March 26, 2019
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साहित्य कला परिषद, कला, संस्कृति और भाषा विभाग, दिल्ली सरकार ने युवा नाट्य समरोह के 6 वें संस्करण की शुरुआत बहुत ही ख़ुशी व उल्लास के किया। यह   उत्सव 5 दिन तक चला और 26 दिसंबर 2018 को इसका सम्पन हुआ ए इस कार्यकर्म को दिल्ली के तमाम थिएटर व आम लोगो द्वारा स्नेह मिला।

 त्योहार के पहले दिनए दर्शकों को संगीत नाटक ‘बाबूजीश् देखने का मौका मिलेगा। जिसे राजेश सिंह ने निर्देशित किया और विभांशु वैभव ने इसकी रचना की। इस  कहानी के मुख्या रचनात्मक श्री मिथिलेश्वर द्वारा लिखा गया था।  यह कहानी नौटंकी शैली पर आधारित है। नाटक के सभी कलाकारों ने अपने एक्ट को फिल्म और थिएटर  प्रसिद्ध  बीण् वीण् कारंत की याद में  समर्पित किया। बाबूजी की कहानी नौटंकी की उत्तर भारतीय लोक कला पर आधारित हैए और किस तरह लल्लन सिंह ;बाबू जीद्ध की जीवनशैली पूरी तरह से नृत्य और संगीत के इर्द.गिर्द घूमती है। किस तरह उनकी हर भावना को संगीत से जोड़ा जाता है और उन्हें किस तरह अपने ही परिवार और समाज द्वारा अपमानित और बेइज्जत किया जाता हैए इन सबके बाद वे किस तरह खुद को संगीत में स्वतंत्र रूप से अपने आप को स्थापित करते हैं।

त्योहार के दूसरे दिन लोगों को रुदाली पर एक शक्तिशाली अभिनय देखने को मिला जिसे  देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए थे। यह नाटक लेट श्रीमती महाश्वेता देवी की कहानियों में सबसे प्रशंसित है।  बंगाली शॉर्ट अफिक्शन पर आधारित यह कहानी अरविंद सिंह द्वारा अनुकूलितए अनुवादित और निर्देशित किया गया है। रुदाली भारत में सामाजिक.आर्थिक और धार्मिक प्रतिष्ठानों पर आधारित है।

रुदाली की कहानी का केंद्रीय चरित्र संचारी पर आधारित हैए संचारी नाम इसलिए  क्योंकि वह शनिवार को पैदा हुई थीए और इसके साथ उसे कुछ दंड भी मिले। समाज का मानना है कि यह उसके दुर्भाग्य के कारण ही है कि उसके परिवार में से कोई भी जीवित नहीं रहा। लेकिन सांचारी की आँखें कभी नम नहीं हुईं। वह अपने बेटे की मौत पर भी नहीं रोई थी। लेकिन आखिरकारए उन्हें रुदाली के रूप में काम करना पड़ाए रुदाली यानि वह स्त्री जो भाड़े पर रोती हैए मेहनताना लेकर मातम करती है द्य सांचारी उस चरित्र का प्रतिनिधित्व करती है जिसके पास न कुछ चुनने और बोलने की स्वतंत्रता हैए इन सब के बाद भी वह कभी नहीं टूटतीए उसका जीवन उसके साथ समान है।

त्यौहार के तीसरे दिन का नाटक शत्रु . द एनिमी इनसाइड श् पर आधारित था। दर्शक इस एक्ट को देख कर सम्मोहित हो उठे। डॉ अशोक लाल द्वारा लिखितए नाटक सुनील रावत द्वारा निर्देशित किया गया थाए यह नाटक दर्शकों के लिए एक अद्भुत अनुभव था।

नाटक शत्रु अजातशत्रु की बौद्ध कथा पर आधारित है। किंवदंती है कि मगध ;500 ईसा पूर्वद्ध के राजा बिंबसार अपनी रानी से एक पुत्र चाहते थे। हेवेन अपने उत्तराधिकारी को छोड़ने के लिए एक उपदेशक को मारता है। कुनेकए उससे पैदा हुआ बेटा बिम्बसार के खिलाफ एक अज्ञात और हिंसक क्रोध पैदा करता है। देवदत्तए गौतम बुद्ध के प्रतिद्वंद्वी द्वारा उकसाए जानेए कुनेक ने बिम्बसार को जेल में डाल दिया और अंततः उसे मौत के घाट उतार दिया। नाटकए जो शास्त्रीय कवि शैली में लिखा गया हैए अंततः आधुनिक मनुष्य के बारे में है. उसका रहस्यमय हिंसक प्रभाव या पूर्वाग्रह. कभी.कभी माता.पिता के खिलाफ हो जाता है। भीतर शत्रु को संबोधित करने के बजायए ऐसी भावनाएं आंतरिक दुःख के लिए जिम्मेदार हैं और बदले मेंए पर्यावरण को नष्ट करने में भी इसी का हाथ होता है।

उत्सव के चौथे दिन लोगों ने महान कवि डॉ चंद्रा शंकर कंबर द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध नाटक ष्शिवरात्रिष् का आनंद लिया। यह नाटक कर्नाटक में बारहवीं शताब्दी मेंकिए गए शरण आंदोलन पर आधारित है। शरण आंदोलन भारतीय इतिहास की सबसे असामान्य घटना थी