September 28, 2020
Politics

हाँ मैं औजार हूँ

औजार हूँ, औजार हूँ, औजार हूँ,
सत्ता का, नेता का, क्रांति का या भ्रांति का,
किसका मैं औजार हूँ,
कर रहा विचार हूँ |

पक्ष हो, विपक्ष हो,
जो साधने में दक्ष हो,|
ओट मेरी ले रहा,
चोट मुझे ही दे रहा ||
अपने अहम के सामने,
ना कर रहा विचार है,
मेरी कोई शक्ल हो,
उसके लिए औजार है||

Artist – Neeraj Gaur

भोजन कभी तू लाता है,
कभी संग कैमरे के आता है,
सहायक का किरदार निभाता है,
सबको जाने क्या बताता है,
सबमें छिपा तेरा एक ही विचार है,
ये मेरा गद्दी का औजार है |

मीडीया एक क्रांति है,
पर फैला रहा भ्रांति है|
जानता हर पक्ष है,
पर जाने क्यूँ निष्पक्ष है |
दिखाए की मैं बेकार हूँ,
बेधर हूँ, बेजार हूँ |
पर सत्य कुछ और है,
उसके लिए भी मैं औजार हूँ|
हाँ मैं औजार हूँ,
तेज धार औजार हूँ ||

मेरे पक्ष को जाने कौन,
मेरे मैं को पहचाने कौन,
मैं सब हूँ देख रहा,
पर में हूँ खड़ा मौन||

जीवन आगे लंबा पड़ा,
कुछ ठीक कुछ पहाड़ सा खड़ा|
पग में चक्र, काँधे पर भविष्य,
चल रहा हूँ ले दृढ़ निश्चय
मंज़िल है मेरी भी,
पहुँचने को बेकरार हूँ,
तुमसा ही हूँ मैं भी,
समझो ना औजार हूँ||

लेखक – विक्रम गौड़

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