September 30, 2020
Art-n-Culture

14 साल की उम्र में पंडित जसराज का हुआ था अपमान, फिर अपनाया गायकी को

जीवन को संगीत और संगीत को जीवन मानने वाले पंडित जसराज एक कार्यक्रम के सिलसिले में इंदौर आए हैं। उन्होंने अपने बारे में खुलकर बात की।उन्होंने बताया कि “कृष्णजी को गाता हूं मैं। उनकी भक्ति ही सारा संगीत है मेरा। बिरले ही सही लेकिन जब गाता हूं तो कभी वह क्षण भी आता है जब कृष्ण दर्शन देते हैं। मुझे उनका अलौकिक रूप नज़र आता है।

यह सिर्फ तब होता है जब एक सुर सधा हुआ लग जाए, अच्छा लग जाए… ऐसा हो तो ही मिलती है वह छवि। प्रभु दिखें ऐसे सुर कब लगते हैं जानते हो! जब मैं और आनंद एक हो जाते हैं। जब किसी भी दायरे से परे हो जाता है गाना। वही तो आनंद है और जब तब आनंद तब तक राग, नहीं तो बैराग। लोग कहते हैं संगीत जीवन देता है, मेरा कहना है कि संगीत तो खुद ही जीवित शय है… और जो जीवित है वह बदलता रहेगा…उसमें छिपे भाव बदलते रहेंगे।

जो बदल न सके वो तो मृत है। आज भी जब गाने बैठता हूं तो मन में उठने वाले भाव नए होते हैं…ताज़ा होते हैं।

शुरुआती दौर में मैं 20 घंटे रियाज़

अक्सर यह बात सामने आती है कि संगीत बदल रहा है। असल में लोग शास्त्रीय संगीत समझते नहीं हैं। जो शास्त्रीय संगीत सीखते हैं वे ही उसे बेहतर समझ पाते हैं। संगीत के सच्चे साधक को रियाज़ के अलावा कुछ और नहीं सोचना चाहिए। मेरा रियाज़ तो चाहकर भी नहीं छूट सकता। शुरुआती दौर में मैं 20 घंटे रियाज़ किया करता था। आज दो-ढाई घंटे ही गाता हूं। इतनी ही देर सिखाता भी हूं…अंतर भी तो आ गया है समय में…पहले लोग 20-20 किलोमीटर दौड़ लिया करते थे। अब दो किमी भी दौड़ नहीं सकते।

क्रिकेट में मेरी रुचि है

संगीत से इतर मैं कुछ सोच नहीं सकता लेकिन क्रिकेट में मेरी रुचि है। 1986 से ही क्रिकेट का शौक है। उस समय रेडियो पर अक्सर लंदन से क्रिकेट कॉमेंट्री आती थी। सिग्नल साफ हो ना हो…आवाज़ आ रही हो या नहीं, लेकिन पूरे समय रेडियाे कान से लगाकर कॉमेंट्री सुनता था। भारत की टीम में सचिन और कुंबले यदि होते तो किसी में दम नहीं था कि 10-15 सालों तक हमें कोई हरा सकता था। क्रिकेट का ये शौक आज भी बरकरार है मेरा।

अपमान ने मोड़ा गाने की ओर

पंडित जसराज ने कहा कि संगीत की राह पर मेरी शुरुआत तबले से हुई थी। 14 बरस की उम्र में अपमानित करने वाली एक घटना ने मुझे गायकी की ओर मोड़ दिया। इंदौर का होलकर घराना काफी प्रसिद्ध रहा है। उस्ताद अमीर खां, पंडित कुमार गंधर्व, लता मंगेशकर, किशोर कुमार सहित इतनी हस्तियां यहां से हैं। कई बार लगता है कि कहां मैं हरियाणा में पैदा हो गया। ईश्वर इंदौर में ही जन्म दे देता तो इन सभी की सोहबत मिलती।

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