June 4, 2020
Politics

क्या Corona Diplomacy का फायदा उठा पायेगा भारत?

कई देशों की कंपनियां ने Covid—19 चलते चीन पर अपनी निर्भरता को कम करने का ठान लिया है। इस फेहरिस्त में शामिल है जापान, दक्षिण ​कोरिया, संघ और अमेरिका। इन देशों की बड़ी कंपनियां अपने Plants चीन से बाहर ले जाना चाहती है।

चीन की अकड़ के चलते यूरोपीय संघ और अमेरिका से उसके संबंध बेहद खराब हो गये है। अमेरिका और चीन के बीच एक प्रकार का Trade War शुरू हो गया है।
दक्षिण कोरिया की कंपनियों जैसे Hyundai और Pasco ने भारत में अपने बड़े Plants चीन से निकालकर भारत में लाने की बातचीत शुरू कर दी है।

आरंभिक दौर में चीन को छोड़ने वाली कंपनियों ने भारत की बजाय वियतनाम को तरजीह दी। इसके बाद भारत को लगा कि एक बड़ा मौका हमारे हाथ से निकल ना जाये।
भारत के Overseas Mission ने चीन से भारत आने वाली कंपनियों को Incentives देने का प्रस्ताव रखा है। भारत की प्राथमिकता Medical Equipment Supplier, Food Processing Units, Lather और Auto Parts Maker को लेकर है। इसके अलावा 550 Products पर चर्चा की जा रही है।

एक सर्वे के मुताबिक USA की कं​पनियां अपने बड़े Plants चीन से बाहर ले जाना चाहती है। US Secretary of State Pompeo ने भी कहा था कि भारत, आस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और वियतनाम के साथ बात कर रहें हैं ताकि इससे उबरने के बाद हम अपनी Supply Chain को Restructure किया जा सके।

उत्तर प्रदेश सरकार की चीन बाहर अपने Manufacturing Plants ले जाने वाली USA की 100 कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन कंपनियों को कई रियायत देने का प्रस्ताव किया है।

Medtronic plc and Abbott Laboratories कंपनियों के मुंबई में छोटे Plants है लेकिन अब दोनों कंपनियां अपने बड़े Plants चीन से भारत लाने के बारे में सोच रही हैं।

जापान या अमेरिका की कंपनियों के वापस अपने देश नहीं जाकर भारत आने वाली कंपनियों को Secured Land और Skilled Laber देने का प्रस्ताव दिया है। यूरोप के देश Luxembourg से दोगुनी बड़ी जमीन भारत इन कंपनियों को प्रदान करेगा। साथ ही यह भी कहा गया कि Labour Law में यदि कुछ तब्दीली करनी पड़ी तो भारत उसके लिए भी तैयार है। बजट में Digital Transaction पर लगने वाले Tex को टाल दिया है।

भारत सरकार 13000 करोड़ रूपये का निवेश करके बड़ी मात्रा में दवाईयां और Medical Device बनाना चाहती है। इसमें भारत की कंपनियों के जरिये उन दवाओं का निर्माण किया जायेगा जिसके लिए पहले भारत की चीन पर निर्भर था।

भारत ने अमेरिका को दवा देने के लिए Hydroxychloroquine पर से Ban को हटा दिया था और अमेरिका को संकेत दिया था कि दोनों देश भविष्य में मिलकर काम करना चाहते हैं।
भारत में कोरोना वायरस के चलते 122 Million नौकरियां जा सकती हैं। इसको संभालने के लिए भारत को विदेशी कंपनियों आकर्षित करना होगाI भारत में बेरोजगारी की दर इस वक्त 27.1 फीसदी है जो 45 सालों में सबसे अधिक है।

भूमि, कामगार और कर के Reforms जल्द करने होंगे, जो बहुत दिनों से लंबित पड़े हुए है। इसका भारतीय कंपनियों को भी फायदा होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को देश में आने वाली कंपनियों को Secured Land, Water and sewerage जैसी महत्वपूर्ण विषयों को लेकर बदलाव लाना होगा। इसके अलावा यह भी गारंटी देनी होगी कि Retrospective Tax नहीं लगाये जायेंगे। इसके कारण वोडाफोन को काफी दिक्कत हुई थी।

भारत की लाल फीताशाही विदेशी कंपनियों के लिए परेशानी का सबब बन जाती है। इसलिए कोरोना संकट को मौके के तौर पर देखते हुए भारत को चीन से भारत आने की इच्छुक कंपनियों के लिए Single Window की व्यवस्था करनी चाहिए और भारत को Manufacturing Hub बनने के मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।

भारत ने वियतनाम और कंबोडिया के मुकाबले बड़ा बाजार है जिससे यहां आने वाली कंपनियों को काफी फायदा होगा। “एक टोकरी में सभी अंडे नहीं रखने” वाली कहावत को विश्व सही मान रहा है। ऐसे में भारत कोई ऐसी गलती ना कर दे जिसे लेकर बाद में भारत को पछताना पड़े।

Deepak Sen – Senior Journalist

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *