June 17, 2019
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भारत में अक्सर गृहणियों का स्थान केवल रसोई घर तक सीमित होता है लेकिन इस रूढ़िवादी मानसिकता को तोड़ते हुए पंजाब की सनमीत कौर ने वर्ष २०१३ में कौन बनेगा करोड़पति में पांच करोड़ रुपए जीत कर यह साबित कर दिया कि महिलाएं किसी से कम नहीं और एक महिला में उतना ही सामर्थ्य होता है जितना एक पुरुष में होता है। वह मूल रूप से चंडीगढ़ की रहने वाली हैं, लेकिन कुछ वर्षों से मुंबई में रहती हैं। बता दे कि सनमीत कौर कौन बनेगा करोड़पति मे ५ करोड़ रुपये जीतने वाली पहली महिला है। आज के दौर में जहां महिला सशक्तिकरण पर बड़ी-बड़ी बातें की जाती है सनमीत कौर उन सभी गृहणियों के लिए एक मिसाल है जो आज भी रसोई घर में काम करते हुए यह सोचती है कि वह कुछ नहीं कर सकती। हमारे संवाददाता से खास बातचीत करते हुए सनमीत ने कई सवालों का जवाब ईमानदारी से दिया और यह बताया कि उनकी जिंदगी आज भी किसी आम हिंदुस्तानी जैसी है। यह रहा उस इंटरव्यू का अंश :

प्रश्न : सनमीत जी आप सबसे पहले अभी तक के अपने सफर को अपने शब्दों में बताएं और बताएं  की आपने किन-किन संघर्षों का सामना अपनी जिंदगी में किया?
उत्तर : मेरा जन्म चंडीगढ़ में वर्ष १९७५ में हुआ, मैंने पूरी पढ़ाई चंडीगढ़ में की और १९९३ में मेरा विवाह हुआ और शादी के बाद मैं मुंबई शिफ्ट हो गई। शुरुआत में मेरे हस्बैंड इंश्योरेंस कंपनी में काम करते थे और बाद में वह एक्टिंग लाइन में आए। मेरी संघर्ष की शुरुआत मेरी सर्जरी से हुई क्योंकि डॉक्टर ने सर्जरी के बाद मुझे बेड रेस्ट के लिए बोला था। सर्जरी से पहले मेरा टिफिन सर्विस का काम था जो बहुत ही बढ़िया चल रहा था। मुझे लगभग ६ महीने का बेस्ट रेस्ट के लिए बोला गया उस वक्त मुझे लगता है कि मेरे हस्बैंड ने काफी सहयोग किया और मैं उस वक्त डिप्रेशन में जा रही थी लेकिन मेरे हस्बैंड ने मुझे प्रोत्साहित किया और उन्होंने ही सबसे पहले मुझे सलाह दी कि मैं बाहर नहीं जा सकती तो मुझे घर बैठे ट्यूशन शुरू कर देनी चाहिए जिससे मेरा भी मन लगा रहेगा। ऐसे करते करते  मैंने अपने आप को व्यस्त रखा जिससे मैंने डिप्रेशन से मुकाबला किया। और रही बात केबीसी की तो उसमे मुझे शुरू से ही रुचि थी। मैंने लगभग १० सेशन केबीसी के देखे हैं। जिस वक्त में बेड रेस्ट पर थी उस वक्त भी मैंने केबीसी देखा और मन में ठान लिया की एक ना एक दिन हॉट सीट पर जरूर बैठना है। और मैं पिछले १० साल से केबीसी में ट्राई भी कर रही थी कि इस बार तो जरूर मेरी किस्मत साथ दे देगी और फिर मैंने जब २०१३ में ट्राई किया तो मैंने सोच लिया था कि अबकी बार अगर नहीं हुआ तो मैं और इसमें और अपना समय नहीं दूंगी, फिर एक-दो महीने बाद मुझे सुबह फोन आया, मुझे याद है कि मैं उस वक़्त बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रही थी और मैंने फोन उठाया और उन्होंने बोला कि हम केबीसी से बोल रहे हैं और आपका सिलेक्शन हो गया है एक सेकेंड के लिए तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ फिर उन्होंने बोला कि आप को ऑडिशन देने के लिए मुंबई आना पड़ेगा तब मुझे यकीन हुआ कि नहीं यह सब मजाक नहीं बल्कि हकीकत है और फिर मैं ऑडिशन देने के लिए गई और उसके ३ महीने के बाद में हॉट सीट तक पहुंची। मैंने बस अपना धैर्य नहीं खोया और मुझे परमात्मा पर पूरा विश्वास था कि वह मेरे साथ हैं।

प्रश्न : केबीसी में पांच करोड़ रुपये जीतने के बाद आपकी जिंदगी में क्या बदलाव आया?
उत्तर : हम तो वैसे के वैसे ही रहे लेकिन दुनिया का देखने  रवैया था उसमें काफी बदलाव आया। अगले दिन हस्बैंड अपने काम पर, मैं अपने काम पर मतलब समान्य जिंदगी की तरह ही सब कुछ चल रहा था। मुझे किस्सा याद आता है कि मैं एक बार सब्जी लेने के लिए बाहर गई तो मैंने अपने हस्बैंड को बताया कि आज तो लोगों ने मुझे घेर लिया था तो मेरे हस्बैंड ने कहा कि यह जो तूने अपनी मेहनत से हासिल किया है यह उसी का फल है। मतलब सरल शब्दों में कहूं तो लोगों का ढेर सारा प्यार मुझे मिला। काफी जगह मुझे  चीफ गेस्ट  व्हाइट किया गया सही मायने में ऐसा लग रहा था कि मानो यह सब ऊपर वाले की कृपा है।

प्रश्न :आप अपनी कामयाबी का क्रेडिट किसे देगी?
उत्तर : मेरी कामयाबी का पूरा क्रेडिट मेरे हस्बैंड और मेरी फैमिली को जाता है उन्हीं के प्यार और सहयोग से मैंने यह सब हासिल किया। मुझे याद आता है कि जिस वक्त मैं  बेड रेस्ट पर थी उस वक्त मेरे हस्बैंड ने काफी मुझे मोटिवेट किया उन्होंने  लगभग अपना सारा समय मुझे दिया और मुझे डिप्रेशन में जाने से बचाया। उन्होंने ही मेरे अंदर सकारात्मक विचार डाले और मुझे विश्वास दिलाया कि मैं कुछ भी कर सकती हूं अगर मैंने ठान लिया है तो। और जब मुझे केबीसी से कॉल आया था कि आप सेलेक्ट हो गए हो उस वक्त मुझे मेरी बेटियों ने बहुत मदद की।  पिछले एक-दो साल की सारी न्यूज़, करंट अफेयर्स यह सारी चीजें मेरी बेटियों ने ही मुझे याद दिलवाने में मदद की जैसे मैं किचन में खड़ी हूं तो वह बोलती थी कि मम्मा 'यह पढ़ो', 'यह सुनो', 'यह देखो' मतलब मुझे मेरे पूरे परिवार का  प्यार और समर्थन था। 

प्रश्न : क्या आपको लगता है कि ट्यूशन पढ़ाने से आपको मदद मिली?
उत्तर :जी हां, एक तो मुझे ट्यूशन पढ़ाना बहुत अच्छा लगता था क्योंकि जो मैं स्टूडेंट्स लेती थी वह लर्निंग डिसेबिलिटी वाले बच्चे होते थे जिनको पढ़ाने के लिए मुझे एक चीज को १०-१० बार पढ़ाना होता था जिसकी वजह से मेरा खुद का भी ज्ञान बढ़ता गया। उन सभी चीजों ने मेरी बहुत मदद की।

प्रश्न : आप उस पल को अपने शब्दों में बताएं कि जब सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा था कि आप ५ करोड रुपए जीत गई है।
उत्तर : उस पल के बारे में अगर आज भी सोचू तो मैं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उस वक्त जवाब देने के बाद मैंने अपने आप को भगवान के भरोसे छोड़ दिया था कि मैंने तो अब जवाब दे दिया अब जो होगा देखा जाएगा और एक तो अमिताभ बच्चन जी का बोलने का तरीका भी अनोखा है वह भी डरा देते हैं अपने अंदाज में मानो ऐसा लगता है कि गलत जवाब दे दिया हो लेकिन फिर जब उन्होंने बोला कि आप पांच करोड़ रुपए जीत गई हो मानो की एक सेकेंड के लिए तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ उसके बाद अमिताभ बच्चन जी ने मुझे गले से लगाया और मुझे भी लगा कि नहीं यह सपना नहीं बल्कि वास्तविकता है फिर उन्होंने मेरे हस्बैंड को मंच पर बुलाया और  उस वक्त सबसे पहले मैंने ऊपर वाले का शुक्रिया अदा किया कि आज जहां पर भी खड़ी हूँ केवल  परमात्मा की वजह से  खड़ी हूं। आज भी उन पलों के बारे में सोचते हुए मैं रोमांचित हो जाती हूँ।

प्रश्न : अक्सर लोगों को याद नहीं रहता कि केबीसी का विनर कौन है मतलब एक-दो दिन के लिए सब बात करते हैं फिर बाद में सब भूल जाते हैं। आपने लोगों के मन में कैसे जगह बनाई?
उत्तर : यह तो मेरे वाहेगुरु ने ही लोगों के मन में जगह बनाई है। और जिस वक्त मैं जीती  उन दिनों महिला सशक्तिकरण पर काफी ज्यादा देश में बाते हो रही थी मुझे लगता है कि मैंने ज्यादातर महिलाओं के हृदय में स्थान पा लिया कि अगर मैं कर सकती हूं तो कोई भी कर सकता है।

प्रश्न : हमने आपके बारे में रिसर्च की और हमें मालूम चला कि आप प्रड्यूसर बन चुकी है, तो आखिर प्रड्यूसर ही क्यों सोचा आपने?
उत्तर : देखिए, मेरे हस्बैंड राइटर भी है उन्होंने लगभग ७५ शॉर्ट फिल्म्स लिखी है सबसे पहले मैंने उन्हें प्रोड्यूस किया। हमारा यूट्यूब पर चैनल भी है 'असली सरदार जी' के नाम से तो उस चैनल पर सबसे पहले हमने शॉर्ट फिल्म रिलीज की। उसके बाद हमने अपना नया प्रोडक्शन हाउस लॉन्च किया 'चार यार एंटरटेनमेंट' के नाम से इसका इनॉगरेशन २५ मई को किया। इसके नाम के पीछे भी एक कहानी है हम चार दोस्त हैं एक मैं, एक मेरे हस्बैंड, एक विक्रम कुमार जो कि ऑस्ट्रेलिया से है वह भी एक एक्टर है और एक मेरी मित्र भावना कुमारी।

प्रश्न :आपके आगे क्या प्लान है? 
उत्तर :हम सुनील ग्रोवर का शो यूके में करवा रहे हैं जो लीसेस्टर मे २१ जून को है और लंदन में २३ जून को। 
एक हमारी वेब सीरीज बन रही है 'आई- मी - माइन' के नाम से जिसका पिछले दिनों ही शूट खत्म हुआ है। आगे  बॉलीवुड मूवीस के  भी प्रोजेक्ट बन रहा है।
आगे हमें अपने प्रोडक्शन हाउस को और ऊंचाई पर ले कर जाना है। अच्छी स्टोरीज पर मूवीस बनानी है जो की परिवार  आधारित हो जिससे देश के युवाओं को मोटिवेशन मिले और हमारा काम समाज में एक सकारात्मक संदेश दे।

प्रश्न :आप उन गृहणियों को क्या संदेश देना चाहेंगी जो घर पर बैठी है कुछ करना चाहती है लेकिन समाज की बंदिशों की वजह से कुछ कर नहीं पा रही? 
उत्तर :सबसे पहले तो मैं उन सभी महिलाओं को एक ही बात समझाना चाहती हूं कि अपने दिमाग से नकारात्मक विचार निकाल  दे कि वह कुछ कर नहीं सकती। आजकल तो सोशल मीडिया का जमाना है आप घर बैठे बैठे आपके पास जो भी हुनर है वह दुनिया के सामने प्रदर्शित कर सकते हो बस बात है आपके लगन  की। कोई भी चीज नामुमकिन नहीं है हर चीज मुमकिन है अगर आपने उसे करने का इरादा बना लिया है तो।  और मुझे तो लगता है कि एक हॉउस वाइफ ही है जो पूरे घर को बांधकर रखती है यानी अगर हम घर संभाल सकते हैं तो हम कुछ भी संभाल सकते हैं।

प्रश्न : सरकार के प्रति आपका क्या संदेश है महिला उत्थान के संबंध में?
उत्तर :महिला सशक्तिकरण पर तो केंद्र की सरकार बहुत काम कर रही है मोदी जी ने देश भर में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का अभियान चलाया, ट्रिपल तलाक पर कानून बनाया, जिससे काफी सारी महिलाओं को लाभ मिला बस मेरा कहना इतना ही है कि महिलाओं पर काम करने की कोई पाबंदी ना लगे और सरकार अपनी पहली प्राथमिकता महिला सुरक्षा को दें।

आज वाकई में सनमीत कौर देश में लाखों महिलाओं  के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है कि अगर एक ग्रहणी भी अगर इरादा बना ले तो सब कुछ हासिल कर सकती है।

Shehzad Shaikh : Beauty is something that reflects from within. The outer one is transitional

Sachin Parikh : You Don’t need to be perfect in order to be successful

Shubhangi Atre : Eyes are the biggest mirror of a person.

Sahil Anand : Being rich, has nothing to do with your attire. Your personality speaks up for you.

Arif Zakaria : Hard work beats talent when talent doesn’t works hard.

Adaa Khan : Standing out in red with a slash of red lipstick.

Arjun Bijlani : He who keeps his cool, wins

Aniruddh Dave : A new day with new thoughts and new strengths

Asmita Sood : Loved and blessed

Bhanujeet Singh : Make a goal to be disciplined and being fit would follow

Delnaaz Irani : Confidence, the best outfit to rock on

Gaurav Sharma : Casual and comfortable

Helly Shah : Love is in the hair

Ira Sone : Get up, show up and never give up

Jasmine Bhasin : A woman like the sun should always shine bright.

Jason Shah : Pardon my Swag

Samir Soni : My style is to take something unexpected and make it a hit.

Malhar Pandya : Begin, be bold, and venture to be wise.

Shashank Vyas : Life works better when we know how to glance at things.

Rohitashv Gour : Good old days

Shivin Narang : Whatever comes in my way, I take it with smile.

स्टार भारत का बेहद अनोखा शो राधकृष्ण राधा और कृष्ण के अपार त्याग और प्रेम की कहानी हम सदियों से अपने पुरखों के मुँह से सुनते आ रहे हैं। ऐसे में रील लाइफ के चहिते कृष्ण ;सुमेध मुदगलकर और राधा ;मल्लिका सिंह की रियल लाइफ में डेट करने की खबर आ रही हैं, जिससे मल्लिका की माँ बेहद नाराज़ हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी की अनुसार सुमेध और मल्लिका सेट पर किए जानेवाले शूट सीक्वेंस के जरिए अपने रियल प्यार का इज़हार करते नजऱ आ रहे हैं। दर्शकों की फेवरेट जोड़ी अब रियल लाइफ जोड़ी भी बन चुकी हैए यह जानकार दर्शक बहुत खुश होंगे। अब ऐसे में सुमेध और मल्लिका की नज़दीकियों से वाकिफ मल्लिका की माँ हमेशा 24 घंटे सेट पर मौजूद रहती हैं ताकि वह अपनी बेटी पर नजऱ रख सकें।
बताया जा रहा है कि मल्लिका की माँ नहीं चाहती कि उनकी बेटी अपने करियर की शुरुआत में ऐसी किसी भी तरह की गल्तियाँ करें। मल्लिका की माँ के अनुसार वह अभी बहुत छोटी है ऐसे में मल्लिका को केवल उनके करियर पर ध्यान देना चाहिए। इसलिए मल्लिका की माँ सेट पर हर वक्त इन प्यार में पड़े पंछियों के पर कतरने की फिराक में रहती हैं।
भगवान कृष्ण की सुंदरता से मोहित होकर जब हज़ारों गोपियाँ उनके प्यार में पड़ गई थी तो मल्लिका अपने सुमेध को कृष्ण अवतार में देखकर भला कैसे प्यार को कैसे अपने प्यार को रोक पाती। वहीं सुमेध का भी दिल अपनी भोली रियल लाइफ मल्लिका के लिए धड़कने से खुदको नहीं रोक पाया। अब देखना है कि सुमेध और मल्लिका का प्यार एक हो पाता है या नहीं या मल्लिका की माँ इनदोनो को अलग करने में सफल हो पाती हैं।

कई बार ऐसा होता है कि कलाकार परदे पर जिस तरह की भूमिका निभाते हैं उसको लेकर दर्शकों के दिमाग में उनकी एक खास छवि बन जाती है। ये कलाकार टेलीविजन पर अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाने के उद्देश्य से इस क्षेत्र में कदम रखते होंगे। कुछ खास तरह की भूमिकाओं को बेहतरीन रूप में निभाने की उनकी क्षमता उन्हें मेकर्स और दर्शकों के लिये परफेक्ट खलनायक बनाती हैं। कहीं ना कहीं ये खलनायक बुरे होने का सही रास्ता ढूंढ लेते हैं।
बेहतरीन कलाकार साई बल्लाल ऐसी ही एक शख्सियत हैं, जो छोटे के साथ-साथ बड़े परदे पर भी खलनायक की भूमिका उतने ही आत्मविश्वास से निभा रहे हैं। पहले भी कई सारी नकारात्मक भूमिकाएं निभा चुके, बल्लाल को यह पता है कि उनकी सभी भूमिकाएं एक जैसी हैं और इसलिये उन्हें टेलीविजन के क्षेत्र में एंट्रऊी करने के साथ अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाने से कोई गुरेज नहीं है। उनकी एक और दमदार नकारात्मक भूमिका एंडटीवी के आगामी शो ‘जात ना पूछो प्रेम कीÓ में पूजन पाण्डेय की है।
बल्लाल एक अमीर ब्राह्मण प्रोफेसर की भूमिका निभा रहे हैं, जोकि इस शो में सुमन (प्रणाली ठाकुर) के पिता हैं। उनके पहले के खलनायक वाले किरदारों से अलग, पूजन पाण्डेय के मन में अपनी पत्नी और बेटी के लिये सम्मान और प्यार है, लेकिन जाति व्यवस्था पर उसका अत्यधिक विश्वास है। उसकी सारी पढ़ाई और बुद्धि उस समय पिछड़ जाती है जब उसका सामना एक नीची जाति के व्यक्ति से होता है। उस समय उसका वह घिनौना चेहरा सामने आ जाता है जब उससे तर्क के आधार पर बात की जाती है।
नकारात्मक भूमिकाएं निभाने को लेकर अपने विचार साझा करते हुए साई कहते हैं,”किसी किरदार की छवि से बाहर आ पाना बहुत ही मुश्किल होता है, क्योंकि आपके दर्शक आपको उसमें देखना चाहते हैं। मेरे लिये परेशानी यह है कि मैं हमेशा ही खलनायक की भूमिका निभाता रहा हूं। हालांकि, मुझे ऐसा लगता है कि खलनायक की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यह कहानी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हर किरदार का एक अलग रूप होता है और थोड़ा अनूठापन हर किरदार को एक-दूसरे से अलग बनाता है और इसलिये उसकी तैयारी करनी पड़ती है।
इस ग्रे किरदार की बारीकियों के बारे में बताते हुए, साई कहते हैं, ”सच कहूं तो पिछले कुछ समय से मुझे लगातार अच्छी नकारात्मक भूमिकाएं मिल रही हैं और मैं सकारात्मक भूमिका निभाने के लिये काफी उत्सुक था। लेकिन जब मुझे पूजन का किरदार सुनाया गया, तो मैं इसकी तरफ खिंचा चला आया, क्योंकि यह किरदार उन सारे किरदारों से काफी अलग था जोकि मैं पहले निभा चुका हूं। पहले मैंने जिस तरह की नकारात्मक भूमिकाएं निभायी हैं, उससे ‘जात ना पूछो प्रेम कीÓ में थोड़ी जटिलता है। इस किरदार का सबसे बड़ा आकर्षण है कि इस किरदार कों लेकर दर्शकों के दिमाग में जिस तरह की छवि बनी हुई है वह एक फिल्म की नहीं बल्कि दो-दो फिल्मों की है। इस तरह की सशक्त भूमिका को आत्मविश्वास के साथ निभाने से बड़ा चुनौतीपूर्ण और क्या हो सकता है? इस किरदार के लिये मुझे कुछ खास तरह का अंदाज दिखाना था और उसमें कुछ चीजें ऐसी थीं, जिसे मैं सीख रहा हूं और कुछ चीजें पता थीं। परदे पर हम जिस तरह की भूमिकाएं निभाते हैं, उसके लिये एक एक्टर के तौर पर हमें काफी नयापन लाना पड़ता है और साथ ही दर्शकों का प्यार इसी तरह पाते रहने के लिये भी काफी मेहनत करनी पड़ती है।ÓÓ
देखिये, इस प्रेम कहानी से परदा उठते हुए 18 जून, 2019 से, हर सोमवार से शुक्रवार, रात 8 बजे केवल एंडटीवी पर

The upcoming weekend will be filled with laughter and joy starring Abhay Deol and Mithila Palkar who will be seen promoting their film, ‘Chopsticks’ on Sony Entertainment Television’s The Kapil Sharma Show. During the show, laughter queen Archana Puran Singh had some intriguing insights to share about her fellow actor, Abhay Deol. It was revealed that during the shoot of, ‘Oye Lucky! Lucky Oye!’, Abhay was following very strict diet and on the other hand, Archana obliged him to eat laddoos. Not deviating from his regime, Abhay refused to eat the laddoos and successfully managed to control his cravings.

While the duo was shooting for the film Oye Lucky! Lucky Oye!, Archana Puran Singh confessed that she had a hard time convincing Abhay Deol to have laddoos who at that time, was following a strict diet for his then upcoming role in the critically acclaimed film, ‘Dev D’. But now, the actor who is off detox mode, enjoys gorging on some tasty ladoos. While all of us enjoy eating them with our hands, Abhay came up with the unique way of enjoying them. He uses chopsticks! He certainly believes in eating freely while he promotes his upcoming film.

Furthermore, when Kapil Sharma asked if the goat in his upcoming film is being taken care of, the actor revealed that the goat has a separate team for make-up and diet to which the comedian had a walk down memory lane saying, “When Ajay Devgn came here as a guest to promote his film, he revealed that he kept pet animals in front of a cooler to make them feel comfortable.”

Watch The Kapil Sharma Show every Saturday and Sunday, 9:30PM only on Sony Entertainment Television!

Siddharth Kumar Tewary’s larger than life mythological love story RadhaKrishn, is all set for one of the biggest wedding’s of Radha and Krishn on the show, which is surely going to grip the audiences with its interesting story line and all the high intensity drama that will unfold.

While the families of Radha and Krishn are preparing in full swing for the upcoming wedding, Kans on the other hand is plotting against all ends to once again put obstacles in the way of Krishn to try and ruin the wedding.

After getting a whiff of the guests arriving in the Munjuvan forest for one of the wedding ceremonies, Kans sends in another one of his demons to create chaos and obstruct the wedding festivities.

Shares a source,” Ahead in RadhaKrishn, Kans gets to know of the guests arriving for Radha and Krishn’s wedding ceremony in the Munjavan forest. He decides to create another obstacle for Krishn by sending his demon Shakhchoor to create a forest fire and block the path of the guests. On seeing this, Krishn takes a stand and in one go swallows the entire forest fire, clearing the path for the guests.

Actor Sharad Kelkar, who was the captain of Mumbai Aces which won Actors Cricket Bash, talks about what made them win, how they stood apart and what he expects in the future.

How do u feel on winning the first season of ACB

I am ecstatic! from 5-6 actors playing to now 100 players playing on the ground. And we were thinking about the same that we should do something like that. And, you know, for me the best part was the team, winning and losing comes much later. I had a team which was honest about the game. they were so selfless, so victory for me is that I got a bunch of actors, a bunch of friends and a bunch of brothers. Everybody gave their 100% and according to me, that is victory!

What contributed the most in the teams winning?

The unity between the actors, I think since the day the teams were divided and I got a bunch of actors, we were all united. And these guys, I tell you, none of the other guys worked so hard. They used to finish their work and come for the practice, they worked on their game and they worked on their game and they stuck together. They synced with each other. I don’t mean to say that other teams lacked this factor, but our team had that unity and mindset and that is what made us win. the selfless dedication showed by the team was a huge contribution to the team’s winning.

Who were your favourite players and why?

All of them, I can’t choose one single person because everybody played their part well and everyone gave their 100% nobody was complaining. Everyone stuck to the game plan, and that’s how we played.

Any controversies you experienced in this season?

No, this format is not for controversies. this is not a controversial tournament it is real cricket.

How would you sum up the whole experience?

It was amazing, there were 100 actors on the ground. And we were playing real cricket. It is not that we changed the equipment of the players on the ground. It was actual cricket on the actual ground. So it was tough competition on the ground and that was the best part. The 4 days when we play cricket together, I think they were an amazing experience for everyone. And I would say it is part of my growth, getting 15-16 actors together. And everyone has their own busy schedule. So, for me, that was a great task. And I learned a lot from it. I became a better human being, a person who belongs to a team and has a huge responsibility. I saw people who had high determination, selfless actually taught me a lot.

what is the best part of a tournament like ACB for you? Also, is there any part of the league that you would like to change?

I think Dilip Aggarwal has organized this whole tournament brilliantly, He asked everyone about the dates and the timings so that everyone can come play. Everyone has their own work commitment, their own choices, own personalities. To handle everyone is difficult and he single-handedly managed ACB. Maybe next year we will go to a bigger stadium and play. And I want to see ACB growing year by year. After seeing the first season, which is a massive success, it will be way bigger next time

What makes ACB stand out according to you?

Normally, people think that actors are only there to act and they are not serious about any other thing. But the best part is all our actors are players. If you see us in this tournament, it was outstanding. I have been a part of many leagues but this is far better. And I have seen extraordinary potential in all the actors. And all of them are amazing, it is not like only 4 players in a team are good players. That was the best part, people might think that how can these people play cricket? But if you see Savant’s injury, I think we all want to dedicate this trophy to him. Despite, falling and getting 3 fractures, he was standing. We also saw his picture on Instagram holding the man of the match trophy whereas, doctor told him that he cannot eat for a month. And we as individual dedicate this victory to Savant.

What do you have to say about Dilip Agrawal who has started this amazing league ACB?

I always said, I think on this day only, way back in 2006-07, Dilip, Salil Ankola, Shabbir and I met at a restaurant because we did a charity match before that. And we were talking about actors playing good cricket. We were like let’s form a team. And that is how ‘Boxxy Boys’ was formed. Then in these thirteen years, I have seen the dedication of the young actors. In the start, we had only 10-11 players and now we have 80-90 players. And very selflessly they have given themselves to the team. And when the number increased, we thought of doing a tournament but there were many hurdles like sponsors etc. But Dilip was behind it. He did this alone because we all got busy with our shooting, he alone is the flag bearer. Finally he did it! And it is commendable!

Be it a roast, comedy on screen or a web series, it doesn’t take much for the Indian audience to get offended and for an actor to be trolled. However, all this does not bother actor Gaurav Gera. “India is a huge country and with the diversity of culture and population, there are all types of people in our country . Some get offended but many smile too
Acting styles , film making style and storytelling styles have evolved .. comedy has evolved too. Also if we talk about platforms .. Now television/ films are not the only source of comedy , there are digital platforms too which have great comedy shows/ content , it’s a time to bloom for comedy.

We have English humour and then there is apna desi humour too, so let them get offended whoever gets and there are appreciators too,” he says. In India there’s audience to every kind of genre you will get Game of Thrones fan, you will get daily soap fans so there’s a market for everything

Meanwhile, the actor has created quite a stir with his characters Aadu , Billi Masi, Chutki Shopkeeper and other avatars on social media. Ask him why he didn’t do this on TV, and he says, “In TElevision I am hired only to act .. but in my videos I am the creator .. When I create a video, I am the scriptwriter, editor, camera person, makeup artist, the actor which i find more satisfying than only acting .The whole process of creating to executing is super fun.

The actor says that the process of working in TV wears him out. “Shows do well and it has been working and will be working forever I would have loved to take television but in TV deadline is the boss .. We still have last minute scripts and same day telecasts … people still work for really long hours , no offs on Saturday sundays I think my temperament might fit better into web series ,” he says

Zee TV is all set to bring its new fiction offering Hamari Bahu Silk, an entertaining take on women with questionable jobs that society raises eyebrows at and their struggle for acceptance even within their own family and inner circle. With an unusual concept being narrated very differently from anything ever seen before on television, actors of the show are leaving no stone unturned to prepare themselves for their challenging roles. Recently, the charming hero of the show Zaan Khan who plays Naksh revealed how he has been focusing on developing some real photography skills in order to convincingly essay his on-screen passion in the show – photography!

Naksh is a young and happy-go-lucky boy who finds his calling in photography. Due to his family pressure and objections, Naksh is always torn between photography and his family business. In order to essay his role effortlessly and justify his character as a budding photographer, talented Zaan has been going the extra mile to understand the art and vision of a photographer! The young heartthrob has been meeting up with his professional photographer friends and trying his level best to understand the postures, body language, style and mannerisms of a photographer.

Talking about this Zaan said, “Playing a photographer on-screen is extremely exciting and I wanted to do justice to the character. I have a few friends who are into the field and I chose to meet them and spend time with them to understand the basics of the camera, how to hold it, the body language and mannerisms while clicking. I spent adequate time on my research so that my passion can come across as natural on-screen. What’s interesting is how I have actually become rather hooked onto photography personally while I started off with it purely as a preparation for my role. I hope I can bring out the detailing well and the audiences and fans enjoy this side of me”

Kudos to Zaan for pushing the boundaries of method acting and going the extra mile!!