July 28, 2021
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Body के अन्‍य अंगो की तरह हमारे Hair भी हमें ये सूचना पहले ही दे देते हैं कि अब Hair की ख़ास Care का वक्‍त आ गया है। केवल मौसम का बदलाव और ध्यान ना रखने की वजह से ही हमारे बाल नहीं गिरते हैं, बल्कि बाल झड़ने की वजह कई साइलंट डिजीज भी होती हैं। यहां पर हम आपको ऐसे 10 संकेत बता रहे हैं, जो बताते हैं कि अब आपको Hair की ख़ास Care की ज़रूरत है।
जब आपको अपने बाल अपनी उम्र से एक क़दम आगे लगने लगे, जैसे- बालों के रंग में बदलाव नज़र आए या फिर बालों के ट्रेक्सचर में फ़र्क महसूस हो, तो समझ लीजिए कि आपके बालों को मेकओवर की ज़रूरत है।

  • बाल जब दो मुंहे हो जाते हैं, तो बालों की ग्रोथ थम जाती है। ऐसी स्थिति में हेयर मेकओवर के लिए ट्रिमिंग एक बेहतरीन विकल्प है। इससे न स़िर्फ बाल घने नज़र आते हैं, बल्कि बालों की ग्रोथ पर भी असर होता है।
  • बाल जब अंदर से अस्वस्थ होते हैं, तभी वो बाहर से पतले और कमज़ोर नज़र आते हैं। मतलब जब आपके बाल पतले नज़र आने लगे तो समझ लें कि बालों को न स़िर्फ मेकओवर की, बल्कि ऑयल और प्रोटीन की भी ज़रूरत है।
  • रूखे और बेजान बाल भी मेकओवर की मांग करते हैं, ताकि मेकओवर की बदौलत उनमें नई जान डाली जा सके। अतः आपके बाल जब बेजान नज़र आएं, तो हेयर मेकओवर के लिए तैयार हो जाएं।
  • जब आप यूं महसूस करें कि आपकी पोनी का शेप वी शेप नज़र आने लगा है यानी आपके बाल ऊपर से मोटे और नीचे से पतले लगने लगे हैं या फिर शेपलेस नज़र आ रहे हैं, तो समझ लें कि हेयर मेकओवर का वक़्त आ चुका है।
  • झड़ते हुए बालों को रोकने के लिए आप हेयर मेकओवर की मदद ले सकती हैं। इसके लिए बहुत अधिक कुछ करने की ज़रूरत नहीं, बस एक बार बालों को ट्रिम करवा कर दिखें, हो सकता है बालों का झड़ना कम हो जाए।
  • हालांकि कलर किए हुए बाल बेहद ख़ूबसूरत नज़र आते हैं, लेकिन जैसे-जैसे कलर फीका पड़ता जाता है, बालों की सुंदरता भी कम होती जाती है। जब आपके बालों के साथ भी कुछ ऐसा होने लगे, तो हेयर मेकओवर से अपने बालों को फिर से अट्रैक्टिव लुक दें।
  • सुनने में अजीब ज़रूर लगता है, लेकिन ये बात सच है कि बालों को ट्रिम करवाकर भी आप डैंड्रफ से छुटकारा पा सकती हैं, लेकिन ख़ासकर तब जब बालों में डैंड्रफ की वजह कैमिलकयुक्त लोशन या हेयर ट्रीटमेंट हो।
  • आपके बाल बेहद ख़ूबसूरत हैं… आपके बालों की स्टाइलिंग का लाजवाब है… यदि ऐसी तारीफ़ सुनें कई महीने बीत गए, तो हेयर मेकओवर के लिए थोड़ी भी देरी न करें।
  • हेयर स्टाइलिंग कॉन्फिडेंस बूस्टर से कम नहीं, इस बात को हमेशा ध्यान में रखें और जब भी आत्मविश्‍वास में कमी महसूस हो, तो बेहतरीन हेयर मेकओवर से अपना खोया हुआ आत्मविश्‍वास वापस ले आएं।

Lifestyle

   

(BY Fitness Expert and Nutritionist, Hasti Singh)

As India is setting a grim record for the rising cases of the Covid-19 pandemic, and with the ongoing shortage of oxygen in the country, it has become really important to take care of your lungs, so that they can function well and improves your breath. 

  Breathing exercises are helpful as they can save your precious time and hard earn money from going into the hands of hoarders. Also, these exercises soothe your senses and help in concentration. Just follow these exercises daily and you won’t be needing the highly expensive cylinders and oxygen concentrators.

Ujjayi Pranayama or Ocean breath

Derived from the Sanskrit word, “Ujjayi”, Ujjayi Pranayama means to conquer something. It helps in relieving stress, tension and anxiety and also improves the functioning of the lungs. In this exercise, you have to take a deep breath from both the nostrils and half-closed glottis. Just sit down on the mat in any meditative pose keeping your eyes closed and spine straight. Breathe in and out through your mouth, feeling the air passing through your windpipe. Once you are comfortable with your exhales, contract the back of your throat to constrict the passage of air. You would hear a sound from your throat while breathing. Once, you are done with the exhaling process, do the same while inhaling. When you can contract your throat while both inhaling and exhaling, close the mouth and start breathing through the nose. Fill your lungs, hold your breath for a while and then exhale.

Kapalbhati Pranayama
It is quite a popular exercise and the credit goes to yoga guru, Baba Ramdev. It is not that tedious or difficult exercise and helps a lot to increase the focus. It not only helps in improving breathing but also strengthens the muscles of the lung. Sit on a mat and tuck your knees one over the other. Place your hands on the knees, with palms upwards and back to be straight. Breathe deeply through your nostrils and as you release,  pull your navel and abdomen back towards the spine. Exhale in steady motion through your nose relaxing your navel and abdomen. Do this at least 10 times then exhale and inhale slowly.

Belly Breathing

Called diaphragmatic breathing, it encourages complete oxygen exchange. This type of breathing helps in stabilising the blood pressure. It also helps in reducing stress and overcome the problem of insomnia. Lay on your bed and place a pillow under your head and knees.

 Place one hand on your naval and other on your heart.

Breathe through your nostrils and feel the movement of your belly while gushing out all the air out of it.

TIGHT LIPS BREATHING

In this exercise, you breathe in through your nose and releases air by tightening the lips. When you feel short of breath, this process will help you to fill oxygen into your lungs and calms you so that your breathing becomes easy.

Sit down in a relaxing position with your back straight and your hand placed on your knees. Inhale through your nose for a few seconds and try to fill your stomach with the air, instead of your lungs.

 Now close your lips and breathe out slowly for 4 to 6 seconds.

Repeat the same 5-10 times.

   

Lifestyle

 Corona virus has placed the world on its knees and the calamity is still on the rise. With the third wave knocking at the door, people have become more cautious and is doing every little thing to keep this menace at bay. As it is said that when nothing works, faith in God and trust is the only way out, many individuals have taken resort to astrology and other occult practices to find when will this pandemic end.

Though this is an uncertain question but Dr. Acharya Vinod Kumar Ojha, who is a renowned and celebrity astrologer and Vaastu Consultantbased in Delhi has predicted that “Corona will start losing its effect from the end of the July and we all need to be more alert in the month of the July as this is the time when corona would be more powerful.”  This is happening because of Rahu transiting in Taurusand retrograde of Pluto, said Acharya Ojha.

Since planetary movements is not in our hand but we can follow some astrological advice as told by the experts apart from the government mandate.

• Make a swastika symbol with red vermilion and place it at the entrance of the main gate. The Swastika symbol will protect you from any negativity and will act as a protection.

• Cleanliness is the priority and one should mop the floor using rock salt in water at-least twice a day.

• Chant Navarna Mantra to stay positive during these tough times.

• Numerology also has a special significance and the biggest problem that people face during Corona is negativity. Write these numbers below with blue ink on your left palm to feel at ease during pandemic.

o 42 41 750

o 71 72 510

o 13 13 514

o 24 27 483

TIPS FOR AFFECTED FAMILY MEMBER

• Chant The Mahamrityunjay Mantra or the Kunjitha Padam Saranam.

• Place a symbol of swastika or write the Mahamrityunjay Mantra on a piece of paper and place it under the bed of the affected person to provide relief.

  • Also be sure to place the head of the ill person towards the East and use only black salt or rock salt in his food.

Moreover, one should stay positive during these tough times and should not loose hope. Remember bad days are not forever and after every dark night it is the dawn that brings hope and aspirations with it.

Health Lifestyle

मुंम्बई से लेकर विदेशियों तक काे रास आ रहा हिसार की पूनम कपूर द्वारा तैयार डाइट फूड्स , डाइट जूस और जूस पाउडर, डायबिटिज से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने भी सहायक एचएयू के एबिक सेंटर से टैकिनकल ट्रेनिंग की मदद से काम को देस के हर कौने तक पहुँचा ने की तैयारी है हर माह कमा रहे डेढ़ लाख

मुम्बई के अर्नकोर ग्रूप ऑफ होटेल्स में रिसर्च एंड डवलपमेंट हेड के पद से छाेड़ी थी नाैकरी

हिसार शहर के पीएलए में रहने वाली पूनम कपूर ने मुबई के कॉर्पोरेट से रिसर्च एंड डवलपमेंट हेड के पद से नाैकरी छाेड़कर खुद का स्टार्टअप तैयार करने की ठानी। कई साल की मेहनत के बाद पूनम ने डाइट फूड्स , जूस पाउउश्र और हेल्दी पाउडर तेयार किए | जूस पाउडर जहां 9 माह तक खराब नहीं हाेता है। वहीं डायबिटिज से लेकर ब्लड प्रेशर, हार्ट की समस्या से भी निजात दिलाने मे सहायक है। यही नहीं इम्यूनिटी बढ़ाने में भी सहायक है। पूनम द्वारा तैयार प्राेडक्ट की अब मुबई से लेकर विदेशों तक में धूम है। एचएयू के एबिक सेंटर से पूनम ने प्राेडक्ट तैयार करने की ट्रेनिंग ली थी। एचएयू के कुलपति प्राेफेसर समर सिंह ने भी पूनम के प्राेडक्ट की सराहना की है।

पूनम मूल रुप से हिसार के पीएलए की रहने वाली है। पूनम ने बताया की उसने जीजेयू से ही एमएससी की पढ़ाई की थी। इसके बाद ब्रिटानिया समेत विभिन्न स्थानाें मे कार्यरत रही। वर्ष 2010 में मुंबई के बड़े कॉर्पोरेट में रिसर्च एंड डवलपमेंट हेड के पद पर तैनात थीं मगर कुछ अलग करने की चाह में वर्ष 2010 में पूनम ने नाैकरी छाेड़ दी तथा पूनम कपूर हेल्दी किचन की शुरुआत एक व्यक्ति से की। अब 50 से अधिक लाेग पूनम के साथ जुड़े है | पूनम ने बताया की उसने ऑर्गॅनिक तरीके से व्हीट ग्रास, तिल, नींबू, सतावरी आदि के माध्यम से डाइट फूड्स, जूस पाउडर तैयार किया | जाे ब्लड प्रेशर राेकने में भी सहायक है। साथ ही डायबिटिज की समस्या का भी समाधान करता है। खासियत यह है की फूडस का काेई साइड इंफेक्ट भी नहीं है।

पूनम का कहना है की जापान, न्यूजीलैंड से भी प्राेडक्ट की डिमांड आती है। बताया क़ी जल्द ही हरियाणा में व्यापक स्तर पर हेल्दी किचन काे शुरू कराया जाएगा। ताकि लाेगाें काे स्वस्थ्य रहने के बारे में भी टिप्स दिए जा सके।

विशेष प्रकार का एप करा रहे तैयार, डाक्टर भी कर रहे मांग

पूनम ने बताया की हेल्दी फूड्स, जूस पाउडर काे विभिन्न स्थानाें तक पहुँचाने के लिए जल्द ही एप तैयार करा रहे है। ताकि लाेग एक क्लिक पर पाउडर के बारे में जानकारी हासिल कर सकें साथ ही खरीद कर प्रयाेग में भी ला सकें। हरियाणा के डाक्टर भी जूस पाउडर की मांग कर रहे है।


एचएयू के कुलपति ने भी पूनम के स्टार्टअप काे सराहा

पूनम द्वारा तैयार हेल्दी प्राेडक्ट, जूस पाउडर विभिन्न राेगाें पर अंकुश लगाने में भी सहायक है। एचएयू के एबिक सेंटर से ही पूनम ने ट्रेनिंग ली थी। अन्य काे भी पूनम से प्रेरणा लेनी चाहिए- प्राेफेसर समर सिंह, कुलपति, एचएयू

https://poonamkapur.com

Lifestyle

After shrinkage in the previous 2 quarters, the microfinance sector saw a quarterly growth of 1.18% to reach ₹226.6K crore as of Dec 2020. The live customer base also witnessed recovery, although 7% lower than Dec 2019. Coming into Q3 FY 2020-21, repayments continue to be stressed since the end of the moratorium period.

Captured below are the key observations from the report:

  • The GLP of the microfinance sector showed signs of recovery with a 1.18% increase in GLP as of Q3 FY 2020-21, standing at ₹226.6K crore as of Dec 2020.
  • With a nearly 80% increase over the previous quarter, disbursements by value stood at ₹56090 crore, still 11.5% lower than Q3 FY 2019-20.
  • By volume, disbursements in Q3 FY 2020-21 almost doubled, compared to the previous quarter standing at 175 lakh and only 4% lower than pre-pandemic disbursements in Q3 FY 2019-20.
  • 20.1% of the disbursements in Q3 FY 2020-21 were of small ticket loans (<=10K) due to loan restructuring and new loans given out as part of guaranteed emergency credit.
  • Repayments continue to be stressed in the 4 months since the end of the moratorium period. Fresh delinquencies (PAR 1-30%) are at 8.3% and PAR 31-180% has increased to 12.7% as of Dec 2020.
  • For the current/good portfolio (0 DPD), collections have improved with the monthly forward flows reducing by nearly 10% between Sep 2020 and Dec 2020.

CRIF’s Views:

The microfinance sector in India has traversed a turbulent journey in this financial year. After witnessing degrowth in the gross loan portfolio in the consecutive first two quarters, the sector experienced green shoots of recovery in the third quarter, with a growth in GLP albeit at only 1.18% over the previous quarter. As markets opened up and operations resumed in Q2 FY 2020-21, disbursements have picked up pace. Digitalisation has gained recognition with more lenders in the customer onboarding stage. Coming into Q3 FY 2020, disbursements further increased, striding towards pre-pandemic levels. 1 out of 5 loans disbursed in Q3 FY 2020-21 is of <=10K, due to loan restructuring and new loans given out as guaranteed emergency credit to manage pandemic induced stress. 

This current disruption has had a huge impact on household incomes of individuals including a large number of microfinance borrowers leading to sub-optimal collection efficiencies for the sector. The post moratorium period witnessed high defaults which have continued to flow into Q3 FY 2020-21. The eastern states of West Bengal and Assam hit by the dual impact of the pandemic and natural calamities, including flood and cyclone have witnessed maximum repayment stress as of Q3 FY 2020-21. The Assam Microfinance Institutions (Regulation of Money Lending) Bill 2020 has been introduced to regulate MFI operations and ease stress in the sector. The COVID 19 pandemic although of incomparable magnitude, is not the first of such crisis faced by the microfinance sector in India. Experts believe that the sector, as in the past, has the resilience to overcome challenges posed by this crisis as well. For greater sustainability and growth in the new normal, microfinance lenders will need to rapidly adapt to the changing business environment, levering digital technologies and data analytics in their business processes.

Lifestyle

पिछली दो तिमाहियों के दौरान आई गिरावट के बाद, माइक्रोफाइनेंस के क्षेत्र में तेजी आई है। दिसंबर 2020 की तिमाही में 1.18 फीसदी की वृद्धि के साथ यह 226.6 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान ग्राहकों की संख्या में भी रिकवरी देखने को मिली, हालांकि दिसंबर 2019 के मुकाबले यह सात फीसदी कमजोर रहा। मोराटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही के दौरान पुनर्भुगतान की स्थिति दबाव में दिखी।

रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में नीचे बताया गया है :

  • वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के जीएलपी (ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो) में 1.18 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ रिकवरी के संकेत देखने को मिले। दिसंबर 2020 तक माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री 226.6 हजार करोड़ रुपये की रही।
  • पिछली तिमाही के मुकाबले डिस्‍बर्समेंट में 80 फीसदी की तेजी आई और यह 56090 करोड़ रुपये रहा। हालांकि यह वित्‍त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के मुकाबले 11.5 फीसदी कम है।
  • वॉल्यूम के आधार पर देखा जाए तो पिछली तिमाही के 175 लाख रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट दोगुना रहा, जो कोरोना महामरी से पूर्व वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के मुकाबले मात्र चार फीसदी कम है।
  • वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट का 20.1 फीसदी हिस्सा छोटे कर्ज (दस हजार रूपये से कम) का रहा और इसकी वजह कर्ज पुनर्गठन और गारंटीड आपातकालीन ऋण के हिस्‍से के रूप में दिए गए नया लोन रहे।
  • मोराटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद भी चार महीने पुनर्भुगतान दबाव में दिखा। दिसंबर 2020 में कर्ज के शुरुआती भुगतान में चूक (पीएआर 1-30 फीसदी) 8.3 फीसदी रहाजबकि पीएआर 31-180% में 12.7 फीसदी का इजाफा हुआ।
  • करंट/गुड पोर्टफोलियो (0 DPD) के मामले में संग्रह में सुधार देखा गया और इसकी वजह से सितंबर 2020 से दिसंबर 2020 के दौरान मासिक फॉरवर्ड फ्लो में करीब 10 फीसदी की गिरावट रही।

सीआरआइएफ का नजरिया:

इस वित्त वर्ष भारत में सूक्ष्म वित्त क्षेत्र यानी माइक्रोफाइनेंस की यात्रा काफी उतार चढ़ाव वाली रही है। लगातार पहली दो तिमाहियों में ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो (जीएलपी) में गिरावट के बाद तीसरी तिमाही में इस क्षेत्र रिकवरी के संकेत नजर आ रहे हैं। पिछली तिमाही के मुकाबले मौजूदा तिमाही में जीएलपी में हुई 1.18 फीसदी की बढ़ोतरी इसका प्रमाण है। वित्त वर्ष 2020-21 में बाजार के फिर से खुलने और गतिविधियों के सामान्य होने की वजह से डिस्‍बर्समेंट में तेजी आई। ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ ही डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में तेजी आई है और इसे कर्ज देने वाली संस्थाओं ने मान्यता प्रदान की है। वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट में तेजी आई है और यह पूर्व-महामारी के स्तर की ओर धीरे-धीरे बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में वितरित किए गए पांच में से एक लोन दस हजार रूपये से कम के रहे और इसकी वजह कर्ज पुनर्गठन और महामारी की वजह से पैदा हुए आर्थिक तनाव के प्रबंधन के लिए गारंटीड आपातकालीन ऋण के रूप में दिए गए नए लोन्‍स रहे।

कोविड-19 के कारण पैदा हुए मौजूदा व्यवधान ने लोगों की घरेलू आय को बुरी तरह से प्रभावित किया है जिसमें बड़ी संख्या में माइक्रोफाइनेंस लेने वाले लोग शामिल हैं। इसकी वजह से इस माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र के संग्रह में गिरावट देखने को मिली। मोराटोरियम की अवधि खत्म होने के बाद की अवधि के बाद भुगतान के मामले में अधिक चूक देखी गई, जो वित्त वर्ष 2020-21 में जारी है। पूर्वी राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में बाढ़ और चक्रवात सहित महामारी और प्राकृतिक आपदाओं के दोहरे प्रभाव की वजह से वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में भुगतान के मामले पर सर्वाधिक दबाव देखा गया। असम माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (रेग्युलेशन ऑफ मनी लेडिंग) विधेयक 2020 को माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं के संचालन को विनियमित करने और इस क्षेत्र में मौजूद तनाव को कम करने के लिए पेश किया गया है। कोविड 19 की वजह से यह क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ है लेकिन भारत में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के लिए यह पहला संकट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह क्षेत्र पहले की तरह इस बार भी चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटने में कामयाब होगा। नई सामान्य स्थिति में स्थिरता और आर्थिक तरक्की के लिए माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं में डिजिटल टेक्‍नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स का लाभ उठाते हुए तेजी से बदलते कारोबारी माहौल के अनुकूल अपने आप को ढालने की जरूरत होगी।

Lifestyle Social Heros

Today, society as a whole is facing a horrible crisis, it’s a debate on the problem of not only India, but the world as a whole, in the last 50 years, the prevalence of chemical farming in the world as a whole is very high, and the outcome is now before us. The farmer is still upset because of this chemical farming, because the entire land is barren and population is sick after consuming chemical food, now this is high time to set the target of reforming this risky process.

10 year back Sunil Sharma, engineer by profession decided to do something for change and decided to put his contribution towards this revolution.

Journey of Engineer to Farmer

Er. Sunil Sharma, Organic Farmer, Haryana

Sunil Sharma, after completing his graduation in civil engineering joined college as lecturer and started his professional life. But there was a farmer inside him was feeling restless with the over usage of chemical in agricultural production.

So, he resigned from his job and decided to do organic farming. Lets understand what he says about his experiences of 10 years.

10 years of organic farming:

We have inspired thousands of farmers over the past 10 years and turned them into organic farming. Thousands of young farmers are eager to join us in this journey. In the last 10 years, though we have been focusing on organic farming, we have understood three topics in detail.

  • First of all, farmers do not get fertiliser on time because they fear that leaving chemical farming will cause them a huge loss, and if they grow organic, they will not be able to find a buyer.
  • Second, while society as a whole suffers from dangerous diseases from the ingestion of chemically produced produce, pure food cannot be found anywhere.
  • Third, culture is ill and is utterly distressed by the side effects of allopathic drug consumption. And people want a solution from anywhere, so that they can naturally get rid of these issues.

We have now agreed to provide society with a forum after a decade where all the challenges can be addressed in a single window. Now we’re going to connect all of these segments with each other after a long period of experience.

  1. It is supplied with bio fertilisers, insecticides, pesticides and fungicides. And proper consultancy is provided at no cost.
  2. Farmers will be supplied with the consumer demand by the time they can get decent prices of their goods and at the same time customers will be eased with those products.
  3. A forum for medical facilities would also be created where everyone will benefit from low-expense medical coverage.

Vision of growth

We understood the dangerous situation of diseases in society with 10 years of working in society among farmers of chemical farming history, our mission is to provide chemical free food to every individual in society and to provide treatments through Indian methods, it is not our faith but our passion. Our squad is entirely unselfish. The main explanation for our success is that our teams are very committed to their duties, and there is an obligation for humanity, every partner takes more responsibility than himself.

Daily Photo Lifestyle

The house sparrow that was declared the ‘State Bird of Delhi’ in 2012 is edging towards extinction due to the lack of an emotional connect, says conservationist Mohammed Dilawar.

Mr. Dilawar, who started the practice of observing March 20 as World Sparrow Day in 2010, said that “mindless urbanisation” was leading to a loss of the birds’ natural habitats.