June 1, 2020
Politics

USA चाहे तो Dragon की खैर नहीं!

दुनिया में सिर्फ और सिर्फ एक देश USA है जो COVID-19 Pandemic के बाद Dragon को सबक सिखाने का माद्दा रखता है। इसके लिए USA को Supply Chain से Dragon को पूरी तरह से अलग करना होगा। यदि USA ऐसा करता है तो इससे भारत, दक्षिण अफ्रीका और जापान जैसे देशों को काफी फायदा हो सकता है।

usa-china

Supply Chain के बारे में हम कुछ इस प्रकार समझते हैं। जैसे बोइंग विमान के हिस्से जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और अमेरिका में अलग अलग बनते हैं जिसे बाद में अमेरिका में Assemble किया जाता है। इससे चीन को पूरी तरह से अलग करना होगा।

साफ तौर पर कहें तो अमेरिका को Re-Globalization की रणनीति बनानी होगी और अपने देश की कंपनियों को तमाम रियायत के साथ अमेरिका में ही उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। यह काम अमेरिका दूसरे विश्व युद्ध और USSR के साथ COLD WAR के वक्त कर चुका है।

खबरों के मुताबिक अमेरिकी कंपनियों के द्वारा बनाये जा रहे मेडिकल साजोसामान और मास्क को चीन अमेरिका नहीं जाने दे रहा है।

इससे पहले, चीन और अमेरिका के बीच एक तरह का Blame game चल रहा था। तकरीबन एक हफ्ते पहले United States Intelligence Community (IC) ने कहा कि हम सभी तरह की सूचनाएं एकत्रित कर रहे हैं। IC में अमेरिका की सभी Intelligence Agencies शामिल हैं। इसमें मुख्य रूप से चीन पर Sanctions, Cancelling US debt obligation, Effort to lift china’s Sovereign Immunity और Drawing up new trade policies शामिल हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि Cancelling US debt पर कदम नहीं उठाना चाहते, क्योंकि US Dollar दुनिया की सबसे विश्वसनीय Currency है और इससे उसको नुकसान पहुंच सकता है।

Five Eyes Dossier लीक हुआ जिसमें Covid—19 के चीन के Wuhan शहर से फैलने के बारे में जांच करने की बात कही गयी है। यह 15 पेज का Document है। इसमें कहा गया है कि Wuhan Lab में SARS जैसे घातक वायरस को बनाया जाता है और साथ ही इसे Leak भी किया जाता है, ताकि इसके परिणाम को देखा जा सके। Wuhan Lab के प्रमुख वैज्ञानिक Dr Shi के पास मौजूद 50 वायरस में से एक बेहद खतरनाक है।

2015 में चीन और अमेरिका की University of North Carolina ने अपनी Study में बताया था कि यदि कोई इस तरह का वायरस Bats से Human में आ जाता है तो इसका कोई इलाज नहीं होगा। इससे साफ होता है कि चीन जानता था कि भविष्य में ऐसा हो सकता है।

Dr Shi ने मार्च 2019 में कहा था कि SARS या MARS जैसे वायरस भविष्य में बाहर आ सकते है। चीन अपनी Research को पूरी दुनिया से छिपाया और जब अमेरिका ने Live Virus Sample मांगे तो चीन ने साफ मना कर दिया।

चीन ने Covid-19 की पहली मरीज Huang Yan Ling की फोटो और बायोडाटा को Wuhan Institute of Virology की Website से हटा दिया और कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। वह इसी संस्थान में कार्यरत थी।

इधर, अमेरिका ने चीन की दो कंपनियों HUWAI और ZTE प्रतिबंध लगा चुका है, लेकिन इसके विकल्प नहीं मिल सके हैं। अमेरिका ने ऐसी नीतियां बनायी जिससे उसकी कंपनियों ने चीन में जाने के लिए विवश हो गयी। मगर COVID-19 के बाद चीन के किसी भी तरह के रोल को समाप्त करने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाने होंगे।

इसके अलावा, अमेरिका और आस्ट्रेलिया ने ताईवान को United Nation की विभिन्न International Body में लाने की कवायद शुरू कर दी है। इस Campaign में Quad Group के दो सदस्य सक्रिय है, जबकि दो अन्य सदस्य भारत और जापान खामोश है।
शायद भारत पर दवाब बनाने के लिए गिलगिट बाल्टिस्तान में चुनाव कराने संबंधी पाकिस्तानी अदालत के आदेश पर विरोध जताने पर चीन ने दादागिरी दिखाते हुए सिक्किम और लद्दाख में सैनिकों के साथ झड़प की।

अब भारत की बात करें तो इस घटना के बाद भारत को International समुदाय के साथ चीन का Corona Virus की जानकारी साझा नहीं करने पर बात करनी होगी और ताईवान को लेकर Quad Group के सदस्य के तौर पर समर्थन करना चाहिए। अभी तक भारतीय Foreign Policy और Diplomacy में किसी भी प्रकार की Activeness और Aggression नहीं दिखाई दी है।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को देश के नाम अपने संबोधन में भी Five eyes Group और Quad Group के समर्थन में कुछ भी नहीं कहा, जबकि United Nation में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए भारत को Corona Diplomacy का सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए था।
प्रधानमंत्री ने Global Community के चार महीने से Corona Virus से संघर्ष का जिक्र किया, जबकि भारत में Lockdown को दो महीने भी पूरे नहीं हुए हैं। फरवरी के अंत में सरकार Namaste Trump में व्यस्त थी और मार्च में भाजपा का सारा ध्यान मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार को गिराने पर था। इसके बाद भारत में Lockdown किया गया।

हालांकि, प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की, लेकिन स्पष्ट कुछ भी नहीं बताया। यह तो वक्त ही बतायेगा कि इसमें से कितना धन लघु उद्योगों और मजदूरों तक पहुंच पाता है।

प्रधानमंत्री इससे पहले भी देश को Corona Virus को लेकर संबोधित कर चुके है, लेकिन Covid-19 के बाद देश की दिशा और दशा के बारे में अभी तक कुछ भी नहीं बताया है।

Deepak Sen – Senior Journalist

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