August 11, 2020
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जब पहली बार नन्हा फूल गोदी में आया ,
बेटी की चाह भी वही सोच को दिल में समाया |

माँ का प्यार था इतना , हर वक़्त हाथो से खिलाया ,
शुक्र है भगवान् का , इस फरिस्ते से हमें मिलाया |

बचपन से अलग ही किस्मत लेके जन्मा हैं ये नहीं मालूम,
शरारती था थोड़ा पर उसका मासूमियत से भी था तालुक |

राजस्थान की धरोहर, अमरसरिया वंश का चालक था ,
स्टार बना दिल्ली में , कियूंकी रहने वाला पालम का था |

जब पता चला की कैंसर ने आके उसको घेरा है ,
फिर भी हिम्मत ना हारी, कहता कामयाबी पे हक़ मेरा हैं |

माँ बाप को डर इतनी दवाइयों का लगता यही दुःख सारा है ,
पर उसकी आँखों में कभी नहीं देखा की वो कैंसर से हारा है |

कीमोथेरपी को हँसते – हँसते सहन कर गया,
खुशनसीब होते अगर ईश्वर भी हम पर कर देते दया |

मन से चंचल सोच में अव्वल, इसलिए नाम मनन रखा ,
सपने और हकीकत के सभी खट्टे -मीठे पलो को साथ में चखा ||

बालकृष्ण अमरसरिया