December 10, 2019
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Art-n-Culture

लालकिला ग्राउंड स्थित 15 अगस्त पार्क में विश्व प्रसिद्ध लवकुश रामलीला कमिटी द्वारा आयोजित किए जा रहे रामलीला के सातवें दिन शनिवार को लीला मंचन की शुरुआत लंका दहन के बाद वापस श्रीराम के पास वापसी, उनसे मुलाकात, रावण द्वारा विभीषण को घर से निकालना, राम के शरण में विभीषण का आना, श्रीराम द्वारा समुद्र पूजा एवं सेतु निर्माण, लंका में अंगद का प्रवेश एवं रावण से संवाद, राम को अंगद की ओर से सूचना प्राप्त होना, रणभूमि में मेघनाद का प्रवेश, लक्ष्मण के मूर्छित होने के बाद राम का लिप, हनुमान को संजीवनी बूटी लाने के लिए भेजना, वहां पर हनुमान की कालनेमी से मुलाकात, संजीवनी बूटी लेकर हनुमान का लौटने जैसे प्रसंगों का मनोहारी और भव्य मंचन किया गया।

लीला के अलग-अलग किरदारों में रावण (अवतार गिल), अमित घनश्याम (नारद), गगन मलिक (रामचंद्र), मोहित (लक्ष्मण), मनीष चतुर्वेदी (शिव), अलका तिवारी (पार्वती), अंजना सिंह (सीता) आदि ने अपने-अपने किरदारों में अभिनय के इंद्रधनुषी रंग भरकर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।

लालकिला ग्राउंड स्थित 15 अगस्त पार्क में विश्व प्रसिद्ध लवकुश रामलीला कमिटी द्वारा आयोजित किए जा रहे रामलीला के पांचवे दिन बृहस्पतिवार को लीला मंचन की शुरुआत गणेश वंदना एवं महालक्ष्मी अभिनय से हुई। इसके बाद लीला का मंचन शुरू हुआ, जिसके प्रथम चरण में रावण-मारीच के बीच संवाद देखने को मिला। दोनों के बीच उत्तेजना से भरे संवाद को सुन दर्शकों की भुजाएं भी फड़कनें लगी, लेकिन उसके बाद जैसे ही पंचवटी से रावण द्वारा सीता जी के हरण का प्रसंग आया, दर्शकों की आंखें स्वतः भीग गईं।
सीता जी के हरण के बाद लंका की ओर प्रस्थान करने के दौरान रावण का मुकाबला जटायु से होता है, जिसमें रावण के हाथों जटायु बुरी तरह घायल हो जाता है। उसे श्रीराम के आगमन का इंतजार रहता है, ताकि वह रावध द्वारा सीता का हरएा कर ले जाने की सूचना दे सके। इसी बीच श्रीराम का आगमन होता है, जो सीता के वियोग में व्याकुल हैं। जटायु उन्हें रावण द्वारा सीता हरण की सूचना देता है और उसी के साथ श्रीराम के चरणों में अपने प्राण त्याग देता है।

लीला के अलग-अलग किरदारों में रावण (अवतार गिल), अमित घनश्याम (नारद), विजेंद्र गुप्ता (अत्री ऋषि), गगन मलिक (रामचंद्र), मोहित (लक्ष्मण), मनीष चतुर्वेदी (शिव), अलका तिवारी (पार्वती), मनोज नरेंद्र दत्त (दशरथ), अंजना सिंह (सीता) आदि ने अपने-अपने किरदारों में अभिनय के इंद्रधनुषी रंग भरकर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।

September 19,New Delhi:  Korean Cultural Centre in association with the National Gugak Centre, South Korea organized ‘Samulnori Workshop 2019’ at its Centre in Lajpat Nagar and JBM Global School New Delhi. This workshop provided a great opportunity for all the interested students to learn more about the traditional culture of Korea through music. This 12 days’ workshop was till 27th September.

Samulnori is a genre of percussion music from Korea. Samulnori’s music is based on the traditional rhythms of Korea. Samulnori consists of four instruments, Kkwaenggwari, Jing, Janggu and Buk.

There were two levels in the workshop. Beginners level for those who had no prior knowledge of Samulnori and advanced level for those with some experience.

Teacher Ms. Park Eun HA who is Ph.D. in Korean Music and Dance says –“I am here for the 4th time for giving training of Korean traditional music to Indian students. Coming to India is like coming to my hometown. Indian students have a very good learning power, they adapt the learning very quickly, they have sharp brains.

She adds that Indian student’s eyes are very expressive, full of curiosity for learning. Learning and playing music gives them happiness; their eagerness makes me more energetic to impact training. I also encourage a little bit of dancing for making them cool down or exercise. Whenever I am in India I feel so energetic, happy and have positive vibes. I visited other countries as well to teach and perform but at India I got a chance to transfer my knowledge to young generation who absorbs it very quickly in comparison to older people. The best part here is that every age group learns. I feel Indian students have a pure heart. The results of giving training to Indian students are so effective and efficient.

Mansi, Student of Korean Cultural Centre, participating in this workshop said that “I am learning Korean culture and music from past 2 years but today also I have the same energy and enthusiasm in learning Korean traditional music in this workshop as it is so interesting and loud. And I like loud music a lot. Basically, I like the Rhythms of the Samulnori Music.

Whereas another student Aakash from advanced level says “I really enjoy learning Samulnori as it very interesting playing Samulnori’s instruments and it a Unique music. And the only thing which makes me sad that this workshop happens once in a year only I feel like it should be more times in a year. “