May 16, 2021
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मुंम्बई से लेकर विदेशियों तक काे रास आ रहा हिसार की पूनम कपूर द्वारा तैयार डाइट फूड्स , डाइट जूस और जूस पाउडर, डायबिटिज से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने भी सहायक एचएयू के एबिक सेंटर से टैकिनकल ट्रेनिंग की मदद से काम को देस के हर कौने तक पहुँचा ने की तैयारी है हर माह कमा रहे डेढ़ लाख

मुम्बई के अर्नकोर ग्रूप ऑफ होटेल्स में रिसर्च एंड डवलपमेंट हेड के पद से छाेड़ी थी नाैकरी

हिसार शहर के पीएलए में रहने वाली पूनम कपूर ने मुबई के कॉर्पोरेट से रिसर्च एंड डवलपमेंट हेड के पद से नाैकरी छाेड़कर खुद का स्टार्टअप तैयार करने की ठानी। कई साल की मेहनत के बाद पूनम ने डाइट फूड्स , जूस पाउउश्र और हेल्दी पाउडर तेयार किए | जूस पाउडर जहां 9 माह तक खराब नहीं हाेता है। वहीं डायबिटिज से लेकर ब्लड प्रेशर, हार्ट की समस्या से भी निजात दिलाने मे सहायक है। यही नहीं इम्यूनिटी बढ़ाने में भी सहायक है। पूनम द्वारा तैयार प्राेडक्ट की अब मुबई से लेकर विदेशों तक में धूम है। एचएयू के एबिक सेंटर से पूनम ने प्राेडक्ट तैयार करने की ट्रेनिंग ली थी। एचएयू के कुलपति प्राेफेसर समर सिंह ने भी पूनम के प्राेडक्ट की सराहना की है।

पूनम मूल रुप से हिसार के पीएलए की रहने वाली है। पूनम ने बताया की उसने जीजेयू से ही एमएससी की पढ़ाई की थी। इसके बाद ब्रिटानिया समेत विभिन्न स्थानाें मे कार्यरत रही। वर्ष 2010 में मुंबई के बड़े कॉर्पोरेट में रिसर्च एंड डवलपमेंट हेड के पद पर तैनात थीं मगर कुछ अलग करने की चाह में वर्ष 2010 में पूनम ने नाैकरी छाेड़ दी तथा पूनम कपूर हेल्दी किचन की शुरुआत एक व्यक्ति से की। अब 50 से अधिक लाेग पूनम के साथ जुड़े है | पूनम ने बताया की उसने ऑर्गॅनिक तरीके से व्हीट ग्रास, तिल, नींबू, सतावरी आदि के माध्यम से डाइट फूड्स, जूस पाउडर तैयार किया | जाे ब्लड प्रेशर राेकने में भी सहायक है। साथ ही डायबिटिज की समस्या का भी समाधान करता है। खासियत यह है की फूडस का काेई साइड इंफेक्ट भी नहीं है।

पूनम का कहना है की जापान, न्यूजीलैंड से भी प्राेडक्ट की डिमांड आती है। बताया क़ी जल्द ही हरियाणा में व्यापक स्तर पर हेल्दी किचन काे शुरू कराया जाएगा। ताकि लाेगाें काे स्वस्थ्य रहने के बारे में भी टिप्स दिए जा सके।

विशेष प्रकार का एप करा रहे तैयार, डाक्टर भी कर रहे मांग

पूनम ने बताया की हेल्दी फूड्स, जूस पाउडर काे विभिन्न स्थानाें तक पहुँचाने के लिए जल्द ही एप तैयार करा रहे है। ताकि लाेग एक क्लिक पर पाउडर के बारे में जानकारी हासिल कर सकें साथ ही खरीद कर प्रयाेग में भी ला सकें। हरियाणा के डाक्टर भी जूस पाउडर की मांग कर रहे है।


एचएयू के कुलपति ने भी पूनम के स्टार्टअप काे सराहा

पूनम द्वारा तैयार हेल्दी प्राेडक्ट, जूस पाउडर विभिन्न राेगाें पर अंकुश लगाने में भी सहायक है। एचएयू के एबिक सेंटर से ही पूनम ने ट्रेनिंग ली थी। अन्य काे भी पूनम से प्रेरणा लेनी चाहिए- प्राेफेसर समर सिंह, कुलपति, एचएयू

https://poonamkapur.com

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After shrinkage in the previous 2 quarters, the microfinance sector saw a quarterly growth of 1.18% to reach ₹226.6K crore as of Dec 2020. The live customer base also witnessed recovery, although 7% lower than Dec 2019. Coming into Q3 FY 2020-21, repayments continue to be stressed since the end of the moratorium period.

Captured below are the key observations from the report:

  • The GLP of the microfinance sector showed signs of recovery with a 1.18% increase in GLP as of Q3 FY 2020-21, standing at ₹226.6K crore as of Dec 2020.
  • With a nearly 80% increase over the previous quarter, disbursements by value stood at ₹56090 crore, still 11.5% lower than Q3 FY 2019-20.
  • By volume, disbursements in Q3 FY 2020-21 almost doubled, compared to the previous quarter standing at 175 lakh and only 4% lower than pre-pandemic disbursements in Q3 FY 2019-20.
  • 20.1% of the disbursements in Q3 FY 2020-21 were of small ticket loans (<=10K) due to loan restructuring and new loans given out as part of guaranteed emergency credit.
  • Repayments continue to be stressed in the 4 months since the end of the moratorium period. Fresh delinquencies (PAR 1-30%) are at 8.3% and PAR 31-180% has increased to 12.7% as of Dec 2020.
  • For the current/good portfolio (0 DPD), collections have improved with the monthly forward flows reducing by nearly 10% between Sep 2020 and Dec 2020.

CRIF’s Views:

The microfinance sector in India has traversed a turbulent journey in this financial year. After witnessing degrowth in the gross loan portfolio in the consecutive first two quarters, the sector experienced green shoots of recovery in the third quarter, with a growth in GLP albeit at only 1.18% over the previous quarter. As markets opened up and operations resumed in Q2 FY 2020-21, disbursements have picked up pace. Digitalisation has gained recognition with more lenders in the customer onboarding stage. Coming into Q3 FY 2020, disbursements further increased, striding towards pre-pandemic levels. 1 out of 5 loans disbursed in Q3 FY 2020-21 is of <=10K, due to loan restructuring and new loans given out as guaranteed emergency credit to manage pandemic induced stress. 

This current disruption has had a huge impact on household incomes of individuals including a large number of microfinance borrowers leading to sub-optimal collection efficiencies for the sector. The post moratorium period witnessed high defaults which have continued to flow into Q3 FY 2020-21. The eastern states of West Bengal and Assam hit by the dual impact of the pandemic and natural calamities, including flood and cyclone have witnessed maximum repayment stress as of Q3 FY 2020-21. The Assam Microfinance Institutions (Regulation of Money Lending) Bill 2020 has been introduced to regulate MFI operations and ease stress in the sector. The COVID 19 pandemic although of incomparable magnitude, is not the first of such crisis faced by the microfinance sector in India. Experts believe that the sector, as in the past, has the resilience to overcome challenges posed by this crisis as well. For greater sustainability and growth in the new normal, microfinance lenders will need to rapidly adapt to the changing business environment, levering digital technologies and data analytics in their business processes.

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पिछली दो तिमाहियों के दौरान आई गिरावट के बाद, माइक्रोफाइनेंस के क्षेत्र में तेजी आई है। दिसंबर 2020 की तिमाही में 1.18 फीसदी की वृद्धि के साथ यह 226.6 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान ग्राहकों की संख्या में भी रिकवरी देखने को मिली, हालांकि दिसंबर 2019 के मुकाबले यह सात फीसदी कमजोर रहा। मोराटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही के दौरान पुनर्भुगतान की स्थिति दबाव में दिखी।

रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में नीचे बताया गया है :

  • वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के जीएलपी (ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो) में 1.18 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ रिकवरी के संकेत देखने को मिले। दिसंबर 2020 तक माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री 226.6 हजार करोड़ रुपये की रही।
  • पिछली तिमाही के मुकाबले डिस्‍बर्समेंट में 80 फीसदी की तेजी आई और यह 56090 करोड़ रुपये रहा। हालांकि यह वित्‍त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के मुकाबले 11.5 फीसदी कम है।
  • वॉल्यूम के आधार पर देखा जाए तो पिछली तिमाही के 175 लाख रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट दोगुना रहा, जो कोरोना महामरी से पूर्व वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के मुकाबले मात्र चार फीसदी कम है।
  • वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट का 20.1 फीसदी हिस्सा छोटे कर्ज (दस हजार रूपये से कम) का रहा और इसकी वजह कर्ज पुनर्गठन और गारंटीड आपातकालीन ऋण के हिस्‍से के रूप में दिए गए नया लोन रहे।
  • मोराटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद भी चार महीने पुनर्भुगतान दबाव में दिखा। दिसंबर 2020 में कर्ज के शुरुआती भुगतान में चूक (पीएआर 1-30 फीसदी) 8.3 फीसदी रहाजबकि पीएआर 31-180% में 12.7 फीसदी का इजाफा हुआ।
  • करंट/गुड पोर्टफोलियो (0 DPD) के मामले में संग्रह में सुधार देखा गया और इसकी वजह से सितंबर 2020 से दिसंबर 2020 के दौरान मासिक फॉरवर्ड फ्लो में करीब 10 फीसदी की गिरावट रही।

सीआरआइएफ का नजरिया:

इस वित्त वर्ष भारत में सूक्ष्म वित्त क्षेत्र यानी माइक्रोफाइनेंस की यात्रा काफी उतार चढ़ाव वाली रही है। लगातार पहली दो तिमाहियों में ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो (जीएलपी) में गिरावट के बाद तीसरी तिमाही में इस क्षेत्र रिकवरी के संकेत नजर आ रहे हैं। पिछली तिमाही के मुकाबले मौजूदा तिमाही में जीएलपी में हुई 1.18 फीसदी की बढ़ोतरी इसका प्रमाण है। वित्त वर्ष 2020-21 में बाजार के फिर से खुलने और गतिविधियों के सामान्य होने की वजह से डिस्‍बर्समेंट में तेजी आई। ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ ही डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में तेजी आई है और इसे कर्ज देने वाली संस्थाओं ने मान्यता प्रदान की है। वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट में तेजी आई है और यह पूर्व-महामारी के स्तर की ओर धीरे-धीरे बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में वितरित किए गए पांच में से एक लोन दस हजार रूपये से कम के रहे और इसकी वजह कर्ज पुनर्गठन और महामारी की वजह से पैदा हुए आर्थिक तनाव के प्रबंधन के लिए गारंटीड आपातकालीन ऋण के रूप में दिए गए नए लोन्‍स रहे।

कोविड-19 के कारण पैदा हुए मौजूदा व्यवधान ने लोगों की घरेलू आय को बुरी तरह से प्रभावित किया है जिसमें बड़ी संख्या में माइक्रोफाइनेंस लेने वाले लोग शामिल हैं। इसकी वजह से इस माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र के संग्रह में गिरावट देखने को मिली। मोराटोरियम की अवधि खत्म होने के बाद की अवधि के बाद भुगतान के मामले में अधिक चूक देखी गई, जो वित्त वर्ष 2020-21 में जारी है। पूर्वी राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में बाढ़ और चक्रवात सहित महामारी और प्राकृतिक आपदाओं के दोहरे प्रभाव की वजह से वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में भुगतान के मामले पर सर्वाधिक दबाव देखा गया। असम माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (रेग्युलेशन ऑफ मनी लेडिंग) विधेयक 2020 को माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं के संचालन को विनियमित करने और इस क्षेत्र में मौजूद तनाव को कम करने के लिए पेश किया गया है। कोविड 19 की वजह से यह क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ है लेकिन भारत में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के लिए यह पहला संकट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह क्षेत्र पहले की तरह इस बार भी चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटने में कामयाब होगा। नई सामान्य स्थिति में स्थिरता और आर्थिक तरक्की के लिए माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं में डिजिटल टेक्‍नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स का लाभ उठाते हुए तेजी से बदलते कारोबारी माहौल के अनुकूल अपने आप को ढालने की जरूरत होगी।

Lifestyle Social Heros

Today, society as a whole is facing a horrible crisis, it’s a debate on the problem of not only India, but the world as a whole, in the last 50 years, the prevalence of chemical farming in the world as a whole is very high, and the outcome is now before us. The farmer is still upset because of this chemical farming, because the entire land is barren and population is sick after consuming chemical food, now this is high time to set the target of reforming this risky process.

10 year back Sunil Sharma, engineer by profession decided to do something for change and decided to put his contribution towards this revolution.

Journey of Engineer to Farmer

Er. Sunil Sharma, Organic Farmer, Haryana

Sunil Sharma, after completing his graduation in civil engineering joined college as lecturer and started his professional life. But there was a farmer inside him was feeling restless with the over usage of chemical in agricultural production.

So, he resigned from his job and decided to do organic farming. Lets understand what he says about his experiences of 10 years.

10 years of organic farming:

We have inspired thousands of farmers over the past 10 years and turned them into organic farming. Thousands of young farmers are eager to join us in this journey. In the last 10 years, though we have been focusing on organic farming, we have understood three topics in detail.

  • First of all, farmers do not get fertiliser on time because they fear that leaving chemical farming will cause them a huge loss, and if they grow organic, they will not be able to find a buyer.
  • Second, while society as a whole suffers from dangerous diseases from the ingestion of chemically produced produce, pure food cannot be found anywhere.
  • Third, culture is ill and is utterly distressed by the side effects of allopathic drug consumption. And people want a solution from anywhere, so that they can naturally get rid of these issues.

We have now agreed to provide society with a forum after a decade where all the challenges can be addressed in a single window. Now we’re going to connect all of these segments with each other after a long period of experience.

  1. It is supplied with bio fertilisers, insecticides, pesticides and fungicides. And proper consultancy is provided at no cost.
  2. Farmers will be supplied with the consumer demand by the time they can get decent prices of their goods and at the same time customers will be eased with those products.
  3. A forum for medical facilities would also be created where everyone will benefit from low-expense medical coverage.

Vision of growth

We understood the dangerous situation of diseases in society with 10 years of working in society among farmers of chemical farming history, our mission is to provide chemical free food to every individual in society and to provide treatments through Indian methods, it is not our faith but our passion. Our squad is entirely unselfish. The main explanation for our success is that our teams are very committed to their duties, and there is an obligation for humanity, every partner takes more responsibility than himself.

Daily Photo Lifestyle

The house sparrow that was declared the ‘State Bird of Delhi’ in 2012 is edging towards extinction due to the lack of an emotional connect, says conservationist Mohammed Dilawar.

Mr. Dilawar, who started the practice of observing March 20 as World Sparrow Day in 2010, said that “mindless urbanisation” was leading to a loss of the birds’ natural habitats.

Lifestyle

As we are waving goodbye to 2020, let’s ponder on best practices of 2020. we want to carry forward and dust off all the miseries . we shall start fresh on many aspects. For few may be professional front, reskilling and adopting alternate skills as traditional white jobs are not sole mode of earning. We have learned the balance of work life .

we should carry forward this. Work from home will be gradually accepted culture where it is permissible to carry work from remote location. Many have lost their close friends and family members in pandemic and life is definitely different. It’s more challenging but hope is light which keep us guiding. Be it young or old health will be cause of concern in all age groups.

Exercising, boosting immunity are key practices which we need to maintain next year also. Minimizing commuting will result in less road congestions and reduce the pollution also to great extent.

Pollution, global warming are few next alarming things before they blew up completely and affect day to day life .Online mode of schools though its barrier for remote location due to infrastructure hurdles but we should continue this best practice for maximum attendance in academics and specially for children home confined for several days due to illness or other reasons.

Economic boosters like Make in India are next leap which not only reduces unemployment but also strengthen our home ground business and good offers to eradicate unemployment.

We want to close the diaries of 2020 by expressing gratitude to all who have fore fronted in fighting this pandemic and special thanks to front line workers. This has reemphasized generosity in society and believes in each other. Unity is strength.

Lifestyle

The days when women were merely recognized and supposed to be homemakers and child-bearers are long gone, whilst the man remained the primary earner of bread. Today, the long-standing battle of women empowerment has reached a crucial stage in the year 2020.

With widespread recognition of the need for equal rights and women’s inclusion in diverse sectors, women today are developing and running more and more enterprises. One such women-run company, PlutusPlus, tackles the growing need for remedies and alternatives for organic skin care.

PlutusPlus is an ode to the devotion and wisdom of our ancestors, who understood the benefits of Indian herbs and had a home remedy for all diseases, including skin care, founded by Ms. Mridula Bhardwaj and Ms. Neerja Gaur.

With an aim to promote homegrown skin care products, Plutus Plus in coming with an exiting offer.

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On December 23, every year, India celebrates National Farmer’s Day or Kisan Diwas. The day is celebrated in memory of Chaudhary Charan Singh, the fifth Prime Minister of India.

Chaudhary Charan Singh – known for welfare schemes for farmers

For a short period of time, Chaudhary Charan Singh was in the workplace. From July 1979 to January 1980, he took charge of India as Prime Minister. Chaudhary Charan Singh is well known for implementing farmers’ welfare schemes.

Chaudhary Charan Singh was born in 1902 in Noorpur, Meerut, into a peasant family. The importance of the agricultural economy and the role of a farmer in the economy were recognized and commended by him.
When he objected to then Prime Minister Pandit Jawahar Lal Nehru, Chaudhary Charan Singh came out as a separate leader.

Chaudhary Charan Singh openly opposed Nehru’s collectivist and socialist land policies in the 1959 Nagpur Congress Session.

Often believing in simplicity, Chaudhary Charan Singh lived a simpler life. He has written several books on Indian farmers’ problems and has also proposed solutions for them.His contribution has been recognized by the Indian government and honored many times.

The memorial to Chaudhary Charan Singh is known as Kisan Ghat. The anniversary of his birth is celebrated as National Farmers’ Day. Amausi Airport in Lucknow has been renamed the International Airport of Chaudhary Charan Singh. The University of Meerut and Haryana Agriculture University, Hisar, has been renamed the University of Chaudhary Charan Singh.

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During pandemic, we switched to online shopping almost for everything. Be it chappals, grocery, kitchen utensils, mugs, electronics etc. Most of experiences were good except clothes. I ordered Lehenga unstitched from famous E -commerce vendor Amazon.

The site shows extremely down rate so I was amazed. What I received was nightmare ..I received a piece which I cannot drape even around my waist. The site showed it fits well but it has no flare of lehenga. Even difficult to fit for smaller sizes also. Luckily being the prominent E commerce vendor, they have return policy. So, I returned the goods.

 I was in high spirits so I ordered again from famous brands Chhabra 555,AND and W Kurtis. I ordered one festive dress from Chhabra. It was long dress with banarasi dupatta. I doubly checked the size accuracy and was waiting eagerly for delivery. When I received the dress, it has foam at upper part which made dress really bulky on me. I left with no choice except returning the order. They have no significant return policy. I made several calls and what sup their customer care number. After two weeks, I bore courier expenses and returned to their central location address.

When I saw AND sales online, my heart literally was pondering on attractive offers. I ordered three to four pieces at once . Two of them were nice. The color of one was little lighter as compared to online dress but I adjusted. The third piece was of net. The moment I wore, my skin got rashes. so, I decided to return. They have courier for return but my account is not credited with return amount. After two to three follow-ups, I left as it was small amount.

W brand was my favorite for Kurtis from long time. When there was sale almost fifty percent, I was not able to resist. So, I ordered plain Kurtis fearing no last-minute surprises. One kurta has lock attached to it. With great difficulty, I took help of friend expert in stitching to remove it without tearing the cloth. My friend Shalini smiled at my will power for continuing online shopping.

Shipra Dhingra