September 30, 2020
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पंडित रोनू मजूमदार विश्व प्रसिद्ध बांसुरी वादक जिन्होंने कृष्ण की लीलाओं को, राधा के प्रेम को, कृष्ण-राधा की नोंक-झोंक को अपनी बांसुरी की धुनों से जीवंत किया है, यह हम सब जानते हैं। स्पिक मैके द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान पंडित रोनू मजुमदार से Thespeaktoday.com की हुई खास मुलाकात के कुछ अंश:

Reporter- Mahipal singh chauhan
Video grapher- Manya Goel

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समर्पण और साहस की मिसाल सुश्री सुमन डूंगा

सुश्री सुमन डूंगा की पहचान पिछले दो दशकों में एक ऐसी संस्कृतिकर्मी और सामाजिक सरोकारों में सदैव सक्रिय रहने वाली मिलनसार और सकारात्मक महिला की है जिन्होंने अपनी सक्रियता और ऊर्जा से देश की राजधानी में रचनात्मक वातावरण बनाने में विनम्र भूमिका निभायी है। शुरू से ही एक सांस्कृतिक दृष्टिकोण रखने और ऐसी गतिविधियों में रुचि रखने के कारण जब वे आगे चलकर स्पिक मैके जैसे सांस्कृतिक अनुष्ठानिक उपक्रम से जुड़ीं तो उन्होंने सामाजिक कार्यों, शिक्षा, मीडिया एवं समन्वय तथा प्रचार-प्रसार के अनुभवों का इस कार्य में आत्मविश्वासपूर्ण प्रयोग किए और सफलता प्राप्त की।

सुश्री सुमन डूंगा वर्तमान में स्पिक मैके में मीडिया और संचार-समन्वय की प्रमुख के रूप में कार्यरत रहते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं संस्कृति के अनेक अनुषंगों के विस्तार और विशेष रूप से शिक्षा के केन्द्रों और संस्थानों से जोड़कर कार्य करने में विशेषज्ञता हासिल की है जिसका प्रमाण 7000 से अधिक गतिविधियाँ हैं जो देश-विदेश में आयोजित हुई हैं। सुश्री सुमन डूंगा को स्पिक मैके के इण्टरनेशनल कन्वेन्शन को 2015 में आईआईटी मुम्बई में संयोजित करने और उसकी चर्चा व्यापक स्तर तक पहुँचाने का सफल श्रेय है।

समाचार पत्रों की शीर्ष संस्था टाइम्स ऑफ इण्डिया के साथ मिलकर उन्होंने इस बडे़ सांस्कृतिक महोत्सव को एक अलग ही अन्दाज में प्रस्तुत किया। यह एक ऐसा आयोजन था जिसमें 2000 प्रतिनिधियों और प्रति सप्ताह 300 कलाकारों का सांस्कृतिक सामंजस्य लोगों के लिए अविस्मरणीय रहा है।उत्तरभारत विशेषकर हरियाणा, पंजाब, चण्डीगढ़, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सुश्री सुमन डूंगा ने स्पिक मैके और स्वप्रेरित-स्वस्फूर्त उपक्रमों के माध्यम से संस्कृति को कला रसिकों, कला के जिज्ञासुओं और प्रेमियों के साथ-साथ नयी पीढ़ी के स्वभाव में भी शामिल करने का जतन किया है जो उनके लिए एक बड़े आत्मसुख का हिस्सा है।

हाल ही में एक बड़ा सांस्कृतिक जलसा दिल्ली में चर्चा का केन्द्र बना जब आईडीसी जर्मनी और यूथ डेलिफिक गेम्स ऑर्गेनाइजिंग कमेटी ने अत्यन्त व्यापक स्तर पर कला और संस्कृति का बड़ा महोत्सव आयोजित किया। इसमें 100 देशों का प्रतिनिधित्व था। सुश्री सुमन इस पहल के बीच अपनी विनम्रता और अथक सक्रियता के साथ दृश्य में दिखायीं दीं। 

सुश्री सुमन ने समय-समय पर अनेक अवसरों में चाहे वो आयोजनों का मंच हो या दूरदर्शन का वैचारिक प्लेटफॉर्म या फिर औपचारिक-अनौपचारिक संवादों की स्थितियाँ, अपनी जिम्मेदारी, दृष्टि, सोच, संवेदना और लक्ष्य का आश्वस्त परिचय दिया है। वे बच्चों से लेकर बड़ों और बुजर्गों, सामान्य जनजीवन से लेकर दिव्यांगों के बीच भी सुरुचि और उत्साह के साथ अपनी नैतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करती हैं।

सुश्री सुमन अपने शब्दों में इस पूरे परिदृश्य में, स्वयं के होने को ईश्वर का वरदान और अपने लिए सौभाग्य मानती हैं। वे कहती हैं कि कला और संस्कृति का विश्व और व्यापक सामाजिक फलक उनके लिए देशकाल और परिस्थितियों, हर हाल में जीने का जरिया हैं, अपने आपको साबित करने का जरिया हैं, मनुष्य बने रहने का जरिया हैं, संवेदनाओं को बनाये रखने का जरिया हैं……………

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जी हां आज के तकनीकी दौर में भागना ही सफलता की कुंजी है। जिसे हम रेस कहते हैं। पहले के जमाने में इस रेस को खेल से जोड़ा जाता था, और आजकल जिम्मेदारियां, नौकरी, बिजनेस आदि से। लेकिन जिम्मेदारियों के साथ भागती जिंदगी बहुत कुछ दे जाती है और ले भी जाती है। डॉ. देवेन्द्र कुमार अरोड़ा ऐसी ही एक कुंजी का नाम है जिन्होंने इस रेस को जीवंत कर दिया है। इस रेस को खेलेगा इंडिया... खिलेगा इंडिया की मुहीम बनाकर। 
जी, बिलकुल सही एक टीचर, प्रोफेसर और मैनेजमेंट गुरू डॉ. देवेन्द्र अरोड़ा ने जब बच्चों को खेलने और खिलने का पाठ पढ़ाया तो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि खेल के प्रति इतना प्यार और प्रभाव मिलेगा। छोटे-छोटे बच्चों की आशाएं और मेहनत को एक मुकाम तक लाने के लिए ही डॉ.देवेन्द्र ने स्पोर्ट्स अकादमी ऐसोसिएशन ऑफ इंडिया का निर्माण किया। आज डॉ. देवेन्द्र इस स्पोर्ट्स अकादमी ऐसोसिएशन ऑफ इंडिया के फाउंडर बतौर कार्यरत है। जो खेल के मैदान से कई नगीनों को चुनकर उनके सपनों को पूरा करने में प्रयासरत है। 
ऐसी ही शख्सियत जो खेल के प्रति दीवानगी रखती है, सोसाइटी में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने का प्रयास करती है तो, आइए जानते हैं उनसे उनके बारे में: 
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डॉ. शोभा गुप्ता एक आईवीएफ विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं जो आईवीएफ, आईयूआई और आईसीएसआई, एंड्रोलॉजी और भ्रूणविज्ञान में विशेषज्ञता रखती हैं। डॉ। शोभा ने दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और डीजीओ, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से प्रसूति और स्त्री रोग में एमडी किया। वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, फेडरेशन ऑफ गाइनोकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया के साथ-साथ दिल्ली मेडिकल काउंसिल सहित विभिन्न संगठनों की सदस्य हैं। डॉ शोभा गुप्ता दिल्ली के पीतमपुरा स्थित मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर में अपनी विशेषज्ञता हासिल कर रही हैं।

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डॉ. शोभा का मानना है कि आईवीएफ के द्वारा एक औरत मां बनने का सपना पूरा कर सकती है, लेकिन आज की युवा पीढ़ी इसका गलत इस्तेमाल न ही करें तो बेहतर होगा। यदि आाप संपूर्ण है तो सम्पूर्णता का अपनाकर ही मां बनें न कि शॉर्टकट्स को अपनाना बच्चे व मां की सेहत के लिए अच्छा होता है। साथ ही उनका कहना है कि आईवीएफ को लेकर मार्केट में कई बिजनेस निकालने वाले लोगों ने इस क्रिया को भम्रित करने का काम भी किया है जो बेहतर समाज के लिए अच्छा नहीं है। आइए बातचीत के द्वारा डॉ. शोभा गुप्ता से जानते ह है उनके बारे में और उनकी विशेषज्ञताओं के बारे में.

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डॉ रविंद्र तुली भारत के पुणे स्थित प्रतिष्ठित सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज के 1964 बैच के पूर्व छात्र हैं। चिकित्सा स्नातक होने के बाद उन्होंने एयरोस्पेस मेडिसिन, स्पोट्र्स मेडिसिन और इंटरनल मेडिसिन में स्नातकोत्तर प्रशिक्षण प्राप्त किया। संपूर्ण स्वास्थ्य की खोज में और आधुनिक चिकित्सा में व्यापक रिक्त स्थान को भरने के लिएए उन्होंने चीन में विभिन्न संस्थानों में एक्यूपंक्चर की प्रणाली का अध्ययन किया। भारतीय योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के दर्शन, विभिन्न आध्यात्मिक हीलिंग तकनीक और साइको-Hypnotherapy आदि। बिना किसी दवा के बीमारियों का स्वाभाविक तौर पर इलाज करने का वादा करने वाले, डॉ.रविंद्र तुली की फाउंडेशन सोहम भी इस आदर्श मॉडल के रूप में विकसित हो रही है। 

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डॉ राहुल गुप्ता को न्यूरोसर्जरी में 18 साल का अनुभव है। उन्होंने रोहतक के सरकारी मेडिकल कॉलेज और पीजीआईएमईआरए चंडीगढ़ से प्रशिक्षण किया। उन्होंने 8 साल तक पीजीआईएमईआरए चंडीगढ़ और जीबी पंत अस्पताल, नई दिल्ली में न्यूरोसर्जरी विभाग में फेकेल्टी मेंबर के रूप में काम किया। वह जुलाई 2012 से फोर्टिस हेल्थकेयर में एक वरिष्ठ न्यूरोसर्जन हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में कई पत्र प्रस्तुत किए हैं और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में लगभग 50 लेख भी प्रकाशित किए हैं। उन्हें 2011 में नागोया यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस, जापान में प्रेस्टीजियस सुगिता छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया था। उनकी रुचि के क्षेत्र में मिनिमली इनवेसिव ब्रेन और स्पाइन सर्जरी, एंडोस्कोपिक स्कल बेस सर्जरी, एंडोवस्कुलर न्यूरो सर्जरी,जटिल ब्रेन ट्यूमर और न्यूरोवास्कुलर सर्जरी और बाल चिकित्सा न्यूरोसर्जन हैं। वह जटिल मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आघात के मामलों का प्रबंधन करने में भी कुशल है। मस्तिष्क और रीढ़ से संबंधित अच्छे स्वास्थ्य के बारे में ज्ञान प्राप्त करने के लिए वह कई कार्यक्रमों में भी जाते हैं। 

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बच्चे भगवान का दिया सबसे खूबसूरत तौहफा है लेकिन कुछ महिलाएं इस सुख से वंचित रह जाती हैं। बच्चा पैदा न करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं लेकिन आजकल विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि आईवीएफ तकनीक के जरिए मां बनने की उम्मीद बढ़ जाती है।
डॉ. ज्योति बाली दिल्ली में बेबीसून फर्टिलिटी और आईवीएफ सेंटर में स्त्री रोग विशेषज्ञ और बांझपन विशेषज्ञ हैं। वह फेलो रिप्रोडक्टिव मेडिसिन, इनफर्टिलिटी इवैलुएशन ट्रीटमेंट, आईवीएफ, आईयूआई, गायनोकोलॉजिकल प्रॉब्लम केयर एंड प्रेग्नेंसी डिलिवरी में विशेषज्ञता रखती है। 
डॉ. ज्योति बाली मेडिकल डायरेक्टर, बेबीसून फर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर एक प्रमुख प्रसूति विशेषज्ञ हैं, जो बांझपन के विविध क्षेत्र के सभी पहलुओं में एक दशक से अधिक का अनुभव रखती हैं और निरंतर इस पर कार्य भी कर रही हैं। उन्होंने अपनी स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, बेलगाम से की। उन्होंने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली से सीनियर रेजिडेंसी किया। उन्हें प्रतिष्ठित बैंगलोर असिस्टेड कॉन्सेप्शन सेंटर और डॉ. कामिनी राव के अस्पताल, बैंगलोर में एआरटी के क्षेत्र में प्रशिक्षित किया गया था।
Thespeaktoday.com  द्वारा डॉ.ज्योति बाली से आईवीएफ व उनके करोल बाग स्थित सेंटर बेबीसून के बारे में लिए इंटरव्यू के कुछ अंश: 
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छोटी सी उम्र का बड़ा कमाल देखिए… ना धूप देखी ना छांव… बस बढ़ते गए है पांव….. युवा उम्र का ये जो निसंदेह करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा बनेगा।
जी हाँ हम बातकर रहें हैं नारी शक्ति की अनुपम उदाहरण और श्रीमती संजूदेवी सुथार एवं  स्वर्गीय श्री लुनाराम जाँगिड़ सुथार की सुपुत्री सुश्री पार्वती जाँगिड़ सुथार की, जो राजस्थान के एक छोटे से ग्रामीण शहर की रहने वाली है। आपने अपना संपूर्ण जीवन बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं एक भारत श्रैष्ठ भारत के लिए लगा देने का प्रण किया।
सुश्री पार्वती कहती हैं कि ‘’लड़की का जन्म कहाँ हुआ है गरीब के घर या अमीर के घर, गाँव में या शहर  में, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, वह भव्य सपने देखने की हकदार है और हमसब मिलकर उसके सपने साकार कर सकते है’’ ऐसी सोच रखते हुए आप दूर दराज गाँवों में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रेरित कर रही हैं। शिक्षा के बाद बेटियाँ भी हर काम में अपनी सहभागिता निभा सकती  हैं, नौकरी, स्वरोजगार हेतू उन्हेंप्रेरित कर, महिला सशक्त हो, इस में एक कदम और आगे बढ़ा रही है।
साथ ही आप 2015 से युवा संसद, भारत की स्थापना कर युवाओं को राष्ट्र निर्माण के प्रतिजागरूक कर रही हैं, युवाओ को भारतीय लोकतंत्र, संसदीय कार्यप्रणाली से रूबरू कराने के लिए देश के भिन्न भिन्न हिस्सों में युवा संसद बुलाती हैं।
पार्वती बचपन से रक्षाबंधन के पर्व को भारत रक्षा पर्व के रूप में अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर पर मनाती हैं, वह सात दिन तक बॉर्डर पर रहती है, इन सात दिनों में वह लगभग आठ नौ सौ किलोमीटर बॉर्डर कवर करती हैं, राखी बाँधने के साथ साथ सीमा की लास्ट चौकियों, फौजी भाइयों की समस्यायें नोट कर, संबधित आईजी, डीजी व सरकार को अवगत करा उसके निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसी जज्बे को सलाम करते हुए सीमा सुरक्षा बल (बी.एस.एफ.) इन्हें सिस्टर ऑफ बीएस एफ कहता है।
हालही आपने इजरायल में हुए वर्ल्ड गवर्नेंस एक्सपेडिशन 2018 में ‘‘फ्यूचर लीडरऑफ द वर्ल्ड‘‘ टाइटल के तहतभारत के बेहतरीन 30 यंग लीडर्स  में शामिल हो देश का प्रतिनिधित्व किया। 13 से 19 अक्टूबर, 2018 तक इजराइल में तिरंगा लहरा भारतीय डेलिगेशन में सर्वश्रेष्ठ चुनी गई और इन्हे लीडरशिप का उत्कृष्ट सम्मान ‘‘चाणक्य अवार्ड-2018‘‘ से सम्मानित कियागया।
अपने बाल विवाह को नाकाम कर समाज और देश के लिए हुई समर्पित सुश्री पार्वती जाँगिड़ को देश के प्रतिष्ठित मीडिया ग्रुप दैनिक भास्कर के  माय ऍफ़ एम् की तरफ से जियो दिल से अवार्ड (महिला कल्याण एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में) से भी सम्मानित किया गया। 
हाल ही पार्वती का विजन इंडिया फेलोशिप में देश के टॉप पांच यंग लीडर में  चयन हुआ, जिसके तहत पार्वती दिल्ली व देश के अलग अलग हिस्सों में जाकर राष्ट्र निर्माण के बारे में और अधिक सीखेगी, इसके तहत इन्हे पांच लाख रुपये स्टाइपेंड भी मिलेगा। पार्वती की अभी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार में इंटर्नशिप चल रही है। 

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Dr. Vivek Bindal is a pioneering surgeon in South East Asia in the field of robotic bariatric surgery.
He has one of the largest series of robotic bariatric procedures, has extensively published and is regularly invited around the world as an expert in this field.

A surgeon committed to patient welfare as the first goal and strongly inspired by teaching and training in sharing knowledge.

He is available at https://drvivekbindal.com