March 26, 2019
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नई दिल्ली :भारत में बिजनेस एजुकेशन बदलाव की दिशा में तेजी से आगे बढ रहा हैइस बात को मान्यता देते हुए देश के उप राष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने आज नई दिल्ली के द क्लैरिजेज में आयोजित ईपीएसआई के बी-स्कूल लीडरशिप कॉन्क्लेव के उद्घाटन में अपने विचार रखे। उन्होने आविष्कारोँ के जरिए शिक्षा की गुणवत्ता में बढोत्तरी के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के माननीय उप राष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने उद्घाटन अभिभाषण के दौरान कहा कि, “हम परम्परागत शिक्षा पद्धति पर निर्भर नहीं रह सकते हैं, हमे शिक्षण के तरीकोँ में बदलाव लाना होगा, और इसमे नई चीजोँ को शामिल किया जाना चाहिए जैसे कि केस स्टडी, अनुरूपता, ऑनलाइन पाठ्यक्रमोँ की शुरुआत जैस कि एमओओसी, तकनीकी उपकरणोँ जैसे कि लैपटॉप और मोबाइल का इस्तेमाल, और डिसरप्टिव तकनीकोँ जैसे कि कक्षाओँ में एआई के इस्तेमाल पर जोर देना चाहिए। हालांकि, स्थिति यह है कि तमाम आविष्कारी समाधानोँ के बावजूद आज भी देश की करीब 20% आबादी अशिक्षित है। ऐसे में अशिक्षा को मिटाने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, खासकर ग्रामीण भारत में, ताकि उच्च शिक्षा की नींव को और मजबूत बनाया जा सके।

भारतीयोँ को व्यवसाय के मामले में अपनी सोच बदलने की जरूरत पर जोर देते हुए श्री नायडू ने कुछ अग्रणी बिजनेस स्कूलोँ जैसे कि बिमटेक,एक्सएलआरआई, आईएसबी, नर्सी मोंजी आदि की बदलाव लाने में भूमिका की सराहना करते हुए श्री नायडू ने पारिवारिक व्यापार को समझने में इनके महत्व की बात की। उन्होने कहा, “बिजनेस स्कूलोँ को अपने पाठ्यक्रम में सफल पारिवारिक व्यवसायोँ को केस स्टडी के तौर पर शामिल करना चाहिए। हमे पहले से मौजूद बिजनेस मॉडल के इस्तेमाल के साथ-साथ अपने खुद के ऐसे मॉडल भी विकसित करने चाहिए जो भारतीय जरूरतोँ के अनुकूल होँ। इसके साथ ही, बिजनेस स्कूलोँ को अपने छात्रोँ के नैतिक व्यवसाय की नीतियोँ और आचार को भी बेहद मजबूती से स्थापित करना चाहिए।“

उन्होने प्रधानमंत्री के उस वक्तव्य का भी जिक्र किया जिसमेँ वह उच्च शिक्षा में “सुधार, क्रियान्वयन और परिवर्तन” की जरूरत पर बल देते हैं। श्री नायडू ने कहा कि, “पिछले कुछ वर्षोँ के दौरान, भारत ने देश में व्यवसाय करने के नियमोँ को काफी सहज बनाया है। परिणामस्वरूप, भारत दुनिया की तीसरी सबसे बडी अर्थव्यवस्था बनने को तैयार है। यह बात पूर्व-स्थापित है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि और सम्पदा उत्पादन में प्रशिक्षित मानवीय पूंजी की भूमिका सबसे अहम होती है। भारत की अर्थव्यवस्था में प्रगति ने नए रोजगार निर्माण के क्षमता में बढोत्तरी की है और व्यवसाय हेतु सम्भावनाएँ भी काफी बढ गई हैं।

प्रो. एरिक कॉर्नुअल, डायरेक्टर जनरल व सीईओ, युरोपियन फाउंडेशन फॉर मैनेजमेंट डिवेलपमेंट (ईएफएमडी) उद्घाटक समारोह में सम्मानित अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे और अन्य गणमान्य अतिथियोँ में डॉ. जी विश्वनाथन, फाउंडर व चांसलर, वेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (वीआईटी), डॉ. एच. चतुर्वेदी, अल्टर्नेट प्रेसिडेंट, एजुकेशन प्रमोशन सोसायटी ऑफ इंडिया एवम डायरेक्टर, बिमटेक (बीआईएमटेक) और डॉ. एम आर जयराम, चेयरमैन, गोकुला एजुकेशन फाउंडेशन ने भी कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में हिस्सा लिया। यह कॉन्क्लेव 28 फरवरी 2019 तक चलेगा और इसका विषयक फोकस है ‘बिजनेस एजुकेशन 4.0:फ्युचराइजिंग इंडियन बिजनेस स्कूल्स’।

प्रो. एरिक कॉर्नुअलडायरेक्टर जनरल व सीईओयुरोपियन फाउंडेशन फॉर मैनेजमेंट डिवेलपमेंट (ईएफएमडी) ने कहा कि, “आज की व्यावसायिक शिक्षा को दुनिया की सामाजिक-आर्थिक स्थितियोँ के अनुकूल बनाने की जरूरत है-दुनिया भर में, आर्थिक असमानता तेजी से बढ रही है मध्य-वर्ग का दायरा तेजी से संकुचित हो रहा है; ऐसे में हमे स्वयम से यह सवाल करना चाहिए कि क्या हमारी परम्परागत शिक्षा युवाओँ को रोजगार मुहैया कराने के लिए उपयुक्त है।“

डॉ. जी विश्वनाथनफाउंडर एवम चांसलरवेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (वीआईटी) ने कहा कि, “किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए शिक्षा एक अहम विषय है लेकिन दुर्भाग्यवश हमारे मामले में ऐसा नहीँ नजर आ रहा है। अब वह समय आ गया है जब हमेँ हर किसी के लिए निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए; इसकी शुरुआत हम लडकियोँ के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करके कर सकते हैं।“

 डॉ. एच. चतुर्वेदीअल्टर्नेट प्रेसिडेंटएजुकेशन प्रमोशन सोसायटी ऑफ इंडिया एवम डायरेक्टरबिमटेक (बीआईएमटेक) ने कहा कि“आज देश के उप राष्ट्रपति जी हमारे बीच हैं, इस बात को लेकर हमे बेहद गर्व है। यह कॉनक्लेव शिक्षा प्रदाताओँ और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियोँ के लिए बेहतरीन अवसर है, जहाँ वे एक साथ आकर बी-स्कूलोँ के लिए एक चार्टर प्लान तैयार कर सकते हैं।“ 

कॉन्क्लेव के पहले सत्र में नए रोजगार, नए कौशल और नए पाठ्यक्रमोँ के बारे में चर्चा की गई जिन्हे आज के छात्रोँ और कल के भविष्य हेतु तैयार किया जा रहा है। अन्य सत्र में शिक्षा के अनुभवोँ पर पुनर्विचार और बिजनेस शिक्षा को तकनीकी से युक्त बनाने के विषय में चर्चा की गई।28 फरवरी को होने वाले सत्र में भारत में भविष्य के अनुकूल बी-स्कूल विकसित करने के लिए रेगुलेटरी पॉलिसी पर चर्चा की जाएगी।

एशिया के विकास में भारत अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि वर्ष 2030 तक यह दुनिया की तीसरी सबसे बडी अर्थ्यव्यवस्था बन सकती है। भारतीय बिजनेस स्कूल भी इस यात्रा में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं और दुनिया के लिए अधिक उपयोगी बन रहे हैं। यह कॉन्क्लेव बिजनेस स्कूल के अगुवाओँ के लिए एक ऐसा अवसर है जिसके जरिए वे अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए खोज, मूल्यांकन और एक ठोस कदम उठाने के लिए तैयार हो सकते हैं।