May 16, 2021
Lifestyle

माइक्रोफाइनेंस लेंडिंग पर त्रैमासिक रिपोर्ट

पिछली दो तिमाहियों के दौरान आई गिरावट के बाद, माइक्रोफाइनेंस के क्षेत्र में तेजी आई है। दिसंबर 2020 की तिमाही में 1.18 फीसदी की वृद्धि के साथ यह 226.6 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान ग्राहकों की संख्या में भी रिकवरी देखने को मिली, हालांकि दिसंबर 2019 के मुकाबले यह सात फीसदी कमजोर रहा। मोराटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही के दौरान पुनर्भुगतान की स्थिति दबाव में दिखी।

रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में नीचे बताया गया है :

  • वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के जीएलपी (ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो) में 1.18 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ रिकवरी के संकेत देखने को मिले। दिसंबर 2020 तक माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री 226.6 हजार करोड़ रुपये की रही।
  • पिछली तिमाही के मुकाबले डिस्‍बर्समेंट में 80 फीसदी की तेजी आई और यह 56090 करोड़ रुपये रहा। हालांकि यह वित्‍त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के मुकाबले 11.5 फीसदी कम है।
  • वॉल्यूम के आधार पर देखा जाए तो पिछली तिमाही के 175 लाख रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट दोगुना रहा, जो कोरोना महामरी से पूर्व वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही के मुकाबले मात्र चार फीसदी कम है।
  • वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट का 20.1 फीसदी हिस्सा छोटे कर्ज (दस हजार रूपये से कम) का रहा और इसकी वजह कर्ज पुनर्गठन और गारंटीड आपातकालीन ऋण के हिस्‍से के रूप में दिए गए नया लोन रहे।
  • मोराटोरियम पीरियड खत्म होने के बाद भी चार महीने पुनर्भुगतान दबाव में दिखा। दिसंबर 2020 में कर्ज के शुरुआती भुगतान में चूक (पीएआर 1-30 फीसदी) 8.3 फीसदी रहाजबकि पीएआर 31-180% में 12.7 फीसदी का इजाफा हुआ।
  • करंट/गुड पोर्टफोलियो (0 DPD) के मामले में संग्रह में सुधार देखा गया और इसकी वजह से सितंबर 2020 से दिसंबर 2020 के दौरान मासिक फॉरवर्ड फ्लो में करीब 10 फीसदी की गिरावट रही।

सीआरआइएफ का नजरिया:

इस वित्त वर्ष भारत में सूक्ष्म वित्त क्षेत्र यानी माइक्रोफाइनेंस की यात्रा काफी उतार चढ़ाव वाली रही है। लगातार पहली दो तिमाहियों में ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो (जीएलपी) में गिरावट के बाद तीसरी तिमाही में इस क्षेत्र रिकवरी के संकेत नजर आ रहे हैं। पिछली तिमाही के मुकाबले मौजूदा तिमाही में जीएलपी में हुई 1.18 फीसदी की बढ़ोतरी इसका प्रमाण है। वित्त वर्ष 2020-21 में बाजार के फिर से खुलने और गतिविधियों के सामान्य होने की वजह से डिस्‍बर्समेंट में तेजी आई। ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ ही डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में तेजी आई है और इसे कर्ज देने वाली संस्थाओं ने मान्यता प्रदान की है। वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही में डिस्‍बर्समेंट में तेजी आई है और यह पूर्व-महामारी के स्तर की ओर धीरे-धीरे बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में वितरित किए गए पांच में से एक लोन दस हजार रूपये से कम के रहे और इसकी वजह कर्ज पुनर्गठन और महामारी की वजह से पैदा हुए आर्थिक तनाव के प्रबंधन के लिए गारंटीड आपातकालीन ऋण के रूप में दिए गए नए लोन्‍स रहे।

कोविड-19 के कारण पैदा हुए मौजूदा व्यवधान ने लोगों की घरेलू आय को बुरी तरह से प्रभावित किया है जिसमें बड़ी संख्या में माइक्रोफाइनेंस लेने वाले लोग शामिल हैं। इसकी वजह से इस माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र के संग्रह में गिरावट देखने को मिली। मोराटोरियम की अवधि खत्म होने के बाद की अवधि के बाद भुगतान के मामले में अधिक चूक देखी गई, जो वित्त वर्ष 2020-21 में जारी है। पूर्वी राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में बाढ़ और चक्रवात सहित महामारी और प्राकृतिक आपदाओं के दोहरे प्रभाव की वजह से वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में भुगतान के मामले पर सर्वाधिक दबाव देखा गया। असम माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (रेग्युलेशन ऑफ मनी लेडिंग) विधेयक 2020 को माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं के संचालन को विनियमित करने और इस क्षेत्र में मौजूद तनाव को कम करने के लिए पेश किया गया है। कोविड 19 की वजह से यह क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ है लेकिन भारत में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के लिए यह पहला संकट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह क्षेत्र पहले की तरह इस बार भी चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटने में कामयाब होगा। नई सामान्य स्थिति में स्थिरता और आर्थिक तरक्की के लिए माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं में डिजिटल टेक्‍नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स का लाभ उठाते हुए तेजी से बदलते कारोबारी माहौल के अनुकूल अपने आप को ढालने की जरूरत होगी।

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