July 4, 2020
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चीनी विश्वविद्यालयों और चीन के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के लेखकों, वैज्ञानिकों का कहना है, “यह मनुष्यों को संक्रमितकरने के लिए अत्यधिक अनुकूल होने के सभी आवश्यक संकेत अमेरिकी विज्ञान पत्रिका पीएनएएस में सोमवार को प्रकाशित एकअध्ययन के अनुसार, चीन में शोधकर्ताओं ने एक नए प्रकार के स्वाइन फ्लू की खोज की है जो एक महामारी को ट्रिगर करने में सक्षम है।

जी 4 नाम दिया गया, यह आनुवंशिक रूप से एच 1 एन 1 तनाव से उतरा है जिसने 2009 में एक महामारी का कारण बना।

चीनी विश्वविद्यालयों और चीन के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के लेखकों, वैज्ञानिकों का कहना है, “यह मनुष्यों को संक्रमितकरने के लिए अत्यधिक अनुकूल होने के सभी आवश्यक संकेत 2011 से 2018 तक, शोधकर्ताओं ने 10 चीनी प्रांतों में बूचड़खानों मेंसूअरों से 30,000 नाक के स्वाब ले लिए और एक पशु चिकित्सा अस्पताल में, उन्हें 179 स्वाइन फ्लू के वायरस को अलग करने कीअनुमति दी।

बहुसंख्यक एक नए प्रकार के थे जो 2016 से सूअरों के बीच प्रभावी रहे हैं।

शोधकर्ताओं ने इसके बाद फेरेट्स पर विभिन्न प्रयोगों को अंजाम दिया, जो फ्लू अध्ययन में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं क्योंकिवे मनुष्यों के समान लक्षणों का अनुभव करते हैं – मुख्य रूप से बुखार, खांसी और छींक।

जी -4 को अत्यधिक संक्रामक माना गया, मानव कोशिकाओं में प्रतिकृति और अन्य वायरस की तुलना में फेरोस्ट में अधिक गंभीर लक्षणपैदा परीक्षणों से यह भी पता चला कि मौसमी फ्लू के संपर्क में आने से कोई भी प्रतिरक्षा मनुष्य जी -4 से सुरक्षा प्रदान नहीं करता है।

रक्त परीक्षणों के अनुसार, जो वायरस के संपर्क में आने वाले एंटीबॉडी दिखाते थे, 10.4 प्रतिशत स्वाइन श्रमिकों को पहले से हीसंक्रमित किया गया परीक्षणों से पता चला कि सामान्य जनसंख्या के 4.4 प्रतिशत लोग भी सामने आए थे।

वायरस इसलिए पहले से ही जानवरों से मनुष्यों के लिए पारित हो गया है, लेकिन अभी तक कोई सबूत नहीं है कि यह मानव से मानव – वैज्ञानिकों की मुख्य चिंता का विषय हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने लिखा है कि यह चिंता का विषय है कि जी -4 वायरस का मानव संक्रमण मानव अनुकूलन को आगे बढ़ाएगा और मानवमहामारी का खतरा बढ़ाएगा।

लेखकों ने सूअरों के साथ काम करने वाले लोगों की निगरानी के लिए तत्काल उपायों का आह्वान किया।

जेम्स वुड के साथ काम करते हुए, एक सैलरी रिमाइंडर के रूप में आता है कि हम लगातार जूनोटिक रोगजनकों और नए जानवरों के पैदाहोने का खतरा बना रहे हैं, जिनसे इंसानों का वन्यजीवों के साथ अधिक संपर्क होता है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पशु चिकित्सा विभागके प्रमुख।

एक जूनोटिक संक्रमण एक रोगज़नक़ के कारण होता है जो एक गैर-मानव जानवर से एक मानव में कूद गया है।

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पूरा विश्व कोरोना वायरस से जंग लड़ रहा है, पूरे विश्व के देशों में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर अब 10,081,545 हो चुकी है, वहीं इस खतरनाक वायरस की चपेट में आने से अब तक 501,298 लोग दम तोड़ चुके हैं तो वहीं अब पूरे विश्न में अभी तक कोरोना वायरस से संक्रमित 5,458,369 लोग ठीक हुए हैं, जबकि इस वायरस से सबसे ज्यादा ग्रसित अमेरिका में कोरोना संक्रमण के केस 25,00,000 हो चुके हैं, पिछले 24 घंटे में 1,79,000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसकी जानकारी दी है।

तो वहीं पिछले 24 घंटे में ब्राजील में 39,483 नए मामले सामने आए और भारत में 18,552 नए मामले सामने आए। अगर भारत की बात करें तो देश में कोरोना वायरस (कोविड-19) के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। भारत में अबतक कोरोना संक्रमण के कुल मामले 5,08,953 हो गए हैं। इसमें से 1,97,387 सक्रिय मामले हैं जबकि 2,95,881 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। देशभर में इस बीमारी से अब तक 15,685 मरीजों की मौत हो गई है। बीते 24 घंटों में ही कोरोना वायरस के 18,552 नए मामले सामने आए हैं और 384 मौतें हुई हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा है कि देश की रिकवरी दर 58 फीसदी से ऊपर चली गई है और लगभग 3 लाख लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने साथ ही कहा कि हमारी मृत्यु दर 3% के करीब है जो बहुत कम है। भारत में कोरोना के मामलों को दोगुना होने के रफ्तार करीब 19 दिन हो चुकी है। यह दर देश में लॉकडाउन के 3 दिन पहले की दर थी।

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Psychologist and founder of My Zindagi Foundation, Jhanvi Sethi, feels that because of the coronavirus pandemic people have become conscious of the choices they are making from a hygiene point of view. She calls it a “great blessing”, and added, “Safety, precaution, and hygiene are our utmost priority.”

Jhanvi lives with her actor-husband, Vikas Sethi, in Mumbai and admitted that they only step out to get essentials. She added, “We are extremely careful when we step out of the house. We always carry a sanitizer and ensure we sanitize. Also, we maintain social-distancing.” She, however, feels that most of the people have not been following social-distancing and said, “We still need to learn our lesson on social-distancing especially in times like these with cases still going up. Be careful and maintain that distance – it will save you and save others from you too.”

Jhanvi further asserted that the scare of the coronavirus pandemic has definitely reduced and added, “We have to live with this as the new normal. I think it’s perfectly fine for people to want to get out because they have been inside their homes for so long. But we need to maintain social-distancing that’s all.”

And how is she maintaining her peace of mind – Jhanvi shared, “I chant daily and also listen to music to stay calm. As the founder of My Zindagi Foundation which is a NGO for mental well-being, I cannot overemphasize the need for balance at such a time. It is absolutely important to address issues like depression, anxiety in these difficult times.”

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Indian American Doctor Dheeraj Kaul का मानना है कि Unlock के बाद भारत पैर पसार रहे Corona Virus से आधी से अधिक आबादी Covid-19 से Infected हो सकती है। इसमें से करोड़ों लोगों को Hospitals के ICU में भर्ती कराना पड़ सकता है। लाखों के लिए Ventilators की जरूरत पड़ सकती है।

Dr. Kaul ने New York से फोन पर बताया कि Virus कभी खत्म नहीं होता है। हां, एक निश्चित अवधि के बाद Pandemic के Virus के फैलने की रफ्तार जरूर धीमी हो जाती है। एक खतरा हर वक्त मंडराता रहता है कि Virus तेजी से फैल सकता है। इसलिए सरकार को एक पूरा Plan तैयार करना चाहिए।

गौरतलब है कि 1 जून से भारत सरकार ने Unlock किया है और इसके बाद Corona Virus तेजी से फैलने लगा है। दिल्ली, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, इंदौर और कोलकाता में संक्रमितों की संख्या बढ़ी है। इसमें महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात और तमिलनाडु में Covid- 19 से मृतकों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। राजधानी दिल्ली में फिर Lockdown करने का विचार किया जा रहा है।
Dr. Kaul का कहना है कि तीसरी दुनिया के देशों में Pandemic का वक्त काफी मुश्किल से भरा होता ​है। इसलिए ऐसे मुश्किल दौर में Government Officers, Doctors and Economists को साथ मिलकर काम करना चाहिए। Pandemic के लिए समाज में Awareness फैलाना बहुत जरूरी है। अगर लोग Pandemic को लेकर लोग सावधान नहीं रहे तो अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा सकती है।

Dr. Kaul कहते हैं कि भारत में यदि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को छोड़ दिया जाये तो Ministry of Health में Medical पृष्ठभूमि का कोई भी व्यक्ति नहीं हैं। “इसलिए मेरा मानना है कि Civil Services को समाप्त कर देना चाहिए और मंत्रालयों में विशेषज्ञों को ही मंत्री के साथ टीम में होना चाहिए।“

तीसरी दुनिया के देशों में Pandemic को मद्देनजर Healthcare System में Reform की जरूरत है और सरकारों की इस तरफ खास ध्यान देना चाहिए। देश में पांच में से चार डॉक्टर Private Sector में काम कर रहे हैं। इसलिए डॉक्टरों की कमी भी बड़ा मसला है। Pandemic के वक्त Physiological बीमारी होने की संभावना काफी बढ़ सकती है। इसलिए लोगों को Mental Health पर काफी ध्यान रखने की आवश्यकता है। इस दौरान Depression और Anxiety Disorder जैसी बीमारी हो सकती है।

वह कहते है कि भारत में काफी कम संख्या में Corona Test हो रहे हैं। इसलिए Corona Infected मरीजों की संख्या काफी कम नजर आती है। “मुझे ऐसा लगता है कि Covid-19 से अप्रत्यक्ष रूप से भी काफी लोगों की मौत हो रही है।“

Deepak Sen – Senior Journalist

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आज पूरा विश्व मानसिक तनाव को झेल रहा है, इससे मुक्ति का सरल समाधान सिर्फ एक ही है वह है ध्यान सभी को ज रूरत है कि वह घर पर रहकर ही योग व ध्यान सीखे करे और स्वस्थ रहें। ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति का जीवन पूर्ण तथा  व्यवस्थित होता है।

ध्यान द्वारा मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत में भारत की बड़ी भूमिका है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने योग के अनेक लाभों को देखते हुए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए देशवासियों को प्रेरित किया है।

भारत में विश्व योग दिवस को भव्य रुप में मनाया जाता है लेकिन इस साल कोरोनावायरस के चलते विश्व योग दिवस फीका न रहे इसके लिए योग दिवस को  अपने घर पर योग करके अवश्य मनाए।  योग ध्यान से शरीर पूर्णता स्वस्थ रहता है इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति इस विश्व योग दिवस को अवश्य मनाए तथा दैनिक जीवन में योग को अवश्य उतारे। आज पूरा विश्व मानसिक तनाव को झेल रहा है इससे मुक्ति का सरल समाधान सिर्फ एक ही है वह है ध्यान एवं योग सभी को जरूरत है कि वह घर पर रहकर ही योग व ध्यान सीखे और करे और स्वस्थ रहें।  

ध्यान के द्वारा मानसिक शक्ति को केंद्रित तथा नियंत्रित किया जा सकता है जिससे अनेक शारीरिक तथा मानसिक रोगों से छुटकारा मिल जाएगा। रोग प्रतिरोधक क्षमता में पाचन प्रणाली में सुधार, आना ,रक्तचाप में कमी आना मानसिक तनाव में कमी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का आसान और स्थाई तरीका है ध्यान का अभ्यास के मानसिक लाभ।

मन हमारे शरीर का चालक है यदि हमारा मन शांत एवम  व्यवस्थित और नियंत्रित रहता है तो अनेक लाभ मिलते हैं जैसे मानसिक तनाव में कमी बेहतर नींद एवम  मन शांत एवम व्यवस्थित और नियंत्रित रहता है रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी होती हैं। इसके द्वारा अपने स्मरण शक्ति को भी विकसित किया जा सकता है इसके द्वारा संकल्प शक्ति का विकास करके अपने क्रोध को द्वेष आदि को दूर करके मानसिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है।   

ध्यान: ध्यान का अर्थ भीतर से जाग जाना ध्यान है। सदा निर्विचार की दशा में रहना ही ध्यान  हैं। ध्यान या मेडिटेशन एक ऐसी मानसिक अवस्था है, जिससे व्यक्ति अपने दिमाग और मन को एकाग्र चित्त करने की कोशिश करता है चिंता तनाव डर मानसिक रोग शारीरिक रोग डिप्रेशन चिंता कुंठा से बचाव का उत्तम उपाय सिर्फ योग एवं ध्यान ही हैं। अशांति तनाव या अवस्था हमारी प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बना देती है योग करें स्वस्थ रहें शरीर को शक्तिशाली बनाते हैं योगिक आसन और ध्यान।        

तनाव हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत हानिकारक प्रभाव डालता है ध्यान वास्तव में ध्यान क्या है। अपनी आंख बंद करके बैठ जाना भी ध्यान नहीं किसी मूर्ति का समरण करना भी ध्यान नहीं माला जपना भी ध्यान नहीं अक्सर ये कहा जाता है कि पांच 10 मिनट के लिए इशवर का ध्यान करो यह भी ध्यान नहीं समरण हैं।ध्यान का अभ्यास करने की विधि।आराम से किसी भी ध्यानात्मक आसन या किसी भी आरामदायक स्थिति में बैठकर ध्यान के अभ्यास को किया जा सकता है।

अपनी आंखों को बंद करें और सांस को नियंत्रित करने की कोशिश न करें स्वाभाविक तरीके से ही सांस लें। सांस पर अपना ध्यान केंद्रित न करें और सांस अंदर लेने और बाहर निकालने पर शरीर की गतिविधियों पर गौर करने के साथ-साथ अपने शरीर के हर अंग का निरीक्षण भी करेंगे जैसे छाती कंधा पसलियां पेट आदि। बस सिर्फ अपनी श्वास पर अपना ध्यान केंद्रित करें बिना उसकी गति या तीव्रता को नियंत्रित किये गहरी सांस ले गहरी सांस लेने के साथ साथ ही नाड़ी शोधन प्राणायाम अवश्य करें।

इससे रक्त वाहिकाओं मे रक्त पवाह को बेहतर बनाने वाले योग करना हमेशा अच्छा होता है। ध्यान करते समय अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट रखें। इससे आपको आराम शांति और ध्यान में मन लगाने में मदद मिलती है। बैठकर ध्यान करते वक्त अपनी आंखें बंद रखें। इससे ध्यान करते समय मन नहीं भटकता। अभ्यास खत्म होने के बाद धीरे-धीरे अपनी आंखें खोले। मन के अब अपने अंदर आई स्फूर्ति  को महसूस करने की कोशिश करें।

आपको ताजगी का एहसास होगा। ध्यान द्वारा मानसिक शक्ति को केंद्रित तथा नियंत्रित किया जा सकता है। जिससे अनेक शारीरिक तथा मानसिक रोगों से छुटकारा मिल जाएगा इसके द्वारा अपने स्मरण शक्ति को भी विकसित किया जा सकता है इसके द्वारा संकल्प शक्ति का विकास करके अपने क्रोध को द्वेष आदि को दूर करके मानसिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है।

ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति का जीवन पूर्ण तथ ाध्यान के अभ्यास से व्यक्तिगत जीवन को नियंत्रित तथा सयमित भी होता है। ध्यान के परिणीति यही है कि हम सभी अपने स्वरूप में स्थित हो जाएं मेडिटेशन के बिना हमारे मन बुद्धि कर्म जीवन सभी में अंधकार रहता है ध्यान अभ्यास करने से हमारा शरीर पूरी तरह से शांत हो जाता है और हमारा समस्त तनाव दूर हो जाता है।

ध्यान पर किए गए परीक्षण बताते हैं कि ध्यान अभ्यास के दौरान हमारे दिमाग की तरंगे धीमी होकर 4 से 10 हर्टज पर काम करने लगते हैं। जिससे कि हमें पूरी तरह से शांत होने का एहसास मिलता है। इससे हमारे शरीर को भी अनेक लाभ मिलते हैं जैसे बेहतर नींद आना रक्तचाप में कमी आना, रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन प्रणाली में सुधार और दर्द के एहसास में कमी आना ।

यह सभी लाभ ध्यान से हमें अपने आप ही मिलने लगते हैं। जब भी आप व्यवस्था और भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं तब ध्यान से आप को शांति मिलती है। 

योगिनी अलका सिंह, योगा एक्सपर्ट, दिल्ली
Health
  • This technique reduced recovery time from 6 months to 3 months
  • Treated organ can resume a normal movement
  • Cost of surgery has been reduced

Jaipur: Ice Cream stick technique has emerged as an advance procedure of treating patients suffering from Ewing sarcoma (bone cancer in left leg). With the help of this technique, it is possible to eliminate bone cancer using liquid nitrogen.This unique surgery has been performed by Ortho Oncologist Dr. Praveen Gupta & anesthesiologist Dr. Soumi Hazra Chaudhuri and her team at Bhagwan Mahaveer Cancer Hospital and Research Center. The surgery was conducted on a 40-year-old patient, without separating the bone from his body.

Dr. Praveen Gupta

Dr. Praveen Gupta informed that Radiotherapy and artificial bone (Implant)procedures are primarily used in bone cancer patient’s surgery.Ice cream stick technique is one of the advanced procedures in which a part of the cancerous bone is cut from one side, safely turning it outside. That bone is than kept in liquid nitrogen for 20 minutes at 160 ° C. Due to hightemperature, the cancer cells present in the bone are completely destroyed. After removing the bone from liquid nitrogen doctor’s team wait for 40 mints allowing the bone to attain normal temperature and later it is rejoined to the patient’s body. Just after 48hrs of the surgery the patient is able to walk and can start working with the help of walking stand.

Usually in case of artificial bone, it takes 9 to 12 months to reattach, but with this technique bone takes just three months to regain the original strength.Dr. Praveen Gupta further added that radiation technique for treating bone cancer can take up to 6 hours of surgery while this innovative technique only 4 hours of surgery can lead to wonderful results. Besides, the surgery for artificial bone (implant) can cost up to Rs 6 to 7 lakh, while this techniquehas substantially reduced it to just 1.5 to 2 lakh .

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राजधानी दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल में मरीजों के लिए प्राइवेट ओपीडी की सुविधा वापस शुरू कर दी गई हैं। कोरोना मरीजों की बढती संख्या को देखते हुऐ ओपीडी सेवा बंद थी। पर अब अन्य मरीजों की दिख्कत को समझते हुऐ बाह्यरूग्ण सेवा (ओपीडी) शुरू की हैं। इस कारण अब मरीज डॉक्टर के पास इलाज के लिए आ सकेंगे।

दिल्ली (प्रतिनिधी) –

Covid19 मरीजों की बढती संख्या को रोखधाम के लिए सामाजिक दूरी और व्यक्तिगत स्वच्छता एकमात्र तरीका हैं। दिल्ली में अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल सभी आवश्यक एहतियात बरत रहा हैं। और covid 19 संक्रमण की रोकथाम के लिए कठोर सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ अपने बाह्यरूग्ण व आंतररूग्ण सेवाओं को प्रदान कर रहा हैं।

डॉक्टर के साथ अपॉइंटमेंट फिक्स करने से पहले मरीजों को कुछ सवालों के जवाब देने होंगे। अन्य रोगियों और अस्पताल की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए एक प्रक्रिया से पहले वैद्यकीय परीक्षण किया जाऐगा।

इस बारे में कहते हुऐ अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ. नवनीत कौर ने कहॉं की, covid19 एक संक्रामक बीमारी है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए यह बीमारी आम है। वृद्ध व्यक्तियों, मधुमेह के रोगी, हृदय रोग, गुर्दे की बीमारी वाले लोग इस बीमारी के लिए सबसे अधिक जोखिम हैं। इन लोगों की बीमारी गंभीर हो सकती है अगर उन्हें तुरंत ध्यान नहीं दिया जाता है। इसलिए, इन रोगियों के निदान और उपचार की तत्काल आवश्यकता है। इसे देखते हुऐ ओपीडी सेवा शुरू कि हैं। इस के अलाव ऐसे रोगी को घर के अंदर रहना चाहिए, सामाजिक दूरी बनाए रखना चाहिए, स्वस्थ भोजन करना चाहिए, हाइड्रेट करना चाहिए और बुनियादी स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। ”

डॉ. अनिल रहेजा ने कहॉं की, “गुणवत्ता से जुड़े हर एक प्रोटोकॉल का पालन अस्पताल द्वारा किया जाता है। मरीजों की सुरक्षा के लिए पूरे अस्पताल को साफ कर दिया गया है। प्रवेश द्वार पर सभी के लिए ट्रिपल स्क्रीनिंग की गई है जिसमें थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजिंग के साथ तापमान जांच शामिल है। आईपीसी (संक्रमण निवारण नियंत्रण) का पालन किया जाता है। कर्मचारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और द इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारे दी गए प्रोटोकॉल का पालन करते हैं, जैसा कि सरकार के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा घोषित किया गया है।’’
अस्पताल आने से पहले इन बातो पर ध्यान दे….

  • प्रवेश द्वार पर स्व-मूल्यांकन COVID चेकलिस्ट भरें
  • बील के भुगतान ऑनलाईन करे
  • अपनी निर्धारित नियुक्ति के लिए समय पर पहुंचें
  • केवल एक मरीज के लिए प्रवेश, यदि आवश्यक हो तो प्रति मरीज केवल एक परिवार के सदस्य की अनुमति है
  • अपने वाहन / प्रतीक्षालय में व्यक्तिगत सामान जैसे बैग आदि रखें और अपना मास्क और पेन साथ रखें
  • सामाजिक दूरी बनाए रखें।
  • ओपीडी के मरीज सामान्य वॉशरूम के इस्तेमाल से बचें
  • सीढ़ी, लिफ्ट बटन आदि जैसे उच्च स्पर्श वाले क्षेत्रों से बचें
  • वैद्यकीय जाचं रिपोर्ट ऑनलाइन प्रकाशित की जाएगी
  • बेहतर देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृपया अपने विवरण के बारे में पारदर्शी रहें

अपनी अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ अस्पताल का उद्देश्य विश्व स्तर की चिकित्सा सेवाओं और रोगियों की सेवा के लिए सर्वोत्तम स्वास्थ्य प्रबंधन प्रथाओं को एक साथ लाना है। इसलिए, अनुभवी डॉक्टरों से नवीनतम उपकरण और विशेषज्ञता के साथ, अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल रोगियों को बीमारियों से निपटने, उनके जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और गुणवत्ता उपचार प्रदान करने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Health

There is a substantial risk to the health and wellbeing of Indian people with the Indian medical system reeling under the pressure of the coronavirus crisis. With growing fear and uncertainty, blood donations have rapidly fallen. Keeping this crisis in mind, Healthians, India’s largest doorstep health test provider, has launched a free to all service on its app to connect blood donors with the receivers and their families in need.

Healthians started this noble service after realising the fact that over 80000 blood samples get collected by them in a month. The recently launched platform by Healthians can be a boon for those in need of blood donation due to medical or accidental emergencies, even if just 10% of the people using Healthians service give their consent to become a donor.

The service includes a free blood group test and requires the consent of a person to become a donor. Once the results arrive back from the lab, a consenting person gets added to the donor list, and any user in need can reach out to donors either by direct contact or via the app.

” The whole idea started with a thought that we have been collecting thousands of blood samples every day since last few years, the few ml of blood which is today collected for a purpose of doing a diagnostic test could have another meaningful contribution to the society at large by agreeing to be a Donor without an extra effort. This was itself so motivating that we started working on it.”, said Deepak Sahni, founder, Healthians.

Many medical services and personnel are under high stress and stretched to their limits due to the pandemic. People, in general, are reluctant even to seek medical attention for their health. So, keeping an expectation from the populace to donate blood voluntarily at hospitals is unrealistic and highly improbable. To tackle this scenario, Healthians has fast-tracked its plan of integrating blood donation services in its app. This service will bring a sigh of relief to those who might require urgent donation and will save many lives.

The process of connecting the Donor to the receiver is very straightforward. Healthians phlebotomists take the consent of the patient for agreeing to be a Donor and add a free blood group test for the customer who consents to be a Donor. Post sample results, the Donor is added to the list with a verified blood group

Anyone using the Healthians app who might need blood donation can raise a request for a specific blood group and give their details. The app will automatically connect the receiver to all nearby donors via chat or phone almost immediately.

This service has registered over 1480 donors with over 41 requests has been raised for the requirement of 100+ units of blood in just a week from its launch, and Healthians is hopeful that these numbers will see a parabolic rise in its adoption by their users. As an add-on, the user will also get a free blood group test and has complete control of their privacy. A donor has the option to either directly contact the receiver or to be contacted only through the app once the receiver consents to help.

Personnel from the company informed that the service would also lead to a new user base for the app. It is a very noble initiative in need of acknowledgement and participation from Indian society. Whether you are an employee working in essential services, a concerned citizen practising social distancing or a frontline corona warrior, the need of the hour is to work together and help wherever necessary.

Healthians has had a rich history regarding innovative healthcare services since its inception in 2015 and presently is the fastest at-home diagnostic service in India with a wide range of tests and health packages. In recent months, owing to the situations created by the COVID-19, Healthians has expanded its horizons and launched services like COVID-Chatbot and Drive through COVID Sample Collections.

Health

– Dr. Bimal Chhajer, Director of SAAOL Heart Center

While the COVID pandemic has created panic all around the world, taking away many lives and containing many infected. Yet Heart ailments are one of the leading causes of mortality and morbidity, which is still underestimated. Till today heart disease remains the most common cause of death in most of the countries of the world.

The numbers of COVID infected people has crossed 2.56 lacs and Deaths more than 7,000. Everywhere there are instructions about how to avoid getting infected – social isolation, sanitization, hand washing, avoiding handshakes and so on. People are worried about themselves getting infected and avoiding the chances of Death.

The recent data suggests that over 70 lac globally have been infected till now out of which around 4 lac have lost their lives. India attributes to around 2.56 Lac infected persons with a mortality of around 7000. This in comparison to Coronary Artery Diseases (CAD) and other heart ailments is very low.

Globally over 20 crore people annually are being diagnosed with CAD and 2 crore have lost their lives, which accounts to 10% mortality rate. India alone accounts for 6 crore people having some form of heart disease with a mortality rate of 35 lac per annum. India is the present-day leader in the whole of the world so far as the number of heart patients is concerned and the number of heart patients are still on the rise. It is estimated that around 9000 per day lose their lives and the count is still increasing Said Dr Bimal Chajjer Director ,SAAOL Heart Center 

Evidently, the rate of mortality due to COVID is restricted to within 2% whereas heart diseases kill over 10%, and still neglected. There are 8-10 crore (80-100 million) heart patients in India and every 10 seconds one person dies of heart disease in this country. Hospitals in India perform more than 2 lakh open heart surgeries annually and are increasing annually by 25%. But the cases of heart attacks are not going down. The surgeries done are only palliative. Educating the masses about Heart disease and its risk factors is important to eradicate the casualties from the root. The Science of Cardiology is failing.

This raises a big question mark on the use of unnecessary Angioplasties and Bypass surgeries in India and the 10,000 Heart Hospital Industry driven by the greedy Heart Surgeons and Interventional Cardiologists. In India more than 5 lac stents are being put every year and some 60,000 Bypass surgeries are being done in the heart Hospitals and 85% of them are done on stable heart patients – which can be easily avoided.

Present day Cardiologists are in the wrong track by emphasizing more use of Bypass surgery or Angioplasty, medicines, emergency treatments – but they are overlooking the real cause of heart attack and heart disease. If all of them work by removal of the cause of heart disease  – namely diet, exercise, Yoga, stress Management  – we can control the spread of heart disease as well as work towards Eradicating heart disease.

Yoga and Diet based Lifestyle management along with Optimum Medical Management is the key to the solution of heart diseases. Not only that they are highly effective for healthy heart, but also prevent Bypass surgery or Angioplasty.SAAOL (Science and Art of Living) has been treating heart patients for the last 25 years successfully and its theory is now being proven correct by the most modern medical research. To avoid heart attack all the patients need is a through training on lifestyle and cover of Allopathic medicines.

Cardiac ailments being a lifestyle related ailment and hence the treatment should also be focused in the same direction. While cardiac ailments remain to be a growing burden in the Indian society, affecting millions of people and the economy of the country, it is time to eradicate them from the root.

The eduVaccine revolves around the concept of ‘Reversal of heart diseases’ through regular monitoring of heart health through a ‘SAAOL Safety Circle’ which can guide every adult of the country to take steps to reverse and prevent heart disease. This technique has benefitted over 2 lakh heart patients in the past 24 years with non-invasive treatment modules like lifestyle change, US FDA approved EECP and a combination of Ayurveda, Homeopathy, Naturopathy, and Detoxification. With the development of the SAAOL Safety circle which is the best indicator of the heart health has benefitted many to prevent future heart complications.  It has three circles and 12 factors to control, six parameters related to medical and four each related to healthy diet and lifestyle habits.

Health

Delhi Government : दिल्ली सरकार के नए आदेश के बाद अब 10-49 बेड वाले उन अस्पतालों और नर्सिंग होम को पूरी तरह से कोविड फैसिलिटी यानी कोरोना इलाज केंद्र में तब्दील कर दिया जाएगा.

दिल्ली सरकार delhi government news ने बढ़ते कोरोना संकट के बीच आदेश दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी में 10-49 बेड वाले अस्पताल और नर्सिंग होम कोविड फैसिलिटी में तब्दील किए जाएंगे. दिल्ली सरकार delhi government news का यह आदेश उस आदेश के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि 50 बेड वाले अस्पतालों को अपने 20 फीसदी बेड कोरोना मरीजों के लिए सुरक्षित रखने होंगे.

 हाई कोर्ट का आदेश

बता दें कि 11 जून को दिल्ली हाई कोर्ट delhi high court ने भी सभी प्राइवेट अस्पतालों को 20 फीसदी बेड कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व करने के लिए कहा था. कोर्ट ने अस्पतालों को निर्देश delhi government news दिया है कि सभी मरीजों का कोरोना टेस्ट करें, चाहे उनमें सिम्पटम हो या ना हो. लेकिन अन्य बीमारी से ग्रस्त लोगों के इलाज से करोना के नाम पर इनकार नहीं कर सकते हैं.

ऑक्सीजन बेड बनाने का आदेश

इससे पहले, दिल्ली सरकार ने सभी कोविड डेडिकेटेड अस्पतालों को ऑक्सीजन बेड बनाने का आदेश दिया था. संक्रमितों की संख्या में हुई वृद्धि के बाद आईसीयू बेड और ऑक्सीजन बेड की बढ़ी मांग को देखते हुए दिल्ली सरकार ने ये आदेश जारी किया था.

दिल्ली सरकार delhi government news ने सभी कोविड डेडिकेटेड अस्पतालों के मेडिकल डायरेक्टर को निर्देश दिया कि जहां पाइप के जरिए ऑक्सीजन सप्लाई नहीं है, वहां ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर या ऑक्सीजन सिलेंडर के जरिए सप्लाई की व्यवस्था की जाए.

जरूरी इक्विपमेंट की खरीद का खर्च दिल्ली स्टेट हेल्थ मिशन delhi government news के कोविड फंड से होगा.