July 5, 2020
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Politics

इसमें कोई सन्देह नहीं है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसका व्यापक प्रभाव देश के एक-एक नागरिक को मिली स्वतंत्रता में झलकता है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन से लोकतंत्र की यह स्वतंत्रता हर क्षण नजर आती है। जब भी कोई अखबार उठाओ, यूट्यूब पर चलने वाले प्राइवेट चैनल देखो, वाट्सएप, फेसबुक और ट्वीटर जैसे माध्यमों पर लोगों के विचार पढ़ना शुरू करो तो पता चलता है कि लोगों को विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता कितनी असरदार है। सामान्य नागरिक से लेकर देश के बड़े से बड़े नेता इस स्वतंत्रता का बेझिझक प्रयोग करते हैं।

कई बार तो इस स्वतंत्रता का प्रयोग अमर्यादित, अशोभनीय और बेशर्मी को भी पीछे छोड़ देता हैं। एक राजनेता प्रधानमंत्री के बारे में यह विचार व्यक्त करता है कि देश का युवा इस प्रधानमंत्री को पीटता हुआ दिखाई देगा। कोरोना महामारी के बाद भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सारे विश्व के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया जब उन्होंने 22 मार्च के दिन जनता कफ्र्यू का आह्वान किया।

इसके दो दिन बाद उन्होंने सारे राष्ट्र में 21 दिन के लिए सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा करते हुए सायं 8 बजे यह आदेश जारी किया कि चार घण्टे बाद अर्थात् रात्रि 12 बजे से जो जहाँ पर है वह वहीं पर रहे। प्रधानमंत्री के इस आदेश के बाद सोशल मीडिया में एक वाक्य पढ़ने को मिला – ‘ऐसा लगता है जैसे मोदी ने पौआ चढ़ा लिया हो और चार घण्टे बाद सम्पूर्ण देश को लॉकडाउन करने जैसा हुक्मनामा जारी कर दिया, यह सोचे बिना कि देश में कितने लोगों को किस-किस प्रकार की तकलीफें होंगी।’

सोशल मीडिया पर इस विशेष टिप्पणी ने मुझे भी मजबूर कर दिया कि प्रधानमंत्री के इस आदेश के पीछे कानूनी या संवैधानिक प्रश्न का उत्तर तो मिलना ही चाहिए। वैसे कुछ कानून के जानकार भी 21 दिन के सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा पर चर्चा करते हुए दिखाई दिये कि संसद के किस कानून में भारत के प्रधानमंत्री को सारे देश में इस प्रकार के आदेश लागू करने के अधिकार दिये हुए हैं? वास्तव में भारत के इतिहास में इतना लम्बा और सम्पूर्ण लॉकडाउन पहली बार देखने और सुनने को मिला।

भारत का संविधान भारतीय नागरिकों को जीवन जीने की कई स्वतंत्रताएँ मूल अधिकारों के रूप में घोषित करता है जिनमें सबसे प्रमुख अधिकार है भारत में कहीं भी घूमने और बसने की स्वतंत्रता। इसी से मिलता-जुलता अधिकार है कि किसी भी व्यापार आदि को करने की स्वतंत्रता। प्रधानमंत्री की सम्पूर्ण लॉकडाउन घोषणा पर इन्हीं दो अधिकारों के दृष्टिगत प्रश्न खड़े किये जा रहे हैं। प्रश्न खड़ा करने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि कोई भी मूल अधिकार पूरी तरह से अक्षरशः लागू नहीं किये जा सकते। केन्द्र सरकार को यह अधिकार है कि सार्वजनिक हित में किसी भी अधिकार पर न्यायोचित प्रतिबन्ध लगाये जा सकते हैं।

परन्तु इस पर भी सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों में कहा गया है कि यह प्रतिबन्ध भी कानूनी प्रक्रिया का पालन करके ही लगाये जा सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार यह भी कहा है कि प्रतिबन्धों का मूल आधार सार्वजनिक हित ही होना चाहिए।

जिस गति के साथ चीन से उत्पन्न कोरोना वायरस अमेरिका, इटली और इरान जैसे सक्षम देशों में जंगल की आग की तरह फैलता दिखाई दे रहा था और विशेष रूप से जबकि ऐसी महामारी की कोई दवाई सारे संसार के पास उपलब्ध नहीं है प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनवरी और फरवरी माह में इस महामारी की गति पर व्यापक अनुसंधान करवाने के बाद भारतीय परिस्थितियों में एक ही उपाय उचित समझा जिसका नाम था सम्पूर्ण लॉकडाउन।

सारे देश के नागरिकों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए ही यह कदम उठाया गया था। सारी दुनिया जानती है कि भारत में यदि यह महामारी अमेरिका की गति से फैलती तो अब तक यहाँ भी हजारों नागरिक मौत का शिकार हो चुके होते। इसलिए प्रधानमंत्री का यह कदम जनहित में तो सिद्ध होता ही है।

सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा के साथ दूसरा प्रश्न उस कानूनी प्रक्रिया के साथ जुड़ा है जो प्रधानमंत्री को इस प्रकार की घोषणा का अधिकार देता हुआ सिद्ध हो। आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य का विषय राज्य सरकारों का विषय है, परन्तु वे यह भूल जाते हैं कि संविधान कीे सातवीं अनुसूची में जहाँ केन्द्र सरकार के और राज्य सरकार के अलग-अलग विषयों पर चर्चा है वहीं एक समवर्ती सूची भी उसका हिस्सा है जिसमें आर्थिक और सामाजिक योजनाओं पर कानून बनाने या व्यवस्थाएँ जारी करने के अधिकार केन्द्र सरकार को प्राप्त है।

केन्द्र सरकार के विषयों वाली सूची में तो स्पष्ट रूप से अन्तर्राज्यीय प्रवास तथा अन्तर्राज्यीय क्वारंटाईन जैसे विषय भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 1897 के एक महामारी रोग कानून की धारा-2ए भी केन्द्र सरकार को महामारियाँ रोकने के लिए विशेष अधिकार देती है। वर्ष 2005 का आपदा प्रबन्धन कानून भी केन्द्र सरकार को सामाजिक दूरी बनाये रखने के सम्बन्ध में उपाय करने का अधिकार देता है।

सामाजिक सुरक्षा वैसे भी सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची में शामिल है। आपदा प्रबन्धन के मामलों में राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन अथारटी का गठन किया गया है जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री ही होता है। इस कानून की धारा-6 में भी प्रधानमंत्री को किसी आपदा के रोकने के लिए विशेष उपाय करने की अनुमति दी गई है। कोरोना वायरस केवल भारत के लिए ही नहीं अपितु सारे संसार के लिए बहुत बड़ी आपदा बनकर उभरा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बिना देरी किये कोरोना वायरस से उत्पन्न परिस्थितियों पर एक महामारी घोषित कर ही दिया था। होना तो यह चाहिए था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन सारे संसार के देशों को यह परामर्श जारी करता कि इस महामारी से बचने का सीधा उपाय सम्पूर्ण लॉकडाउन का लागू करना ही हो सकता है। परन्तु भारत के दूरदर्शी प्रधानमंत्री ने इन परिस्थितियों में पहले जनता कफ्र्यू और फिर सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा करके सारे विश्व में अपनी धाक बना ली है।

उनका यह कदम भारतीय संविधान, महामारी रोग कानून तथा आपदा प्रबन्धन कानून में प्रदत्त अधिकारों की पृष्ठभूमि से ही उठा है। इसलिए इस प्रश्न का भी सीधा और सकारात्मक उत्तर मिलता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के साथ ऐसी घोषणा की है। इससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण उनका यह प्रयास रहा कि किसी भी व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने से पूर्व उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंस का तारतम्य बनाया।

दूसरी तरफ देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी दलगत राजनीति को भुलाकर केन्द्र की इन घोषणाओं को पूरी ताकत के साथ लागू करने में ही भारतीय जनता का हित समझा है। इसीलिए आज कोरोना जैसी महामारी भारत जैसे विशाल देश में पूरे पैर नहीं पसार सकी।
-विमल वधावन योगाचार्य,
एडवोकेट
सुप्रीम कोर्ट

Health

कोरोना महामारी की गति अनियंत्रित तरीके से लगातार उफान पर है। सारे संसार में कोरोना पीड़ितों की संख्या 10 लाख के आंकड़े तक पहुँचने जा रही है। मृतकों की संख्या भी 50 हजार के निकट पहुँच रही है। सारा विश्व जानता है कि अमेरिका और इटली इस महामारी का सबसे अधिक शिकार हुए हैं। इटली में 23 प्रतिशत जनसंख्या वरिष्ठ नागरिकांे की है और अमेरिका में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या केवल 13 प्रतिशत है। जबकि भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों की जनसंख्या 8.6 0प्रतिशत है। शहरों में वरिष्ठ नागरिकों को अक्सर अनेकों प्रकार के रोगों का सामना करना पड़ता है।

कोरोना से उत्पन्न परिस्थितियों ने अनेकों देशों को लॉकडाउन के लिए मजबूर कर दिया। कोरोना रोग की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए यह कदम आवश्यक भी हो गया। इस लॉकडाउन व्यवस्था के परिणामस्वरूप आज देश का हर नागरिक केवल अपने घर में पारिवारिक सदस्यों के बीच बंधकर रह गया है। पारिवारिक एकता की दृष्टि से इस व्यवस्था को सकारात्मक रूप से देखना चाहिए। परन्तु इस लॉकडाउन व्यवस्था में उन वरिष्ठ नागरिकों का क्या हाल-चाल है जो पूरी तरह से अकेला जीवन जी रहे हैं।

बेटियाँ विवाह के बाद अपने ससुराल में बस जाती हैं और बेटे कहीं विदेश तो कहीं अन्य राज्यों में अपने-अपने कार्यों में स्थापित हो जाते हैं। वृद्धावस्था में एक साथी की मृत्यु के बाद तो दूसरा साथी परिवार के बीच में रहता हुआ भी अपने आपको अकेला ही महसूस करता है। ऐसी परिस्थितियों में अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों की समस्याएँ तो और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। वास्तव में अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक तो पहले से ही लॉकडाउन जैसी परिस्थितियों में ही जीवन जी रहे थे, परन्तु फिर भी हिम्मत करके स्वयं बाहर निकलकर स्थानीय बाजारों में जाकर अपनी व्यवस्थाएँ जुटाने में सक्षम थे। कभी-कभार किसी पड़ोसी की सहायता से या किसी सेवक आदि की सहायता से अपने कार्य सम्पन्न करवा लेते थे। परन्तु सम्पूर्ण लॉकडाउन के बाद तो उनके लिए किसी प्रकार की बाहरी सहायता लेना भी कठिन हो गया है।

‘हेल्पएज इंडिया’ नामक एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा करवाये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के वरिष्ठ नागरिकों में 10 से 20 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिक पूरा एकांकी जीवन बिता रहे हैं। कोरोना जैसी छुआछूत से फैलने वाली बीमारी से वरिष्ठ नागरिकों को बचाकर रखना अत्यन्त आवश्यक है। क्योंकि इस आयु में शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता कमजोर हो जाती है। शरीर के सारे तंत्रों में से श्वसन तन्त्र तो और भी अधिक प्रभावित रहता है।

कोरोना वायरस भी गले और श्वसन तन्त्र को ही सीधा प्रभावित करता है। एक तरफ तो वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा इसी में है कि वे अपने घर तक सीमित ही रहे, परन्तु अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों की समस्याएँ और अधिक गम्भीर हो जाती हैं क्योंकि उनके लिए दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के विकल्प भी अवरुद्ध हो जाते हैं। इन परिस्थितियों में सरकारों और विशेष रूप से स्थानीय प्रशासन और पड़ोसियों का दायित्व बढ़ जाता है क्योंकि वरिष्ठ नागरिकों की दैनिक आवश्यकताओं के साथ-साथ उनके लिए पहले से चल रहे उपचार आदि की व्यवस्था करना भी आवश्यक होता है।

उनके लिए दैनिक खाने-पीने की वस्तुओं के साथ-साथ भिन्न-भिन्न प्रकार के रोगों की दवाईयों और अन्य उपचार के सामान की भी व्यवस्था करनी पड़ती है। शहरों में रह रहे एकांकी वरिष्ठ नागरिकों के लिए धन की सहायता का कोई विषय नहीं है अपितु उन्हें तो संवेदनशील सहायता और समर्थन की आवश्यकता है। उन्हें एक ऐसा तन्त्र उपलब्ध कराया जाना चाहिए जहाँ अपना अधिकार समझकर वे अपनी पहुँच बना सकें और अपनी आवश्यकतानुसार अपने खर्च पर व्यवस्थाओं की माँग कर सकें।

वरिष्ठ नागरिकों को नियमित अन्तराल के बाद ब्लड प्रेशर, शुगर और हृदय आदि की जाँच करवानी पड़ती है। कुछ लोग जो डायलिसिस पर हैं उन्हें प्रति सप्ताह डायलिसिस के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। जिन लोगों को दमा रोग है उनके लिए नेबोलाइजर, पफ और दवाईयों की नियमित आवश्यकता पड़ती है। ऐसी परिस्थितियों में पुलिस का यह दायित्व बनता है कि वरिष्ठ नागरिकों की सूची में से एकांकी वरिष्ठ नागरिकों की अलग सूची तैयार करें और उन्हें एक ऐसा टेलीफोन नम्बर उपलब्ध कराया जाये जिस पर वे कभी भी सहायता के लिए फोन कर सकें।

भारत की संसद ने वर्ष 2007 में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए एक विशेष कानून भी पारित किया था। इस कानून में पारिवारिक अव्यवस्थाओं और कठिनाईयों से मुक्ति दिलाने के लिए जहाँ एक तरफ विशेष प्राधिकरण गठिन करने के प्रावधान थे तो दूसरी तरफ राज्य सरकारों को वृद्धाश्रम खोलने तथा अस्पतालों में वरिष्ठ नागरिकों को विशेष सुविधाएँ देने के प्रावधान भी शामिल किये गये थे। वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को लेकर पुलिस और स्थानीय प्रशासन को विशेष रूप से संवेदनशील बनाने की भी बात कही गई है। भारत सरकार का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को दूर करने के लिए समय-समय पर कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाता है।

कोरोना प्रकोप के चलते मेरे सामने भी ऐसे एकांकी वरिष्ठ नागरिकों की कुछ समस्याएँ आई। लॉकडाउन के दौरान किसी समस्या के पता लगने पर मैं स्वयं किसी वरिष्ठ नागरिक की सेवा में उपस्थित नहीं हो सकता था परन्तु टेलीफोन पर ही मैंने स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस की मदद ऐसे लोगों तक पहुँचाने के कई प्रयास किये हैं। मेरा राज्य सरकारों से विशेष निवेदन है कि प्रत्येक जिले में वरिष्ठ नागरिकों को किसी प्रकार की सहायता के लिए एक टोल फ्री नम्बर स्थापित करना चाहिए और पुलिस के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को व्यक्तिगत रूप से यह सूचना दी जानी चाहिए कि किसी भी सहायता के लिए वे इस नम्बर पर निःसंकोच सम्पर्क कर सकते हैं।

पुलिस और प्रशासन को जब कभी भी किसी वरिष्ठ नागरिक के सामने आ रही कठिनाईयों का पता लगे तो उन्हें पूरी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उनकी समस्याओं का निदान करना चाहिए। इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर मुझे किसी प्रकार का कोई संकोच नहीं होगा यदि समाज का कोई भी वरिष्ठ नागरिक अपनी किसी भी प्रकार की समस्या के लिए मेरी सहायता आवश्यक समझे। मेरे व्यक्तिगत दूरभाष 9013181544, 9463600544, 9417021139 तथा 9815945432 को भी वरिष्ठ नागरिकों की किसी भी सहायता के लिए एक विनम्र प्रयास के रूप में समझा जा सकता है।

अविनाश राय खन्ना,
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा

Lifestyle

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोनावायरस को महामारी घोषित किया गया है। उसके बाद से ही सारी दुनिया सहित हमारी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक ठहराव सा आ गया है। महामारी के चलते कई सारे फ़िल्म्स ,सीरियल्स और विज्ञापनों को बीच में ही रोक दिया गया है। जब दुनिया कोविद -19 के खिलाफ लड़ रही है, तब एंटरटेनमेंट जगत के कई सेलेब्स अपने विचार से जागरूकता फैलाते हुए दर्शकों को घर के अंदर रहने के लिए कहते हुए देखा जा सकता हैं। साथ ही कुछ ने बताया कि वे कैसे घर पर अपना क्वारंटाइन समय बिता रहे हैं ?

इस बीच ,अभिनेत्री संगीता कपूरे ने एहतियात बरतते हुए अपने घर के आस-पास के आवारा कुत्तों को खाना खिलाते देखा गया। हाल ही में ,हमने देखा कि हम सबकी प्यारी निधि मामी उर्फ़ संगीता कपूरे आवारा कुत्तों को खाना खिला रही है। हालांकि, उन्होंने बीमारी से बचने के लिए मास्क और हाथ में ग्लब्स पहन रखा था। चुकीं अभी covid 19 के चलते देश की स्थिति ऐसी है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को घर में रहकर सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है , ताकि इसे बीमारी की रोका जा सके। जिसके कारण लोग अपने घरों के आस – पास के आवारा जानवरो को भोजन नहीं दे पा रहे है,जो उनपर निर्भर है।

संगीता कपूरे के इस छोटे से कदम ने मानवता की एक मिसाल कायम की है। साथ ही अभिनेत्री ने एक संदेश देने का प्रयास किया है कि किस तरह खुद सुरक्षित रहते हुए इस कठिन घडी में अपने पालतू पशुओं के साथ बाहर के जानवरों का ख्याल और मदद की जा सकती है। उन्होंने एक पोस्ट को साझा किया है और लोगों से अपील की ,कि अपने आस-पास के जानवरों को खाना देने के लिए अगर आप बाहर नही निकल सकते है तो दिए गए पते पर आप खाने की कुछ सामग्री पंहुचा सकते है जैसे पारले -जी, टाइगर बिस्किट, गुलुकोस बिस्किट, ब्रेड, दूध जैसे कुछ सामान आप डोनेट भी कर सकते है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर पता भी शेयर किया है ।

Instagram लिंक: https://www.instagram.com/p/B-bmAqJnmPH/

टेलीविजन अभिनेत्री संगीता कपूरे , वर्तमान में स्टार प्लस के शो ‘ये रिश्ते है प्यार के’ में नज़र आ रही हैं। जहां वह निधि राजवंश की भूमिका निभा रही हैं। उनके किरदार को दर्शक काफ़ी पसंद कर रहे हैं। साथ ही उनके अभिनय को सराहा भी जा रहा है।

Health

रोजाना पिएं जीरा और अदरक से बना वेट लॉस ड्रिंक

ऐसे में लॉकडाउन खत्म होने तक कई लोगों में अतिरिक्त वजन बढ़ सकता है। इसलिए, हमें सलाह दी जाती है कि घर पर कुछ फ्री-हैंड एक्सरसाइज करें और अपनी डाइट पर नजर रखें। वहीं जिन लोगों को लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां जैसे मोटापा और डायबिटीज आदि है उन्हें अपने वजन का खास ख्याल रखना चाहिए।

ऐसे में वजन कम करने और इसे संतुलित बनाए रखने के लिए हम एक वेट-लॉस ड्रिंक के बारे में बताने जा रहे हैं, जो काफी लाभकारी और सेवन में आसान है। ये आपके अतिरिक्त किलो वजन कम करने में मदद कर सकता है। लॉकडाउन में घर बैठे खाने से आपका वजन बढ़ सकता है, ऐसे में आप जीरा और अदरक से बना वेट लॉस ड्रिंक अपना सकते हैं।
जीरा और अदरक के फायदे

जीरा कैलोरी को कम करने का एक प्रभावी गुण रखता है और अच्छे चयापचय को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। वहीं ये शरीर में फैट जलने की प्रक्रिया को तेज करता है। यह पेट से संबंधित कई समस्याओं से छुटकारा पाने में भी आपकी अच्छी मदद कर सकता है, जैसे कि सूजन, अपच, एसिडिटी इत्यादि। दूसरी ओर, अदरक इम्यूनिटी को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है, जो किसी व्यक्ति को मौसमी सर्दी और फ्लू से लड़ने में मदद करता है।

जिंजरॉल अदरक में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण यौगिक है। वहीं अदरक अपने एंटीऑक्सिडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए भी जाना जाता और साथ ही ये शरीर के बैड फैट को कम करने में मदद कर सकता है। आइए जानते हैं इस जीरा-जिंजर ड्रिंक बनाने की रेसिपी के बारे में।

जीरा-जिंजर ड्रिंक बनाने का तरीका
सामग्री:

  • एक गिलास पानी
  • एक चम्मच जीरा
  • एक चम्मच अदरक (कद्दूकस किया हुआ)
  • आधा नीबू
  • दो चम्मच शहद
  • आधा चम्मच काला नमक

तैयारी:

  • सॉस पैन में पानी लें।
  • जीरा और अदरक के साथ अच्छी तरह उबालें।
  • इसे एक गिलास में छान लें। इसे ठंडा करें।
    • इसमें नींबू निचोड़ें, शहद और काला नमक डालें और मिला ले।
    • और आपका जीरा-अदरक ड्रिंक तैयार हो गया अब इसका रोज सुबह खाली पेट सेवन करें।

TV

Actor-director Faruk Kabir who has made the web film 377 Ab Normal is making the most of this 21-day lockdown period. He has been making sure to keeping himself busy and maintaining a good lifestyle. “In this 21-day lockdown, I’ve made a 21-day list of 21 things I’d like to improve in myself and add value to the lives of my family members,” he says, adding, “Less is more, so I am eating less and sleeping on time.

Most importantly, I’ve always been fond of mornings, and for the longest time I have wanted to shift from an 8am wake up cycle to a 5 am wake up cycle, and now finally I am staying disciplined and bettering my overall routine.”

In fact, he is enjoying his time at home. “Well, the family is finally getting the time to have meals together, life’s blessing. I am currently reading “The 5 am Club” by Robin Sharma. I am also finishing a thousand-piece puzzle gifted to me by my sister. I am finishing a script and getting the bandwidth to pamper it; staying in touch with my team from time to time. We’ve set up some creative targets, we can now peacefully achieve,” he says.

He adds, “I am doing my bit in our society for hygiene. We are also cooking and sending food for building watchman. In the evening, 4.30 to 6pm is dedicated to fitness, mat work, functional training and a lot of stretching for both the body and the imagination. A few minutes of meditation, positive visualisation is how I finish my fitness routine.”

TV

Actor Saumya Tandon has been taking this self-quarantine very seriously. The actor says that she and her family members are staying put at home and have been taking all the precautions. “As there is a 21-day lockdown, so we are definitely not going out of the house until and unless there is an emergency. Secondly, there is a huge panic in people’s mind that there will be no basic amenities.

They feel there will be a lockdown and so we will not have food and we need to hoard a lot of stuff. I am not doing that. Apart from that, if I am opening doors or taking milk packets or even if I have to go to buy groceries, I wear gloves and a mask. Whenever I come inside my house, I throw the gloves, wash my hands properly and wash my clothes,” she says.

Talking about the diet and fitness measures that she is following at home, Saumya says, “We don’t really have a choice to go to the gym or for pilates or even on a walk, so what I do is Yoga. I get up early in the morning and do as much as I can. I am doing Yoga every day and am also trying to upload some videos if people want to take some ideas or get inspired. As far as diet is concerned, I am eating regular food.

I usually don’t eat sweets and maida, which I am maintaining and there is no option of eating anything from outside, though there are restaurants delivering food home. I do not recommend that anybody should order food from outside. Please cook at home, even if you are eating basic rice and pulses. Try to avoid outside food as much as you can.”

The actor urges others to take this lockdown seriously as well. “I think it is the need of the hour and this lockdown is important. Yes, it’s true that daily wage workers are going to suffer and it is going to be huge slow down in the economy but we don’t have a choice because we are the second-largest populated country in the world.

We don’t even have that kind of medical facilities that other developed countries have. We won’t even have enough hospital beds to be able to accommodate so many people if this spreads. So, we have to slow down the process of this spread so that our government is able to arrange for more beds, more ventilators and this will also give time to the scientists to come out with the vaccination,” she says.

Ask her how she spends her time at home, and Saumya says, “I am spending time with my family. We always keep cribbing that we don’t have time for each other, well, now we do. So, the first thing that we have is a lot of time to spend with our family, connect with each other, have conversations, as in our normal lives we don’t get to do that.

I am reading books, I am not watching a lot of films and television but I am indulging myself with board games like monopoly, carrom, chess etc. It is a bit frustrating that we can’t go out, but I am making the most of it.” Saumya got lot of appreciatino for the roel of Anita Bhabhi ni Benaifer and Sanjay Kohli’s Bhabiji Ghar Par Hai. The show is having re-runs and is keeping the audiences glued to TV.

Health

क्वारंटाइन पीरियड में सब लोग रह रहे हैं उसमें आप दही को अपनी डाइट में शामिल करके अपनी सेहत और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रख सकते हैं। कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा दही में भरपूर होती है। इसके अलावा प्रोबॉयटिक बैक्टिरया भी दही में पाया जाता है जो कि शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत रखने में फायदेमंद होता है। दही बीपी और हड्डियों सब में फायदेमंद होता है।
यीस्ट इंफेक्‍शन से बचाव में दही का सेवन बहुत मददगार होता है।

इसके अलावा इम्यूनिटी को दही बढ़ाता है साथ ही बाकी संक्रमण को भी दही होने से बचाता है। क्वारंटाइन के समय में आप अपनी डाइट में कम से कम एक कटोरी दही रोजाना खाएं। 300 ग्राम कैल्शियम की मात्रा एक कटोरी दही में होती है। अगर आपके घर में धूप इस क्वारंटाइम में नहीं आ पा रही है तो आप दही का सेवन करें। कमजोर हड्डियों को यह आपकी मजबूत करेगी। बोन डेंसिटी भी इससे आपकी अच्दी होगी। इसके अलावा ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी इससे बुजुर्गों को नहीं होगा। रोजाना एक कम दही उनके लिए लंच के बाद जरूर खाएं।

इन दिनों आपके पास घर में बैठकर ज्यादा काम नहीं है जिसकी वजह से वेट आपका बढ़ सकता है। इसके लिए आप दही को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। 
एमिनो एसिड दही में अच्छी मात्रा में होता है जो मांसपेशियों की मरम्मत में मददगार हो सकता है। अगर आप एक गिलास पानी दही के साथ पीते हैं तो आंतों में जमी गंदगी भी साफ हो जाती है।
दही में पोटेशियम बहुत होता है जो उच्च रक्तचाप और गुर्दे की बीमारी में लाभकारी होता है। सोडियम की अधिकता को यह शरीर में दूर करता है। 

प्रोबायोटिक्स दही में मौजूद होता है जो शरीर में प्रतिरक्षा के निर्माण का काम करता है साथ ही कई बीमारियों को खत्म करने में मददगार होता है। आंतों की बीमारी में बहुत फायदेमंद प्रोबायोटिक्स बैक्टिरियां होता है। 

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Health

The survey highlights that 60.5% of people are worried about the health of their family members, while 45.3% are confident that Govt. will handle COVID-19 pandemic situation

 New Delhi: Ahead of curfew and lockdown to cut-down on COVID-19 pandemic’s spread, people have been found violating the norms of this effective deterrent. The violators’ judgement may be overpowered by the thought process like, such things happen in the cycle of nature over an interval and eventually vanish or I am young so nothing will happen to me, we Indians have very strong immunity and so on.

lockdown

A survey conducted on COVID-19 pandemic to know the optimism levels of the people around it has similar findings that quite resembles with the perception of the people in the current scenario, which is indicative of a cognitive bias called Unrealistic Optimism – when one is convinced nothing wrong will happen to them even in the face of facts.

As per the survey findings, 33.4% of people believe that it will subside soon whereas 21.5% believes these diseases keep coming and going. Additionally, 26.8% believe in destiny, what has to happen will happen and 17.4% thinks Indian have high immunity to fight such infection. With such a belief system and mindset, it is quite easy to cross the thin line between realistic and unrealistic optimism.

This survey has been conducted under Healthy Nudge Initiative of HEAL Foundation – Indian Health Advocacy Group, in association with Counselling & Empowering -Enhancing Well-Being and Mental Health, to understand people’s perception of the impending danger of COVID-19. The survey has tried to find out people’s optimism level amidst COVID 19.
Suggestion for the above – Although the majority of participants had moderate to low optimism disposition levels, yet on being asked about the impact of COVID 19 on their optimism level the majority stated their optimism levels were not impacted by this outbreak as this was a hype created by the media and it will subside soon.

This survey brings out the thought processes, perceptions, levels of realistic optimism as well as unrealistic optimism of the people and their behavioural change around COVID-19 pandemic, thereby helping us in spreading the right information in the masses. If we see the grim scenario of the outbreak in the global backdrop and its exponential spread which took 67 days for the number of corona-affected persons to reach 1 lakh, and just 11 days in doubling the infected number, and merely 4 days in adding another one lakh, crossing the figure of 3 lakh virus infected.

With so many reasons behind this, unrealistic optimism amongst the masses might be one of the leading reasons as a good number of responses of the people during the survey asserted that this outbreak is a normal thing, which will get over soon”, says Dr. Swadeep Srivastava, Founder, HEAL Foundation.  

Adding further, he says, “The unrealistic optimism of the masses around the casual approach that this is a routine sort of thing might have resisted the people from social distancing, resulting in the havoc. But the result of the survey about unrealistic optimism also points toward the importance and the essence of social distancing, which has turned out to be the most effective preventive measure for COVID-19. Thus, the HHN Initiative is proactively doing its bit to keep the masses updated with the latest developments around the pandemic, and inculcating them to follow the preventive measures such as social distancing and healthy hygiene to cease its upsurge”.

The survey was conducted online with a gender-mixed sample size of 366 with a male & female ratio 46:54 from different parts of the country, majorly in Delhi/NCR. Globally recognised LOR-T form was used to asses people’s optimism disposition levels and then they were asked if there has been an impact on their optimism levels due to the COVID19 outbreak
Likewise, certain statistics of the survey also highlighted the unrealistic optimism of the people as 33.8% believed that such diseases come and go, so there is no need to worry as nothing is going to happen. In the same line, 17.6% believed that Indians have high immunity, so it’s a usual thing and not something that requires one to be extra careful or diligent.

“In the survey, which consisted of participants who were adults belonging to the elite and upper-middle-class socio-economic category, when asked whether their optimism levels were affected by the outbreak of COVID-19 epidemic, over 57% of the total sample surveyed expressed that their optimism was not affected by the outgoing pandemic while 82% of the sample showed low and moderate optimism disposition levels.

The results were very interesting from a behavioural perspective, because even in the face of all the panic and downfall in the markets, people dying and suffering; the majority of the participants in the survey was optimistic and expressed that their optimism levels were not affected by the COVID-19 outbreak.”, says Vidhi Mahanot, Psychologist and Founder, Counseling And Empowering.

She adds further, “Unrealistic Optimism is when one makes a judgement of a risk which is very different from the objective standard of that particular risk. This cognitive bias often leads to misplaced hope and subsequent disappointment. What could be consequences of unrealistic optimism in the current situation of the COVID-19 outbreak? It could lead to being less prepared, taking lesser precautions, not wearing a mask if one has a cough, not getting oneself tested while experiencing symptoms similar to COVID-19 as one believes that they are in a low risk or no risk situation.

Growing research indicates that people with tendencies to hold the positive expectation from the future, respond to obstacles and adversities in ways that are adaptive. Hence, while it’s great to be optimistic, however, let’s be aware of being unrealistically optimistic by cultivating and maintaining optimistic disposition and at the same time considering the risks of actions from a realistic angle.

TV

Aparna Dixit: Srishti in ‘Pyaar Ki Lukka Chuppi’
“These days I have been extremely busy shooting and hence could not manage to watch new films and series. I love cinema and therefore I will make sure to catch up on everything that I have missed. Also, I will spend time at home with my brother, cook delicious dishes for him and take care of my plants. I wish my parents were in Mumbai too, would have loved to spend some family time with them.”

Rahul Sharma: Sarthak in ‘Pyaar Ki Lukka Chuppi
“Since shootings have been cancelled, I am starting my day with yoga. I am also trying to read all my pending books. To keep myself fit in these days, I am working out indoors and meditating before I sleep”

Tarun Khanna: Lord Shiva in ‘Devi-Aadi Parashakti
“I have planned to stay indoors and spend my time in cooking as I have given paid leave to my cook so that he too can be safe. I will do my work out sessions at home to stay fit and healthy during this time. I intend to use my time to complete all my pending tasks.”

Shiny Doshi: Seher in ‘Alif Laila’
“I think it is just perfect because we all needed this break. I’m glad that the government has passed this rule and we all have stopped the shooting because it is very important from safety purpose specially. I have planned to do a couple of things till 31st. I am going to work out in my house. Secondly I have started cooking my favourite dishes, taking as much as sleep I can possibly whole day & whole night. I may be doing a lot of yoga along with lot of meditation. Since I cannot go out of my house till 31st, so have not much to do. But I will do whatever things I can do staying in my house.”

Rati Pandey: Devi in ‘Devi-Aadi Parashakti
“I am currently in my home town in Patna with my brother, bhabhi (sister-in-law) and my cute little 10 month old niece. Having one of the best times. I am an early riser and try to soak up as much Vitamin D while working out on the terrace, post which I do some Yoga in my room. I completely devote my self to playing, pampering and taking care of my niece, during the day. I am catching up on my lost sleep, taking care of my regime and skin.

Being a hardcore foodie, I have my binge eating days once every 3-4 days which makes me feel guilty but I cover it up in the next couple of meals and exercise it out. Im also hooked onto some series on OTT platforms. Just for fun, I’m making some TikTok videos too. Amidst all this, we are ensuring to take all the necessary precautions to curb the spread of the virus. Although restricted in the confines of my home I am enjoying this part too, its like an indoor vacation.”