June 1, 2020
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डाॅ. (इंजी.) आलोक सक्सेना की माह-ए-रमजान मुबारकबाद

जनाब, शुक्रवार दिनांक 24 अप्रैल, 2020 को चांद दिखने के बाद शनिवार दिनांक 25 अप्रैल, 2020 से मुस्लिम धर्मावलंबियों का पवित्र रमजान का महीना शुरू हो चुका है। यहां आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि हमारे मुस्लिम आत्मीय भाई-बहन इस्लामी कैलेंडर के रमजान महीने में रोजा यानी उपवास रखते हैं। वह सवेरे से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी खाते-पीते नहीं हैं। यहां तक जल (पानी) तक नहीं पीते। इस दौरान पूरे एक महीने तक रोजे रखे जाते हैं और उसके बाद ईद का खुशियों भरा त्योहार मनाया जाता है। रमजान का महीना और ईद समस्त मानव जाति को आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का खुशनुमा संदेश देती है।

जनाब, दुर्भाग्य है कि इस बार इस दौरान विश्वव्यापी अदृश्य जानलेवा कोरोना वायरस के घातक प्रकोप से अपना मुल्क भी लॉकडाउन की कठिन प्रक्रिया से गुजर रहा है। लॉकडाउन हम सब देशवासियों की सुरक्षा हेतु सतर्कता के साथ अपनी जान की हिफ़ाजत करने हेतु बहुत जरूरी कदम है। और स्वास्थ्य मंत्रालय एवं भारत सरकार द्वारा जो भी सावधानियां और सतर्कताएं बताई गई हैं उनका सख्ती से पालन करना भी हम सभी के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ, बार-बार साबुन से हाथ धोते रहना और नाक व मुंह पर मास्क पहनना बहुत जरूरी है। अतः इस बार पवित्र रमजान माह पर आत्म संयम की पहले से अधिक आवश्यकता है। आपस में एक-दूसरे से शारीरिक दूरी रख कर ही हम स्वयं और अपनों को सुरक्षित रख सकते हैं। फिलहाल कोरोना वायरस से बचने का और कोई विशेष उपाय नहीं है।

जनाब, रमजान के इस पवित्र मौके पर मैं अपने समस्त मुस्लिम आत्मीय भाई-बहनों को अपनी एक मौलिक कविता के माध्यम से मुबारकबाद देता हूं और सबका मालिक एक उन्हें दिल से अल्लाह कहो, परवरदिगार कहो या फिर परमपिता परमात्मा भगवान कहो, मैं भी उनसे विश्वभर के अमन-चैन की प्रार्थना करता हूं। और लीजिए मेरी मौलिक कविता के रूप में आप भी स्वीकार कीजिए, ‘माह-ए-रमजान मुबारकबाद’-

लो, रमजान का पवित्र महीना आ गया, जनाब,
परवरदिगार परमात्मा रोशन करे रमजान आपका,
हो कुबूल इस माह अल्लाह से हर फरियाद आपकी,
चाँद के पार है अल्लाह मिया आपका और हमारा,
पैगम्बर मोहम्मद साहब कह गए,
‘शैतानों को जंजीर किया जाता है इस माह’,
इबादत कुबूल करवा ले मौका है रमजान का,
अदृश्य शैतान कोरोना हो बंदिश यहां,
कोरोना घात के दोज़ख (जहन्नुम) से सारे जग को बचा,
फिर मगफिरत (मोक्ष) की हर बात बन जाए,
हर रोजा (उपवास) ही रूहानियत (अध्यात्मिकता) का रास्ता है आपका,
सदा पाकसाक रहने और पाकीज़गी की शर्त है हर रोजा,
खुदा रहमत करे कि, हर शख्स नेकी के मकां में रहे,
हर रूह (आत्मा) का अल्लाह (परमात्मा) मिलन है हर रोजा,
अल्लाह के बंदों पर बरसेगी ‘रहमत’,
अल्लाह नाजिल (प्रकट) करेगा ‘बरकत’,
फिर मगफिरत का समय होगा जब,
अल्लाह करेगा माफ़ नापाक गुनाहों को भी,
वह रहमदिल है सर्वशक्तिमान है, जनाब,
बस रखनी होंगी उसकी सदा नेक दिल पैग़ामभरी बातें याद,
कि रमजान के बाद भी न दुःखी हो दिल किसी का,
नफ़रत व हिंसा को छोड़कर, ज्ञान, प्रेम, पवित्रता, सुख,
शांति, आनंद और शक्ति का हो वास हर बंदे में सदा,
अल्लाह कहो या खुदा या फिर परमपिता परमात्मा,
उसकी बेहद की प्यारभरी तालीम में हम सब बस हो जाएं फिदा,
जब भी जनाजा उठे इस धरा से तो,
परवरदिगार अल्लाह के आगोश में बस निश्चिंत हो सो जाएं,
मित्रो, ये आपका मित्र ‘आलोक’ कहता है आपसे,
मेरे आत्मीय भाई-बहनों हो बहुत-बहुत मुबारक,
आपको अल्लाह मिलन रमजान का ये महीना ।
इतनी दुआएं मांगना अल्लाह से मेरे मित्र,
हो जाए अपने मुल्क समेत दुनियाभर से
नापाक अदृश्य शैतान कोरोना वायरस का खात्मा,
फिर भययुक्त शारीरिक दूरी मिटा कर,
आने वाली नव पवित्र ईद पर,
जी भर फक्र से गले मिल जाएं हम लोग सदा,
फिर से हो चमन ये अपना मुल्क और जहान हमारा,
और हे अल्लाह परवरदिगार,
हमारा जब भी दम निकले
तो तेरी इबादत में ही निकले।

( लेखक राष्ट्रीय मीडिया अधिकारी, प्रयोगधर्मी व्यंग्यकार एवं प्राकृतिक चिकित्सक हैं )

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