February 19, 2020
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मंटो मेरी नजर से।

अगर आपको मेरी कहानियां गंदी लगती हैं या अश्लील लगती है, तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है क्योंकि आप ही गंदे और अश्लील समाज में रहते हैं, मेरी कहानियां तो समाज को आइना दिखाने का काम करती है, मंटो ऐसा अक्सर कहा करता था।

मंटो न तो हिंदुस्तान का अफसाना निगार था न पाकिस्तान का अफसाना निगार, और ना ही एशिया महाद्वीप का। बल्कि मंटो तो एक ख्याति प्राप्त कहानीकार था।

मंटो जिसका पूरा नाम सआदत हसन मंटो था, का जन्म 11 मई सन 1912 को पंजाब के एक छोटे से गांव समराला में हुआ था।

मंटो ने लघु कथाओं के अलावा रेडियो ड्रामा और फिल्मों की कहानियां भी लिखीं। मंटो एक बहुत अच्छा सहाफी यानी पत्रकार भी था।

वह उर्दू का वाहिद ऐसा लेखक था कि जिसको जितना पसंद किया जाता था उतना ही नापसंद किया जाता था, हां ये बात और है कि मंटो को वही लोग सबसे ज्यादा पढ़ते थे जो मंटो को सबसे ज्यादा गालियां दिया करते थे।

इसी कारण मंटो को 6 बार अदालत भी जाना पड़ा, तीन बार हिंदुस्तान पाकिस्तान बंटवारे से पहले और तीन बार पाकिस्तान के बनने के बाद। फिर बात अलग है कि जिन लोगों ने उस पर मुकदमा दर्ज किया उन लोगों को कोई फायदा नहीं हुआ।

मंटो ने अपनी छोटी सी जिंदगी में भरपूर लेखनी चलायी उन्होंने 22 लघुकथा संग्रह, 1 उपन्यास, पांच रेडियो ड्रामा संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह तथा व्यक्तिगत रेखाचित्रों के दो संग्रह की रचना की।

मेरी नजर में मंटो एक ऐसा अलमस्त अफसाना निगार था कि वो जो देखता था वही कागज पर उतार देता था, उसने उस वक्त में भी समाज के उन चीजों के बारे में बात की जिसे हम आज के वक्त में भी बंद दरवाजों के पीछे किया करते हैं, मंटो ने समाज के ऐसे तबके के बारे में बताया जो हमारे आस पास तो है लेकिन हम उन लोगों के बारे में बात करने से हिचकिचाते हैं।

मंटो को मैं बड़ा अफसाना निगार या बड़ा इंसान इसलिए कहता हूं क्योंकि मंटो आवाम का अफसाना निगार था, मंटो ने हर उस चीज के ख़िलाफ़ लिखा और बोला जो मंटो को गलत लगा, चाहे मंटो कितनी भी गरीबी में रहा हो चाहे उसने अच्छे दिन देखे हों लेकिन कभी भी वह अपने उसूलों से हटा नहीं, इसीलिए वो अपने आप ने महान शख्सियत था।

मंटो मेरी जानकारी में ऐसा लेखक है कि वह जिस जुबान में लिखता था उसी जुबान में कहते हैं 3 बार फेल हुआ, कुछ लोग कहते हैं कि मंटो सिगरेट और शराब बहुत पीता था , मंटो को सिगरेट और शराब की लत इस हद तक लग गई थी कि अगर मंटो को यह ना मिले तो मंटो पागलों जैसा बर्ताव करने लगता था,।

मंटो की कुछ मशहूर कहानियां इस प्रकार है, खोल्डो, ठंडा गोश्त, टोबा टेक सिंह, काली सलवार इत्यादि।

मंटो के अफसाने की एक खास बात यह भी है कि जब आप उस की कहानियां सुनेंगे तो आपको बिल्कुल भी नहीं लगेगा कि आप उसकी कहानियां सुन रहे हैं, बल्कि आपको लगेगा कि आप बंद आंखों से वही होते हुए देख रहे हैं जो मंटो ने अपने अफसानों में कहा है।, उस वक्त के लोग बताते हैं कि मंटो बहुत जिंदादिल, मिलनसार और मजाकिया इंसान था।

मंटो ने 22 साल की उम्र में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया जहां अली सरदार जाफरी जैसे मशहूर शायर की संगत मिली, लेकिन ज्यादा दिन तक अलीगढ़ नहीं रह पाए, वापस अमृतसर आ गए, फिर वहां से लाहौर चले गए, जहां मंटो ने पारस नाम के एक अखबार में नौकरी कर ली, और मुसवविर नाम के एक अखबार का संपादन करने लग गए, फिर मंटू 1939 में दिल्ली आ गए, दिल्ली में सिर्फ 17 महीने ही रहे दिल्ली में ही आकर उन्होंने रेडियो नाटक लिखें साथ ही ऑल इंडिया रेडियो में भी काम करते रहे किन्तु 1942 में मुंबई आ गए, जहां उनको कमाल अमरोही अशोक कुमार वाचा और कृष्ण चन्द्र जैसे लोगों की की संगत मिली।मुंबई में ही आकर उन्होंने फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी और काफी शोहरत कमाई, लेकिन फिर 1948 में मंटो को लाहौर जाना पड़ा।
लाहौर में अदब और साहित्य का माहौल नहीं था, तो मंटो काफी तन्हा हो गए और शराब में और ज्यादा डूबने लगे, इसी कारण 1955 में किडनी खराब होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई।
लेकिन सहादत हसन मंटो हम सबके दिलों में आज भी जिंदा हैं।
©राजीव साहिर।

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पटाखे जलाते समय विशेष तौर पर रखें आंखों का ख्याल

नई दिल्ली : दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। दिवाली का त्योहार प्रकाश और उजाले का प्रतीक माना जाता है। इसे बड़ी ही खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों में दिवाली की परंपरा के अनुसार हम सभी लोग घर के हर कोने में चारों ओर दीपक और मोमबत्तियां जलाते हैं। सभी दोस्तों और रिश्तेदारों को मुबारकबाद देते हैं। मिठाइयां और तोहफे बांटते हैं। इस दिन का बच्चे खास तौर पर इसलिए भी बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्यों कि उन्हें पटाखे जलाने को मिलते हैं। नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइट के निदेशक डा.महिपाल सचदेव का कहना है कि पटाखे हमेशा अच्छी लाइसेंस धारक दुकान से ही खरीदने चाहिए। हमेशा बंद बाक्स में ही आतिशबाजी खरीदें। पटाखों को गैस स्टोव या किसी भी ज्वलनशील पदार्थ से दूर रखना चाहिए। पटाखों को खुली जगह पर ही जलाएं। बड़े पटखों को जलाते समय अधिक सावधान रहें। पटाखे जलाने के बाद बची हुई राख या फुलझडियों को एक पानी से भरी हुई बाल्टी में रखें, ताकि वह आपके पैरों के नीचे न लगें और न ही आप को नुकसान पहुंचाए।

डा.महिपाल सचदेव का कहना है कि दिवाली पर पटाखे जलाते समय विशेष तौर पर अपनी आंखों का ख्याल रखना चाहिए। आंख में अगर किसी प्रकार की भी चोट लगी हो तो तुरंत नेत्र विषेशज्ञ से मिलें क्यों कि इस दिन लापरवाही के चक्कर में कई लोग अपनी आंखें भी खो बैठते हैं या कई लोग पटाखे जलाते वक्तअपनी आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा बैठते हैं। बहुत से लोगों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है। इसलिए समूह में इकट्ठे होकर ही पटाखे जलाने चाहिए। इससे त्योहार का आनंद तो दोगुना हो ही जाता है साथ ही बमों को अकेले पटाखे जलाने का मौका नहीं मिलता जिससे कि उन्हें कोई नुकसान पहुंचे।

बच्चों को अकेले पटाखे जलाने के लिए न भेजें। बच्चों को तीर कमान से खेलने के लिए मना करें क्यों कि उससे आंखों में चोट लगने का खतरा बहुत अधिक रहता है। दिवाली के समय आखों में कट, सुपरफिशियल एब्रेशन, ग्लोब इंज्योरी, केमिकल एण्ड थर्मल बर्न हो सकता है। पीडि़त को आंखों में दर्द, लाल होना, सूजन, जलन, आंख खोलने और बंद करने में परेशानी या फिर दिखाई न देना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ होते हैं-अनार, हवाई, तीर कमान आदि। सबसे ज्यादा क्षति तब होती है जब पटाखों को टिन या शीशे की बोतल में रखकर जलाया जाता है ताकि सबसे ज्यादा शोर हो, लेकिन इससे आसपास खड़े लोगों को बहुत नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए। पत्थर और कांच के टुकड़े बहुत तेजी से उड़ते हुए किसी की भी आंख में बहुत अंदर तक चुभ सकते हैं जिससे कि आंखों में भयानक चोट लग सकती है। पटाखों के अंदर से निकला हुआ कार्बन और अन्य विशाक्त पदार्थ आंखों के उत्तकों, नसों और अन्य मुलायम लिगामेंट्स को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। आंख में चोट लगते ही आंख को नल के साफ पानी से छींटे मारें। फिॅर तुरंत किसी अच्छे डाक्टर के पास ले जाएं।

अगर आप की आंखों में चोट लग जाए तो कुछ निम्रलिखित बातों का ध्यान रखें जैसे-
डा.महिपाल सचदेव का कहना है कि चोटिल भाग को न छेड़ें और आंखों को न मलें। अगर ये सुपरफिश्यिल इंज्युरी है, तो आंखों को साफ पानी से धो लें। अगर आंखों से खून निकल रहा हो, दर्द हो या फिर साफ दिखाई न दे तो आंखों को ढंग लें और तुरंत डाक्टर के पास जाएं। अपने आप कोई उपचार न करें। किसी भी आंख की चोट को मामूली न समझें क्यों कि छोटी सी चोट भी हमेशा के लिए आंखों की दृष्टि को हानि पहुंचा सकती है। ये छोटी-छोटी बातें और जानकारी आंखों के इलाज में मदद करती हैं, जिससे पीडि़त जल्दी ही ठीक हो सकता है। ये याद रखिए कि आंखें भगवान का अमूल्य उपहार हैं और उनका ख्याल रखना हमारा परम कर्तव्य है। आंख संबंधी किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए डाक्टर से तुरंत संपर्क करें।

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Astonishing Diwali Ideas By Interior Designer Punam Kalra

Diwali is the season for the warmth of social and familial bonding, elaborate house parties, gluttonous food, vibrant lighting, and festive colors. Lively and luxurious, minimal and alluring, eccentric and chic, this is your season to bring your own aura into your interiors. Free to experimentation and interpretation, it is the age for new and modern adaptations of the traditional and contemporary, thus giving new definitions to these themes and to your spaces. Whatever your preferred style may be, we strongly advocate a sense of muted luxury and warm comfort this Diwali.

A play of the traditional elements with the trends and colors of this season can create the perfect grandeur this Diwali. A touch of metal or metallic shades can uplift a fairly subdued space by instantly adding glamour to the room by lending it that delicate touch of luxury. Metallic doesn’t have to translate only into the standard silver and gold, but can be an assorted choice from amongst gold, rose gold, copper, brass, silver, iridescent and black nickel. These metallic details can be added in the form of discreet upholstery patterns, lighting details, sleek furniture details, crockery, wall hangings and screens for a more dramatic space with an enhanced ornamental look. Using luminous metallic fabrics for furniture, like in our Aureate Chairs, is another fantastic way to capture the light and add a new contemporary warmth and sheen to any room.

A combination of white and warm grey along with underlying jewel tones of emerald, burgundy and even fuchsia can bring out the true spirit of the celebrations. Perfect for creating plush spaces, the soft, neutral-hued matte look in white and grey can be highlighted with deep colored highlight walls in textured colors, elegant patterns, hand-painted, plush wallpapers or contrasting artworks to create a highly contemporary and timeless appeal.

Nifty furniture detailing in an assortment of colors and textures, like in our playful dining set combining the timeless appeal of sleek natural wood, high gloss finishing and gold leafing with a healthy splash of vibrant orange, create spaces that exude a sense of subtle elegance. Since it’s the season to host people, fun furniture like our minimal yet luxurious Amarillo rich suede coffee table with multiple legs in gold and clean architectural lines that channels an elegant modern vibe can prove to be a feisty and colorful addition to your living room. A modern, young and quirky furniture in modern materials like steel and acrylic solid surfaces like our geometric and minimal center table with card inspired inlays can set the right tone for your house gatherings.

Diwali is especially incomplete without lighting. It is definitely amongst the defining factors of any festive décor and can make or break a space. Any lighting installation or chandelier is an extension of the room’s personality and, we believe, should have its own unique identity and charisma. Chandeliers and statement pieces designed in semi-precious stones and trendy metals add a feeling of warm luxury to the room without it looking too ostentatious like our sleek, traditional jaali and motif inspired corner lamp adds delicate light patterns, highlighting the space and creating a stunning experience.

Colorful rugs or throws, carpets and drapes in plush textile can be used to further add a bright dash of color and uplift the most mundane spaces. Quirky, contemporary accessories such as bells, incense stick holders, torans, uruli, tall lamps, mirrors in different geometric shapes and materials like brass, steel, stone, ceramics, concrete, along with fragrant flowers can be used to create a spectacular sensory experience.

While decorating your house for the festivities, the key principle is to not go overboard. To keep a check, the ideal way is to identify the important feature areas in the house to be focused on. Based on the form, utility and overall ambiance of the area, you can add a statement piece either by way of its color, material or sculptural form, complete with its own set of lighting and accessories. The rest of the house can have more subtle and simpler additions to create a stylish festive look.

Price- On Request  

Available at:

I’M, The Centre for Applied Arts

A-15, Lajpat Nagar-II

New Delhi-110024

Tel: 011 48780006

Website- http://www.imcaa.in/

Insta Link- https://www.instagram.com/imcaain/

Facebook link– https://www.facebook.com/imcaain/

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लवकुश रामलीला : सातवें दिन हनुमान ने संजीवन बूटी लाकर बचाई लक्ष्मण की जान

लालकिला ग्राउंड स्थित 15 अगस्त पार्क में विश्व प्रसिद्ध लवकुश रामलीला कमिटी द्वारा आयोजित किए जा रहे रामलीला के सातवें दिन शनिवार को लीला मंचन की शुरुआत लंका दहन के बाद वापस श्रीराम के पास वापसी, उनसे मुलाकात, रावण द्वारा विभीषण को घर से निकालना, राम के शरण में विभीषण का आना, श्रीराम द्वारा समुद्र पूजा एवं सेतु निर्माण, लंका में अंगद का प्रवेश एवं रावण से संवाद, राम को अंगद की ओर से सूचना प्राप्त होना, रणभूमि में मेघनाद का प्रवेश, लक्ष्मण के मूर्छित होने के बाद राम का लिप, हनुमान को संजीवनी बूटी लाने के लिए भेजना, वहां पर हनुमान की कालनेमी से मुलाकात, संजीवनी बूटी लेकर हनुमान का लौटने जैसे प्रसंगों का मनोहारी और भव्य मंचन किया गया।

लीला के अलग-अलग किरदारों में रावण (अवतार गिल), अमित घनश्याम (नारद), गगन मलिक (रामचंद्र), मोहित (लक्ष्मण), मनीष चतुर्वेदी (शिव), अलका तिवारी (पार्वती), अंजना सिंह (सीता) आदि ने अपने-अपने किरदारों में अभिनय के इंद्रधनुषी रंग भरकर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।

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लवकुश रामलीला : पांचवे दिन सीता-हरण का प्रसंग देख भीगी दर्शकों की आंखें

लालकिला ग्राउंड स्थित 15 अगस्त पार्क में विश्व प्रसिद्ध लवकुश रामलीला कमिटी द्वारा आयोजित किए जा रहे रामलीला के पांचवे दिन बृहस्पतिवार को लीला मंचन की शुरुआत गणेश वंदना एवं महालक्ष्मी अभिनय से हुई। इसके बाद लीला का मंचन शुरू हुआ, जिसके प्रथम चरण में रावण-मारीच के बीच संवाद देखने को मिला। दोनों के बीच उत्तेजना से भरे संवाद को सुन दर्शकों की भुजाएं भी फड़कनें लगी, लेकिन उसके बाद जैसे ही पंचवटी से रावण द्वारा सीता जी के हरण का प्रसंग आया, दर्शकों की आंखें स्वतः भीग गईं।
सीता जी के हरण के बाद लंका की ओर प्रस्थान करने के दौरान रावण का मुकाबला जटायु से होता है, जिसमें रावण के हाथों जटायु बुरी तरह घायल हो जाता है। उसे श्रीराम के आगमन का इंतजार रहता है, ताकि वह रावध द्वारा सीता का हरएा कर ले जाने की सूचना दे सके। इसी बीच श्रीराम का आगमन होता है, जो सीता के वियोग में व्याकुल हैं। जटायु उन्हें रावण द्वारा सीता हरण की सूचना देता है और उसी के साथ श्रीराम के चरणों में अपने प्राण त्याग देता है।

लीला के अलग-अलग किरदारों में रावण (अवतार गिल), अमित घनश्याम (नारद), विजेंद्र गुप्ता (अत्री ऋषि), गगन मलिक (रामचंद्र), मोहित (लक्ष्मण), मनीष चतुर्वेदी (शिव), अलका तिवारी (पार्वती), मनोज नरेंद्र दत्त (दशरथ), अंजना सिंह (सीता) आदि ने अपने-अपने किरदारों में अभिनय के इंद्रधनुषी रंग भरकर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।

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Delhilites are learning Korean traditional music Samulnori

September 19,New Delhi:  Korean Cultural Centre in association with the National Gugak Centre, South Korea organized ‘Samulnori Workshop 2019’ at its Centre in Lajpat Nagar and JBM Global School New Delhi. This workshop provided a great opportunity for all the interested students to learn more about the traditional culture of Korea through music. This 12 days’ workshop was till 27th September.

Samulnori is a genre of percussion music from Korea. Samulnori’s music is based on the traditional rhythms of Korea. Samulnori consists of four instruments, Kkwaenggwari, Jing, Janggu and Buk.

There were two levels in the workshop. Beginners level for those who had no prior knowledge of Samulnori and advanced level for those with some experience.

Teacher Ms. Park Eun HA who is Ph.D. in Korean Music and Dance says –“I am here for the 4th time for giving training of Korean traditional music to Indian students. Coming to India is like coming to my hometown. Indian students have a very good learning power, they adapt the learning very quickly, they have sharp brains.

She adds that Indian student’s eyes are very expressive, full of curiosity for learning. Learning and playing music gives them happiness; their eagerness makes me more energetic to impact training. I also encourage a little bit of dancing for making them cool down or exercise. Whenever I am in India I feel so energetic, happy and have positive vibes. I visited other countries as well to teach and perform but at India I got a chance to transfer my knowledge to young generation who absorbs it very quickly in comparison to older people. The best part here is that every age group learns. I feel Indian students have a pure heart. The results of giving training to Indian students are so effective and efficient.

Mansi, Student of Korean Cultural Centre, participating in this workshop said that “I am learning Korean culture and music from past 2 years but today also I have the same energy and enthusiasm in learning Korean traditional music in this workshop as it is so interesting and loud. And I like loud music a lot. Basically, I like the Rhythms of the Samulnori Music.

Whereas another student Aakash from advanced level says “I really enjoy learning Samulnori as it very interesting playing Samulnori’s instruments and it a Unique music. And the only thing which makes me sad that this workshop happens once in a year only I feel like it should be more times in a year. “