March 22, 2019
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जी हां… बीता वर्ष फिल्म के सुपरस्टारों के लिए निराशा के अलावा कुछ नहीं लाया। साल के अंत में रीलिज हुई जीरो भी पूरी तरह से जीरो ही साबित हुई। लेकिन अंतिम पलों में आई सिम्बा मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है। वैसे सिम्बा को यदि छोटा सिंघम कहां जाएं तो भी बात गलत नहीं होगी। पर इसके साथ ही रणवीर सिंह के लिए भी एक बेहद खास साल का अंत भी सुपरहिट फिल्म के साथ होने जा रही है। आपको बता दें कि साल 2018 की शुरुआत भी रणवीर सिंह शाहिद कपूर और दीपिका पादुकोण की सुपरहिट फिल्म ‘पद्मावत के साथ ही हुई थी। हालांकि, फिल्म सिनेमाघरों तक पहुंचने तक काफी विवादों में घिरी रही मगर रिलीज के बाद फ़िल्म टिकट खिड़की पर अच्छा व्यापार करने में सफल रही थी। इसी साल रणवीर सिंह दीपिका पादुकोण के साथ विवाह के बंधन में बंधे तो कह सकते हैं कि रणवीर सिंह के लिहाज से तो यह साल काफी खास रहा। हालांकि, इसके विपरीत बॉलीवुड के सबसे बड़े नामों में शुमार आमिर खान, शाहरुख़ खान और सलमान खान की तिकड़ी ने इस साल दर्शकों को खासा निराश किया। भले ही इस साल आई सलमान खान की रेस 3, आमिर खान की ठग्स ऑफ हिंदुस्तान और शाहरुख़ खान की जीरो तीनों कलाकारों के फेस वैल्यू की बदौलत बॉक्स ऑफिस पर पैसे कमाने में कामयाब रही हों, लेकिन दर्शकों ने तीनों की फिल्मों को एक सिरे से नकार दिया। पिछले एक दशक में यह पहला मौका होगा जब तीन में से तीनों खान दर्शकों को एक यादगार फिल्म देने में नाकामयाब रहे हों। शाहरुख खान के लिए तो स्थिति और भी बुरी रही, जिनकी फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ के आकड़े को छूने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

खान तिकड़ी की ही तरह साल 2018 की सबसे बड़े रिलीज में से एक 2.0 भी दर्शकों के अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी। रजनीकांत और अक्षय कुमार जैसे बड़े नाम और स्पेशल इफेक्ट्स पर बेतहाशा पैसा खर्च करने के बावजूद भी हिट फिल्म रोबोट की सीक्वल फिल्म 2.0 दर्शकों को रोमांचित नहीं कर सकी।

हालांकि, इसके विपरीत साल 2018 में दर्शकों ने आम भारतीयों से जुड़ी कहानियों जिनका बजट भी कम था, और न ही कोई बड़ी स्टारकास्ट थी, उनको काफी पसंद किया। यही कारण था कि सोनू के टीटू की स्वीटी, रेड, राजी, स्त्री, गोल्ड और बधाई हो जैसी आम भारतीयों का द्वन्द दिखाती फिल्में बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ से ज्यादा का कारोबार करने में सफल रहीं। इन फिल्मों के अलावा भी पैडमैन, ब्लैकमेल, परमाणु, सूरमा, मनमज़िर्यां और अंधाधुन जैसी फिल्मों को भी दर्शकों ने काफी पसंद किया।

अगर साल के पसंदीदा स्टार्स की बात करें तो आयुष्मान खुराना अपनी फिल्म बधाई हो और अंधाधुन के जरिये अपनी कलाकारी की एक अलग छाप छोड़ने में कामयाब रह। तो राजकुमार राव फिर से फिल्म स्त्री के जरिये अपने शानदार अभिनय का लोहा मनवाने में कामयाब रहे। हालांकि इस साल की सबसे बड़ी खोज विक्की कौशल ही रहे। विक्की साल 2015 में मसान फिल्म से लोगों की नजर में आये थे, मगर इस साल राजी, संजू और मनमज़िर्यां में तीन अलगअलग तरह के किरदार निभा कर विक्की ने यह साबित कर दिया कि उनके अभिनय में कितनी विविधता है। वहीं स्थापित कलाकारों में अक्षय कुमार अपना जलवा बरकरार रखने में कामयाब रहे। अक्षय कुमार इस साल तीन फिल्मों पैडमैन, गोल्ड और 2.0 का हिस्सा रहे और यह तीनों ही फ़िल्में जहां बॉक्स ऑफिस पर हिट रहीं तो वहीं इन फिल्मों में अक्षय के काम की भी जम कर तारीफ हुई। अजय देवगन ने भी शानदार अभिनय के बल पर फिल्म रेड को 100 करोड़ के पार ले गए।

अगर बात साल 2018 की सबसे बड़ी हिट की करें तो यह सेहरा रणवीर कपूर अभिनीत फिल्म संजू के सर सजा, राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित यह फिल्म संजय दत्त के जीवन पर आधारित थी। संजय दत्त का किरदार निभा रहे रणवीर कपूर को दर्शकों का खूब प्यार मिला और यह साल की सबसे बड़ी हिट साबित हुई।

साल 2018 में दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट और तापसी पन्नू ने भी अपने दमदार अभिनय का लोहा मनवाया। पद्मावत में रानी बनी दीपिका हो या फिल्म राजी में जासूस का किरदार निभा रही आलिया, इन दोनों ही किरदारों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। वहीं साल के आखिरी महीने में दो फिल्मों के साथ सारा अली खान टॉप डेब्यू लिस्ट में शामिल हो गई। साथ ही धड़क जैसी हिट फिल्म के साथ जान्हवी कपूर के रूप में दो स्टार पुत्रियों ने भी बॉलीवुड में पदार्पण किया। शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर को भी बेस्ट डेब्यू के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया गया।

कुल मिलाकर साल 2018 की फिल्मों में एक बात जो साफ़ तौर पर देखने को मिली वो यह कि भले ही बड़े कलाकार फिल्म को बड़ी ओपनिंग दिलाने में कामयाब हो जाएं। मगर यदि कहानी दमदार ना हो तो फिल्म का सफल होना मुश्किल है, साल की सफल फिल्मों की फेहरिस्त देख यह भी सहज अंदाजा लग जाता है कि विदेशी लोकेशंस और महंगे सेट्स फिल्म को सफल बनाने के लिए महंगी जरूरत नहीं है, बल्कि छोटे शहरों की नुक्कड़ की दुकान पर बैठे-बैठे भी दमदार कहानी और सस्ती लोकेशन आपको नोमिनेशन ही नहीं अवॉर्ड की सीढ़ी पर भी चढ़ाने में कामयाब साबित हो सकती है। अचल जैन