July 11, 2020
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Manisha Rawat who is essaying the role of Maa Saraswati in the show Jag Jaanani Maa Vaishno Devi – Kahani Mata Rani Ki’ decided to explore her painting skills during this lockdown. Turns out this immensely talented actor is an amazing artist too. She believes in trying times like this adding colour to your life might just brighten up your day.

When spoken to the multi-talented actor about her painting skills she said, “Painting has been my hobby ever since I was a kid. But now, due to hectic shoot schedules I don’t really get the time to paint regularly. I used to paint only during special occasions to present a gift to my close and loved ones in order to make them feel special with a gift that has a personal touch to it. Although on a brighter side, this lockdown has helped relive my childhood days and I have revisited my love for painting.”

Manisha further added, “Painting makes me feel calm and brings in a lot of positivity in me. It helps me be in a different world. I would suggest everyone to do something that they always wanted to do and couldn’t because of time constraints. This is a real good opportunity to explore your rusty childhood skills and hobbies and work on it; not only will that you remain positive during this phase, it will also make you happy.”

Covid- 19 has brought out the talents of many artists and hopefully Manisha Rawat gives more surprises to us and explores her inner talent and shares it with her fans

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नई दिल्ली: हिंदी साहित्य प्रकाशन जगत के दिग्गज नाम वाणी प्रकाशन ग्रुप 57 वर्षों से विभिन्न विधाओं में बेहतरीन हिन्दी साहित्य का प्रकाशन कर रहा है। समकालीन हिंदी साहित्य के चर्चित साहित्यकार निर्मल वर्मा, उदय प्रकाश, उषाकिरण खान, अरुण कमल, यतीन्द्र मिश्रा, अनामिका, प्रभा खेतान आदि लेखकों के रचनाओं के बाद वाणी प्रकाशन साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित जानी मानी कथाकार अलका सरावगी का नया उपन्यास ‘कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिये’ जल्द ही प्रकाशित करने जा रहा है। लेखिका अलका सरावगी हिंदी के गणमान्य उपन्यासकारों में मानी जाती हैं। उन्हें अपने पहले ही उपन्यास ‘कलिकथा वाया बाई पास’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

‘कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिये’ उपन्यास स्वंतंत्रता से पहले बांग्लादेश से रातों रात भारत आये हुए प्रवासी परिवार के एक अनोखे शख्स कुलभूषण जैन की कहानी है, इस उपन्यास में प्रेम प्रसंग, विवाहेतर संबधों से लेके पारिवारिक कलेश की कहानी हैं। यह साधारण पात्र की आसाधारण कहानी है जो बांग्लादेश से कलकत्ता में आके कैसे बंगाली माहौल में अपने आप को ढालता है उसको बखूबी दर्शाता है।

इतिहास, भूगोल, साहित्य, मनोविज्ञान, संस्कृति, प्रेम, द्वेष, साम्प्रदायिकता, परिवार, समाज- किस्सागोई की लचक, कथानक की मज़बूती से रेखांकित यह कहानी हमें कुछ अटपटे किरदारों से परिचित कराएगी। अपने भीतर बसे झूठे, प्रेमी, रंजिश पालने वाले, चिकल्लस बखानने वाले अलग-अलग किरदार हमें कुलभूषण की दुनिया में यूँ ही चलते फिरते मिलेंगे। तैयार रहिएगा, यदि इनमें से किसी की बातों में आ गये, तो फँसे! और बात नहीं मानी, तो कुलभूषण के जीवन-झाले में कभी घुस ही नहीं पाएंगे।

लेखिका अलका सरावगी ने अपने उपन्यास पर अपने विचार रखते हुए कहा “डेढ़ चप्पल पहनकर घूमता यह काला दुबला लम्बा शख़्स कौन है? हर बात पर इतना ख़ुश कैसे दिखता है ? कुलभूषण को कुरेदा, तो जैसे इतिहास का विस्फोट हुआ और कथा-गल्प-आख्यान-आपबीती-जगबीती के तार ही तार निकलते गए। रिफ़्यूजी तो आज की दुनिया में भी बनते चले जा रहे हैं।कुलभूषण तो पिछली आधी सदी का उजाड़ा हुआ है।देश, घर, नाम-जाति-गोत्र तक छूट गया उसका, फिर भी कहता है, माँ-बाप का दिया कूलभूषण जैन नाम दर्ज कीजिए”।

वाणी प्रकाशन ग्रुप के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा “स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही हिंदी प्रकाशन के क्षेत्र में जिस स्वातंत्र्योतर चेतना के साथ भारतीय मनीषा के ढेरों आधुनिक विचारों ने लिखना शुरु किया,उनकी रचनात्मक यात्रा का गवाह वाणी प्रकाशन बनता रहा। आजादी के साथ खुले में सांस लेने की जो स्वायत्तता भारत के हर नागरिक में आती गयी, उसी के न्वोमेष ने हमें ढेरों स्वनामधन्य रचनाकार दिए। जिसमें निर्मल वर्मा जैसे शब्द –शिल्पियों ने भारत का आधुनिक और तर्कपूर्ण विवेकशील व सृजनात्मक मानस रचा। वाणी प्रकाशन सोभाग्यशाली है कि इस विकास यात्रा में इन साहित्य साधकों के साथ शब्दों की अर्थपूर्ण मशाल लिए हुए अपनी यात्रा के सुनहरे वर्ष पूर्ण कर रहा है” ।

अलका सरावगी के नए उपन्यास ‘कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिये’ की जानकारी देते हुए वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति माहेश्वरी ने कहा “कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिये” अलका सरावगी का नया उपन्यास है, और उसकी पहली पाठक और संपादक यानी मैं, कुछ दिनों और रातों से कुलभूषण की दुनिया में बंद हूँ। इस किरदार के आसपास के संसार में कोई दरवाज़ा ताला-निगार नहीं है, लेकिन फिर भी कई तिजोरियों के रहस्य दफ़न हैं इसके पास। कुलभूषण की बातों का सच उतना ही खामोश और पक्का है, जितनी हाथों में लकीरें या आसमान में बादल। एक लाइन ऑफ कंट्रोल, दो देश, तीन भाषाएं, चार से अधिक दशक…कुलभूषण ने सब देखा, जिया, समझा है”।

“मास्टर स्टोरीटेलर” अलका सरावगी का नया उपन्यास मुझे रह-रह कर महसूस करा रहा है कि गेब्रियल गार्सिया मार्केज़ के संपादक क्रिस्टोबल पेरा का पांडुलिपि के पहले ड्राफ़्ट को पढ़ना कितने गर्व, संयम, गंभीरता और उल्लास का विषय रहता होगा।

लेखिका के बारे में

लेखिका अलका सरावगी का जन्म 17 नवम्बर,1960, कोलकाता में हुआ,वे साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। उन्होंने हिन्दी साहित्य में एम॰ए॰ और ‘रघुवीर सहाय के कृतित्व’ विषय पर पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की है। “कलिकथा वाया बाइपास” उनका चर्चित उपन्यास है, जो अनेक भाषाओं में अनुदित हो चुके हैं। लेखिका ने अपने पहले उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद किया था.

अपने प्रथम उपन्यास ‘कलिकथा वाया बायपास’ से एक सशक्त उपन्यासकार के रूप में स्थापित हो चुकी अलका का पहला कहानी संग्रह वर्ष 1996 में ‘कहानियों की तलाश में’ आया। इसके दो साल बाद ही उनका पहला उपन्यास ‘काली कथा, वाया बायपास’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ। ‘काली कथा, वाया बायपास’ में नायक किशोर बाबू और उनके परिवार की चार पीढिय़ों की सुदूर रेगिस्तानी प्रदेश राजस्थान से पूर्वी प्रदेश बंगाल की ओर पलायन, उससे जुड़ी उम्मीद एवं पीड़ा की कहानी बयाँ की गई है। वर्ष 2000 में उनके दूसरे कहानी संग्रह ‘दूसरी कहानी’ के बाद उनके कई उपन्यास प्रकाशित हुए। पहले ‘शेष कादंबरी’ फिर ‘कोई बात नहीं’ और उसके बाद ‘एक ब्रेक के बाद’। उन्होने ‘एक ब्रेक के बाद’ उपन्यास के विषय का ताना-बाना समसामायिक कोर्पोरेट जगत को कथावस्तु का आधार लेते हुए बुना है। अपने पहले उपन्यास के लिए ही उनको वर्ष 2001 में ‘साहित्य कला अकादमी पुरस्कार’ और ‘श्रीकांत वर्मा पुरस्कार’ से नवाजा गया था। यही नहीं, उनके उपन्यासों को देश की सभी आधिकारिक भाषाओं में अनूदित करने की अनुशंसा भी की गई है।

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घर बहुत  पुराना था 
ये —लंबा -चौड़ा —–
बहुत से कमरों वाला 
कमरों के नाम भी थे 
बड़े सुन्दर ,बड़े प्यारे 
प्रेम,स्नेह,लाड़ ,दुलार 
मुस्कान ,खिलखिलाहट 
मेजबानी ,कुर्बानी 
हाँ,इनसे दूरी पर कुछ और भी कमरे थे 
जिनमें शायद ही कोई झाँकता था 
उनके भी नाम थे —
लिप्सा,माया तृष्णा ,घृणा,ईर्ष्या 
उनमें जाने पर झुलस जाने का भय 
पालती मारे बैठा रहता —सो 
ताले लगा दिए गए थे उनमें —किन्तु 
चुराने के लिए घुस ही तो आए कुछ लोग 
देखकर मोटे ताले 
बीज उगा लालच का —
तोड़ लिया गया  मोटे तालों को  
अब कमरों की क़तार में 
न जाने कैसे —
दूर वाले कमरे उड़कर 
चिपक गए आगे 
पुराने मकान के आँगन में 
घर का थरथराता  बूढा मालिक
सोच में था 
क्या कमरों के भी पँख होते हैं ?
कमरों में पसरती दुर्गंध से 
आकुल-व्याकुल हो 
उसने छोड़ दिया 
अपना वो –पुराना घर 
अगले दिन सुबह 
सड़क पर  लैंप-पोस्ट के नीचे 
उसकी झिंगली खाट पड़ी थी  —||

                प्रणव भारती 

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Ministry of Tourism organises 17th session of “Dekho Apna Desh” webinar series on ‘Exploring River Nila’

Ministry of Tourism, Government of India’s 17th session of Dekho Apna Desh webinar on 9th April 2020, titled ‘Exploring River Nila’ was about showcasing meaningful travel experiences for travelers that are offered by relatively unvisited places.

Presented by Gopinath Parayil, Founder, The Blue Yonder, Anita Nair, Writer and Storyteller and Arun Narayanan, INTACH Palakkad , the webinar took the participants to a journey into lesser known towns and villages along the River Nilaaalso known as Bharathapuzha in Kerala which offers authentic and unique experiences to the discerning travellers and explorers .

The story ‘Exploring River Nila’ was modelled on showcasing the tenets of responsible tourism that involves finding uniqueness about a place , the people who live in it, and sharing it with the people who come to visit. The presenters spoke about local food, festivals, art forms , traditions and also about conserving the nature, landscapes, heritage and community of the places that people travel to .

The destinations showcased in webinar are located in Palakkad, Thrissur and Malappuram Districts in Kerala which can be easily accessed by air through Coimbatore, Kochi and Kozikodeairports and well connected by rail and road network.

The focus of Dekho Apna Desh webinar series is promotion of domestic tourism. During the present lockdown period, the Ministry of Tourism is making all efforts to engage with the stakeholders of tourism industry and the citizens of the country to sustain their interest in travelling within the country once travel restrictions are lifted. The Participants in these webinars have included tourism stakeholders, students and the general public from all across the country.

The sessions of webinars are now available on the https://www.youtube.com/channel/UCbzIbBmMvtvH7d6Zo_ZEHDA/featured and also on all social media handles of Ministry of Tourism , Government of India.

The next webinar titled Odisha: India’s Best Kept Secret is scheduled on 12th May 2020 at 11.00 amand registrations can be done by visiting link https://bit.ly/OdishaDAD

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हमारा जीवन असुरक्षाओं व अनिशितताओं से भरा है | हर समय हमारे मन में एक अजीब तरह की असुरक्षा की भावना रहती है, मन कई चीज़ों के लिए असुरक्षित व अनिश्चित सा रहता है | ये भावना काल के अधीन नहीं होती, न ही उम्र, जाति, धर्म या देश के अधीन नहीं होती |

ये असुरक्षा की भावना कर्ण की भावना है जो अर्जुन की श्रेष्ठता से आती है | ये भावना उस औरंगजेब की भावना है तो दारा शिकोह की बढ़ती लोकप्रियता से आती है | ये हर उस बालक में आती है जो कक्षा में अधिक प्रश्नों का उत्तर देते साथी छात्र को देखता है| हर उस खिलाड़ी के मन में आती है तो दूसरे खिलाड़ी को ज़्यादा प्राप्त करते देखता है |

ये हर उस राजनीति के निपुण नेता की भावना है जो किसी नये नेता को उभरते देखता है|

ये ट्रंप की मनोस्थिति भी है जो विरोध को बढ़ते देखती है | ये नंद की भावना है तो चाणक्य के संकल्प को से आती है | ये चाणक्य की भावना है को विदेशी आक्रमणकारियों को देख कर आती है|

ये भावना काल, देश, भाषा, धर्म, व जाति की सीमाओं से परे हैं | ये किसी में भी आ सकती है, चाहे आप श्रेष्ठ हो या ना हों, आप देश, समाज के लिए सही चाणक्य हो या औरंगजेब हो |

ये श्रेष्ठ में अपना स्थान छीन जाने के डर की भावना, श्रेष्ठता पाने को आगे बढ़ते व्यक्ति के मन में साथी प्रतियोगी की प्रगति देख कर श्रेष्ठ के मन में आने वाली भावना | निपुण में निपुणता के बाद भी किसी साधारण से काम ना कर पाना व वही काम किसी साधारण से दिखने वाले व्यक्ति के वही काम कर सकने के बाद आने वाली भावना |

ये बड़ी विकट स्थिति है, ये स्थिति किसी भी बड़े से बड़े योद्धा को हरा सकती है | बड़े से बड़े योगी का संतुलन खराब कर सकती है |

यहाँ बड़ा सवाल है की इस परिस्थिति से कैसे बचा जाए, क्या इसका कोई निदान है | क्या इससे होने वाले संभावित नुकसान से बचा जा सकता है |

जवाब एक ही है – हाँ

इससे एक ओर बड़ा सवाल निकलता है – कैसे ?

जैसे रात का निदान दिन है, अंधेरे का इलाज उजाला है | उसी तरह एक विचार, एक भावना की इलाज भी दूसरी भावना में या विचार में ही छिपा है | मगर उलझन ये है की वो भावना कैसी हो, वो विचार कैसा हो |

इसके लिए रात का दिन से, अंधेरे का उजाले से आपसी रिश्ते को समझना ज़रूरी है | रात का दिन से, अंधेरे का उजाले से विपरीतात्मकता का रिश्ता है, एक दूसरे से विपरीत होने का रिश्ता है |

इसी तरह असुरक्षा की भावना का इलाज भी इसकी विपरीत भावना में छिपा है|

उजाला दीपक भी देता है पर वो सूरज का स्थान नहीं ले सकता | पानी नदी में भी है मगर वो समुद्र का स्थान नहीं ले सकती | पानी समुद्र का अच्छा है, प्रक्रति का संतुलन बनता है पर पीने के काम नहीं आ सकता | पीने के लिए कुए का पानी ही आता है |

हर व्यक्ति की अपनी श्रेष्ठता है, अपनी उपयोगिता है | कोई भी दूसरे का स्थान नहीं ले सकता |

श्रेष्ठ हमेशा श्रेष्ठ रहे, ये प्रक्रति का नियम नहीं है |

दीपक का प्रकाश अच्छा है पर सूरज श्रेष्ठ हैं|

असुरक्षा की भावना का इलाज सहज सहयोग की भावना ही है | प्रक्रति का नियम मानते ही हम सहयोग करें | जैसे दीपक रात को सूरज का सहयोग करता है| दीपक हमें प्रकाश का एहसास देता है व सूरज के आने तक का समय गुजारने में सहयोग देता है |

हम द्रद्ता से अपने मन को ये विश्वास दिलाएँ की अच्छा श्रेष्ठ का दुश्मन नहीं होता |

अच्छा श्रेष्ठ का सहयोगी होता है| श्रेष्ठ के लिए ये श्रेय कर है की वो अच्छे का सहयोग करे व प्रक्रति का चक्र चलने दे |

प्रक्रति का आधार यही भावना है की अच्छा श्रेष्ठ का दुश्मन नहीं होता |

Good is not the enemy of Best

लेखक – विक्रम गौड़

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जनाब, शुक्रवार दिनांक 24 अप्रैल, 2020 को चांद दिखने के बाद शनिवार दिनांक 25 अप्रैल, 2020 से मुस्लिम धर्मावलंबियों का पवित्र रमजान का महीना शुरू हो चुका है। यहां आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि हमारे मुस्लिम आत्मीय भाई-बहन इस्लामी कैलेंडर के रमजान महीने में रोजा यानी उपवास रखते हैं। वह सवेरे से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी खाते-पीते नहीं हैं। यहां तक जल (पानी) तक नहीं पीते। इस दौरान पूरे एक महीने तक रोजे रखे जाते हैं और उसके बाद ईद का खुशियों भरा त्योहार मनाया जाता है। रमजान का महीना और ईद समस्त मानव जाति को आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का खुशनुमा संदेश देती है।

जनाब, दुर्भाग्य है कि इस बार इस दौरान विश्वव्यापी अदृश्य जानलेवा कोरोना वायरस के घातक प्रकोप से अपना मुल्क भी लॉकडाउन की कठिन प्रक्रिया से गुजर रहा है। लॉकडाउन हम सब देशवासियों की सुरक्षा हेतु सतर्कता के साथ अपनी जान की हिफ़ाजत करने हेतु बहुत जरूरी कदम है। और स्वास्थ्य मंत्रालय एवं भारत सरकार द्वारा जो भी सावधानियां और सतर्कताएं बताई गई हैं उनका सख्ती से पालन करना भी हम सभी के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ, बार-बार साबुन से हाथ धोते रहना और नाक व मुंह पर मास्क पहनना बहुत जरूरी है। अतः इस बार पवित्र रमजान माह पर आत्म संयम की पहले से अधिक आवश्यकता है। आपस में एक-दूसरे से शारीरिक दूरी रख कर ही हम स्वयं और अपनों को सुरक्षित रख सकते हैं। फिलहाल कोरोना वायरस से बचने का और कोई विशेष उपाय नहीं है।

जनाब, रमजान के इस पवित्र मौके पर मैं अपने समस्त मुस्लिम आत्मीय भाई-बहनों को अपनी एक मौलिक कविता के माध्यम से मुबारकबाद देता हूं और सबका मालिक एक उन्हें दिल से अल्लाह कहो, परवरदिगार कहो या फिर परमपिता परमात्मा भगवान कहो, मैं भी उनसे विश्वभर के अमन-चैन की प्रार्थना करता हूं। और लीजिए मेरी मौलिक कविता के रूप में आप भी स्वीकार कीजिए, ‘माह-ए-रमजान मुबारकबाद’-

लो, रमजान का पवित्र महीना आ गया, जनाब,
परवरदिगार परमात्मा रोशन करे रमजान आपका,
हो कुबूल इस माह अल्लाह से हर फरियाद आपकी,
चाँद के पार है अल्लाह मिया आपका और हमारा,
पैगम्बर मोहम्मद साहब कह गए,
‘शैतानों को जंजीर किया जाता है इस माह’,
इबादत कुबूल करवा ले मौका है रमजान का,
अदृश्य शैतान कोरोना हो बंदिश यहां,
कोरोना घात के दोज़ख (जहन्नुम) से सारे जग को बचा,
फिर मगफिरत (मोक्ष) की हर बात बन जाए,
हर रोजा (उपवास) ही रूहानियत (अध्यात्मिकता) का रास्ता है आपका,
सदा पाकसाक रहने और पाकीज़गी की शर्त है हर रोजा,
खुदा रहमत करे कि, हर शख्स नेकी के मकां में रहे,
हर रूह (आत्मा) का अल्लाह (परमात्मा) मिलन है हर रोजा,
अल्लाह के बंदों पर बरसेगी ‘रहमत’,
अल्लाह नाजिल (प्रकट) करेगा ‘बरकत’,
फिर मगफिरत का समय होगा जब,
अल्लाह करेगा माफ़ नापाक गुनाहों को भी,
वह रहमदिल है सर्वशक्तिमान है, जनाब,
बस रखनी होंगी उसकी सदा नेक दिल पैग़ामभरी बातें याद,
कि रमजान के बाद भी न दुःखी हो दिल किसी का,
नफ़रत व हिंसा को छोड़कर, ज्ञान, प्रेम, पवित्रता, सुख,
शांति, आनंद और शक्ति का हो वास हर बंदे में सदा,
अल्लाह कहो या खुदा या फिर परमपिता परमात्मा,
उसकी बेहद की प्यारभरी तालीम में हम सब बस हो जाएं फिदा,
जब भी जनाजा उठे इस धरा से तो,
परवरदिगार अल्लाह के आगोश में बस निश्चिंत हो सो जाएं,
मित्रो, ये आपका मित्र ‘आलोक’ कहता है आपसे,
मेरे आत्मीय भाई-बहनों हो बहुत-बहुत मुबारक,
आपको अल्लाह मिलन रमजान का ये महीना ।
इतनी दुआएं मांगना अल्लाह से मेरे मित्र,
हो जाए अपने मुल्क समेत दुनियाभर से
नापाक अदृश्य शैतान कोरोना वायरस का खात्मा,
फिर भययुक्त शारीरिक दूरी मिटा कर,
आने वाली नव पवित्र ईद पर,
जी भर फक्र से गले मिल जाएं हम लोग सदा,
फिर से हो चमन ये अपना मुल्क और जहान हमारा,
और हे अल्लाह परवरदिगार,
हमारा जब भी दम निकले
तो तेरी इबादत में ही निकले।

( लेखक राष्ट्रीय मीडिया अधिकारी, प्रयोगधर्मी व्यंग्यकार एवं प्राकृतिक चिकित्सक हैं )

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पिछले दो महीनों में COVID-19 के बीच कई त्योहार आये और देशदुनिया में लोग घरों में ही कैद रहे और Festival बीत गये। दुनिया में लोगोंमें त्योहारों को अपने पारंपरिक तरीके हर्षोल्लास से नहीं मनाने का मलालहै। रमजान का महीना चल रहा है, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री मोदी नेरविवार को किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को “मन की बात” कार्यक्रम में कहा किरमज़ान का पवित्र महीना शुरू हो चुका है।….Corona ने इस बार भारतसमेत दुनिया-भर में त्योहारों को मनाने का स्वरुप ही बदल दिया है, रंग-रूप बदल दिए हैं। अभी पिछले दिनों ही बिहू, बैसाखी, पुथंडू, विशू, ओड़िया New Year, Easter त्योहारों को घर में रहकर और बड़ी सादगीके साथ और समाज के प्रति शुभचिंतन के साथ त्योहारों को मनाया।

याद रखिये, हमारे पूर्वजों ने हमें इन सारे विषयों में बहुत अच्छा मार्ग- दर्शनकिया है। हमारे पूर्वजों ने कहा है –

‘अग्नि: शेषम् ऋण: शेषम्, व्याधि: शेषम् तथैवच।

पुनः पुनः प्रवर्धेत, तस्मात् शेषम् न कारयेत।।

अर्थात, हल्के में लेकर छोड़ दी गयी आग, कर्ज़ और बीमारी, मौक़ा पाते हीदोबारा बढ़कर ख़तरनाक हो जाती हैं। इसलिए इनका पूरी तरह उपचारबहुत आवश्यक होता है।

Ministry of Home Affairs ने कुछेक दुकानों को शर्तों के साथ खोलनेकी अनुमति दी। इसके बाद दिल्ली सरकार ने शनिवार को shops खोलनेकी अनुमति दे दी।

MHA Release के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में सभी दुकानों को खोलने कीअनुमति है। हालांकि, Shopping Mall में स्थित दुकानें इनमें शामिल नहींहैं। शहरी क्षेत्रों में सभी एकल दुकानों, आस-पड़ोस की दुकानों औरआवासीय परिसरों में स्थित दुकानों को खोलने की अनुमति है। हालांकि, बाजारों, Market Complexes और Shopping Mall में स्थित दुकानोंको खोलने की अनुमति नहीं है।

इसमें स्पष्ट किया गया है कि E-Commerce companies को केवलआवश्यक वस्तुओं की ही बिक्री करने की अनुमति है। यह भी स्पष्ट कियाजाता है कि शराब की बिक्री के साथ-साथ उन अन्य वस्तुओं की भी बिक्रीप्रतिबंधित है, जिनके बारे में COVID – 19 के प्रबंधन संबंधी राष्ट्रीयनिर्देशों में Specified किया गया है।

दिशा-निर्देशों में उन सभी क्षेत्रों, चाहे वे ग्रामीण हों या शहरी, में shops or businesses को खोलने की अनुमति नहीं है, जिन्हें संबंधित राज्यों याकेंद्र शासित प्रदेशों द्वारा containment zones घोषित किया गया है।

हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार, रमजान का महीने में थोड़ी सी भी छूट भारीनुकसान का कारण बन सकती है। यह कदम COVID—19 के बचावकी दृष्टि से काफी घातक हो सकता है जो भारत सरकार के किये करायेपर पानी फेर सकता है। भारत सरकार के कदम की WHO ने काफीसराहना की थी।

विश्लेषकों का मानना है कि तब्लीकी जमात के मामले के बाद भारत कोLockdown में 3 मई से पहले किसी भी तरह की छूट देना काफी भारीपड़ सकता है और इसका हर्जाना कुछ हजार लोगों को नहीं बल्कि देशके 130 करोड़ लोगों को भरना पड़ेगा।

वहीं, दुनिया भर में Lockdown के बीच जुमे के दिन से रमज़ान कीशुरुआत काफी सावधानी के साथ की गयी। CORONA संकट सेनिपटने के लिए दुबई में Curfew लगा हुआ है। Corona Pandemic केबीच मुसलमानों के सबसे पवित्र माने जाने वाले मक्का के Masjid al-Haram में भी सन्नाटा पसरा हुआ है।

तुर्की में Corona के कहर को रोकने के लिए चार दिनों का Curfew लगाया गया है। इस कारण देश भर में मस्जिद बंद कर दिए गए हैं जिनमेंइस्तांबुल की अय्यूब सुल्तान मस्जिद भी शामिल है।

रमज़ान इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने में पड़ता है और माना जाता हैकि इस महीने की आख़िरी की दस रातों में क़ुरान नाज़िल हुआ था। bosnia and Herzegovina के Sarajevo में मौजूद gazi husrev beg mosque में मुसलमान समुदाय के Grand Mufti Husein Kavazovićने अकेले नमाज़ पढ़ी।

क्वालालंपुर के राष्ट्रीय मस्जिद में Social Distancing का ख़याल रखतेहुए तरावीह (रमज़ान के दौरान पढ़ी जाने वाली ख़ास नमाज़) पढ़ी गई। देश के नागरिकों के लिए तरावीह की Live Streaming की गई। COVID – 19 को फैलने से रोकने के लिए मलेशिया ने भारत की तरह हीलोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है।

फ़लिस्तीन के ग़ाज़ा शहर में मस्जिद में इकट्ठा होने पर पाबंदी लगी हुई है।भारी सुरक्षा और Social Distancing के नियमों के साथ Jerusalem की Al-Aqsa Mosque के सामने कुछ फ़लस्तीनी मुसलमानों नेनमाज़ पढ़ी। ये मक्का के Masjid al-Haram और मदीना की al-Masjid an-Nabawi (‘The Prophet’s Mosque’) के बादमुसलमानों के लिए तीसरा सबसे पवित्र स्थल है।

पाकिस्तान के कराची की एक मस्जिद में Social Distancing के साथमुसलमानों ने रमज़ान के पहले दिन जुमे की नमाज़ पढ़ी।

इंडोनेशिया के पूर्वी जावा प्रांत की एक मस्जिद में लोग मस्जिदों में इकट्ठाहुए और Social Distensing का ध्यान रखते हुए नमाज़ पढ़ी। इंडोनेशिया के जकार्ता की The Grand Istiqlal Mosque कोCorona Pandemic के मद्देनज़र बंद कर दिया गया है।

मिस्र की राजधानी क़ाहिरा में मौजूद बाब जुवैला इलाक़े में रमज़ान केमौक़े पर यहां कुछ दुकानें तो सजी हैं लेकिन दुकानों पर लोग नहीं आ रहेहैं।

Deepak Sen – Senior Journalist

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12 Rajasthani girls defeated the lockdown to do a virtual Ghoomar dance medley and the results are colourful !

When Rajasthani singer Rajnigandha Shekhawat put a post on her social media 2 days after the big lockdown announcement, asking intrested ladies to become part of her upcoming music video she was inundated with requests but everyone had the same question – when and where will the shoot happen in these impossible times?!

The answer lay in a lot of coordination, pre planning, foresight and out of the box creative thinking.

Presenting the Rajasthani original Ghumar dance medley by Rajnigandha Shekhawat

12 Rajasthani girls from various parts of the world, came together, virtually, to do the Ghumar from the safety of their own homes, in self shot videos! Some of these personal homes also happen to be forts!

Girls from age of 5 years and above, dressed in their finest poshaks, traditional Rajasthani finery, from Jaipur, Danta fort, Udaipur, Ujjain, United Kingdom and more, brought their best Ghoomar moves to the dance floor in this 10-min long medley that’s a riot of Rajasthani colours and joy!

8 of the most popular folk songs have been woven together in a 10 min long medley that goes seamlessly from one hit to the next without breaking the dance beat, for the convenience of those who like to dance uninterrupted, specially in big fat indian weddings. Or when they are at home with nothing to do during the lockdown !

The song arrangement, video shoot, edit and release have entirely been done remotely, and virtually via the internet.

“All I’m going to say is, that’s Corona Virus – 0 and Rajasthani girls – 12, we’re winning this game hands down” said Rajnigandha Shekhawat about her innovative release.

Facebook:
www.facebook.com/RajnigandhaShekhawat

Instagram:
www.instagram.com/RajnigandhaShekhawat

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7 अप्रैल 2020 मंगलवार को आकाशमंडल में एक अद्भुत घटना घटित होने वाली है। इस दिन चांद का रंग बदला-बदला नजर आएगा और इसे ‘सुपर पिंक मून’ कहा जाएगा। यह इसलिए होगा क्योंकि चांद पृथ्वी के बेहद करीब आ जाएगा। सामान्य तौर पर पृथ्वी से चांद करीब 3 लाख 84 हजार 400 किलोमीटर की दूरी पर रहता है, लेकिन इस दिन यह दूरी घटकर 3 लाख 56 हजार 907 किलोमीटर रह जाएगी। यानी चांद पृथ्वी से 27493 किलोमीटर करीब आ जाएगा।

इससे चांद का आकार सामान्य से 7 गुना अधिक बड़ा और 15 प्रतिशत अधिक चमकीला दिखाई देगा। रात्रि में 8.05 बजे इस अद्भुत घटना को अच्छे से देखा जा सकेगा। चंद्रमा के पृथ्वी के करीब आने से अनेक प्रकार की पर्यावरणीय और प्राकृतिक घटनाएं घटित होती हैं। इसका व्यापक प्रभाव मनुष्य और प्रकृति पर होता है।

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Every individual sees the time with different eyes and angle. Some takes tough time as burden, some takes it as testing time and do something innovative. The time Eric Garcetti, Mayor, Los Angeles Mayor ordered the entire city to shelter in place in March, Singer-Writer Chris Mann saw lockdown as an opportunity to have some fun with his music. 

COVID-19 pandemic forced the organisers to cancel all concert events but the singer-songwriter and former contestant on season two of “The Voice” decided something new. He decided to release his own version of The Knack’s 1979 hit single “My Sharona,”. He did some tweaking and renamed “My Corona,” on March 15. It’s a huge success and since upload, the video has garnered more than 4.2 million views on YouTube.