December 5, 2020
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चल रही है जिंदगी, भटकती, बेजार सी।
दिशा का पता नहीं, सांस है उखड़ रही।।
पगों में लगाम नहीं, विचारों में आयाम नहीं।
संस्कारों को नकारती, युद्ध को पुकारती।।

चाल तेज जरूर है, पर है बेलगाम सी,
हाथ कई जरूर है, पर स्वयं में एकान्त सी।।
न साथ कि फिक्र इसे, न छूटने का गम है।
इतने सरों से घिरा जरूर, मैं है पर कहीं न हम है।।

समय चाहे उद्दंड हो, मौन खड़ा दंड हो।
तूफान चाहे प्रचंड हो, मन होता खंड हो।।

पगों को फिर भी रोक लेंगे, अब और न भटकने देंगे।
तूफानों के वेग को, चक्र से अपने रोक देंगे।।

युद्धों के बीच खड़े हो, शान्ति का हम नाद देंगे।
टूटते संसार को, संकल्प है के साध लेंगे।

राम नाम बीज है, राम नाम आधार है।
जय श्री राम के घोष से, अब फिर दिशा हम देंगे

लेखक – विक्रम गौड़

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एमडीएच (MDH) के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी (Dharampal Gulati) का 98 साल की उम्र में गुरुवार को दिल्ली में निधन हो गया. उन्होंने दिल्ली के माता चंदन देवी हॉस्पिटल (Mata Chanan Devi Hospital ) में सुबह 5.38 बजे आखिरी सांस ली.

Mahashay Chunni Lal Gulati set up the masala company in 1919 in SialkotIndia currently located in the Punjab province of Pakistan since 1947.It is associated with Mahashay Chunni Lal Charitable Trust.

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हमारा जीवन असुरक्षाओं व अनिशितताओं से भरा है | हर समय हमारे मन में एक अजीब तरह की असुरक्षा की भावना रहती है, मन कई चीज़ों के लिए असुरक्षित व अनिश्चित सा रहता है | ये भावना काल के अधीन नहीं होती, न ही उम्र, जाति, धर्म या देश के अधीन नहीं होती |

ये असुरक्षा की भावना कर्ण की भावना है जो अर्जुन की श्रेष्ठता से आती है | ये भावना उस औरंगजेब की भावना है तो दारा शिकोह की बढ़ती लोकप्रियता से आती है | ये हर उस बालक में आती है जो कक्षा में अधिक प्रश्नों का उत्तर देते साथी छात्र को देखता है| हर उस खिलाड़ी के मन में आती है तो दूसरे खिलाड़ी को ज़्यादा प्राप्त करते देखता है |

ये हर उस राजनीति के निपुण नेता की भावना है जो किसी नये नेता को उभरते देखता है|

ये ट्रंप की मनोस्थिति भी है जो विरोध को बढ़ते देखती है | ये नंद की भावना है तो चाणक्य के संकल्प को से आती है | ये चाणक्य की भावना है को विदेशी आक्रमणकारियों को देख कर आती है|

ये भावना काल, देश, भाषा, धर्म, व जाति की सीमाओं से परे हैं | ये किसी में भी आ सकती है, चाहे आप श्रेष्ठ हो या ना हों, आप देश, समाज के लिए सही चाणक्य हो या औरंगजेब हो |

ये श्रेष्ठ में अपना स्थान छीन जाने के डर की भावना, श्रेष्ठता पाने को आगे बढ़ते व्यक्ति के मन में साथी प्रतियोगी की प्रगति देख कर श्रेष्ठ के मन में आने वाली भावना | निपुण में निपुणता के बाद भी किसी साधारण से काम ना कर पाना व वही काम किसी साधारण से दिखने वाले व्यक्ति के वही काम कर सकने के बाद आने वाली भावना |

ये बड़ी विकट स्थिति है, ये स्थिति किसी भी बड़े से बड़े योद्धा को हरा सकती है | बड़े से बड़े योगी का संतुलन खराब कर सकती है |

यहाँ बड़ा सवाल है की इस परिस्थिति से कैसे बचा जाए, क्या इसका कोई निदान है | क्या इससे होने वाले संभावित नुकसान से बचा जा सकता है |

जवाब एक ही है – हाँ

इससे एक ओर बड़ा सवाल निकलता है – कैसे ?

जैसे रात का निदान दिन है, अंधेरे का इलाज उजाला है | उसी तरह एक विचार, एक भावना की इलाज भी दूसरी भावना में या विचार में ही छिपा है | मगर उलझन ये है की वो भावना कैसी हो, वो विचार कैसा हो |

इसके लिए रात का दिन से, अंधेरे का उजाले से आपसी रिश्ते को समझना ज़रूरी है | रात का दिन से, अंधेरे का उजाले से विपरीतात्मकता का रिश्ता है, एक दूसरे से विपरीत होने का रिश्ता है |

इसी तरह असुरक्षा की भावना का इलाज भी इसकी विपरीत भावना में छिपा है|

उजाला दीपक भी देता है पर वो सूरज का स्थान नहीं ले सकता | पानी नदी में भी है मगर वो समुद्र का स्थान नहीं ले सकती | पानी समुद्र का अच्छा है, प्रक्रति का संतुलन बनता है पर पीने के काम नहीं आ सकता | पीने के लिए कुए का पानी ही आता है |

हर व्यक्ति की अपनी श्रेष्ठता है, अपनी उपयोगिता है | कोई भी दूसरे का स्थान नहीं ले सकता |

श्रेष्ठ हमेशा श्रेष्ठ रहे, ये प्रक्रति का नियम नहीं है |

दीपक का प्रकाश अच्छा है पर सूरज श्रेष्ठ हैं|

असुरक्षा की भावना का इलाज सहज सहयोग की भावना ही है | प्रक्रति का नियम मानते ही हम सहयोग करें | जैसे दीपक रात को सूरज का सहयोग करता है| दीपक हमें प्रकाश का एहसास देता है व सूरज के आने तक का समय गुजारने में सहयोग देता है |

हम द्रद्ता से अपने मन को ये विश्वास दिलाएँ की अच्छा श्रेष्ठ का दुश्मन नहीं होता |

अच्छा श्रेष्ठ का सहयोगी होता है| श्रेष्ठ के लिए ये श्रेय कर है की वो अच्छे का सहयोग करे व प्रक्रति का चक्र चलने दे |

प्रक्रति का आधार यही भावना है की अच्छा श्रेष्ठ का दुश्मन नहीं होता |

Good is not the enemy of Best

विक्रम गौड़

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‘Staying Happy does not mean there is not problem in Life, Being Happy means you have learnt how to face challenges and overcome them…’Mr. Sachin Mehta Motivational Speaker explained the How to Achieve Purpose of Live.

  • Motivational Speaker, Life Coach & Poet Mr. Sachin Mehta has been helping Youth to get right direction in Life. 32 years old Motivational Speaker Mr. Sachin Mehta has more than Ten  Thousands of Followers on his Facebook https://www.facebook.com/SachinMehtaMotivationalSpeaker
  • In the recent videos Released on YouTube, Mr. Sachin Mehta talked about the to Achieve Purpose of Life 5 Steps needs to follow, which are very Simple and can be easily followed by anyone.

The Video was Viral on YouTube and has been seen by thousand of viewers. The Link of Video is : https://youtu.be/hiPR7wTY3uM

  • Motivational Speaker Mr. Sachin Mehta the said, Step 1 is  to Visualize the outcome and assume yourself in the situation and to reach on goal.
  • Mr. Sachin Mehta said, Step 2 is to Put yourself in light pressure, means tell your Goals to your well wisher, so that they help you get it reminded.
  • Mr. Sachin Mehta then explained, Step 3 is create a Timeline and schedule your task for next day in advance.
  • Step 4 : To make any habit it takes 21 days to repeat and regularly do same thing.
  • Step 5 :Motivational Speaker Mr. Sachin Mehta then discussed about Enjoy yourself, make such goal which keep you entertaining rather than putting pressure on you.

Subscribe Mr. Sachin Mehta on his Official YouTube : https://www.youtube.com/channel/UCC3x8ua6sGDQKdNPoAirnOQ

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To view complete video, click on Link :

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इस हमाम में सब नंगे

आजकल टेलीविजन चैनलों में अपनी टीआरपी या दर्शकों की संख्या ज्यादा से ज्यादा बताने के लिए होड़ मची हुई है ।

इसी होड़ के चलते वे घटिया सामग्री परोसते हैं ।

उदाहरण के लिए ‘आज तक’ जैसे प्रमुख चैनल पर स्वर्गीय रामविलास पासवान की मृत्यु और उनकी जीवनी पर कोई लंबा कार्यक्रम बताने के बजाय तीन दिन पुरानी हाथरस के कथित बलात्कार की स्टोरी बार-बार रिपीट की जा रही हैं।

TRP आखिर है क्या बला?

टीआरपी का मतलब है टेलिविजन रेटिंग पॉइंट। इसके जरिए चलता है कि किसी टीवी चैनल या किसी शो को कितने लोगों ने कितने समय तक देखा। इससे यह पता चलता है कि कौन सा चैनल या कौन सा शो कितना लोकप्रिय है, उसे लोग कितना पसंद करते हैं। जिसकी जितनी ज्यादा टीआरपी, उसकी उतनी ज्यादा लोकप्रियता। अभी BARC इंडिया (ब्रॉडकास्ट आडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया) टीआरपी को मापती है।

TRP कैसे मापी जाती है?

अब समझते हैं कि आखिर टीआरपी मापी कैसे जाती है। सबसे पहले तो यह साफ कर देना जरूरी है कि टीआरपी कोई वास्तविक नहीं बल्कि आनुमानित आंकड़ा होता है। देश में करोड़ों घरों में टीवी चलते हैं, उन सभी पर किसी खास समय में क्या देखा जा रहा है, इसे मापना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए सैंपलिंग का सहारा लिया जाता है। टीआरपी मापने वाली एजेंसी देश के अलग-अलग हिस्सों, आयु वर्ग, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का प्रतिनिध्तव करने वाले सैंपलों को चुनते हैं। कुछ हजार घरों में एक खास उपकरण जिसे पीपल्स मीटर कहा जाता है, उन्हें फिट किया जाता है। पीपल्स मीटर के जरिए यह पता चलता है कि उस टीवी सेट पर कौन सा चैनल, प्रोग्राम या शो कितनी बार और कितने देर तक देखा जा रहा है। पीपल्स मीटर से जो जानकारी मिलती है, एजेंसी उसका विश्लेषण कर टीआरपी तय करती है। इन्हीं सैंपलों के जरिए सभी दर्शकों की पसंद का अनुमान लगाया जाता है।

टीवी चैनलों की कमाई का मुख्य स्रोत विज्ञापनों से आने वाला पैसा ही है। जिस चैनल की जितनी ज्यादा लोकप्रियता यानी टीआरपी होती है, विज्ञापनदाता उसी पर सबसे ज्यादा दांव खेलते हैं। ज्यादा टीआरपी है तो चैनल विज्ञापनों को दिखाने की ज्यादा कीमत लेगा। कम टीआरपी होगी तब या तो विज्ञापनदाता उसमें रुचि नहीं दिखाएंगे या फिर कम कीमत में विज्ञापन देंगे। इससे साफ समझ सकते हैं कि जिस चैनल की जितनी ज्यादा टीआरपी, उसकी उतनी ज्यादा कमाई।


टीआरपी में किस तरह से हेरफेर हुआ?

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया देशभर में अलग-अलग जगहों पर 30 हजार बैरोमीटर (People’s Meter) लगाए गए हैं। मुंबई में इन मीटरों को लगाने का काम हंसा नाम की संस्था ने किया था। मुंबई पुलिस का दावा है कि हंसा के कुछ पुराने वर्करों ने जिन घरों में पीपल्स मीटर लगे थे, उनमें से कई घरों में जाकर वे लोगों से कहते थे कि आप 24 घंटे अपना टीवी चालू रखिए और फलां चैनल लगाकर रखिए। इसके लिए वे लोगों को पैसे भी देते थे। मुंबई पुलिस का दावा है कि अनपढ़ लोगों के घरों में भी अंग्रेजी के चैनल को चालू करवाकर रखा जाता था।

इस मामले में कुछ तथ्य विचारणीय हैं: पहली महत्वपूर्ण बात यह है कि मुंबई पुलिस ने इस मामले में तीन चैनलों को आरोपी बनाया है और इनमें से दो छोटे चैनल ‘फख्त मराठी’ और ‘बॉक्स सिनेमा’ के प्रमोटर्स को गिरफ्तार कर लिया है ।

प्रश्न यह है कि तीन में से दो चैनल के मालिक गिरफ्तार कर लिए गए हैं तो तीसरे चैनल ‘रिपब्लिक’ के मालिक अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार करने की ताकत क्यों नहीं है ? क्या पैसे और ताकतवर लोगों के प्रति पुलिस का रवैया हरदम की तरह भिन्न है या पुलिस को पता है कि आगे पीछे उसके आरोप झूठे सिद्ध होंगे, इसलिए इस मामले को सिर्फ रिपब्लिक मीडिया की इमेज खराब करने तक ही सीमित रखा जाए!

इस मामले में टीआरपी का अनुमान लगाने वाली संस्था BARC ने अपनी एफआईआर में ‘इंडिया टुडे’ का भी नाम लिया है लेकिन पुलिस ने उसके खिलाफ कोई जांच नहीं की जो कि संदेहास्पद है ।
शुरू में ‘आज तक’ ने रिपब्लिक टीवी के फंसने पर बहुत शोर मचाया लेकिन बहुत जल्दी ही उसे पता लग गया कि इस कांड में वे भी फंस सकते हैं, इसलिए अब वह चुपचाप फिर से हाथरस के कवरेज पर लौट आए हैं।

मुंबई पुलिस और अर्नब गोस्वामी के बीच इन दिनों एक महाभारत चल रहा है और अर्नब गोस्वामी बिना डरे मुंबई पुलिस पर लगातार हमले कर रहे हैं जिससे महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस अर्नब गोस्वामी और उनके चैनल के पीछे पड़ी है। प्रश्न यह है कि अभिव्यक्ति की आजादी की बात करने वाले वामपंथी अर्नब का साथ देंगे या मुंबई पुलिस का। हां, एक बात जरूर है कि इस हमाम में सारे चैनल ही नहीं संपूर्ण व्यवस्था और राजनीतिज्ञ सब नंगे हैं।

  • वेद माथुर
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Festivals revive and reinforce cultural traits. Togetherness with friends and relatives instills a sense of camaraderie, strengthens personal bonds and helps us build a support system for life. The ambience during festivals and the rituals or practices of each vary from one festival to another and adds variety, creating joy amidst the rush of daily life.Designated holidays for these festivals provide time for everyone to relax and take much-needed breaks.

But alas! Here we are in 2020 — a year so dismal and gloomy as no other that any of us has ever experienced or even imagined. The pandemic and the resultant lockdown has deprived us of these simple joys as well. From tiny tots to elderly, everyone has had their routines thrown out of gear.Students in crucial years of school and college find themselves in limbo, unsure of the next stage of life. Job losses for many, financial difficulties and hardships in travel have cumulatively taken the sheen out of the season we enter now.

With more than half the year completed and uncertainties weighing down heavily, the remaining days of the year will likely see the same trend. Festivals in 2020 are set to draw a blank, following the government’s regulations and restrictions over celebration and social gathering. Religious festivals could be a low key affair too, as they are not open to the general public in many places.

And so, brace yourselves for a Ganesh Chaturthi without idol worship and immersion, Dussera without Ravan Visarjanam or display of dolls, Diwali without crackers, Bakrid without offerings, Christmas without mass and ringing of bells and even the New Year could be ushered in without midnight revelries. This is the reality we must accept this year.

Apart from what we lose in terms of human connection on account of this washout, the following communities would take a professional hit and incur huge monetary losses in every festival. 

The quantum of loss would be difficult to compute but it is likely to be very high.And then of course, there is the intangible loss on account of all the missed celebrations and fervour within the larger community.In summary, the washout is set to have a devastating effect on all. A festive season that under normal circumstances would have seen pomp and pageantry is set to be lost in mellow, sombre introspection for the first time in decades.The washout of cheer and festivities is indeed cause for frustration. Yet as reasonable humans, we should not let it take over our senses. We are passing through unprecedented times of distress and pain, a situation which even our forefathers had not seen. 

Our objective now is to defeat the pandemic. We have to do what it takes to keep the country safe, even if it is unpleasant.We have come a long way through these five months of lockdown. This washout of the festival is yet another bridge that must be crossed. Let us sacrifice big celebrations this one year and commemorate festivals in a simple, personal manner. We must soldier on with the hope that we will emerge stronger and successful in the fight against COVID-19.Abhishek kumar

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Learn how to get rid of dark circles with ease  

Eyes are the window to one’s soul. Thus, a lot of qualities such as confidence and righteousness are associated with their appearance, which may be blemished by dark-circles. The dark circles may appear beneath your eyes due to sleeplessness, sun exposure or allergies. Along with the eyes, dark circles can undermine your self-belief and overall looks.

If there’s an upcoming party or meeting, dark circles might leave you worried and anxious. However, they aren’t a great cause for worry if you know how to hide them. 

Here’s a step-by-step guide to how you can camouflage and conceal your dark circles:

  1. Properly moisturize the area beneath your eyes!
  2. Before applying anything else it is extremely important that the skin is optimally moisturized. For this purpose, you can use a moisturizer or an under-eye cream. The moisturizer helps create a smooth-base.
  3. Counter the depth of the dark circles!
  4. Dark circles may sit deep in your skin. An orange corrector can sparingly cut down the deepness of the dark circles.
  5. Use the appropriate concealer!
  6. It is very important to use the right concealer as using a light concealer may make the dark circles beneath your eyes all the more obvious. So, you should make use of a warmer (and not light) concealer which matches your skin-tone. 
  7. Setting everything right with foundation! 
  8. After everything else is done, it is important to ensure that area beneath your eyes has the same skin-tone as the rest of your face. This can be achieved using a thin layer of powdered-foundation. 
  9. Voila, dark circles are gone!     

Celebrity Makeup Artist Samaira Sandhu 

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LinkAstro is India’s first transgender astrologer Ravi Amrani Akka Bhairavi. Linkastro is a marketplace for astrologers providing services like Chat, Call and reports online to astrology seekers. Ravi Amrani is also a life coach, writer, entrepreneur, activist and an artist. The app provides free services such as Matchmaking, Daily Panchang, Kundli, and yearly horoscope. LinkAstro the only astrology app promoting inclusivity with the LGBTQ community in India and this sets the foot forward towards a change in the outlook and acceptance in our country.  

Q . when did you joined linkastro?

Joined LinkAstro in August 2020. 

Q. when you started practising astrology?

Since last 4 years

Q. Do you feel proud like you are a all rounder, as you  are coach, writer, entrepreneur, activist and an artist?

Yes, I definitely feel proud that I’m all rounder. But the drawback is you cannot do all the things at a time. So I have bifurcated them in number of years and I’ve learnt that being creative is very important.

Q. how was your experience with your Guru Dr. Mohit Shukla ji?

I had a wonderful experience with my Guru Acharya Dr Mohit Shukla Ji. He is very strict and disciplined. I realised my weak points and improvements in my life through him. 

Q. Is linkastro app can really influence the concerned authorities?

If yes then tell us something about this app?This app is a platform where astrologers can join without any payment. This app gives us an oppurtunity to earn money without stepping out from our house. This app promotes all the astrologers and is creating an atmosphere where we can work without any dilemma. I would encourage others to use this app as it will help to improve the life not only for me but for other astrologers who have joined LinkAstro. This app also helps in bringing this unorganised astrology profession to organised one.

Q. how is your cream and cinnamon bakery & café working?

CNC is doing pretty well. It’s a pretty good earning shop and we are thinking out to branch it out very soon in a near future in the front areas of Raipur. The size of my team is 12-13 people and they stay with us. I’m so happy for CNC. I’ve handed over all the responsibility to my big brother so he is looking out as of now.

Q. you have seemed to gon through from a very depressed state in your life where you also tried to end your life , now you are a capable person how you feel now?

Being a transgender, there was lot of troubles in my life but now I feel pretty good that I’m giving my services to the mankind. I’ve read somewhere that knowledge is the only key to your solutions so I’m contributing my part to this world.

Q. Best thing about astrology u like the most?

Astrology is the one which gives you a ray of hope or life. Astrology has a lot of power. One thing I like about Astrology that it’s very complex, It’s because the stars, the combination are very complex, conjunctions, your placements of the chart you have born with is very complex because of that your life is complex. The duty of Astrology is you can find out so many things it’s like you can find out your answers. 

Q. Why you appeal the LGBTQ community to explore astrology as a great career option ?

It’s a best career choice as you don’t have to invest money in this and it’s a noble profession and one can make their name. In my community, people are very creative so it’s perfect for them to appeal Astrology. 

Q. Is Astrology a good practice to do ?

What message you will give to public about astrology?Definitely it’s a good practice to do infact, it’s a divine. It’s a good profession in a genuine way. As you follow doctors in the same way please follow astrology and take the follow ups and implement it as Astrologers do wonders.

Lifestyle

Website Link : https://thespeaktoday.com/ Mr. Sachin Mehta “Shaleen” : Motivational Speaker & Poet
Headline : ‘To Grow in Life and to be Successful, Understand yourself and other Attitude…’Mr. Sachin Mehta Motivational Speaker explained the Giver, Taker and Matcher

Description : Motivational Speaker, Life Coach & Poet Mr. Sachin Mehta has been helping Youth to get right direction in Life. 32 years old Motivational Speaker Mr. Sachin Mehta has more than Ten Thousands of Followers on his Facebook.
Bhiwani Pariwar Maithri Sang(BPMS) President Rajesh Chetan has Invited Motivational Speaker Mr. Sachin Mehta in a program Pustak Prabhat organized by BPMS. Mr. Sachin Mehta talked about the Book GIVE and TAKE written by Adam Grant. The Video of the program was Viral on YouTube and has been seen by thousand of viewers.

Mr. Sachin Mehta explained very nicely about the Three type of people’s behaviour. Mr. Sachin Mehta explain very well about Givers, Takers and Matchers. Firstly, Mr. Sachin Mehta said, to achieve success in life the Three most important things are Motivation, Ability and Opportunity and which can be achieved with Hardwork, Talent and Luck.

Motivational Speaker Mr. Sachin Mehta the said, we daily meet with number of people and everyone has their own thinking and different attitude. Firstly, he explained who Takers are : Those who believes in getting more than they give and put their own goals above other’s need. Takers Praise themselves and take full credit of their work.

Mr. Sachin Mehta said, On the other side Givers are those, who are always ready to help other, gives more than they get and believes in sharing their credit with others and then he explained about Matchers, those people who calculate before giving help to others. Matchers firstly thinks, if they are helping some one, what they can get in reverse. They help other with an expectation from others to get more support and benefits in reverse.

Motivational Speaker Mr. Sachin Mehta then discussed about Success Ladder, he said as per survey to find who are on top of success ladder, whether it’s Taker, Giver or Matcher. The result of survey was Takers and Matchers are always in Middle of the success ladder and Givers are on Top of Success ladder and Givers are on Bottom of Success Ladder.

Mr. Sachin Mehta, then explained that, there are Two type of Givers. One those are on Top of Success Ladder and others, those are on Bottom of Success Ladder. Two Givers are : Selfless Givers and Otherish Givers. Selfless givers are self sacrificing Givers, who completely cares about others and don’t take care for self interest at all. That is the reason Self Sacrificing Givers are on bottom of Success Ladder.

Second are the Otherish Givers, who are on the Top of Success Ladder. Otherish Givers are the Successful Givers and they are high Performance Givers. Otherish Givers helps other people and also concerns for self interest as well along with other’s interest.

Mr. Sachin Mehta then explained, to become Successful in Life, we must become Otherish Givers and how to become Otherish Givers? He said, we must do three things. Which are : Help others, Give Advice and Share Credits. Mr. Sachin Mehta emphasize that we must help others in their need and whenever other seek our Advice, we must give good advice which is beneficial for others and above all we must Share credit of our Success with others.

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