September 21, 2020
Art-n-Culture

बुलाती है मगर… सबको अलविदा कह गए राहत इंदौरी साहब

मैं मर जाऊँ तो मेरी इक अलग पहचान लिख देना,
लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना..!

“‘सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिटटी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’ यह बेमिसाल शेर कहने वाले उर्दू के सुप्रसिद्ध शायर राहत इंदौरी का मंगलवार शाम 5:00 बजे निधन हो गया। राहत इंदौरी ने बीत दिन ही अपने कोरोना पॉजिटिव होने की खबर सोशल मीडिया के माध्यम से दी थी और लोगों से उनके अच्छे स्वास्थ्य की दुआ करने के लिए कहा था। लेकिन वह अपने सारे चाहने वालों का दिल तोड़ कर दुनिया को अलविदा कह गए। इंदौरी साहब रात साढ़े नौ बजे छोटी खजरानी (इंदौर) कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिए गए । कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उनको दफनाया गया।राहत इंदौरी ने मंगलवार सुबह ही ट्विटर पर अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी दी थी. मंगलवार को इसी एकाउंट से उनकी मृत्यु की सूचना दी गई.
राहत इंदौरी के मरणोपरांत उनके ट्विटर अकाउंट से ये ट्वीट किया गया.

इस ट्वीट में लिखा है – “राहत साहब का Cardiac Arrest की वजह से आज शाम 05:00 बजे इंतेक़ाल हो गया है….. उनकी मग़फ़िरत के लिए दुआ कीजिये।
उनके निधन पर राजनीति, फिल्म, साहित्य जगत की हस्तियों गहरा दुख प्रकट किया है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीटर पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “अपनी शायरी से लाखों-करोड़ों दिलों पर राज करने वाले मशहूर शायर, हरदिल अज़ीज़ श्री राहत इंदौरी का निधन मध्यप्रदेश और देश के लिए अपूरणीय क्षति है. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति दें और उनके परिजनों और चाहने वालों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दें.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहत इंदौरी के निधन पर ट्वीट करके लिखा, दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके चाहने वालों के साथ हैं.

इसी साल उनके द्वारा एक मुशायरे में पढ़ी गयी अपनी नज़्म ‘बुलाती है मगर जाने का नहीं’ भी टिक टोक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर खासी वायरल हुई थी. आइए एक नजर डालते हैं राहत इंदौरी के उन फेमस शेर पर जिन्हें लोगों ने कई बार दोहराया।

-दो गज सही ये मेरी मिलकियत तो है
ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।

इबादतों की हिफाजत भी उनके जिम्मे हैं,
जो मस्जिदों में सफारी पहन के आते हैं।

-अफवाह थी की मेरी तबियत खराब है
लोगों ने पूछ-पूछ के बीमार कर दिया।

-अब कहां ढूढने जाओगे हमारे कातिल
आप तो तत्ल का इल्जाम हमीं पर रख दो।

Mahipal Singh chauhan

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