March 22, 2019
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नई दिल्ली: कांस्टिच्यूशन क्लब में मकर संक्रांति महोत्सव एवं पूर्वांचल सम्मान समारोह का आयोजन का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि एन डी एम सी के सचिव श्री मती रश्मी सिंह और दिल्ली पुलिस के सहायक आयुक्त – बी के सिंह, मेजर जनरल यस पी सिन्हा, कमिश्नर भारत सरकार बिनोद कुमार सिंह सहित देश भर से कई बुद्धिजीवी एवं गणमान्य लोंगों उपस्थित थे।
श्रीमती रश्मी सिंह का कहना है कि जो व्यक्तिगत तौर से जुड़े गये है कहीं न कहीं अनेक कार्यक्रमो के साथ लगे, कार्यक्रमों के परे क्यों कि कार्यक्रम सब कुछ नहीं होता। कार्यक्रम के परे जो दुनिया है उस दुनिया में पूर्वांचल फाउण्डेशन आज इस भावना के साथ इस कार्यक्रम से परे होने चाहिए। उनके बारे में सोचिए और  पूर्वांचल के लोगों के बारे हमे एक दूसरे की सहायता करनी चाहिए। जो लोग ज्यादा सक्षम है उनको पूर्वाचल के लोगों का विकास के बारे में सोचना चाहिए ।मेजर जनरल यस पी सिन्हा का कहना है कि पूर्वाचल में लोगों के बीच में वृद्धि पहचान के लिए एक्शन प्लान बनाने की जरूरत है और सभी लोग एक दूसरे का सहयोग करें। इस अवसर पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा राजेन्द्र सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष-राष्ट्रीय हिन्दी एकता मिशन सह अध्यक्ष विहार क्षत्रीय एकता समिति के राणा सिंह को पूर्वाचल सम्मान के सम्मानित किया गया। पूर्वांचल फाउण्डेशन के अध्य्क्ष सुरेंद्र सिंह का कहना है हमारी कोशिश है कि हम सभी पूर्वाचल के लोगों को एक साथ लाने की।निर्मल सिंह, ’सचिव पूर्वांचल फाउण्डेशन/ अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा दिल्ली के मंत्री कुँवर रघुवंश सिंह सेंगर, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री/राष्ट्रीय प्रमुख मीडिया प्रभारी उमेश कुमार सिंह, अध्य्क्ष पूर्वांचल समाज दिल्ली के राकेश सिंह, निर्मल सिंह अध्य्क्ष वीर कुँवर सिंह फाउण्डेशन दिल्ली, आदि शक्ति सेवा संस्थान के अध्य्क्ष रजनीश , पुरंजुल राणा युवा नेतृत्व दिल्ली, प्रणय चंदेल, रवि रघुवंशी, रंजन राजपूत , सतीश कौशिक, केशव झा, अतुल सिंह लक्की परमार, डा.पीसी ठाकुर, किशोर सिंह, आदि सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे।

  • मैं बांग्लादेश कभी वापस नही जा सकती क्योंकि मैंने लज्जा जैसे उपन्यास लिखे हैं रूतसलीमा नसरीन
  • भारत में रहना जीना बांग्लादेश से अधिक आसान है- तसलीमा नसरीन

विश्वप्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन  उपन्यास  बेशरम का लोकार्पण विश्व पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन के स्टाल जलसाघर में हुआ. इस मौके पर लेखिका तसलीमा नसरीन के अलावा लेखिका  अल्पना मिश्र एहिमांशु बाजपेयी एवं राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी मौजूद थे ण्लोकार्पण के बाद वरिष्ठ पत्रकार मनीषा पाण्डे ने लिखिका से विस्तार से बात की.

बेशरम उपन्यास तसलीमा नसरीन के 1993 में आये ‘लज्जा उपन्यास की उत्तर कथा हैं तथा राजकमल प्रकाशन द्वारा इसे प्रकाशित किया गया है. लज्जा उपन्यास के कारण ही बांग्लादेश में कट्टरपंथी समूहों द्वारा लेखिका पर फतवा जारी कर दिया गया था तथा किताब पर  प्रतिबन्ध लगा दिया गया था. लेखिका आज भी निर्वाषित जीवन व्यतीत कर रहीं हैं. इस उपन्यास का बांग्ला भाषा से हिंदी में अनुवाद उत्पल बैनर्जी द्वारा किया गया है,

लेखिका तसलीमा नसरीन ने किताब के बारे बताते हुए कहा ‘ मेरे पहले उपन्यास लज्जा में  हिन्दुओं को बांग्लादेश से कैसे सांप्रदायिक दंगो के कारण देश छोड़ना पड़ा था वह कहानी थी. वहीँ बेशरम उपन्यास लज्जा उपन्यास के पात्र सुरंजन और माया जो बांग्लादेश छोड़ के हिंदुस्तान में आये उन लोगों ने कैसे पराये देश में अपने जीवन यापन के लिए संघर्ष किया उनकी कहानी है ण्यह उपन्यास राजनीतिक से हटके समाजिक जीवन पर केन्द्रित हैं.

बांग्लादेश देश वापस जाने के प्रश्न पर लेखिका ने कहा कि ‘ जो लोग बांग्लादेश से उस समय छोड़ कर भारत में वापस आये अगर वे चाहें तो वापस बांग्लादेश जा सकते हैं क्योंकि उन लोगों के यादें वहां से जुड़ी हुई हैं ण्मगर मैं बांग्लादेश कभी वापस नही जा सकती क्योंकि मेने लज्जा और आदि उपन्यास लिखे हैं. और मुझे  देश छोड़ने को मजबूर किया गया था ण्जो कुछ भी बांग्लादेश में घटित होता है उसके विरोध में मै हमेशा  लिखती हूँ न केवल हिन्दुओं पर बल्कि अन्य  बांग्लादेशी  अल्पसंख्यकों  पर होने वाले अत्याचारों पर भी मैंने हमेशा आवाज उठाई है.

भारत के बारे में अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा ‘ भारत में रहना, जीना बांग्लादेश से अधिक आसान है. यहां  मुझे हमेशा अपने देश ही की तरह लगा हैं और बहुत  इज्जत  प्यार मिला है और साथ ही मै भारत की एक भाषा भी बोलती हूँ. मै चाहती तो  स्वीडन और अमेरिका में भी रह सकती हूँ क्योंकि मेरे पास वहां की नागरिकता है मगर मेंने भारत को चुना.

लेखिका तसलीमा नसरीन का बेशरम उपन्यास उन लोगों के बारे में हैं जो अपनी जन्मभूमि को छोड़कर किसी  और देश में दुनिया के अलग .अलग हिस्सों में  पराये माहौल पर परायी आबोहवा में अपना जीवन बिता रहे हैं . कहने की जरूरत नहीं कि तसलीमा ने यह जीवन  बहुत नजदीक से  जिया   हैं .उनकी विश्वस्तर पर  चर्चित पुस्तक लज्जा के लिए उन्हें कट्टरपंथियों ने देशनिकाला दे दिया था. लम्बे समय  से वह अपने मुल्क से बाहर हैं इस उपन्यास में उन्होंने अपनी जड़ों से उखेड़ ऐसे ही जीवन की मार्मिक और विचारोतेजक कथा कही है ण्स्वयं उनका कहना है की यह उपन्यास लज्जा की तरह राजनितिक नही है .इसका उद्देश्य निर्वासन की सामजिक दुर्घटना और उसकी परिस्थतियों को रेखांकित करना है.

In her new hindi poetry collection “JurratKhwaabDekhne Ki “(2018, AyanPrakashan, New Delhi) Rashmi Bajaj, the well known feminist poet, widens her canvas of themes and concerns beyond gender. As the prologue states, the collection is of “Poetry that is more than/mere deception and hypocrisy”. In the collection divided into four sections, the poet ruthlessly scans the contemporary intellectual, political, socio-cultural and gender _scenario.It forces us all to reinvent our’ human core’ beyond the narrow confines of identities and ideologies. The poet is outraged at the rampant misogyny ,gender oppression, sexual violence and she laments that all the lofty dreams of great men like “Gandhi”,“Ambedkar” about women emancipation and gender equal society stand badly shattered aswomen continue to be ‘eternal Dalits’. Even the ‘Manusmriti_burners’ become the perpetrators of gender oppression at homes and in life.The distinction of the collection is that it represents the voices that have long been ignored in the main literary discourse. There are poems on the plight of Kashmiri Hindus :‘Na koi NabinaMasiha’ and the cold_bloodedmurder of Dr. Pankaj Narang of Delhi emerges as the “New symbol”ofthe “new marginalized” of “New India” these people don’t fit in the vote_ scheme of politicians and discourse_ scheme of intellectuals. The poems prominently bring out the poet’s deep dismay over identity_ politics_ ridden times where people “first explore the caste ,religion and class of corpses before shedding tears on a dead fellow human being”. The poet also exposes the despicable fraud of the present day reformers and selfishsocial activists busy in photo shopping while sufferers thirst for ‘two drops of genuine love ‘.She calls out for destruction of the divisive political and intellectual narrative and discourse that spreads only hatred and despair which has let loose blood thirsty ‘madaris, performing Death shows with deadly antiques and Dance of Corpses’.
The real beauty of the collection is itsfinal message of faith , hope ,humanity and universal love. It is a world enlivened by Buddha and sufis even as Ambedkar,Abdul Kalaam and Amrita Pritam receive poetictributes. The myth ofSitais also recreated as she assumes name ‘Janki’and instead of burying herself in earth returns to take charge of her parental kingdom Mithila and serve her old and needy parents!
The poems reveal the poet’s unflinching faith inthe power of Art Of Poetry and strength of Poet:“Never ever perish/the infinite possibilities of poet and poetry”and poet in her‘NewAvtar’ will redeem the present depressing wasteland of ours.In our impoverished circumstances where ideologies and philosophies are becoming increasingly dissatisfying,“JurratKhwaabDekhneki” encapsulates a serious brave quest for “New scriptures/New scholarship/New wisdom/and new homo_sapiens”.
PROFILE – DR. RASHMI BAJAJ

A University topper, an All-Round Best Medal Awardee in her student life, a Head of English Deptt. in a Haryana College, Rashmi Bajaj is known as a promising bilingual (Hindi, English) poet, author and critic with a ‘bold, original stance’. Propelled by her intense desire to ‘connect’ with her ‘own’ people around her, she has chosen to adopt Hindi as her language of creative writing. Her poetry is her most effective means of realizing her Dream of creating a ‘beautiful, egalitarian world’. Her collections – “Mrityorma Jeevnam Garmaya” (1998) [From Death to Life], “Nirbhay Ho Jao Draupadi” (2006) [Be Thou Fearless, O Draupadi], “Surbala Ki Madhushala” (2009) [A Woman’s Tavern”] and “Swayamsiddha” (2013) [A Self-Realized Woman] are well-known feminist works and subjects of many research – degrees and research – articles by scholars. Her poems have been prescribed as teaching inputs in University Text Books. Her internationally acclaimed Criticism work “Women Indo-Anglian Poets: A Critique”, selected by U.S. Library of Congress among best publications in 1996, holds the distinction to be a milestone in the study of English poetry by Indian women writers. Her research articles and creative writing have been published in prestigious books, anthologies and journals. A recipient of many awards and honours, an inspirational scholarly speaker in international and national fora, celebrated poet in poetry congregations, Rashmi Bajaj is also a strong Print and Electronic media presence with her views, interviews and poems frequently published and telecast.

शारजाह: NDWBF 2019 गेस्ट ऑफ ऑनर

भारतीय ग्रंथ माला के साथ दिलचस्प संवाद

जबकि देश बड़ी आकांक्षाओं और खुशियों के साथ 2019 का स्वागत करने के लिए तैयार है। शारजाह द्वारा आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले 2019 के गेस्ट ऑफ ऑनर स्टैंड में कईं बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियां पुस्तक प्रेमियों की प्रतीक्षा कर रही हैं।

यूएई के तीसरे सबसे बड़े अमीरात के रूप में प्रशिद्ध, शारजाह प्रगति मैदान, नई दिल्ली के हॉल नं-7 पवेलियन एबीसी हॉल में अपनी समृद्ध अरबी सांस्कृतिक और साहित्यिक विशेषताओं का प्रदर्शन करेगा। शारजाह के अमीरात एक समृद्ध साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन करेंगे, जिसके तहत शारजाह का एक प्रतिनिधिमंडल 6.9 जनवरी तक पुस्तक मेले के आगंतुकों के समक्ष अपनी विभिन्न सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करेगा।

सूची में शारजाह की उन साहित्यिक पहलों पर बौद्धिक चर्चा शामिल है जिसने संयुक्त अरब अमीरात के प्रकाशन क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव डाला है और स्थानीय समुदायों को पुस्तकों और पढ़ने के करीब लाया है।

कार्यक्रम में साहित्य संगोष्ठीए कविता पाठ निशा, भारतीय सिनेमा पर संयुक्त अरब अमीरात के प्रभाव पर चर्चा और दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध जैसा कि अमिराती यात्रा साहित्य, अनुवाद में दर्शाया गया है और दोनों देशों में प्रकाशकों के समक्ष खड़ी चुनौतियों को सभी के सामने लाया जाएगा।

अमीरात ने हिंदी पाठकों को अमीरात की समृद्ध साहित्यिक विरासत से परिचित कराने के लिए 57 अरबी भाषा की रचनाओं का अनुवाद भी किया है। यूएई सुप्रीम काउंसिल के सदस्य और शारजाह के शासक महामहिम शेख डॉण् सुल्तान बिन मुहम्मद अल कासिमी के नेतृत्व में अमीरात को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ;यूनेस्कोद्ध द्वारा हाल ही में 2019 के लिए प्रतिष्ठित श्वर्ल्ड बुक कैपिटलश् का खिताब भी दिया गया है।

सरकारी संबंध विभाग के कार्यकारी अध्यक्ष, और NDWBF 2019 में शारजाह प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखए शेख फहीम बिन सुल्तान अल कासिमी ने कहाए अतिथि के रूप में शारजाह का चयन क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अमीरात की महत्वपू्र्ण सांस्कृतिक स्थिति का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा -शारजाह को यह सांस्कृतिक प्रतिष्ठा रातोंरात नहीं मिली है, बल्कि चार दशकों से लगातार प्रयासों का परिणाम है। यूएई और भारत के बीच कई दशकों से मजबूत संबंध रहे हैं। हमारी भौगोलिक निकटता समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ मिलकर दोनों देशों को मजबूत संचार और समझ स्थापित करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करती है।

शारजाह बुक अथॉरिटी के चेयरमैन महामहीम अहमद बिन रक्कड़ अल अमेरी ने कहारू “शारजाह दुनिया भर में अरब और अमिराती संस्कृति को उजागर करने के मिशन पर है, और यह पुस्तक मेले हमें ऐसा करने के लिए एक बेजोड़ अवसर प्रदान करते हैं। NDWBF 2019 मेंए हम शारजाह की विश्व स्तरीय सेवाओं और दुनिया भर के प्रकाशकों के लिए विविध प्रस्तावों को प्रदर्शित करेंगे और अरब बाजारों में अवसरों को भुनाने के लिए हमारा विशेषज्ञता पूर्ण परामर्श प्रदान करेंगे।

ज्ञान और संस्कृति के केंद्र, शारजाह में प्राचीन और आधुनिक दुनिया की कला और कलाकृतियों की विशेषता वाले 30 से अधिक संग्रहालय स्थित हैंए और यह अतीत में कई बड़े सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजनों की मेजबानी कर चुका है। शारजाहए संयुक्त अरब अमीरात और व्यापक क्षेत्र में सफलतापूर्वक चल रही कई परियोजनाओं के माध्यम सेए अमीरात दुनिया भर में संस्कृतिए कलाए साहित्य, साक्षरता और शिक्षा को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है।

विश्व पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन का ‘जलसाघर

  • लेखिका तस्लीमा नसरीन के बहुचर्चित उपन्यास ‘लज्जा, की उत्तरकथा ‘बेशरम  का लोकार्पण राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर
  • लेखिका अरूंधति राय के उपन्यास..द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस के हिंदी और उर्दू अनुवाद
  • मशहूर अभिनेता एवं सक्रीनप्ले राइटर सौरभ शुक्ला का चर्चित नाटक ‘बर्फ़ किताब की शक्ल आएगी

राजकमल प्रकाशन के लिये विश्व पुस्तक मेला, 2019 बहुत खास है। श्रेष्ठ पुस्तकों के श्रेष्ठ प्रकाशन की संस्कृति के रूप में शुरू हुआ राजकमल प्रकाशन, आज 70 साल के नौजवान की तरह है। कृष्णा सोबतीए,नामवर सिंहए मन्नू भंडारी से लेकर गौरव सोलंकी, अनुराधा बेनीवाल, पुष्यमित्र जैसे युवा लेखक यानी 4 पीढ़ियाँ एक ही समय में एक साथ छप रहे है।

राजकमल प्रकाशन के सत्तर साल की यात्रा, स्वतंत्र भारत के विकास की सहयात्रा है। हिन्दीभाषी भारतीय समाज में घटित हर परिघटना का साक्षी। यह साल जिसे उत्सव.वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है..के मद्देनजर राजकमल प्रकाशन के स्टॉल का नाम ‘जलसाघर रखा गया है। यहाँ जलसा किताबों का होगा, लेखकों, पाठकों और रचनाधर्मिता से जुड़ी ढेर सारी बातों का होगा। 70 साल की निरन्तर यात्रा को सम्प्रेषित करता राजकमल प्रकाशन का विशेष ‘लोगोश् भी इस मौके से  तैयार किया गया है।

उम्र के 9 दशक पार कर चुकीं कृष्णा सोबती की सशक्त लेखनी का नायाब उदाहरण है उनका पहला उपन्यास है‘चन्ना। जो कभी पाठकों के सामने अब तक आई नहीं थी, अब पहली बार यह राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित होकर सार्वजनिक हो रही है। यह दस्तावेजी उपन्यास पाठकों के लिये मेले की खास प्रस्तुति है।

मेले में आने वाली खास किताबों में इस साल बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखिका अरूंधति रॉय  के उपन्यास..द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस के हिंदी और उर्दू अनुवाद हैं। हिंदी में यह ‘अपार ख़ुशी का घराना  ;अनुवादक रू मंगलेश डबराल और उर्दू में श्बेपनाह शादमानी की मुमलकत ;अनुवादक , अर्जुमंद आरा नाम से 9 जनवरी से उपलब्ध होगा। अब तक यह उपन्यास 49 भाषाओँ में छप चुका है।

विश्वप्रसिद्ध एवं निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन के बहुचर्चित उपन्यास ‘लज्जा की उत्तरकथा ‘बेशरम  का लोकार्पण राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर किया जाएगा। यह किताब साम्प्रदायिकता की आग में झुलसे जीवनों की कहानी है।

मशहूर अभिनेता एवं स्क्रीनप्ले राइटर सौरभ शुक्ला का चर्चित नाटक ‘बर्फ़ पहली बार किताब की शक्ल में छप रही है। कश्मीर के लोगो के जीवन को देखने का यह बेहद संवेदनशील नजरिया है जो उन्माद एवं झूठ.सच के जाल में झूल रहे सभी पाठकों के लिये एक जरूर पढ़ी जाने वाली किताब होगी।

विभाज़न का दंश भारत की आज़ादी के साथ मिली एक गहरी टीस है। सत्तर साल के बाद भी हिन्दूदृमुस्लिम भाईचारे का सवाल रोज़ हमारे अख़बारों, टीवी चैनलों से निकलकरए सड़क पर भीड़ के उन्माद का कारण बन रहा है। लेकिन साहित्य अब भी प्यार और उम्मीद की लौ को जगाए रखे हुए है। इसी का उदाहरण है भालचन्द्र जोशी का उपन्यास ‘जस का फूल, ईश मधु तलवार का उपन्यास ‘रिनाला.खुर्दश्,  शरद पगारे का उपन्यास ‘गुलारा बेग़म और त्रिलोकनाथ पाण्डेय का उपन्यास ‘प्रेम लहरी। ये चारों उपन्यास वर्तमान परिस्थितियों में परस्पर विश्वास के सिरे को थामे रखने का कारण देती हैं।

भारत की राजनीति के कई उलझे सिरों को समझने के लिये सच्चिदानंद सिन्हा की किताब  ‘आज़ादी का अपूर्व अनुभव तथा गुणाकर मुले की ‘भारत इतिहास और संस्कृति किताब पठनीय किताबें हैं। साथ में दीपक कुमार की किताब ‘त्रिशंकु राष्ट्र और प्रफुल बिदवई की किताब ‘दोराहे पर वामश् कई नए राजनीतिक पहलुओं को सामने ले आने वाली किताबें हैं। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित पत्रिका ‘आलोचना का नया अंक भी आज़ादी के सत्तर साल पर आधारित है, जो मेले में पाठकों के लिये उपलब्ध होगा। मेले में चे ग्वेरा की नई ..जीवनी भी सामने आएगी। मनोहर श्याम जोशी पर प्रभात रंजन की संस्मरण की किताब विशेष आकर्षणों में है। अब्दुल बिस्मिल्लाह, अनामिका और अल्पना मिश्र की नई कृतियाँ प्रमुख आकर्षणों में है।

इस साल ‘लेखक से मिलिए कार्यक्रम के जरिए पाठक लेखकों से सीधे मुखातिब हों सकेंगे। अनामिकाए अब्दुल बिस्मिल्लाहए सोपान जोशी, शिवमूर्ति, मैत्रेयी पुष्पा, अखिलेश, वीरेन्द्र यादव, हृषिकेश सुलभ, अल्पना मिश्र, गौरव सोलंकी, विनीत कुमार, नवीन चौधरी के साथ. साथ और भी महत्वपूर्ण लेखकों की उपस्थिति मेले की रौनक बढ़ाएगी ।

हिन्दी साहित्य के इतिहास में 1919.1920 के आसपास शुरू हुए ‘छायावाद की परंपरा एवं छायावादी कवियों का विशेष स्थान है। इस परिघटना के साथ राजकमल प्रकाशन एक खास प्रस्तुति के साथ मेले में उपस्थित हो रहा है। हिन्दी के हॉल नंबर 12 में छायावाद को समर्पित एक स्टॉल पाठकों के लिये अलग आकर्षण का केन्द्र होगा।

मेले में अन्य खास किताबों में दलित साहित्य जयप्रकाश कर्दम का उपन्यास ‘उत्कोच, क्रिस्टॉफ़ जेफ्रलो की  लिखी जीवनी ‘भीमराव आंबेडकर  बद्री नारायण की किताब ‘कांशीराम बहुजनों के नायक  मेले में उपलब्ध होंगी।

जनवरी, साल का पहला महीना जब देश के कोने.कोने से श्चलो प्रगति मैदान की लौ दिल में जगाए पाठक..किताबें खरीदने, अपने पसंदीदा लेखक से मिलने दिल्ली आते हैं। इस परंपरा में बढ़.चढ़ कर हिस्सा लेने के लिये राजकमल प्रकाशन समूह ‘साथ जुड़ें, साथ पढ़ें की भावना के साथ  ढेर सारी नई किताबें लेकर विश्व पुस्तक मेला में भागीदारी कर रहा है।

भूली हुई यादों मुझे इतना न सताओ

अब चैन से रहने दो मेरे पास न आओ

       भैया ! कितना भी सोच लो यादें हमारा पीछा छोड़ दें पर वो घूमती फिरती हमसे कभी भी ऐसे आ टकराती हैं मानो हमें बीते दिनों की  खट्टी.मीठी दुनिया में लौटाकर ले जाना चाहती हों।एक आँधी सी चलती है और हम उसमें लिपटे उड़ चलते हैं ..पीछे और पीछे ! लिपट ही तो जाती है वो आँधी हमसेएदामन छोड़ने का नाम ही नहीं लेती ।

      बहुत हाथ जोड़े एबड़ी आज़ीज़ी कीएबड़ी मिन्नतें माँगीं पर किसी भी जाते हुए साल ने ऐसा कभी नहीं किया कि बस मीठी मीठी यादें ही ज़ेहन में बसा दे और खट्टी यादों को हमारे नज़दीक भी न आने दे।वैसे खटमिठी यादें भी ज़ायका तो बढ़िया कर देती हैंएकुछ चटपटा स्वाद घुलता हैए तकलीफ़ तब होती है जब यादें मुह कसैला कर देती हैं।

      जिंदगी कैसी है पहेली हाय!

      कभी तो हँसाएएकभी ये रुलाए ।।

    भैया ! यही है इस जिंदगी का स्टाइल ! यानी इसकी शैली ! बड़े बुज़ुर्ग कह गए हैं य

अँधेरे में नहीं जाओगे तो उजाला कैसे पाओगे घ् अँधेरे में  शम्मा जलाएंगे तभी तो उजाला होगा।कठिनाई सहन करना नहीं सीखोगे तो उससे निकलकर आसान सफ़र कैसे तय करेंगे  घ्

     हम सबमें ही इस जाते हुए वर्ष ने खट्टे.मीठे अनुभव बाँटे हैं।कभी हँसाया है तो कभी रुलाया भी हैएआँखों में नमी भरी है तो आँचल में खुशियाँ भी ।इन्द्रधनुष के रंगों से खिलती हुए आकाशीय गंगा मे हम नहाए भी हैं तो अमावस्या में दीए जलाकर अस्तित्व को रोशन करने का प्रयास करके हम खिलखिलाए भी हैं।भैया ! यही है जिंदगी और चलती का नाम गाड़ी और भैया न चलाओ तो…. अनाड़ी !

    हाँएएक बात बड़ी ही महत्वपूर्ण याद आ गई ।जब हम छोटे थे तब हमें सिखाया जाता था धन्यवाद या शुक्रिया या थैंक्यू अदा करना।आज हम अपनी संतानों को यही सब सिखाते हैं न ! किसी गलती होने पर साॅरी या माफ़ करिए महसूस करना । तब इन शब्दों के कुछ अर्थ होते थे ।अफ़सोस ये है ये सब अब मुह से फिसले शब्दों के अलावा कुछ भी इंपोर्टेंस नहीं रखते ।तो बताइए भला इन शब्दों की वैल्यू क्या रह गई फिरघ् 

    भैयाए आइए इन सब शब्दों को केवल हवा में न उछालेंएउनका सम्मान करना सीखेंएउनकी वैल्यू करें।जाते हुए साल में हम उन सबका तो शुक्रिया अदा करें ही जिन्होंने हमारा हाथ पकड़ा हैए हमारे आँसू पोंछे हैंएसाथ ही उनका भी शुक्रिया अदा करना न भूलें जो हमारी पीड़ा का कारण बने हैंएउन्होंने ही तो हमें अपनी असलियत बताकर हमें चेताया हैए बहुत कुछ सिखाया है हमें।

     ईश्वर का धन्यवाद करना तो हर पल बनता ही है जो यदि एक रास्ता बंद करता भी है तो कई रास्ते हमारे लिए खोल देता है ।वैसे रूठों को मनालें जिससे इस आने वाले साल में सबमें खुशियों के उपहार बाँट सकें।

 भैया ! संवाद करें खुद से और स्वागत करें नए वर्ष का!

तो चलिए ए मिलते हैं नए साल में कुछ नई बातें लेकर ?

नये साल के नये तराने

रूठों को भी चलो मनाने

                                       डॉ.प्रणव भारती

नई दिल्ली। विगत 30 दिसंबर, 2018 को यशपाल सभागारए हिन्दी भवन, लखनऊ में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान लखनऊ द्वारा आयोजित साहित्यकार पुरस्कार वितरण समारोह में उत्तर प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री राम नाईक ने चंदौसी में जन्मे मैनपुरी उत्तर प्रदेश के मूल निवासी प्रयोगधर्मी व्यंग्यकार डॉण् आलोक सक्सेना, नई दिल्ली को राष्ट्रीय श्हरिशंकर परसाई पुरस्कारश् से नवाजा। हिन्दी व्यंग्य लेखन क्षेत्र का यह श्रेष्ठ राष्ट्रीय पुरस्कार है। डॉ सक्सेना को यह राष्ट्रीय पुरस्कार उनके छठे व्यंग्य संग्रह श्पप्पू  बन गया अफसरश् के लिए प्रदान किया गया। इस संग्रह में उनके 51 बेहतरीन तरोताजा मौलिक व्यंग्य संग्रहित हैं। सम्मानस्वरूप उन्हें पचहत्तर हजार रुपए का एक चैक, प्रशस्ति पत्र एवं शॉल भेंट किया गया। समारोह की अध्यक्षता डॉ सदानन्दप्रसाद गुप्त माननीय कार्यकारी अध्यक्ष उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने की। इस अवसर पर श्री जितेन्द्र कुमार प्रमुख सचिव भाषा उत्तर प्रदेश शासनए श्री शिशिर निदेशक उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थानए अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थेे द्य अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत डॉ सक्सेना की अब तक एक दर्जन से अधिक मौलिक साहित्यिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके इस व्यंग्य संग्रह का प्रकाशन किताब घर, 24 /4855 , अंसारी रोड, दरियागंज, नई दिल्ली द्वारा किया गया।

Mumbai : Suresh Kumar Khanna, Urban Development and Parliamentary Affairs Minister of UP and Sunil Khanna,Chairman of CII Maharashtra Council (L) during the press conference on ‘ Prayagraj Khumbh Mela 2019’, in Mumbai on Thursday. Photo Girish Srivastav/03.01.2019