March 26, 2019
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भूली हुई यादों मुझे इतना न सताओ

अब चैन से रहने दो मेरे पास न आओ

       भैया ! कितना भी सोच लो यादें हमारा पीछा छोड़ दें पर वो घूमती फिरती हमसे कभी भी ऐसे आ टकराती हैं मानो हमें बीते दिनों की  खट्टी.मीठी दुनिया में लौटाकर ले जाना चाहती हों।एक आँधी सी चलती है और हम उसमें लिपटे उड़ चलते हैं ..पीछे और पीछे ! लिपट ही तो जाती है वो आँधी हमसेएदामन छोड़ने का नाम ही नहीं लेती ।

      बहुत हाथ जोड़े एबड़ी आज़ीज़ी कीएबड़ी मिन्नतें माँगीं पर किसी भी जाते हुए साल ने ऐसा कभी नहीं किया कि बस मीठी मीठी यादें ही ज़ेहन में बसा दे और खट्टी यादों को हमारे नज़दीक भी न आने दे।वैसे खटमिठी यादें भी ज़ायका तो बढ़िया कर देती हैंएकुछ चटपटा स्वाद घुलता हैए तकलीफ़ तब होती है जब यादें मुह कसैला कर देती हैं।

      जिंदगी कैसी है पहेली हाय!

      कभी तो हँसाएएकभी ये रुलाए ।।

    भैया ! यही है इस जिंदगी का स्टाइल ! यानी इसकी शैली ! बड़े बुज़ुर्ग कह गए हैं य

अँधेरे में नहीं जाओगे तो उजाला कैसे पाओगे घ् अँधेरे में  शम्मा जलाएंगे तभी तो उजाला होगा।कठिनाई सहन करना नहीं सीखोगे तो उससे निकलकर आसान सफ़र कैसे तय करेंगे  घ्

     हम सबमें ही इस जाते हुए वर्ष ने खट्टे.मीठे अनुभव बाँटे हैं।कभी हँसाया है तो कभी रुलाया भी हैएआँखों में नमी भरी है तो आँचल में खुशियाँ भी ।इन्द्रधनुष के रंगों से खिलती हुए आकाशीय गंगा मे हम नहाए भी हैं तो अमावस्या में दीए जलाकर अस्तित्व को रोशन करने का प्रयास करके हम खिलखिलाए भी हैं।भैया ! यही है जिंदगी और चलती का नाम गाड़ी और भैया न चलाओ तो…. अनाड़ी !

    हाँएएक बात बड़ी ही महत्वपूर्ण याद आ गई ।जब हम छोटे थे तब हमें सिखाया जाता था धन्यवाद या शुक्रिया या थैंक्यू अदा करना।आज हम अपनी संतानों को यही सब सिखाते हैं न ! किसी गलती होने पर साॅरी या माफ़ करिए महसूस करना । तब इन शब्दों के कुछ अर्थ होते थे ।अफ़सोस ये है ये सब अब मुह से फिसले शब्दों के अलावा कुछ भी इंपोर्टेंस नहीं रखते ।तो बताइए भला इन शब्दों की वैल्यू क्या रह गई फिरघ् 

    भैयाए आइए इन सब शब्दों को केवल हवा में न उछालेंएउनका सम्मान करना सीखेंएउनकी वैल्यू करें।जाते हुए साल में हम उन सबका तो शुक्रिया अदा करें ही जिन्होंने हमारा हाथ पकड़ा हैए हमारे आँसू पोंछे हैंएसाथ ही उनका भी शुक्रिया अदा करना न भूलें जो हमारी पीड़ा का कारण बने हैंएउन्होंने ही तो हमें अपनी असलियत बताकर हमें चेताया हैए बहुत कुछ सिखाया है हमें।

     ईश्वर का धन्यवाद करना तो हर पल बनता ही है जो यदि एक रास्ता बंद करता भी है तो कई रास्ते हमारे लिए खोल देता है ।वैसे रूठों को मनालें जिससे इस आने वाले साल में सबमें खुशियों के उपहार बाँट सकें।

 भैया ! संवाद करें खुद से और स्वागत करें नए वर्ष का!

तो चलिए ए मिलते हैं नए साल में कुछ नई बातें लेकर ?

नये साल के नये तराने

रूठों को भी चलो मनाने

                                       डॉ.प्रणव भारती