March 22, 2019
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शारजाह: NDWBF 2019 गेस्ट ऑफ ऑनर

भारतीय ग्रंथ माला के साथ दिलचस्प संवाद

जबकि देश बड़ी आकांक्षाओं और खुशियों के साथ 2019 का स्वागत करने के लिए तैयार है। शारजाह द्वारा आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले 2019 के गेस्ट ऑफ ऑनर स्टैंड में कईं बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियां पुस्तक प्रेमियों की प्रतीक्षा कर रही हैं।

यूएई के तीसरे सबसे बड़े अमीरात के रूप में प्रशिद्ध, शारजाह प्रगति मैदान, नई दिल्ली के हॉल नं-7 पवेलियन एबीसी हॉल में अपनी समृद्ध अरबी सांस्कृतिक और साहित्यिक विशेषताओं का प्रदर्शन करेगा। शारजाह के अमीरात एक समृद्ध साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन करेंगे, जिसके तहत शारजाह का एक प्रतिनिधिमंडल 6.9 जनवरी तक पुस्तक मेले के आगंतुकों के समक्ष अपनी विभिन्न सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करेगा।

सूची में शारजाह की उन साहित्यिक पहलों पर बौद्धिक चर्चा शामिल है जिसने संयुक्त अरब अमीरात के प्रकाशन क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव डाला है और स्थानीय समुदायों को पुस्तकों और पढ़ने के करीब लाया है।

कार्यक्रम में साहित्य संगोष्ठीए कविता पाठ निशा, भारतीय सिनेमा पर संयुक्त अरब अमीरात के प्रभाव पर चर्चा और दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध जैसा कि अमिराती यात्रा साहित्य, अनुवाद में दर्शाया गया है और दोनों देशों में प्रकाशकों के समक्ष खड़ी चुनौतियों को सभी के सामने लाया जाएगा।

अमीरात ने हिंदी पाठकों को अमीरात की समृद्ध साहित्यिक विरासत से परिचित कराने के लिए 57 अरबी भाषा की रचनाओं का अनुवाद भी किया है। यूएई सुप्रीम काउंसिल के सदस्य और शारजाह के शासक महामहिम शेख डॉण् सुल्तान बिन मुहम्मद अल कासिमी के नेतृत्व में अमीरात को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ;यूनेस्कोद्ध द्वारा हाल ही में 2019 के लिए प्रतिष्ठित श्वर्ल्ड बुक कैपिटलश् का खिताब भी दिया गया है।

सरकारी संबंध विभाग के कार्यकारी अध्यक्ष, और NDWBF 2019 में शारजाह प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखए शेख फहीम बिन सुल्तान अल कासिमी ने कहाए अतिथि के रूप में शारजाह का चयन क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अमीरात की महत्वपू्र्ण सांस्कृतिक स्थिति का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा -शारजाह को यह सांस्कृतिक प्रतिष्ठा रातोंरात नहीं मिली है, बल्कि चार दशकों से लगातार प्रयासों का परिणाम है। यूएई और भारत के बीच कई दशकों से मजबूत संबंध रहे हैं। हमारी भौगोलिक निकटता समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ मिलकर दोनों देशों को मजबूत संचार और समझ स्थापित करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करती है।

शारजाह बुक अथॉरिटी के चेयरमैन महामहीम अहमद बिन रक्कड़ अल अमेरी ने कहारू “शारजाह दुनिया भर में अरब और अमिराती संस्कृति को उजागर करने के मिशन पर है, और यह पुस्तक मेले हमें ऐसा करने के लिए एक बेजोड़ अवसर प्रदान करते हैं। NDWBF 2019 मेंए हम शारजाह की विश्व स्तरीय सेवाओं और दुनिया भर के प्रकाशकों के लिए विविध प्रस्तावों को प्रदर्शित करेंगे और अरब बाजारों में अवसरों को भुनाने के लिए हमारा विशेषज्ञता पूर्ण परामर्श प्रदान करेंगे।

ज्ञान और संस्कृति के केंद्र, शारजाह में प्राचीन और आधुनिक दुनिया की कला और कलाकृतियों की विशेषता वाले 30 से अधिक संग्रहालय स्थित हैंए और यह अतीत में कई बड़े सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजनों की मेजबानी कर चुका है। शारजाहए संयुक्त अरब अमीरात और व्यापक क्षेत्र में सफलतापूर्वक चल रही कई परियोजनाओं के माध्यम सेए अमीरात दुनिया भर में संस्कृतिए कलाए साहित्य, साक्षरता और शिक्षा को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है।

विश्व पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन का ‘जलसाघर

  • लेखिका तस्लीमा नसरीन के बहुचर्चित उपन्यास ‘लज्जा, की उत्तरकथा ‘बेशरम  का लोकार्पण राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर
  • लेखिका अरूंधति राय के उपन्यास..द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस के हिंदी और उर्दू अनुवाद
  • मशहूर अभिनेता एवं सक्रीनप्ले राइटर सौरभ शुक्ला का चर्चित नाटक ‘बर्फ़ किताब की शक्ल आएगी

राजकमल प्रकाशन के लिये विश्व पुस्तक मेला, 2019 बहुत खास है। श्रेष्ठ पुस्तकों के श्रेष्ठ प्रकाशन की संस्कृति के रूप में शुरू हुआ राजकमल प्रकाशन, आज 70 साल के नौजवान की तरह है। कृष्णा सोबतीए,नामवर सिंहए मन्नू भंडारी से लेकर गौरव सोलंकी, अनुराधा बेनीवाल, पुष्यमित्र जैसे युवा लेखक यानी 4 पीढ़ियाँ एक ही समय में एक साथ छप रहे है।

राजकमल प्रकाशन के सत्तर साल की यात्रा, स्वतंत्र भारत के विकास की सहयात्रा है। हिन्दीभाषी भारतीय समाज में घटित हर परिघटना का साक्षी। यह साल जिसे उत्सव.वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है..के मद्देनजर राजकमल प्रकाशन के स्टॉल का नाम ‘जलसाघर रखा गया है। यहाँ जलसा किताबों का होगा, लेखकों, पाठकों और रचनाधर्मिता से जुड़ी ढेर सारी बातों का होगा। 70 साल की निरन्तर यात्रा को सम्प्रेषित करता राजकमल प्रकाशन का विशेष ‘लोगोश् भी इस मौके से  तैयार किया गया है।

उम्र के 9 दशक पार कर चुकीं कृष्णा सोबती की सशक्त लेखनी का नायाब उदाहरण है उनका पहला उपन्यास है‘चन्ना। जो कभी पाठकों के सामने अब तक आई नहीं थी, अब पहली बार यह राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित होकर सार्वजनिक हो रही है। यह दस्तावेजी उपन्यास पाठकों के लिये मेले की खास प्रस्तुति है।

मेले में आने वाली खास किताबों में इस साल बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखिका अरूंधति रॉय  के उपन्यास..द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस के हिंदी और उर्दू अनुवाद हैं। हिंदी में यह ‘अपार ख़ुशी का घराना  ;अनुवादक रू मंगलेश डबराल और उर्दू में श्बेपनाह शादमानी की मुमलकत ;अनुवादक , अर्जुमंद आरा नाम से 9 जनवरी से उपलब्ध होगा। अब तक यह उपन्यास 49 भाषाओँ में छप चुका है।

विश्वप्रसिद्ध एवं निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन के बहुचर्चित उपन्यास ‘लज्जा की उत्तरकथा ‘बेशरम  का लोकार्पण राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर किया जाएगा। यह किताब साम्प्रदायिकता की आग में झुलसे जीवनों की कहानी है।

मशहूर अभिनेता एवं स्क्रीनप्ले राइटर सौरभ शुक्ला का चर्चित नाटक ‘बर्फ़ पहली बार किताब की शक्ल में छप रही है। कश्मीर के लोगो के जीवन को देखने का यह बेहद संवेदनशील नजरिया है जो उन्माद एवं झूठ.सच के जाल में झूल रहे सभी पाठकों के लिये एक जरूर पढ़ी जाने वाली किताब होगी।

विभाज़न का दंश भारत की आज़ादी के साथ मिली एक गहरी टीस है। सत्तर साल के बाद भी हिन्दूदृमुस्लिम भाईचारे का सवाल रोज़ हमारे अख़बारों, टीवी चैनलों से निकलकरए सड़क पर भीड़ के उन्माद का कारण बन रहा है। लेकिन साहित्य अब भी प्यार और उम्मीद की लौ को जगाए रखे हुए है। इसी का उदाहरण है भालचन्द्र जोशी का उपन्यास ‘जस का फूल, ईश मधु तलवार का उपन्यास ‘रिनाला.खुर्दश्,  शरद पगारे का उपन्यास ‘गुलारा बेग़म और त्रिलोकनाथ पाण्डेय का उपन्यास ‘प्रेम लहरी। ये चारों उपन्यास वर्तमान परिस्थितियों में परस्पर विश्वास के सिरे को थामे रखने का कारण देती हैं।

भारत की राजनीति के कई उलझे सिरों को समझने के लिये सच्चिदानंद सिन्हा की किताब  ‘आज़ादी का अपूर्व अनुभव तथा गुणाकर मुले की ‘भारत इतिहास और संस्कृति किताब पठनीय किताबें हैं। साथ में दीपक कुमार की किताब ‘त्रिशंकु राष्ट्र और प्रफुल बिदवई की किताब ‘दोराहे पर वामश् कई नए राजनीतिक पहलुओं को सामने ले आने वाली किताबें हैं। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित पत्रिका ‘आलोचना का नया अंक भी आज़ादी के सत्तर साल पर आधारित है, जो मेले में पाठकों के लिये उपलब्ध होगा। मेले में चे ग्वेरा की नई ..जीवनी भी सामने आएगी। मनोहर श्याम जोशी पर प्रभात रंजन की संस्मरण की किताब विशेष आकर्षणों में है। अब्दुल बिस्मिल्लाह, अनामिका और अल्पना मिश्र की नई कृतियाँ प्रमुख आकर्षणों में है।

इस साल ‘लेखक से मिलिए कार्यक्रम के जरिए पाठक लेखकों से सीधे मुखातिब हों सकेंगे। अनामिकाए अब्दुल बिस्मिल्लाहए सोपान जोशी, शिवमूर्ति, मैत्रेयी पुष्पा, अखिलेश, वीरेन्द्र यादव, हृषिकेश सुलभ, अल्पना मिश्र, गौरव सोलंकी, विनीत कुमार, नवीन चौधरी के साथ. साथ और भी महत्वपूर्ण लेखकों की उपस्थिति मेले की रौनक बढ़ाएगी ।

हिन्दी साहित्य के इतिहास में 1919.1920 के आसपास शुरू हुए ‘छायावाद की परंपरा एवं छायावादी कवियों का विशेष स्थान है। इस परिघटना के साथ राजकमल प्रकाशन एक खास प्रस्तुति के साथ मेले में उपस्थित हो रहा है। हिन्दी के हॉल नंबर 12 में छायावाद को समर्पित एक स्टॉल पाठकों के लिये अलग आकर्षण का केन्द्र होगा।

मेले में अन्य खास किताबों में दलित साहित्य जयप्रकाश कर्दम का उपन्यास ‘उत्कोच, क्रिस्टॉफ़ जेफ्रलो की  लिखी जीवनी ‘भीमराव आंबेडकर  बद्री नारायण की किताब ‘कांशीराम बहुजनों के नायक  मेले में उपलब्ध होंगी।

जनवरी, साल का पहला महीना जब देश के कोने.कोने से श्चलो प्रगति मैदान की लौ दिल में जगाए पाठक..किताबें खरीदने, अपने पसंदीदा लेखक से मिलने दिल्ली आते हैं। इस परंपरा में बढ़.चढ़ कर हिस्सा लेने के लिये राजकमल प्रकाशन समूह ‘साथ जुड़ें, साथ पढ़ें की भावना के साथ  ढेर सारी नई किताबें लेकर विश्व पुस्तक मेला में भागीदारी कर रहा है।