August 13, 2020
Art-n-Culture

Good is not the enemy of Best – अच्छा श्रेष्ठ का दुश्मन नहीं होता

हमारा जीवन असुरक्षाओं व अनिशितताओं से भरा है | हर समय हमारे मन में एक अजीब तरह की असुरक्षा की भावना रहती है, मन कई चीज़ों के लिए असुरक्षित व अनिश्चित सा रहता है | ये भावना काल के अधीन नहीं होती, न ही उम्र, जाति, धर्म या देश के अधीन नहीं होती |

ये असुरक्षा की भावना कर्ण की भावना है जो अर्जुन की श्रेष्ठता से आती है | ये भावना उस औरंगजेब की भावना है तो दारा शिकोह की बढ़ती लोकप्रियता से आती है | ये हर उस बालक में आती है जो कक्षा में अधिक प्रश्नों का उत्तर देते साथी छात्र को देखता है| हर उस खिलाड़ी के मन में आती है तो दूसरे खिलाड़ी को ज़्यादा प्राप्त करते देखता है |

ये हर उस राजनीति के निपुण नेता की भावना है जो किसी नये नेता को उभरते देखता है|

ये ट्रंप की मनोस्थिति भी है जो विरोध को बढ़ते देखती है | ये नंद की भावना है तो चाणक्य के संकल्प को से आती है | ये चाणक्य की भावना है को विदेशी आक्रमणकारियों को देख कर आती है|

ये भावना काल, देश, भाषा, धर्म, व जाति की सीमाओं से परे हैं | ये किसी में भी आ सकती है, चाहे आप श्रेष्ठ हो या ना हों, आप देश, समाज के लिए सही चाणक्य हो या औरंगजेब हो |

ये श्रेष्ठ में अपना स्थान छीन जाने के डर की भावना, श्रेष्ठता पाने को आगे बढ़ते व्यक्ति के मन में साथी प्रतियोगी की प्रगति देख कर श्रेष्ठ के मन में आने वाली भावना | निपुण में निपुणता के बाद भी किसी साधारण से काम ना कर पाना व वही काम किसी साधारण से दिखने वाले व्यक्ति के वही काम कर सकने के बाद आने वाली भावना |

ये बड़ी विकट स्थिति है, ये स्थिति किसी भी बड़े से बड़े योद्धा को हरा सकती है | बड़े से बड़े योगी का संतुलन खराब कर सकती है |

यहाँ बड़ा सवाल है की इस परिस्थिति से कैसे बचा जाए, क्या इसका कोई निदान है | क्या इससे होने वाले संभावित नुकसान से बचा जा सकता है |

जवाब एक ही है – हाँ

इससे एक ओर बड़ा सवाल निकलता है – कैसे ?

जैसे रात का निदान दिन है, अंधेरे का इलाज उजाला है | उसी तरह एक विचार, एक भावना की इलाज भी दूसरी भावना में या विचार में ही छिपा है | मगर उलझन ये है की वो भावना कैसी हो, वो विचार कैसा हो |

इसके लिए रात का दिन से, अंधेरे का उजाले से आपसी रिश्ते को समझना ज़रूरी है | रात का दिन से, अंधेरे का उजाले से विपरीतात्मकता का रिश्ता है, एक दूसरे से विपरीत होने का रिश्ता है |

इसी तरह असुरक्षा की भावना का इलाज भी इसकी विपरीत भावना में छिपा है|

उजाला दीपक भी देता है पर वो सूरज का स्थान नहीं ले सकता | पानी नदी में भी है मगर वो समुद्र का स्थान नहीं ले सकती | पानी समुद्र का अच्छा है, प्रक्रति का संतुलन बनता है पर पीने के काम नहीं आ सकता | पीने के लिए कुए का पानी ही आता है |

हर व्यक्ति की अपनी श्रेष्ठता है, अपनी उपयोगिता है | कोई भी दूसरे का स्थान नहीं ले सकता |

श्रेष्ठ हमेशा श्रेष्ठ रहे, ये प्रक्रति का नियम नहीं है |

दीपक का प्रकाश अच्छा है पर सूरज श्रेष्ठ हैं|

असुरक्षा की भावना का इलाज सहज सहयोग की भावना ही है | प्रक्रति का नियम मानते ही हम सहयोग करें | जैसे दीपक रात को सूरज का सहयोग करता है| दीपक हमें प्रकाश का एहसास देता है व सूरज के आने तक का समय गुजारने में सहयोग देता है |

हम द्रद्ता से अपने मन को ये विश्वास दिलाएँ की अच्छा श्रेष्ठ का दुश्मन नहीं होता |

अच्छा श्रेष्ठ का सहयोगी होता है| श्रेष्ठ के लिए ये श्रेय कर है की वो अच्छे का सहयोग करे व प्रक्रति का चक्र चलने दे |

प्रक्रति का आधार यही भावना है की अच्छा श्रेष्ठ का दुश्मन नहीं होता |

Good is not the enemy of Best

लेखक – विक्रम गौड़

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