indian of the Year’ award for 2017 by Brands Academy for her contribution to Literature. She has received the ‘Academia
award for Business Excellence by the New Delhi Institute of Management. She has given talks in many premier educational institutions such as IITs and IIMs and corporate organisations like KPMG, ISRO, Infosys and
Accenture and many others. She is also an artist specialising in portraiture and illustrated journalling. Her short stories and poetry have been published in various magazines such as Conde Nast and Verve. She has been featured on BBC World, Cosmopolitan, The Hindu, Verve, Times of India and all other major media. She has a very popular blog and
also wrote a weekly column in The Financial Chronicle for many years.
Her other interests are travel, photography and yoga. Her books include
Wake Up Life is Calling, Life is What You Make it, The Rule Breakers, A
Hundred Little Flames, It’s All In The Planets, Why We Love The Way We
Do, The Secret Wish List, The One You Cannot Have and many others. Her
work has been translated to many languags.

चर्चित लेखिका अल्पना मिश्रा के उपन्यास अस्थि फूल पर परिचर्चा का आयोजन हिंदी भवन में किया गया। इस परिचर्चा में वक्ताओं में निर्मला जैन ए ममता कालिया, अनामिका, अभय कुमार दुबे ए अवधेस प्रीत, संजीव कुमार एवं प्रेम भरद्वाज मौजूद थे एवं संचालन आकांशा पारे द्वारा किया गया।
राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित अस्थि फूल उपन्यास आंदोलन और विस्थापन के बहुपरतीय सवालों से जूझता, झारखंड आंदोलन और वहाँ की औरतों के बाजार में बेचे जाने की दारुण कथा है। अल्पना मिश्र का यह दूसरा उपन्यास एक ऐसा समाजिक.राजनीतिक उपन्यास है जो पहली बार किसी स्त्री कथाकार की कलम के द्वारा काफी सशक्त ढंग से लिखा गया हैं।
उपन्यास के लिखने की प्रक्रिया पर अपने अनुभव साँझा करते हुए कहा अल्पना मिश्र ने कहा, इस उपन्यास को लिखने के बाद मैंने महसूस किया कि लेखक के बोलने का सबसे अच्छा तरीका उसका लेखन होता है। झारखंडी की जिन लड़कियों की कहानी पर यह उपन्यास आधारित हैए उनकी दिक्कतों को देखकर मैंने निश्चय किया कि मैं उनकी कहानी जरूर कहूँगी। इसके लिये चाहे जितनी भी यातनाएं और कठिनाईयां सहनी पड़ें।
आलोचक संजीव कुमार ने कहा कि इस उपन्यास को लिखने के लिये लेखिका के साहस को सलाम करना चाहिए। उन्होंने कहा इसे पढ़ते हुए यह पता लगता है कि यह ना जाने कौन सी संस्कृति है इस देश की जो औरतों को इतना रोंधती है।
लेखक एवं संपादक अभय कुमार दुबे ने उपन्यास की उपयोगिता पर बात करते हुए कहा कि इसमें ४ तरह के समय और ३ तरह की यथार्थ को दर्शाए गया है। इन सारे समय को स्पष्ट करना और इसे कलात्मक तरीके से लिखना इस उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता है।
झारखंड आंदोलन की बुनियाद और आदिवासी समाज के सपने के टुटने की दास्तान पर आधारित यह उपन्यास, साहित्य में अपनी एक विशेष पहचान बनाता है। इस विषय पर संपादक प्रेम भारद्वाज, लेखक एवं पत्रकार अवधीस प्रीत और प्रसिद्ध साहित्यकार ममता कालिया ने भी अपने विचार पाठकों एवं श्रोताओं से साझा किए। कार्यक्रम के अंत में अपने अध्यक्षीय वक्तव्य को रखते हुए वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर निर्माला जैन ने कहा, इस उपन्यास को लिखना अपने आप में एक चुनौती है इस पढ़ते हुए पता लगता है कि लेखिका ने इस उपन्यास पर कितनी मेहनत की है।

बता के रहूंगा, जी… प्रभु और देवी.देवताओं का फर्क. समाज में इस फर्क को जाने बिना विसंगतियां पैदा न करें।
प्रभु यानी परमपिता परमात्मा अर्थात स्वयं भगवान इस विश्व रंगमंच का क्रिएटर, डायरेक्टर और मुख्य एक्टर है। चाहें उसे अल्लाह कहो, जीसस कहो, वाहेगुरु कहो या परवरदिगार। उसे प्यार से किसी भी नाम से पुकारो सबका मालिक एक है। उसे किसी ने गॉड.ऑफ़.लाइट, नूर.ए.इलाही, एक ओंकार, सतनाम, निराकार आदि नामों से भी पुकारा।
प्रभु यानी सर्वशक्तिमान परमपिता परमात्मा, ज्ञान, प्रेम, पवित्रता, सुख, शांति, आनंद और शक्ति का सागर है। वह संपूर्ण विश्व की आत्माओं का बाप है। जो जन्म.मरण के चक्कर से परे है। वह सृष्टि चक्र ;सतयुग, त्रेता, द्धापर, कलियुग में अपने समय पर केवल कलियुग के अंत में सृष्टि को पतित से पावन बनाने के लिए आते हैं। कलियुग की जो आत्माएं समझ लेती हैं और अपने विकारों ;काम, क्रोध, लोभ, मोह, और अहंकार का नाश करती हैं केवल वही आत्माएं सतयुग में स्वर्ग स्थापित कर देवी.देवता बनती हैं। उनके द्धापर युग में मंदिर बनते हैं।
इस धरा पर प्रभु भी अपना पार्ट अपनी मनमर्जी से निभाने हेतु स्वतंत्र नहीं हैं, वह भी समय के साथ बंधे हुए हैं। जी, यह जानना बहुत आवश्यक है कि इस धरा पर प्रभु का पार्ट अलग है और देवी.देवताओं का एकदम अलग। प्रभु अपना अधिकार किसी को नहीं दे सकते इसलिए किसी भी देवी.देवता का प्रभु के सामान अधिकार हो ही नहीं सकता। प्रभु कभी मंदिरों में नहीं रहते। वहां तो सिर्फ देवी.देवता रहते हैं। इस धरा पर लोग देवी.देवताओं को ही प्रभु समझ बैठते हैं। उन्हें भगवान ;सबका मालिक एक और देवी.देवताओं में फर्क का पता ही नहीं होता।
जीए प्रभु और देवी.देवताओं के फर्क को जाने बिना ही समाज में विसंगतियां मिटाने वाले ही विसंगतियां पैदा कर रहे हैं। बहुत बुरा लगता है। ;यह सूचना केवल जनहित में जारी की गई। बुरा मानने वाले, नकारात्मक लोग तथा औरों को अपने से श्रेष्ठ न समझने वाले अन्यथा न लें, धन्यवाद।
डॉ. आलोक सक्सेना
नई दिल्ली

Art Spice and Art Magnum showcased an amazing art show with the entire eminent Indian artist at TheMetropolitan Hotel and Spa. This exhibition includes a wide collection of art pieces of all the Indian senior masters. Both Art Magnum and Art Spice share the same vision and objectives to promote Indian art and culture.

Art Spice gallery at The Metropolitan Hotel & Spa aims to foster meaningful contemporary art and traditional Indian art forms. This exhibition will provide an opportunity to art enthusiasts and critics to connect with works of renowned Indian Artists.

The show was inaugurated by Dr. Sandeep Marwah, Chancellor, AAFT University of Media & Arts.

The show is continued till 10th April, 2019 from 11 am – 08 pm daily at Art Spice Gallery, The Metropolitan Hotel & Spa, Bangla Sahib Road, New Delhi- 110001.
Eclectic strokes is curated by Praveen Upadhye, an eminent artist, keeping in mind the signature style of each artist. The exhibition shall display works of S H Raza, M F Husain, Ram Kumar, F N Souza, T Vaikuntam, K G Subramanyan, Ram KinkerBaij, Jamini Roy, Suhas Roy, Arup Das, Jatin Das, Jogen Choudhury, Manu parekh, Paresh Maity, Neeraj Goswami, Sanath Kar, Jatin Das, Manish Pushkale, Gogi Saroj, Jai Zharotia, Yashwant Sirwadkar, Sanjay Bhattacharya, Sridhar Iyer amongst others.

Over finest wines and hors d’oeuvres, the incandescent event at the capital was attended by celebrated guests like Artist Jatin Das, Artist Vilas Kulkarni, Artist Shridhar Iyer, Artist O.P Sharma, Artist Manish Pushkale, Artist Klera, NeelamPratap Rudy, Radhika Manocha, Dr. Gunita Singh, Anamika Chhabra, Monisha Gupta, Vipul Gupta, Designer Tara Bhuyan name a few.

Babita Gupta Art Spice” It was a pleasure to associate with Art Magnum and invite all the senior artist to showcase their art work. Eclectic Strokes is a platform for like-minded people to meet and explore art not just from a typical “art history” or “art interpretation” aspect, but from a more relatable perspective. These meet-ups will also give people an opportunity to meet experts and art critics who will add perspectives and insights to these sessions.”

Saurabh Singhvi Art Magnum” Eclectic strokes is a platform for all art admirers to come under one roof and get an opportunity to see the art work of nationally recognized artists. It also provides an unique opportunity to young collectors to pick up works of Indian masters and seniors at affordable prices. Art Magnum will be delighted to collaborate with Art spice and present such a fabulous show.”

रोहिणी, नई दिल्ली

टेक्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज का पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग दिल्ली के विद्यार्थियों को अपने हुनर से सबको अवगत कराने और एक स्टार्ट अप देने का एक बेहतरीन सुअवसर वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम “सरस – 2019” लेकर आया है. उक्त वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम “सरस – 2019” का कल 28 मार्च 2019 को सुबह 9 बजे से टेक्निया ऑडिटोरियम में आयोजित है. वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम “सरस – 2019”  पूरी तरह से दिल्ली के सभी कॉलेज के छात्र और छात्राओं के लिए ओपन है. आयोजित विभिन्न सात सांस्कृतिक और टैलेंट हंट कार्यक्रमों के अंतर्गत विभिन्न 15 कार्यक्रमों में से एक या सभी कार्यक्रम में अपना प्रतिभाग सुनिश्चित कर अपने हुनर को दिखा सकते हैं. वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम “सरस – 2019” के माध्यम से संचार एवं अभिव्यक्ति से जुड़े सोलो डांस, फूटलूज (ग्रुप डांस), रंगोली, मोनो एक्टिंग, फ़ाईन आर्ट्स, म्यूजिक, वर्ड प्ले, फैशन परेड, और जस्ट ए मिनट (हिंदी/अंग्रेजी) जैसे कुल 15कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. टेक्निया ऑडिटोरियम में आयोजित मोनों एक्टिंग में आसिफ कमर, सोलो सिंगिंग में सिद्धार्थ, फूटलूज में रिद्धिमा सेठी, फैशन परेड में दिव्यांश कम्बोज, फेस ऑफ़ सरस में कैलाश चंद्र और सना चंद्र जजेज के रूप में उपस्थित रहेंगे. 

भैया ! आप सबको रंग-बिरंगी राम राम ।इस वातावरण में खुद से बात करने का, खुद से संवाद करने का सुख ही कुछ अलग है। क्यों। क्योंकि वातावरण रंग-बिरंगा और मौसम टेसू में घुलकर एक मीठी बयार बयार के साथ पुकार रहा है सबको। पुकारता है कि भैया ! आओ और बीते गमगीन पलों को भुलाकर मन को रंग दो मुहब्बत से, भुला दो गए वर्ष के गिले शिकवों को ।
सुबह-सुबह ,जबकि अभी पूरी तरह सूर्य देवता का आगमन भी नहीं हुआ था। हाँ ,उनके पहुंचने की सूचना आसमान की फ़िज़ाओं में बहकने लगी थी। हल्की लालिमा से भरा आसमानी मंज़र गवाही दे रहा था कि बस अब केवल कुछ पलों में ही सूर्य देवता अपनी ऊर्जा का प्रसाद इस ऊंघते हुए संसार में बाँटने के लिए पधारने ही वाले हैं। इसी समय स्कूल जाने वाले बच्चों की टोली निकली। सारे बच्चे साइकिलों पर शोर मचाते हुए अपने घरों से निकल स्कूल की ओर भागे जा रहे थे। उन्हें समय पर अपने स्कूल में पहुंचना था। पूरी टोली साइकिलों पर जल्दी जल्दी पैडल मारते हुए निकल गई केवल एक बच्चा रह गया जो कुछ कमज़ोर सा भी था और शायद उसकी तबियत भी कुछ ठीक नहीं थी।अचानक उसकी साइकिल डगमगाई, शायद कोई ईंट उसके रास्ते में आ गई थी। बच्चा बहुत बुरी तरह गिर पड़ा , उसका बैग दूर जा गिरा, जूता निकल गया और लगभग दस.ग्यारह वर्ष का वह बच्चा सड़क पर गिरकर ज़ोर.ज़ोर से रोने लगा। उसके दोनों घुटनों में से बुरी तरह खून निकल रहा था।
अब तक सूर्यदेव की रश्मियों ने वातावरण को आलोकित कर दिया था, सड़क पर भी आवाजाही शुरू हो गई थी। वहीं पर से एक स्वामी जी कार में जा रहे थे जिन्हें कहीं उपदेश देना था। उन्होंने ड्राइवर को पल भर के लिए रुकने के लिए कहा तो सही किंतु देरी होने की सोचकर वे रुके नहीं और अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए। बच्चा बेचारा पीड़ा में थाएवह रो रहा था। अचानक बच्चे को दो हाथों ने संभाला और बड़ी कोमलता से सड़क से सटे मार्ग पर बनी हुई बैंच पर बैठाकर उसकी चोट देखीं। रोते हुए बच्चे को अपनी पानी की बोतल से पानी पिलाया, उसके आँसू पोंछकर, उसके घर का रास्ता पूछा। बच्चे की हालत ऐसी नहीं थी कि वह स्कूल जा सकता। अजनबी ने बच्चे का स्कूल बैग उसकी साइकिल के आगे लटका दिया और बच्चे को कैरियर पर बिठाकर बहुत संभालते हुए उसके बताए हुए रास्ते पर चलकर बच्चे के घर पहुंचा।
बच्चे को काफ़ी खून निकल रहा था, उसके माता.पिता परेशान हो रहे थे। बच्चा डेटॉल की बॉटल देखते ही चीखने लगा था। अजनबी ने उनसे थोड़ा सा सरसों का तेल मांगा। माँ को वह बहुत साधारण से कपड़े पहने अजनबी कुछ अच्छा नहीं लग रहा था पर पिता के कहने पर बच्चे की माँ ने सरसों के तेल की बॉटल और रूई दे दी।
यूं तो सरसों का तेल लगवाने से भी बच्चा परहेज़ कर रहा था पर न जाने कैसे उसने अजनबी के हाथ से उसने अपनी चोट पर तेल लगवा लिया। खून मिनटों में बंद हो गया और चिरमिराहट भी थोड़ी देर में कम होने लगी, बच्चा चुप हो गया था।अजनबी नमस्कार करके अब जाने लगा था। अब बच्चे के पिता ने उसके बारे में पूछा । पता चला कि अजनबी बी.ए पास है लेकिन कोई काम न मिलने पर वह अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिहाड़ी पर मज़दूरी करता है। शहर के एक नुक्कड़ पर मज़दूर इक्क_े होते हैं , वहीं से जिन लोगों को ज़रूरत होती है, मज़दूरों को लोग ले जाते हैं।
आज उसे काफ़ी देर हो गई थी और काम मिलने की संभावना अब न के बराबर थी।
बच्चे के पिता ने उसे कुछ पैसे देने की कोशिश की पर उसने पैसे लेने से इंकार कर दिया और वापिस जाने लगा। बच्चे के पिता ने उसे अपना विजिटिंग कार्ड दिया और अपने ऑफिस आने के लिए कहा। यह अजनबी का भाग्य ही था कि ऑफिस में एक जगह खाली थी। अजनबी का नाम विनोद था, उसे पहले वहाँ पीयून और बाद में उसकी योग्यता देखते हुए उसे क्लर्क का पद मिल गया।
भैया! हम समय की धार के बारे में कुछ नहीं जानते, हम नहीं जानते कि हमारे भाग्य में क्या लिखा है।बस, इतना जानते हैं कि खुद से संवाद करके जो सही लगे एवह निर्णय लेना ही सही रास्ता है। एक तरफ़ वह उपदेशक जो सारी सुविधा होते हुए भी रुक नहीं पाया, दूसरी तरफ वह आम आदमी ! सोचें, संवाद करें खुद से एकौन अधिक इंसानियत के करीब है।
जीने को तो सभी जीते हैं यहाँ लोग
इंसान बनके जीएं तो कुछ बात बनेगी।

 डॉ.प्रणव भारती